BY SCARY CROCODILE TEAM
रात के लगभग साढ़े नौ बजे थे।
कोलकाता की विशाल नेशनल लाइब्रेरी लगभग खाली हो चुकी थी। दिनभर छात्रों और शोधकर्ताओं से भरी रहने वाली इमारत अब असामान्य रूप से शांत थी। लंबे गलियारों में सिर्फ पीली रोशनी जल रही थी और दूर कहीं किसी पुराने पंखे की आवाज सुनाई दे रही थी।
एक कर्मचारी को कुछ दस्तावेज व्यवस्थित करने के लिए देर तक रुकना पड़ा था। National Library Mystery
वह तीसरी मंजिल के एक पुराने Reading Room में काम कर रहा था। कमरे में उसके अलावा कोई नहीं था। कम से कम उसे ऐसा ही लग रहा था।

तभी उसे लगा जैसे पीछे कोई धीरे-धीरे चल रहा हो।
पहले उसने ध्यान नहीं दिया। उसे लगा शायद कोई Security Guard होगा। लेकिन कुछ सेकंड बाद वही आवाज फिर सुनाई दी।
इस बार उसने पीछे मुड़कर देखा।
कमरा खाली था।
वह घटना शायद साधारण लग सकती है, लेकिन वर्षों से नेशनल लाइब्रेरी से जुड़ी ऐसी कई कहानियां सुनाई जाती रही हैं। यही कारण है कि आज भी यह जगह भारत की सबसे रहस्यमयी लाइब्रेरी में गिनी जाती है।
कोलकाता में स्थित नेशनल लाइब्रेरी केवल किताबों का भंडार नहीं है। यह भारत की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है, जहां लाखों दुर्लभ पुस्तकें, दस्तावेज और ऐतिहासिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं। लेकिन इस विशाल संग्रह के साथ-साथ यहां एक और चीज भी मौजूद है—रहस्य।
कहा जाता है कि जिस जमीन पर यह लाइब्रेरी बनी है, उसका इतिहास कई सदियों पुराना है। वर्तमान भवन कभी बेल्वेडियर एस्टेट का हिस्सा था। ब्रिटिश शासन के दौरान यहां उच्च अधिकारियों का निवास हुआ करता था। समय बदला, इमारत का उपयोग बदला, लेकिन पुरानी दीवारें वहीं रहीं।
और शायद उन्हीं दीवारों के साथ जुड़ गईं कई कहानियां।
लाइब्रेरी के कुछ पुराने कर्मचारियों ने दावा किया है कि देर शाम के समय उन्हें कभी-कभी ऐसा महसूस होता था जैसे कोई उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहा हो। कई लोगों ने बताया कि सुनसान गलियारों में चलते समय पीछे कदमों की आवाज सुनाई देती थी। जब वे रुकते, आवाज भी रुक जाती। जब वे आगे बढ़ते, आवाज फिर सुनाई देती।
सबसे अजीब बात यह थी कि आसपास कोई दिखाई नहीं देता था।
कुछ लोगों ने इसे कल्पना बताया।
कुछ ने कहा कि विशाल इमारतों में ध्वनि का प्रतिध्वनि प्रभाव ऐसा भ्रम पैदा कर सकता है।
लेकिन जिन्होंने इन घटनाओं का अनुभव करने का दावा किया, वे इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे।
नेशनल लाइब्रेरी की सबसे चर्चित बात सिर्फ ये अनुभव नहीं हैं। वर्ष 2010 में यहां एक ऐसी खोज हुई जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
लाइब्रेरी के एक हिस्से में एक बंद कमरा मिला।
जब यह खबर सामने आई, तो लोगों की कल्पनाएं दौड़ने लगीं। किसी ने कहा वहां कोई गुप्त सुरंग होगी। किसी ने दावा किया कि वह कमरा किसी रहस्य को छुपाए हुए है। कुछ लोगों ने तो इसे Paranormal गतिविधियों से भी जोड़ दिया।
हालांकि बाद में जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला जो किसी अलौकिक घटना की ओर संकेत करता हो।
फिर भी इस खोज ने लाइब्रेरी के रहस्य को और गहरा कर दिया।
National Library Mystery
यदि आप दिन के समय नेशनल लाइब्रेरी जाएं, तो शायद आपको यह सिर्फ एक भव्य ऐतिहासिक भवन दिखाई दे। लेकिन देर शाम जब भीड़ कम होने लगती है, तब इसका वातावरण पूरी तरह बदल जाता है।
ऊंची छतें।
लंबे गलियारे।
सैकड़ों बंद कमरे।
और हर तरफ फैली खामोशी।
ऐसे माहौल में इंसान का दिमाग छोटी-सी आवाज को भी असामान्य मान सकता है।
यही कारण है कि कुछ विशेषज्ञ इन घटनाओं को मनोवैज्ञानिक प्रभाव बताते हैं। उनके अनुसार जब कोई व्यक्ति घंटों तक शांत और सुनसान वातावरण में काम करता है, तो उसे सामान्य ध्वनियां भी रहस्यमयी लग सकती हैं।
लेकिन हर कोई इस तर्क से सहमत नहीं है।
आज भी कोलकाता में ऐसे लोग मिल जाएंगे जो दावा करते हैं कि उन्होंने लाइब्रेरी के अंदर कुछ ऐसा महसूस किया जिसे वे समझा नहीं पाए।
शायद वह सिर्फ भ्रम था।
शायद वातावरण का प्रभाव।
या शायद कोई ऐसी बात, जिसका जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है।
सच्चाई जो भी हो, नेशनल लाइब्रेरी का नाम भारत की सबसे चर्चित Haunted Places की सूची में लंबे समय से बना हुआ है।
यहां भूत हैं या नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है।
लेकिन इतना जरूर है कि इस ऐतिहासिक इमारत के गलियारों में छिपे रहस्य आज भी लोगों की जिज्ञासा को जीवित रखते हैं। और शायद यही किसी भी रहस्यमयी जगह की सबसे बड़ी पहचान होती है।
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