Haunted Railway Station | Horror Story

कभी-कभी किसी जगह का डर वहां हुई किसी एक घटना से नहीं बनता, बल्कि उन अनगिनत बातों से बनता है जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं होता। कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने वहां किसी को देखा था। कुछ कहते हैं कि उन्होंने किसी को सुना था। लेकिन जब सच जानने की कोशिश की गई, तो पता चला कि जिस इंसान का ज़िक्र हो रहा था… वह वर्षों पहले मर चुका था। Haunted Railway Station Horror Story

Haunted Railway Station Horror Story

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के पास एक छोटा-सा रेलवे स्टेशन था—शिवपुर हाल्ट। वह किसी बड़े शहर का हिस्सा नहीं था। वहां दिन में सिर्फ छह ट्रेनें रुकती थीं और रात के बाद पूरा स्टेशन लगभग वीरान हो जाता था। प्लेटफॉर्म पर एक पुराना टिकट काउंटर, लोहे की जंग लगी बेंचें, पीले रंग की फीकी दीवारें और स्टेशन मास्टर का छोटा-सा कमरा था। रेलवे के रिकॉर्ड में वह सिर्फ एक साधारण हाल्ट था, लेकिन आसपास के गांवों में उसका दूसरा नाम था—”वह स्टेशन जहां आखिरी ट्रेन के बाद कोई इंतज़ार नहीं करता।”

राघव सक्सेना भारतीय रेलवे में सिग्नल और कम्युनिकेशन इंजीनियर था। उसकी नौकरी का मतलब था अलग-अलग स्टेशनों पर जाकर खराब सिस्टम ठीक करना। वह अंधविश्वास जैसी बातों पर कभी विश्वास नहीं करता था। उसके लिए हर समस्या का कारण तार, मशीन, बिजली या नेटवर्क होता था। एक सोमवार की सुबह उसे आदेश मिला कि शिवपुर हाल्ट के सिग्नल सिस्टम में कई महीनों से अजीब गड़बड़ियां आ रही हैं। कभी बिना वजह सिग्नल लाल हो जाता, कभी कंट्रोल रूम में ऐसी कॉल दर्ज होती जिसका कोई स्रोत नहीं मिलता, और कभी-कभी पूरी रात लॉगबुक में ऐसे समय दर्ज हो जाते जब स्टेशन पर कोई मौजूद ही नहीं था।

दोपहर तक राघव स्टेशन पहुंच गया। स्टेशन मास्टर महेंद्र तिवारी लगभग साठ वर्ष के शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने औपचारिक बातें कीं, लेकिन जब राघव ने रात रुककर जांच करने की बात कही तो उनके चेहरे का रंग बदल गया।

“अगर हो सके तो शाम से पहले काम खत्म कर लीजिए,” उन्होंने धीरे से कहा।

राघव मुस्कराया। “क्यों? रात में मशीनें ज्यादा खराब हो जाती हैं क्या?”

महेंद्र ने उसकी आंखों में देखा, लेकिन जवाब नहीं दिया।

शाम तक राघव ने सिग्नल बॉक्स, केबल लाइन और कंट्रोल पैनल की जांच की। सब कुछ सामान्य लग रहा था। फिर भी रिकॉर्ड बता रहे थे कि समस्या रोज़ लगभग एक ही समय पर होती थी—रात 1:47 बजे।

राघव ने फैसला किया कि वह उसी समय तक स्टेशन पर रहेगा।

रात गहराने लगी। आखिरी यात्री ट्रेन भी निकल गई। प्लेटफॉर्म पर सिर्फ दो बल्ब जल रहे थे। दूर कहीं झींगुरों की आवाज़ आ रही थी। हवा इतनी शांत थी कि पटरियों पर पड़े छोटे-छोटे पत्थरों की खनक भी सुनाई दे रही थी।

महेंद्र स्टेशन मास्टर ने जाने से पहले कहा, “अगर किसी अनजान यात्री की आवाज़ सुनाई दे… तो जवाब मत दीजिएगा।”

राघव हंस पड़ा। “सर, मैं इंजीनियर हूं, भूत भगाने वाला नहीं।”

महेंद्र बिना मुस्कुराए चले गए।

रात 1:32 बजे राघव कंट्रोल रूम में लैपटॉप से सिस्टम लॉग देख रहा था। अचानक मॉनिटर पर सभी सिग्नल एक साथ कुछ सेकंड के लिए ब्लिंक करने लगे। उसने सोचा शायद बिजली का उतार-चढ़ाव होगा, लेकिन वोल्टेज बिल्कुल स्थिर था।

1:41…

रेलवे वायरलेस सेट में हल्की खरखराहट हुई।

फिर एक धीमी आवाज़ सुनाई दी।

“…प्लेटफॉर्म नंबर एक… ट्रेन आने वाली है…”

राघव तुरंत उठ खड़ा हुआ।

शेड्यूल के अनुसार उस समय कोई ट्रेन नहीं थी।

वह बाहर आया।

पूरा स्टेशन खाली था।

लेकिन दूर पटरियों के उस पार उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने सफेद कपड़े पहन रखे हों और वह प्लेटफॉर्म की ओर धीरे-धीरे चल रहा हो।

राघव ने टॉर्च जलाई।

रोशनी वहां पहुंची…

Haunted Railway Station Horror Story

लेकिन वहां कोई नहीं था।

वह वापस कंट्रोल रूम आया।

लैपटॉप स्क्रीन पर एक नई एंट्री अपने आप दर्ज हो चुकी थी—

“Passenger Count: 38.”

उसने माथा सिकोड़ लिया।

स्टेशन पर तो एक भी यात्री नहीं था।

उसने लॉग डिलीट करने की कोशिश की।

सिस्टम ने संदेश दिखाया—

“Train Arrived Successfully.”

उसका दिल पहली बार थोड़ा तेज़ धड़कने लगा।

रात 1:47 बजे…

अचानक पूरे स्टेशन में पुराने इंजन की सीटी गूंज उठी।

इतनी साफ़… जैसे कोई ट्रेन बिल्कुल सामने खड़ी हो।

लेकिन पटरियां खाली थीं।

फिर हवा में कंपन होने लगा।

लोहे की बेंच हल्की-हल्की कांपने लगी।

राघव दौड़कर प्लेटफॉर्म पर पहुंचा।

उसकी आंखों के सामने कुछ ऐसा हुआ जिसे वह अपनी समझ से कभी नहीं समझ पाया।

खाली पटरियों के ऊपर हल्का-सा धुंधला आकार बनने लगा।

धीरे-धीरे वह किसी पुरानी भाप इंजन वाली ट्रेन जैसा दिखने लगा।

रोशनी नहीं…

धुआं नहीं…

लेकिन पूरी आकृति साफ दिखाई दे रही थी।

जैसे किसी ने समय की पुरानी तस्वीर को हवा में खड़ा कर दिया हो।

ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म के सामने आकर रुक गई।

दरवाज़े अपने आप खुल गए।

अंदर बैठे यात्रियों के चेहरे दिखाई नहीं दे रहे थे।

वे सब बिल्कुल स्थिर बैठे थे।

एक भी इंसान हिल नहीं रहा था।

फिर आखिरी डिब्बे से एक बूढ़ा आदमी उतरा।

उसने सीधे राघव की तरफ देखा।

उसकी आंखें बिल्कुल सामान्य थीं।

उसने शांत आवाज़ में पूछा,

“बेटा… अगली ट्रेन कितने बजे आएगी?”

राघव का गला सूख गया।

वह कुछ बोल नहीं पाया।

बूढ़े ने फिर वही सवाल दोहराया।

इस बार उसकी आवाज़ थोड़ी भारी हो गई।

“हम… बहुत देर से इंतज़ार कर रहे हैं…”

राघव ने पीछे हटना शुरू किया।

तभी उसे एहसास हुआ कि प्लेटफॉर्म अब खाली नहीं था।

कुछ सेकंड पहले जहां कोई नहीं था…

अब वहां दर्जनों लोग खड़े थे।

कोई टिकट हाथ में पकड़े हुए।

कोई बैग लेकर।

कोई बच्चे का हाथ थामे।

सबकी आंखें उसी की तरफ थीं।

लेकिन कोई पलक नहीं झपका रहा था।

राघव ने घबराकर कंट्रोल रूम की तरफ दौड़ लगाई।

जैसे ही उसने दरवाज़ा बंद किया, बाहर से धीरे-धीरे दस्तक की आवाज़ आने लगी।

ठक…

कुछ सेकंड की खामोशी…

फिर…

ठक…

फिर…

एक साथ कई आवाज़ें।

ऐसा लग रहा था जैसे बाहर खड़े सभी लोग एक-एक करके दरवाज़ा खटखटा रहे हों।

वायरलेस सेट अपने आप चालू हो गया।

इस बार आवाज़ साफ थी।

“सभी यात्रियों से अनुरोध है कि ट्रेन संख्या 309 अपने अंतिम सफर पर रवाना होने वाली है…”

राघव ने तुरंत रेलवे डेटाबेस खोला।

उसने ट्रेन नंबर 309 खोजा।

स्क्रीन पर जो जानकारी आई, उसने उसकी सांस रोक दी।

ट्रेन संख्या 309।

स्थिति: 31 वर्ष पहले दुर्घटनाग्रस्त।

स्थान: शिवपुर हाल्ट से दो किलोमीटर आगे।

मृतक: 38 यात्री।

राघव की नज़र फिर उस लॉग पर गई।

Passenger Count…

बाहर दस्तक बंद हो चुकी थी।

धीरे-धीरे उसने हिम्मत करके दरवाज़ा खोला।

पूरा प्लेटफॉर्म फिर खाली था।

कोई ट्रेन नहीं।

कोई यात्री नहीं।

सिर्फ ठंडी हवा।

सुबह होते ही महेंद्र वापस आए।

उन्होंने राघव का चेहरा देखा और बिना कुछ पूछे स्टेशन के पुराने रिकॉर्ड रूम में ले गए।

वहां धूल से भरी एक फाइल रखी थी।

उसमें दुर्घटना की तस्वीरें थीं।

एक तस्वीर में दुर्घटना से पहले प्लेटफॉर्म पर खड़ी वही ट्रेन दिखाई दे रही थी।

और सामने…

एक बूढ़ा आदमी।

हाथ में पुराना चमड़े का बैग।

राघव के हाथ कांप गए।

वह वही आदमी था जिसने रात उससे अगली ट्रेन का समय पूछा था।

महेंद्र ने धीमी आवाज़ में कहा,

“हर साल उसी तारीख़ की रात… वही ट्रेन यहां कुछ मिनट के लिए लौटती है। किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती… बस शायद अभी भी अपने सफर के खत्म होने का इंतज़ार कर रही है।”

राघव ने उसी दिन तबादले की अर्जी दे दी।

रेलवे ने तकनीकी रिपोर्ट में लिखा—

“कोई हार्डवेयर खराबी नहीं मिली। सिस्टम सामान्य है।”

लेकिन उसके निजी नोट्स में सिर्फ एक वाक्य लिखा था—

“कुछ स्टेशन मशीनों से नहीं चलते… कुछ जगहों पर समय आज भी आखिरी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा है।”

Indian Railways – https://indianrailways.gov.in/

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