Baarish Ki Raat Horror Story

जुलाई का महीना शुरू होते ही पूरे शहर का मिजाज बदल गया था। लगातार तीन दिनों से बादल बिना रुके बरस रहे थे। सड़कों पर पानी भर चुका था, ट्रैफिक जगह-जगह अटका हुआ था और लोग जितना हो सके घरों से निकलने से बच रहे थे।
Baarish Ki Raat 

अमन चौधरी पेशे से मेडिकल इक्विपमेंट सर्विस इंजीनियर था। उसका काम अस्पतालों में खराब मशीनें ठीक करना था। कई बार अचानक कॉल आ जाती और उसे किसी भी मौसम में निकलना पड़ता।

Baarish Ki Raat 

उस दिन दोपहर से ही मौसम बेहद खराब था। तेज बारिश के कारण उसकी कंपनी ने लगभग सभी विजिट अगले दिन के लिए टाल दी थीं। अमन राहत की सांस लेकर घर पहुंचा ही था कि मोबाइल बज उठा।

स्क्रीन पर कंपनी के कंट्रोल रूम का नंबर चमक रहा था।

“अमन, एक अर्जेंट केस है।”

“सर, इस मौसम में?”

“सिटी के बाहर न्यू लाइफ ट्रॉमा सेंटर में वेंटिलेटर बंद हो गया है। आईसीयू में मरीज एडमिट हैं। अगर मशीन नहीं चली तो बड़ी दिक्कत हो सकती है।”

कुछ सेकंड तक अमन चुप रहा।

“लोकेशन भेज दीजिए।”

बीस मिनट बाद वह अपनी सर्विस वैन लेकर निकल पड़ा।

बारिश इतनी तेज थी कि वाइपर लगातार चलने के बावजूद सामने मुश्किल से तीस-चालीस मीटर तक ही दिखाई दे रहा था।

एफएम रेडियो पर मौसम विभाग लगातार चेतावनी दे रहा था—

“भारी वर्षा के कारण नदी किनारे और निचले इलाकों में जाने से बचें…”

अमन ने रेडियो बंद कर दिया।

कुछ देर बाद शहर पीछे छूट गया। अब सड़क दोनों तरफ फैले खाली औद्योगिक इलाके से गुजर रही थी। पुराने गोदाम, बंद फैक्ट्रियां और पानी से भरे मैदान।

गूगल मैप बार-बार नेटवर्क खो रहा था।

तभी उसकी नजर सड़क किनारे लगे एक इलेक्ट्रॉनिक साइन बोर्ड पर गई।

उस पर लाल अक्षरों में लिखा था—

ROAD CLOSED AHEAD

लेकिन नीचे लगे बैरियर आधे खुले हुए थे।

अमन ने गाड़ी धीमी की।

उसी समय पीछे से एक एम्बुलेंस तेजी से आई और उसी रास्ते से निकल गई।

“अगर रास्ता बंद होता तो एम्बुलेंस क्यों जाती?”

उसने भी गाड़ी आगे बढ़ा दी।

करीब दस मिनट बाद उसे एहसास हुआ कि वह जिस सड़क पर चल रहा है, वहां पिछले कई मिनटों से एक भी दूसरी गाड़ी दिखाई नहीं दी।

ना कोई बाइक।

ना ट्रक।

ना इंसान।

सिर्फ बारिश।

और उसकी वैन की हेडलाइट।

अचानक…

डैशबोर्ड पर लगा डिजिटल क्लॉक झिलमिलाया।

8:41

फिर…

00:00

फिर वापस…

8:41

अमन ने सोचा शायद बैटरी में दिक्कत होगी।

लेकिन अगले ही पल रेडियो अपने आप चालू हो गया।

कोई स्टेशन नहीं…

सिर्फ तेज़…

श्श्श्श्श्श्श….

स्टैटिक आवाज।

उसने तुरंत रेडियो बंद किया।

दो सेकंड बाद वही आवाज फिर आने लगी।

इस बार रेडियो बंद ही था।

आवाज कहीं और से आ रही थी।

जैसे…

वैन के पीछे रखी मेडिकल मशीनों के बीच कोई पुराना वायरलेस सेट लगातार सिग्नल पकड़ने की कोशिश कर रहा हो।

अमन ने रियर व्यू मिरर में देखा।

सब कुछ सामान्य था।

सिर्फ मशीनों के ऊपर रखा एक सफेद कवर हल्का-हल्का हिल रहा था।

Baarish Ki Raat 

उसने खुद को समझाया—

“हवा होगी…”

लेकिन तभी…

वैन अपने आप धीरे-धीरे ब्रेक लगाने लगी।

उसने पूरा एक्सीलेरेटर दबाया।

इंजन गरज रहा था…

लेकिन गाड़ी जैसे किसी ने पीछे से पकड़ रखी हो।

आखिरकार वैन रुक गई।

इंजन चालू था।

हेडलाइट जल रही थी।

बारिश पहले से भी ज्यादा तेज हो चुकी थी।

अमन ने शीशे से बाहर झांका।

सामने सड़क पर पानी तेजी से बह रहा था।

और उसी बहते पानी के बीच…

लगभग पचास मीटर दूर…

कोई खड़ा था।

काले रेनकोट में।

पूरी तरह स्थिर।

चेहरा नीचे झुका हुआ।

अमन ने हॉर्न बजाया।

कोई हरकत नहीं।

उसने फिर हॉर्न बजाया।

फिर भी नहीं।

कुछ सेकंड बाद वह आकृति धीरे-धीरे अपना सिर ऊपर उठाने लगी।

लेकिन…

जहां चेहरा होना चाहिए था…

वहां सिर्फ काला अंधेरा था।

ना आंखें।

ना नाक।

ना होंठ।

सिर्फ बारिश…

जो उस खाली चेहरे के आर-पार गिरती हुई दिखाई दे रही थी।

अमन की उंगलियां स्टीयरिंग पर जम गईं।

और तभी…

वैन के पीछे से बिल्कुल साफ आवाज आई—

“दरवाज़ा मत खोलना…”

आवाज़ किसी पुरुष की थी।

धीमी…

थकी हुई…

और इतनी पास…

जैसे कोई अभी भी पीछे की सीट पर बैठा हो।

अमन का पूरा शरीर सुन्न पड़ गया।

वैन के पीछे से आई आवाज बिल्कुल साफ थी।

“दरवाज़ा मत खोलना…”

उसने तुरंत रियर-व्यू मिरर में देखा।

पीछे सिर्फ मेडिकल मशीनों के बड़े-बड़े बॉक्स रखे थे। कोई इंसान नहीं।

उसने गहरी सांस ली।

“मैं डर की वजह से चीजें सुन रहा हूं…”

वह खुद को समझाने ही वाला था कि उसी समय सामने खड़ा काले रेनकोट वाला आदमी एक कदम आगे बढ़ा।

बस… एक कदम।

लेकिन उस एक कदम के साथ सड़क पर बहता पानी अचानक उसकी तरफ उल्टी दिशा में बहने लगा।

अमन की आंखें फैल गईं।

बारिश अब भी ऊपर से नीचे गिर रही थी, लेकिन सड़क पर जमा पानी जैसे किसी अदृश्य ताकत के कारण उस आदमी के पैरों की ओर लौट रहा था।

उसने घबराकर गाड़ी रिवर्स में डालने की कोशिश की।

गियर लग गया।

एक्सीलेरेटर भी दब गया।

लेकिन वैन पीछे नहीं हिली।

ऐसा लग रहा था जैसे चारों टायर कीचड़ में नहीं, बल्कि सीमेंट के अंदर धंस चुके हों।

तभी फिर वही आवाज आई।

इस बार और भी करीब।

“शीशे से बाहर मत देख…”

अमन ने तुरंत सामने से नजर हटाई।

लेकिन इंसान का स्वभाव अजीब होता है।

जिस चीज से मना किया जाए, आंखें उसी तरफ चली जाती हैं।

सिर्फ दो सेकंड के लिए उसने दोबारा सामने देखा।

और उसका गला सूख गया।

अब वह आदमी पचास मीटर दूर नहीं था।

वह वैन के ठीक सामने खड़ा था।

इतना पास कि उसकी हेडलाइट की रोशनी सीधे उसके रेनकोट पर पड़ रही थी।

फिर भी…

चेहरा नहीं था।

जहां चेहरा होना चाहिए था, वहां काला खालीपन था।

अचानक…

ठक…

ठक…

ठक…

विंडशील्ड पर किसी ने उंगलियों से दस्तक दी।

लेकिन सामने कोई हाथ नहीं था।

बारिश की बूंदों के बीच सिर्फ तीन गोल निशान बनते और मिटते जा रहे थे।

अमन ने आंखें कसकर बंद कर लीं।

उसी समय पीछे से फिर आवाज आई।

“अगर बचना चाहता है… तो पीछे मत देखना… और जो भी हो… दरवाज़ा मत खोलना।”

अबकी बार अमन ने आवाज पहचान ली।

यह आवाज किसी बुजुर्ग आदमी की थी।

वह कांपते हुए बोला,

“कौन… कौन है?”

कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।

फिर बहुत धीमी आवाज सुनाई दी।

“मैं… पांच साल पहले इसी सड़क पर मरा था…”

अमन के पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई।

“वह जिसे तू देख रहा है… वह इंसान नहीं है।”

“वह हर बारिश में किसी एक गाड़ी का इंतजार करता है।”

“जो उसके लिए दरवाज़ा खोल देता है…”

“वह कभी घर नहीं पहुंचता।”

अमन का दिल इतनी तेज धड़क रहा था कि उसे खुद अपनी धड़कन सुनाई दे रही थी।

बाहर दस्तक अब लगातार होने लगी थी।

ठक…

ठक…

ठक…

ठक…

फिर अचानक दस्तक बंद हो गई।

पूरा माहौल बिल्कुल शांत हो गया।

सिर्फ बारिश।

अमन ने धीरे से आंखें खोलीं।

सामने कोई नहीं था।

सड़क खाली थी।

उसने राहत की सांस ली ही थी कि अचानक उसकी नजर बाईं खिड़की पर गई।

वहीं…

सिर्फ कुछ इंच की दूरी पर…

वही बिना चेहरे वाला आदमी शीशे से चिपका खड़ा था।

उसका खाली चेहरा कांच से लगा हुआ था।

और उसी काले खालीपन के भीतर…

धीरे-धीरे दो सफेद आंखें खुलने लगीं।

अमन चीख पड़ा।

घबराहट में उसका हाथ हॉर्न पर जा पड़ा।

हॉर्न लगातार बजने लगा।

और उसी पल…

पीछे बैठे अदृश्य व्यक्ति ने जोर से चिल्लाया—

“अभी… भाग!”

जैसे किसी ने अचानक वैन को छोड़ दिया हो।

गाड़ी जोर से आगे उछली।

अमन ने पूरी रफ्तार से एक्सीलेरेटर दबा दिया।

वह पीछे मुड़कर नहीं देख रहा था।

बस बारिश…

सड़क…

और इंजन की आवाज।

करीब दस मिनट बाद अचानक मोबाइल में नेटवर्क वापस आ गया।

गूगल मैप फिर से चालू हो गया।

स्क्रीन पर जो लोकेशन दिखाई दी, उसे देखकर अमन का दिमाग सुन्न पड़ गया।

वह उस सड़क पर था ही नहीं जहां उसे होना चाहिए था।

वह लगभग पंद्रह किलोमीटर पीछे खड़ा था…

उसी जगह…

जहां इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड पर लिखा था—

ROAD CLOSED AHEAD

यानी पिछले बीस मिनट में वह कहीं गया ही नहीं था।

लेकिन…

उसकी वैन का पूरा अगला हिस्सा कीचड़ और गहरे हाथों के निशानों से भरा हुआ था।

जैसे दर्जनों लोगों ने उसे पकड़ने की कोशिश की हो।

अस्पताल पहुंचने तक सुबह होने लगी थी।

मशीन ठीक करने के बाद जब वह लौट रहा था तो जिज्ञासा उसे उस रास्ते के बारे में पूछने से रोक नहीं सकी।

अस्पताल के सबसे पुराने सिक्योरिटी गार्ड ने उसकी बात पूरी होने से पहले ही पूछा—

“तुमने… बिना चेहरे वाला आदमी देखा था क्या?”

अमन कुछ बोल नहीं पाया।

गार्ड ने लंबी सांस छोड़ी।

“पांच साल पहले बारिश में एक प्राइवेट बस उसी बंद सड़क पर बह गई थी।”

“कई लोग मारे गए।”

“उसके बाद से हर बरसात में लोग शिकायत करते हैं कि कोई रेनकोट पहनकर रास्ता रोकता है।”

“जो गाड़ी रोककर उतर जाता है…”

“वह या तो गायब हो जाता है…”

“…या उसकी लाश कई दिनों बाद नीचे बहती नदी में मिलती है।”

अमन ने उस दिन के बाद कभी उस इलाके की ड्यूटी नहीं ली।

करीब एक साल बाद उसने नौकरी भी छोड़ दी।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

एक शाम वह अपनी पुरानी वैन बेचने के लिए सर्विस सेंटर गया।

मैकेनिक गाड़ी की जांच कर रहा था।

अचानक उसने पीछे का स्लाइडिंग दरवाज़ा खोला और हंसते हुए बोला,

“सर, आपके साथ कोई और भी आया है क्या?”

अमन चौंक गया।

“नहीं… क्यों?”

मैकेनिक ने अंदर की तरफ इशारा किया।

धूल की मोटी परत पर किसी ने अपनी उंगली से सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

“इस बार दरवाज़ा खोल देना…”

अमन ने तुरंत पीछे देखा।

लेकिन वहां कोई नहीं था।

उसने उसी दिन वह वैन बिना मोलभाव किए बेच दी।

तीन महीने बाद अखबार के एक छोटे-से कॉलम में खबर छपी—

“लगातार बारिश के दौरान हाईवे पर खड़ी एक सर्विस वैन नदी में मिली। चालक लापता।”

अमन ने खबर में छपी तस्वीर देखी।

वह वही वैन थी…

जो उसने बेच दी थी।

उस रात उसने पहली बार महसूस किया कि कुछ रास्ते सिर्फ बंद नहीं होते…

वे किसी का इंतज़ार भी कर रहे होते हैं।

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