Places to Visit in Auli 2026 | औली में घूमने की 12 खूबसूरत जगहें

औली भारत के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक है, जहां हर मौसम में प्रकृति का अलग ही रूप देखने को मिलता है। सर्दियों में बर्फ से ढकी पहाड़ियां, गर्मियों में हरी-भरी घास के मैदान, घने देवदार के जंगल और हिमालय की शानदार चोटियां इस जगह को खास बनाती हैं। यदि आप पहली बार यहां घूमने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे बड़ा सवाल होता है कि Places to Visit in Auli कौन-कौन सी हैं और किन जगहों को अपनी यात्रा में शामिल करना चाहिए।

Places to Visit in Auli

औली केवल स्कीइंग के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहां धार्मिक स्थल, प्राकृतिक झीलें, ट्रैकिंग रूट, रोपवे और कई ऐसे व्यू पॉइंट हैं जहां से नंदा देवी, कामेट, माना पर्वत और अन्य हिमालयी चोटियों का अद्भुत नज़ारा दिखाई देता है।

इस विस्तृत गाइड में हम औली की सबसे खूबसूरत घूमने की जगहों, उनकी खासियत, घूमने का सही समय और यात्रा से जुड़े जरूरी सुझावों के बारे में विस्तार से जानेंगे।


Places to Visit in Auli

1. औली स्कीइंग स्लोप (Auli Skiing Slopes)

औली स्कीइंग स्लोप भारत के सबसे प्रसिद्ध और बेहतरीन स्कीइंग स्थलों में से एक है। समुद्र तल से लगभग 2,500 से 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान सर्दियों के दौरान मोटी बर्फ की चादर से ढक जाता है, जिससे यह स्कीइंग और स्नो एडवेंचर के लिए आदर्श बन जाता है। यहां की ढलानें शुरुआती (Beginners) और अनुभवी (Professional) दोनों तरह के स्कीयर के लिए उपयुक्त हैं।

हर साल दिसंबर के अंत से मार्च तक यहां बड़ी संख्या में पर्यटक और स्कीइंग प्रेमी पहुंचते हैं। इस दौरान विभिन्न स्कीइंग प्रतियोगिताएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। यदि आपने पहले कभी स्कीइंग नहीं की है, तो यहां अनुभवी प्रशिक्षकों की मदद से बेसिक ट्रेनिंग लेकर सुरक्षित तरीके से इस रोमांचक खेल का आनंद ले सकते हैं।

स्कीइंग के अलावा पर्यटक स्नोबोर्डिंग, स्नो ट्रेकिंग, चेयरलिफ्ट और केबल कार की सवारी का भी आनंद लेते हैं। साफ मौसम में यहां से नंदा देवी, कामेट, माना पर्वत, द्रोणागिरि और त्रिशूल जैसी हिमालय की ऊंची चोटियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है, जो इस अनुभव को और भी यादगार बना देता है।

मुख्य आकर्षण

  • विश्वस्तरीय स्कीइंग स्लोप
  • शुरुआती और प्रोफेशनल दोनों के लिए उपयुक्त
  • स्कीइंग ट्रेनिंग और उपकरण किराए पर उपलब्ध
  • स्नोबोर्डिंग और स्नो एडवेंचर एक्टिविटी
  • नंदा देवी सहित हिमालय की बर्फीली चोटियों का मनोरम दृश्य
  • सर्दियों में आयोजित स्कीइंग प्रतियोगिताएं

घूमने का सबसे अच्छा समय: दिसंबर के अंत से मार्च (बर्फबारी और स्कीइंग के लिए)


2. औली रोपवे (Auli Ropeway)

औली रोपवे यहां के सबसे लोकप्रिय आकर्षणों में से एक है और इसे भारत के सबसे लंबे तथा सबसे ऊंचे रोपवे में गिना जाता है। यह रोपवे जोशीमठ और औली को जोड़ता है तथा लगभग 4 किलोमीटर की दूरी तय करता है। इसकी यात्रा के दौरान पर्यटकों को हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियां, घने देवदार और ओक के जंगल, गहरी घाटियां तथा खूबसूरत बुग्यालों का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है।

सर्दियों में जब पूरा क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है, तब रोपवे की सवारी और भी रोमांचक हो जाती है। वहीं गर्मियों में चारों ओर फैली हरियाली और साफ आसमान यात्रा को यादगार बना देते हैं। यदि सड़क मार्ग पर बर्फ के कारण आवाजाही प्रभावित हो, तो रोपवे औली पहुंचने का सुविधाजनक विकल्प भी बन जाता है।

फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है। रोपवे की ऊंचाई से नंदा देवी, द्रोणागिरि, माना पर्वत और कामेट जैसी हिमालय की प्रसिद्ध चोटियों के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का नजारा विशेष रूप से आकर्षक होता है।

पर्यटन सीजन और बर्फबारी के समय यहां पर्यटकों की संख्या काफी अधिक रहती है, इसलिए टिकट पहले से बुक करना या सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • जोशीमठ से औली तक रोमांचक रोपवे यात्रा
  • लगभग 4 किलोमीटर लंबा हवाई सफर
  • हिमालय की बर्फीली चोटियों का मनोरम दृश्य
  • सर्दियों में बर्फ और गर्मियों में हरियाली का शानदार अनुभव
  • फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए बेहतरीन स्थान
  • परिवार, बच्चों और कपल्स के लिए यादगार आकर्षण

घूमने का सबसे अच्छा समय: दिसंबर से मार्च (बर्फबारी का अनुभव) और अप्रैल से जून (साफ मौसम व सुंदर दृश्य)।


3. गुरसों बुग्याल (Gurso Bugyal)

गुरसों बुग्याल औली की सबसे खूबसूरत प्राकृतिक जगहों में से एक है। यह विशाल अल्पाइन घास का मैदान (Meadow) समुद्र तल से लगभग 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और औली से करीब 3 किलोमीटर की आसान ट्रेकिंग के बाद पहुंचा जा सकता है। रास्ते भर देवदार और ओक के घने जंगल, रंग-बिरंगे जंगली फूल और हिमालय के मनमोहक दृश्य आपकी यात्रा को यादगार बना देते हैं।

गर्मियों के दौरान पूरा बुग्याल हरी-भरी घास और जंगली फूलों से ढका रहता है, जबकि सर्दियों में यही मैदान बर्फ की सफेद चादर ओढ़ लेता है। साफ मौसम में यहां से नंदा देवी, त्रिशूल, द्रोणागिरि और कामेट जैसी हिमालय की प्रसिद्ध चोटियों के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है, इसलिए यह फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

यदि आप भीड़-भाड़ से दूर कुछ समय शांति के बीच बिताना चाहते हैं, तो गुरसों बुग्याल आपके लिए बेहतरीन स्थान है। यहां परिवार, कपल्स और ट्रेकिंग के शौकीन सभी आराम से समय बिता सकते हैं। सर्दियों में बर्फ पर चलने का अनुभव और गर्मियों में खुली हरी वादियों में सैर करना दोनों ही बेहद यादगार रहते हैं।

मुख्य आकर्षण

  • औली से लगभग 3 किलोमीटर का सुंदर ट्रेक
  • विशाल हरे-भरे घास के मैदान
  • सर्दियों में बर्फ और गर्मियों में हरियाली का अद्भुत नज़ारा
  • नंदा देवी, त्रिशूल, द्रोणागिरि और कामेट पर्वत के मनोरम दृश्य
  • फोटोग्राफी, पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान
  • शांत वातावरण और ताज़ी पहाड़ी हवा का आनंद

घूमने का सबसे अच्छा समय: अप्रैल से जून (हरियाली के लिए) और दिसंबर से मार्च (बर्फबारी का अनुभव करने के लिए)।


4. चत्रकुंड झील (Chattrakund Lake)

चत्रकुंड झील औली के पास स्थित एक छोटी लेकिन बेहद खूबसूरत प्राकृतिक झील है, जो अपनी शांत वातावरण और साफ़ मीठे पानी के लिए जानी जाती है। यह झील घने देवदार, ओक और रोडोडेंड्रोन के जंगलों से घिरी हुई है, जिससे यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और भी आकर्षक हो जाता है। औली से लगभग 3–4 किलोमीटर की आसान ट्रेकिंग के बाद इस झील तक पहुंचा जा सकता है, इसलिए यह ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है।

झील का शांत पानी आसपास के पेड़ों और हिमालय की चोटियों का प्रतिबिंब बनाता है, जो फोटोग्राफी के लिए शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। यहां का वातावरण इतना शांत होता है कि पक्षियों की चहचहाहट और हवा की हल्की आवाज़ के अलावा कुछ सुनाई नहीं देता। यदि आप भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति के बीच कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो चत्रकुंड झील आपके लिए बेहतरीन स्थान है।

गर्मियों में झील के आसपास हरियाली और रंग-बिरंगे जंगली फूल देखने को मिलते हैं, जबकि सर्दियों में पूरा इलाका बर्फ से ढक जाता है और झील का नज़ारा किसी पोस्टकार्ड जैसा दिखाई देता है। हालांकि यहां भोजन या अन्य सुविधाएं सीमित हैं, इसलिए पानी और हल्का नाश्ता साथ लेकर जाना बेहतर रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • साफ़ और मीठे पानी की प्राकृतिक झील
  • देवदार और ओक के घने जंगलों से घिरा शांत वातावरण
  • औली से लगभग 3–4 किलोमीटर का सुंदर ट्रेक
  • फोटोग्राफी और बर्ड वॉचिंग के लिए बेहतरीन स्थान
  • गर्मियों में हरियाली और सर्दियों में बर्फ से घिरा मनमोहक दृश्य
  • भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून भरा अनुभव

घूमने का सबसे अच्छा समय: अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर। यदि बर्फीले नज़ारे पसंद हैं, तो दिसंबर से फरवरी के बीच भी यहां का दृश्य बेहद आकर्षक होता है।


5. जोशीमठ (Joshimath)

जोशीमठ औली का प्रवेश द्वार माना जाता है और यह धार्मिक, ऐतिहासिक तथा प्राकृतिक महत्व के कारण उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल है। समुद्र तल से लगभग 1,890 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह नगर औली से करीब 15–16 किलोमीटर दूर है। अधिकांश पर्यटक औली जाने से पहले या बाद में जोशीमठ में रुकते हैं, क्योंकि यहीं से रोपवे, सड़क मार्ग और कई प्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट शुरू होते हैं।

यह शहर आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख मठों में से एक ज्योतिर्मठ (ज्योतिषपीठ) के लिए भी प्रसिद्ध है। धार्मिक दृष्टि से यहां स्थित नरसिंह मंदिर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की यह प्राचीन मूर्ति समय के साथ धीरे-धीरे पतली होती जा रही है, जिससे जुड़ी कई स्थानीय मान्यताएं प्रचलित हैं।

जोशीमठ का स्थानीय बाजार भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है, जहां से ऊनी कपड़े, हस्तशिल्प, स्थानीय मसाले और स्मृति चिन्ह खरीदे जा सकते हैं। यहां कई होटल, गेस्ट हाउस, कैफे और रेस्टोरेंट उपलब्ध हैं, इसलिए औली की यात्रा के दौरान ठहरने के लिए भी यह एक सुविधाजनक स्थान माना जाता है।

साफ मौसम में जोशीमठ से नंदा देवी, हाथी पर्वत, घोड़ी पर्वत और द्रोणागिरि जैसी हिमालय की ऊंची चोटियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है। यदि आपके पास पर्याप्त समय हो, तो यहां से बद्रीनाथ, फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब और औली जैसी प्रसिद्ध जगहों की यात्रा भी आसानी से की जा सकती है।

मुख्य आकर्षण

  • नरसिंह मंदिर और ज्योतिर्मठ (ज्योतिषपीठ)
  • औली रोपवे का प्रारंभिक स्टेशन
  • स्थानीय बाजार और उत्तराखंडी हस्तशिल्प
  • हिमालय की बर्फीली चोटियों का मनोरम दृश्य
  • बद्रीनाथ, औली और हेमकुंड साहिब का प्रमुख प्रवेश द्वार
  • होटल, कैफे और स्थानीय व्यंजनों का आनंद

घूमने का सबसे अच्छा समय: अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर। यदि आप बर्फबारी और औली स्कीइंग का अनुभव करना चाहते हैं, तो दिसंबर से फरवरी के बीच जोशीमठ की यात्रा भी बेहद खूबसूरत रहती है।


6. नंदा देवी व्यू पॉइंट

नंदा देवी व्यू पॉइंट औली की सबसे लोकप्रिय दर्शनीय जगहों में से एक है, जहां से भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी नंदा देवी (7,816 मीटर) का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। साफ मौसम में यहां से नंदा देवी के साथ-साथ द्रोणागिरि, कामेट, माना पर्वत, हाथी पर्वत और त्रिशूल जैसी हिमालय की कई प्रसिद्ध चोटियां भी दिखाई देती हैं। यही कारण है कि यह स्थान प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और ट्रैवलर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है।

यह व्यू पॉइंट औली स्कीइंग क्षेत्र और रोपवे के आसपास स्थित है, इसलिए यहां तक पहुंचना काफी आसान है। सुबह सूर्योदय के समय जब सूर्य की पहली किरणें बर्फ से ढकी चोटियों पर पड़ती हैं, तो पूरा हिमालय सुनहरे रंग में चमक उठता है। वहीं शाम के समय सूर्यास्त का नज़ारा भी बेहद मनमोहक होता है और पर्यटक इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद करना नहीं भूलते।

सर्दियों में चारों ओर फैली सफेद बर्फ इस स्थान की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है, जबकि गर्मियों में साफ आसमान और हरियाली के बीच हिमालय की चोटियां बेहद स्पष्ट दिखाई देती हैं। यदि आप औली घूमने आए हैं, तो इस व्यू पॉइंट पर कुछ समय बिताना आपकी यात्रा का सबसे यादगार अनुभव बन सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • नंदा देवी सहित हिमालय की ऊंची चोटियों का शानदार दृश्य
  • सूर्योदय और सूर्यास्त का मनमोहक नज़ारा
  • फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए बेहतरीन स्थान
  • बर्फबारी के मौसम में अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य
  • परिवार, कपल्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श जगह
  • औली रोपवे और स्कीइंग क्षेत्र के पास सुविधाजनक स्थान

घूमने का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से जून। हालांकि दिसंबर से मार्च के बीच बर्फबारी के दौरान यहां का दृश्य सबसे अधिक आकर्षक दिखाई देता है।


7. क्वानी बुग्याल (Kwani Bugyal)

क्वानी बुग्याल औली के आसपास स्थित सबसे खूबसूरत और शांत अल्पाइन घास के मैदानों में से एक है। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, खुले हरे मैदानों और हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों के मनोरम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। समुद्र तल से लगभग 3,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह बुग्याल ट्रेकिंग प्रेमियों और प्रकृति के बीच समय बिताने वाले पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

क्वानी बुग्याल तक पहुंचने के लिए आमतौर पर औली से लगभग 10–12 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है। ट्रेक का रास्ता घने ओक और देवदार के जंगलों, छोटे-छोटे घास के मैदानों और पहाड़ी ढलानों से होकर गुजरता है। रास्ते में कई स्थानों से नंदा देवी, द्रोणागिरि, कामेट, माना पर्वत और हाथी पर्वत जैसी हिमालय की प्रसिद्ध चोटियों के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं, जो इस यात्रा को और भी यादगार बना देते हैं।

गर्मियों के मौसम में पूरा बुग्याल हरी-भरी घास और रंग-बिरंगे जंगली फूलों से ढक जाता है, जबकि सर्दियों में यहां बर्फ की मोटी परत बिछ जाती है। यह स्थान भीड़-भाड़ से दूर होने के कारण शांति पसंद करने वाले यात्रियों, फोटोग्राफरों और कैंपिंग के शौकीनों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। यदि आप औली की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो क्वानी बुग्याल की यात्रा जरूर करें।

मुख्य आकर्षण

  • समुद्र तल से लगभग 3,350 मीटर की ऊंचाई
  • औली से लगभग 10–12 किलोमीटर का सुंदर ट्रेक
  • नंदा देवी और अन्य हिमालयी चोटियों के शानदार दृश्य
  • हरे-भरे घास के मैदान और रंग-बिरंगे जंगली फूल
  • ट्रेकिंग, कैंपिंग और नेचर फोटोग्राफी के लिए आदर्श स्थान
  • शांत वातावरण और भीड़-भाड़ से दूर प्राकृतिक अनुभव

घूमने का सबसे अच्छा समय: मई से जून और सितंबर से नवंबर। यदि आपको बर्फबारी का अनुभव करना है, तो दिसंबर से फरवरी के बीच भी यहां का प्राकृतिक सौंदर्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है।


8. चिनाब झील (Chenab Lake)

चिनाब झील औली के पास स्थित एक खूबसूरत और अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध प्राकृतिक झील है, जिसे उत्तराखंड के सबसे शांत और ऑफबीट पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। घने देवदार, ओक और बुरांश के जंगलों के बीच स्थित यह झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। यदि आप भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो चिनाब झील आपके लिए एक बेहतरीन जगह है।

इस झील तक पहुंचने के लिए औली से लगभग 10–12 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है। ट्रेक का रास्ता घने जंगलों, हरे-भरे बुग्यालों और पहाड़ी पगडंडियों से होकर गुजरता है, जिससे पूरी यात्रा रोमांचक और यादगार बन जाती है। रास्ते में कई स्थानों से नंदा देवी, द्रोणागिरि, कामेट और त्रिशूल जैसी हिमालय की प्रसिद्ध चोटियों के शानदार दृश्य भी देखने को मिलते हैं।

चिनाब झील का साफ और शांत पानी आसपास के जंगलों और पर्वतों का सुंदर प्रतिबिंब बनाता है, जो इसे फोटोग्राफी के लिए आदर्श स्थान बनाता है। गर्मियों में झील के आसपास हरी घास और जंगली फूल इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं, जबकि सर्दियों में बर्फ से ढका यह क्षेत्र किसी मनमोहक हिमालयी दृश्य जैसा दिखाई देता है।

चूंकि यहां पर्यटन सुविधाएं सीमित हैं, इसलिए ट्रेक पर निकलने से पहले पानी, हल्का भोजन और आवश्यक सामान साथ रखना चाहिए। यदि संभव हो, तो स्थानीय गाइड के साथ यात्रा करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • शांत और कम भीड़ वाली प्राकृतिक झील
  • औली से लगभग 10–12 किलोमीटर का रोमांचक ट्रेक
  • देवदार, ओक और बुरांश के घने जंगल
  • नंदा देवी और अन्य हिमालयी चोटियों के शानदार दृश्य
  • फोटोग्राफी, बर्ड वॉचिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान
  • शांत वातावरण और ऑफबीट ट्रैवल का बेहतरीन अनुभव

घूमने का सबसे अच्छा समय: मई से जून और सितंबर से नवंबर। सर्दियों में बर्फबारी के दौरान भी यहां का दृश्य बेहद आकर्षक होता है, लेकिन भारी बर्फबारी के समय ट्रेकिंग से पहले स्थानीय मौसम और मार्ग की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।


9. बद्रीनाथ धाम

बद्रीनाथ धाम भारत के सबसे पवित्र हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है और इसे चार धाम तथा छोटा चार धाम यात्रा का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर अलकनंदा नदी के तट पर बसा है और औली से लगभग 55–60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यदि आप औली घूमने आए हैं, तो एक दिन का समय निकालकर बद्रीनाथ धाम की यात्रा अवश्य कर सकते हैं।

यह मंदिर भगवान विष्णु के बद्रीनारायण स्वरूप को समर्पित है। मान्यता है कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में इस मंदिर का पुनरुद्धार कराया था। हर वर्ष मई से नवंबर के बीच लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं, जबकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

मंदिर के पास स्थित तप्त कुंड प्राकृतिक गर्म पानी का झरना है, जहां श्रद्धालु दर्शन से पहले स्नान करते हैं। इसके अलावा माणा गांव, भीम पुल, व्यास गुफा, गणेश गुफा और सरस्वती नदी जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी बद्रीनाथ के निकट स्थित हैं, जिन्हें अपनी यात्रा में शामिल किया जा सकता है।

धार्मिक महत्व के अलावा बद्रीनाथ चारों ओर से बर्फ से ढके हिमालयी पर्वतों और खूबसूरत घाटियों से घिरा हुआ है। सुबह और शाम की आरती के समय मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता हर श्रद्धालु और पर्यटक के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन जाती है।

मुख्य आकर्षण

  • भगवान बद्रीनारायण का विश्व प्रसिद्ध मंदिर
  • चार धाम और छोटा चार धाम यात्रा का प्रमुख तीर्थ
  • तप्त कुंड (प्राकृतिक गर्म पानी का झरना)
  • माणा गांव, भीम पुल, व्यास गुफा और गणेश गुफा की यात्रा
  • अलकनंदा नदी और हिमालय की बर्फीली चोटियों का मनमोहक दृश्य
  • सुबह और शाम की भव्य आरती का आध्यात्मिक अनुभव

घूमने का सबसे अच्छा समय: मई से जून और सितंबर से अक्टूबर। मानसून के दौरान यात्रा से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य लें, जबकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।


10. फूलों की घाटी (Valley of Flowers)

फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध प्राकृतिक स्थल है, जिसे अपनी दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों और रंग-बिरंगे जंगली फूलों के लिए जाना जाता है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) भी है और औली से घूमने जाने वाले पर्यटकों के लिए सबसे लोकप्रिय डे-ट्रिप्स में से एक मानी जाती है। मानसून के मौसम में जब हजारों प्रजातियों के फूल एक साथ खिलते हैं, तो पूरी घाटी रंगों की चादर से ढकी हुई दिखाई देती है।

यह घाटी लगभग 3,250 से 3,650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहां पहुंचने के लिए गोविंदघाट से घांघरिया होते हुए लगभग 16–17 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है। रास्ते में बहते झरने, लकड़ी के पुल, घने जंगल और बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों के दृश्य इस यात्रा को और भी रोमांचक बना देते हैं। ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह अनुभव जीवनभर याद रहने वाला होता है।

फूलों की घाटी में आपको ऑर्किड, ब्लू पॉपी, ब्रह्मकमल (आसपास के ऊंचे क्षेत्रों में), प्रिमुला, एनीमोनी, पोटेंटिला और कई दुर्लभ अल्पाइन फूलों की प्रजातियां देखने को मिल सकती हैं। इसके अलावा यहां तितलियों और हिमालयी पक्षियों की कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं। प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और वनस्पति विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

यदि आप औली की यात्रा जुलाई से सितंबर के बीच कर रहे हैं, तो फूलों की घाटी को अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें। हालांकि यह एक संरक्षित राष्ट्रीय उद्यान है, इसलिए यहां सफाई बनाए रखना और पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है।

मुख्य आकर्षण

  • यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
  • हजारों प्रजातियों के रंग-बिरंगे हिमालयी जंगली फूल
  • शानदार ट्रेकिंग मार्ग और प्राकृतिक झरने
  • हिमालय की बर्फीली चोटियों के मनोरम दृश्य
  • प्रकृति, फोटोग्राफी और बर्ड वॉचिंग के लिए आदर्श स्थान
  • दुर्लभ वनस्पतियों और तितलियों को देखने का अवसर

घूमने का सबसे अच्छा समय: जुलाई से सितंबर, क्योंकि इसी दौरान घाटी में सबसे अधिक फूल खिलते हैं और इसकी प्राकृतिक सुंदरता अपने चरम पर होती है।

घूमने का समय

  • जुलाई
  • अगस्त
  • सितंबर

11. हेमकुंड साहिब

हेमकुंड साहिब भारत के सबसे ऊंचे और पवित्र सिख तीर्थस्थलों में से एक है। समुद्र तल से लगभग 4,329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गुरुद्वारा सात बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों से घिरी एक शांत हिमालयी झील के किनारे बना है। औली से इसकी दूरी लगभग 70–75 किलोमीटर है और यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

हेमकुंड साहिब तक पहुंचने के लिए गोविंदघाट से घांघरिया और फिर लगभग 6 किलोमीटर का कठिन चढ़ाई वाला ट्रेक करना पड़ता है। रास्ते में बहते झरने, घने जंगल, ऊंचे पहाड़ और मनमोहक घाटियां यात्रा को बेहद रोमांचक बना देती हैं। हालांकि ट्रेक चुनौतीपूर्ण है, लेकिन शिखर पर पहुंचने के बाद दिखाई देने वाला शांत झील का दृश्य और आसपास की बर्फीली चोटियां सारी थकान भुला देती हैं।

मान्यता है कि दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पूर्व जन्म में इसी स्थान पर तपस्या की थी। यही कारण है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गुरुद्वारे में सभी श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी रहती है, जहां नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

हेमकुंड साहिब की यात्रा के दौरान अधिकांश पर्यटक पास स्थित फूलों की घाटी (Valley of Flowers) भी घूमते हैं, क्योंकि दोनों स्थानों का आधार शिविर घांघरिया है। यदि आप औली की यात्रा के दौरान धार्मिक अनुभव के साथ हिमालय की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना चाहते हैं, तो हेमकुंड साहिब आपकी यात्रा का सबसे यादगार पड़ाव बन सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • समुद्र तल से लगभग 4,329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध गुरुद्वारा
  • सात हिमालयी चोटियों से घिरी शांत हिमालयी झील
  • गोविंदघाट और घांघरिया से रोमांचक ट्रेकिंग मार्ग
  • गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा धार्मिक महत्व
  • लंगर सेवा और आध्यात्मिक वातावरण
  • फूलों की घाटी के साथ एक ही यात्रा में घूमने का अवसर
  • फोटोग्राफी और हिमालयी प्राकृतिक दृश्यों का शानदार अनुभव

घूमने का सबसे अच्छा समय: जून से सितंबर, क्योंकि इसी अवधि में गुरुद्वारे के कपाट खुले रहते हैं और ट्रेकिंग मार्ग भी सामान्य रूप से सुलभ रहता है। यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और मार्ग की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।


12. तपोवन

तपोवन औली और जोशीमठ के पास स्थित एक शांत और प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जो अपने प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों (Hot Springs) और हिमालय के मनमोहक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान समुद्र तल से लगभग 1,900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और जोशीमठ से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर है। औली घूमने आने वाले पर्यटक अक्सर तपोवन को अपनी यात्रा में शामिल करते हैं, क्योंकि यहां प्रकृति और आध्यात्मिक शांति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

तपोवन का सबसे बड़ा आकर्षण यहां के प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड हैं। माना जाता है कि इन झरनों के पानी में सल्फर और अन्य प्राकृतिक खनिज पाए जाते हैं, जिनके कारण यह पानी वर्षभर गर्म रहता है। सर्दियों के मौसम में जब आसपास का क्षेत्र ठंड से ढका होता है, तब इन गर्म जलकुंडों में स्नान करना एक अनोखा और यादगार अनुभव बन जाता है।

तपोवन केवल गर्म पानी के झरनों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी शांत वादियों, हरे-भरे पहाड़ी ढलानों और हिमालयी दृश्यों के लिए भी जाना जाता है। यहां से आसपास की कई बर्फ से ढकी चोटियों का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। यह स्थान प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और भीड़-भाड़ से दूर कुछ समय बिताने वाले यात्रियों के लिए बेहद उपयुक्त है।

यदि आप औली की यात्रा के दौरान आराम और प्राकृतिक अनुभव की तलाश में हैं, तो तपोवन जरूर जाएं। यहां का शांत वातावरण, ताजी पहाड़ी हवा और प्राकृतिक गर्म झरने आपकी यात्रा को और भी खास बना देंगे।

मुख्य आकर्षण

  • प्राकृतिक गर्म पानी के झरने (Hot Springs)
  • सल्फर युक्त गर्म जलकुंड
  • शांत और प्राकृतिक वातावरण
  • हिमालय की बर्फीली चोटियों के सुंदर दृश्य
  • फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान
  • औली और जोशीमठ से आसानी से पहुंचने योग्य

घूमने का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से जून। हालांकि सर्दियों (दिसंबर से फरवरी) में ठंड के बीच गर्म पानी के झरनों का अनुभव सबसे अधिक आनंददायक माना जाता है।


औली में घूमने का सबसे अच्छा समय

दिसंबर से मार्च

यदि आप बर्फबारी और स्कीइंग का आनंद लेना चाहते हैं, तो यही सबसे अच्छा समय है।

अप्रैल से जून

मौसम सुहावना रहता है।

ट्रैकिंग और दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए आदर्श समय।

जुलाई से सितंबर

बारिश के कारण हरियाली अपने चरम पर होती है।

हालांकि भूस्खलन की संभावना को ध्यान में रखते हुए यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

अक्टूबर से नवंबर

साफ मौसम और कम भीड़ के कारण घूमने के लिए अच्छा समय माना जाता है।


औली घूमने के लिए जरूरी टिप्स

  • सर्दियों में गर्म कपड़े जरूर रखें।
  • आरामदायक ट्रैकिंग शूज़ पहनें।
  • ऊंचाई के कारण पर्याप्त पानी पीते रहें।
  • मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा करें।
  • रोपवे टिकट पहले से बुक करने की कोशिश करें।
  • कैमरा और अतिरिक्त बैटरी साथ रखें।
  • सुबह जल्दी निकलें ताकि सभी जगह आराम से देख सकें।

Places to Visit in Auli का 2 दिन का यात्रा कार्यक्रम

पहला दिन

  • औली रोपवे
  • स्कीइंग स्लोप
  • नंदा देवी व्यू पॉइंट
  • स्थानीय बाजार

दूसरा दिन

  • गुरसों बुग्याल
  • चत्रकुंड
  • जोशीमठ
  • तपोवन

यदि आपके पास 3–4 दिन हैं, तो बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी भी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।


Places to Visit in Auli – FAQ

औली में सबसे प्रसिद्ध जगह कौन-सी है?

औली स्कीइंग स्लोप और औली रोपवे यहां के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं।

औली घूमने के लिए कितने दिन चाहिए?

2 से 3 दिन औली की प्रमुख जगहों को आराम से घूमने के लिए पर्याप्त हैं।

क्या औली परिवार के साथ घूमने के लिए अच्छा है?

हाँ, औली परिवार, दोस्तों और हनीमून कपल्स सभी के लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन है।

औली में बर्फबारी कब होती है?

आमतौर पर दिसंबर के अंत से मार्च तक बर्फबारी और बर्फ देखने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।

औली में ट्रैकिंग कहां कर सकते हैं?

गुरसों बुग्याल, क्वानी बुग्याल, चत्रकुंड और चिनाब झील ट्रैकिंग के लिए लोकप्रिय स्थान हैं।


निष्कर्ष

यदि आप हिमालय की खूबसूरती, बर्फ से ढके पहाड़, शांत वातावरण और रोमांचक गतिविधियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो Places to Visit in Auli की यह सूची आपकी यात्रा को यादगार बना सकती है। औली केवल स्कीइंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां प्राकृतिक घास के मैदान, शांत झीलें, धार्मिक स्थल, रोपवे और शानदार ट्रैकिंग रूट हर तरह के यात्री को आकर्षित करते हैं। सही मौसम चुनकर और अच्छी योजना बनाकर आप औली की इन सभी खूबसूरत जगहों का भरपूर आनंद ले सकते हैं।

Uttarakhand Tourism – https://uttarakhandtourism.gov.in/

Best Time to Visit Auli 2026 | औली घूमने का सबसे अच्छा समय

2 thoughts on “Places to Visit in Auli 2026 | औली में घूमने की 12 खूबसूरत जगहें”

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