गर्मियों की वो रात | Scary Summer Night Story

Scary Summer Night Story गर्मियों की वो रात आज भी अर्जुन को याद थी।

जून का महीना था। हवा गर्म थी, सड़क खाली थी और आसमान में चाँद ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने पीले कागज़ का टुकड़ा अँधेरे पर चिपका दिया हो।

Scary Summer Night Story

अर्जुन शहर से अपने गाँव लौट रहा था। बस में सिर्फ पाँच लोग बचे थे—ड्राइवर, कंडक्टर, एक बूढ़ी औरत, एक आदमी जो पूरे रास्ते खिड़की से बाहर देख रहा था, और अर्जुन।

बस जैसे-जैसे गाँव के करीब पहुँच रही थी, वैसे-वैसे मोबाइल network गायब होता जा रहा था।

अर्जुन ने फोन देखा।

No Signal.

वह मुस्कुराया, “गाँव आ गया।”

लेकिन तभी कंडक्टर उसके पास आया और धीमी आवाज़ में बोला,
“भाई साहब, किस स्टॉप पर उतरना है?”

“काली हवेली के पास,” अर्जुन ने जवाब दिया।

कंडक्टर का चेहरा सफेद पड़ गया।

ड्राइवर ने अचानक ब्रेक लगाया।

बस के अंदर एक अजीब सन्नाटा फैल गया।

बूढ़ी औरत ने अर्जुन को देखा और सिर्फ इतना कहा,
“आज की रात वहाँ मत जाना बेटा।”

अर्जुन हँस पड़ा।
“क्यों? कोई ghost story है क्या?”

कंडक्टर ने टिकट फाड़ते हुए कहा,
“Story नहीं है साहब… warning है।”

2. काली हवेली का रास्ता

अर्जुन दस साल बाद अपने गाँव लौट रहा था। उसके पिता की मृत्यु के बाद पुश्तैनी हवेली बेचने का फैसला हुआ था। शहर के एक buyer ने अच्छा पैसा देने की बात की थी।

वह practical इंसान था। ghosts, spirits, paranormal जैसी चीज़ों पर उसे भरोसा नहीं था।

बस ने उसे गाँव से आधा किलोमीटर पहले उतार दिया।

“आगे बस नहीं जाएगी,” ड्राइवर ने साफ कहा।

“पर road तो है,” अर्जुन बोला।

ड्राइवर ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“Road है… लेकिन लौटने वाले कम हैं।”

बस चली गई।

अब अर्जुन अकेला था।

सामने कच्ची सड़क थी। दोनों तरफ सूखे खेत। दूर एक पुरानी हवेली की छत दिख रही थी।

उसने बैग कंधे पर डाला और चल पड़ा।

रात बहुत गर्म थी, फिर भी अर्जुन को बार-बार ठंडी हवा छू रही थी। जैसे कोई उसके बिल्कुल पास से गुजर रहा हो।

तभी पीछे से एक आवाज़ आई—

“अर्जुन…”

वह रुक गया।

पीछे कोई नहीं था।

उसने खुद को समझाया, “थकान है।”

लेकिन फिर वही आवाज़ आई।

“अर्जुन… वापस चला जा।”

इस बार आवाज़ उसकी माँ जैसी थी।

उसकी माँ, जिसकी मौत पंद्रह साल पहले इसी हवेली में हुई थी।

3. दरवाज़ा अपने आप खुला

हवेली के बाहर पहुँचते ही अर्जुन रुक गया।

काली हवेली वैसी ही थी जैसी बचपन में थी—ऊँची दीवारें, टूटे झरोखे, बड़ा लोहे का दरवाज़ा और बीच आँगन में सूखा पीपल का पेड़।

बस फर्क इतना था कि अब हवेली साँस लेती हुई लग रही थी।

अर्जुन ने चाबी निकाली।

लेकिन चाबी लगाने से पहले ही दरवाज़ा अपने आप खुल गया।

धीरे-धीरे।

चूँऽऽऽ…

अर्जुन के हाथ ठंडे पड़ गए।

“पुराना lock होगा,” उसने खुद से कहा।

वह अंदर गया।

आँगन में धूल थी, सूखे पत्ते थे, और दीवार पर सफेद चूने से लिखा था—

“गर्मियों की वो रात अभी खत्म नहीं हुई।”

अर्जुन ने पढ़कर भौंहें सिकोड़ लीं।

“किसने लिखा ये?”

तभी ऊपर की मंज़िल से किसी बच्चे के हँसने की आवाज़ आई।

हाहाहा…

हँसी बहुत हल्की थी, लेकिन साफ थी।

अर्जुन ने टॉर्च जलाई।

“कौन है?”

कोई जवाब नहीं आया।

सिर्फ पंखे की पुरानी चरमराहट सुनाई दी, जबकि हवेली में बिजली दस साल से नहीं थी।

4. बंद कमरा

हवेली में एक कमरा था जिसे बचपन में हमेशा बंद रखा जाता था।

अर्जुन की माँ उसे वहाँ जाने से रोकती थी।

“उस कमरे में गर्मी रहती है,” माँ कहती थीं।

अर्जुन तब हँसता था।
“गर्मी से कौन डरता है?”

माँ कहती थीं,
“हर गर्म चीज़ सूरज की नहीं होती बेटा।”

आज वही कमरा उसके सामने था।

दरवाज़े पर जंग लगी थी, लेकिन अंदर से हल्की रोशनी आ रही थी।

अर्जुन ने दरवाज़ा धक्का दिया।

कमरा खुल गया।

अंदर दीवारों पर पुराने newspaper चिपके थे। कुछ headlines दिख रही थीं—

“काली हवेली में रहस्यमयी मौत”
“गर्मी की रात परिवार गायब”
“बच्चे की चीखें सुनाई देती हैं”

अर्जुन का दिल तेज़ धड़कने लगा।

तभी उसकी नजर कमरे के बीच रखे एक पुराने wooden box पर गई।

उसने box खोला।

अंदर एक diary थी।

Diary पर लिखा था—

“अगर अर्जुन लौटे, तो सच बताना।”

अर्जुन के हाथ काँप गए।

यह handwriting उसकी माँ की थी।

5. माँ की Diary

अर्जुन ने diary खोली।

पहला पन्ना पीला पड़ चुका था।

लिखा था—

“जिस रात अर्जुन पैदा हुआ, हवेली में पहली बार वो आई थी। कोई औरत नहीं थी। कोई छाया नहीं थी। वो गर्म हवा थी… जो इंसान की तरह चलती थी।”

अर्जुन ने पन्ना पलटा।

“हर साल जून की सबसे गर्म रात को हवेली किसी एक को बुलाती है। पहले दादा गए। फिर चाचा। फिर… मैं।”

अर्जुन की सांस अटक गई।

उसने अगली लाइन पढ़ी—

“अगर मेरा बेटा कभी लौटे, तो उसे कहना—वो हवेली बेचने नहीं आया होगा। उसे बुलाया गया होगा।”

तभी कमरे का दरवाज़ा पीछे से बंद हो गया।

धड़ाम!

अर्जुन ने भागकर दरवाज़ा खींचा।

बंद।

तभी दीवार पर लगे newspaper अपने आप हिलने लगे।

एक-एक कर सारे कागज़ जमीन पर गिर गए।

दीवार पर खून जैसे लाल रंग से लिखा था—

“तू बहुत देर से आया, अर्जुन।”

6. फोन में कैद चेहरा

अर्जुन ने कांपते हाथों से मोबाइल निकाला। Network नहीं था, पर flashlight चल रही थी।

उसने कमरे की recording शुरू कर दी।

“ये सब कोई prank है,” वह खुद से बोला।

तभी मोबाइल screen पर उसे अपने पीछे कोई दिखाई दिया।

एक औरत।

लंबे बाल।

सफेद साड़ी।

चेहरा झुका हुआ।

अर्जुन जम गया।

वह धीरे से मुड़ा।

पीछे कोई नहीं था।

फिर उसने screen देखी।

औरत अब और करीब थी।

उसका चेहरा screen में दिखने लगा।

वो अर्जुन की माँ थी।

लेकिन उसकी आँखें खाली थीं।

Screen से आवाज़ आई—

“बेटा… भाग मत। सच देख।”

अर्जुन के हाथ से फोन गिर गया।

फोन की screen टूट गई, लेकिन video चालू था।

Screen पर अब एक पुराना scene चल रहा था।

वही हवेली। वही गर्मी की रात। उसकी माँ, पिता और छोटा अर्जुन।

और कमरे के कोने में खड़ा एक आदमी।

अर्जुन उसे पहचानता था।

वो उसके पिता थे।

लेकिन पिता के हाथ में एक चाकू था।

7. सच का पहला दरवाज़ा

अर्जुन का सिर घूमने लगा।

उसने diary फिर खोली।

अगले पन्ने पर लिखा था—

“सबको लगता है हवेली शापित है। सच ये है कि शाप हवेली में नहीं, खून में है।”

नीचे लिखा था—

“अर्जुन के पिता ने उस रात सौदा किया था।”

अर्जुन चिल्लाया,
“नहीं! पापा ऐसे नहीं हो सकते!”

कमरे में अचानक गर्मी बढ़ने लगी।

दीवारें तपने लगीं।

अर्जुन को लगा जैसे कोई invisible furnace जल उठा हो।

तभी एक धीमी आवाज़ आई—

“तुझे सच नहीं चाहिए था?”

अर्जुन ने देखा।

कमरे के कोने में वही आदमी खड़ा था—उसके पिता।

पर चेहरा जला हुआ था।

“पापा…”

वो आकृति हँसी।

“मैं तेरा पिता नहीं हूँ।”

“तो कौन है तू?”

उसने जवाब दिया—

“मैं वो हूँ जिसे तेरे पिता ने गर्मियों की उस रात जगाया था।”

8. हवेली का सौदा

अचानक अर्जुन के सामने पूरा कमरा बदल गया।

वह अब अतीत में था।

साल 1999।

गर्मियों की रात।

हवेली में पैसों की तंगी थी। अर्जुन के पिता कर्ज में डूबे थे। गाँव वाले कहते थे कि हवेली के नीचे पुराना तहखाना है, जहाँ कभी तांत्रिक पूजा होती थी।

अर्जुन के पिता ने सच में तहखाना खोला था।

वहाँ मिट्टी में एक काला पत्थर दबा था।

उस पत्थर पर लिखा था—

“जिसे धन चाहिए, वह अपना सबसे प्यारा नाम दे।”

अर्जुन के पिता ने पहले अपनी पत्नी का नाम लिखा।

लेकिन पत्थर चुप रहा।

फिर उन्होंने अपने बेटे का नाम लिखा—

अर्जुन।

तभी हवेली में गर्म हवा चली।

दीवारों से आवाज़ आई—

“बच्चा अभी छोटा है। जब लौटेगा, तब लिया जाएगा।”

अर्जुन का दिल जैसे रुक गया।

वह समझ गया।

वह हवेली बेचने नहीं आया था।

वह वसूली के लिए बुलाया गया था।

9. गाँव वाले क्यों डरते थे

अर्जुन किसी तरह कमरे से बाहर निकला।

आँगन में आते ही उसे लगा जैसे पूरी हवेली जाग गई है।

ऊपर झरोखे में कोई खड़ा था।

सीढ़ियों पर पायल बज रही थी।

पीपल के पेड़ से राख गिर रही थी।

अर्जुन दरवाज़े की ओर भागा।

लेकिन दरवाज़ा गायब था।

जहाँ दरवाज़ा था, वहाँ दीवार थी।

तभी हवेली के बाहर से गाँव वालों की आवाज़ें आईं।

“अर्जुन!”

“दरवाज़ा मत खोलना!”

“सुबह तक रुक जा!”

अर्जुन चिल्लाया,
“मुझे बाहर निकालो!”

बाहर से वही बूढ़ी औरत बोली,
“बेटा, बाहर कोई नहीं है। ये हवेली आवाज़ें बनाती है।”

अर्जुन रुक गया।

अगर बाहर कोई नहीं था, तो आवाज़ किसकी थी?

तभी दीवार के पीछे से वही बूढ़ी औरत अंदर चली आई।

बिना दरवाज़े के।

उसके पैर जमीन को छू नहीं रहे थे।

वह मुस्कुराई।

“मैंने बस में कहा था ना… मत आना।”

10. आखिरी पन्ना

अर्जुन वापस बंद कमरे में गया। उसे लगा जवाब diary में ही है।

Diary के आखिरी पन्ने पर लिखा था—

“अगर अर्जुन बचना चाहता है, तो उसे अपना नाम वापस लेना होगा। नाम वापस लेने के लिए उसे उस इंसान का सच स्वीकारना होगा, जिससे वह सबसे ज्यादा प्यार करता है।”

अर्जुन समझ गया।

उसे अपने पिता का सच स्वीकारना था।

तभी कमरे में पिता की आवाज़ गूँजी—

“मैंने सब तेरे लिए किया था!”

अर्जुन चिल्लाया,
“नहीं! आपने मुझे बेचा था!”

दीवारें काँपने लगीं।

“बोल अर्जुन,” आवाज़ आई,
“क्या तू अपने पिता को दोषी मानता है?”

अर्जुन की आँखों से आँसू निकल आए।

“हाँ।”

“क्या तू उन्हें माफ करता है?”

अर्जुन चुप हो गया।

यह सवाल मुश्किल था।

गर्मी और बढ़ गई।

उसकी त्वचा जलने लगी।

तभी उसे माँ की आवाज़ सुनाई दी—

“माफ करना भूलना नहीं होता, बेटा। बस खुद को आज़ाद करना होता है।”

अर्जुन ने आँखें बंद कीं।

“मैं उन्हें माफ करता हूँ।”

हवेली में चीख गूँजी।

इतनी भयानक कि अर्जुन बेहोश हो गया।

11. सुबह का धोखा

जब अर्जुन की आँख खुली, सुबह हो चुकी थी।

वह हवेली के बाहर पड़ा था।

गाँव वाले उसके आसपास खड़े थे।

एक आदमी बोला,
“भगवान का शुक्र है, तू बच गया।”

बूढ़ी औरत भी वहीं थी।

इस बार उसके पैर जमीन पर थे।

अर्जुन ने पूछा,
“कल रात आप बस में थीं?”

बूढ़ी औरत हैरान हुई।
“कौन सी बस बेटा? इस रास्ते पर तो पंद्रह साल से बस नहीं चलती।”

अर्जुन का खून जम गया।

उसने जेब से मोबाइल निकाला।

Screen टूटी हुई थी।

लेकिन video saved था।

उसने video चलाया।

पहले अँधेरा दिखा।

फिर कमरा।

फिर उसकी माँ।

फिर पिता।

और फिर आखिरी frame में एक चेहरा।

अर्जुन ने zoom किया।

वो चेहरा उसका अपना था।

लेकिन आँखें काली थीं।

और screen पर text लिखा था—

“सौदा पूरा नहीं हुआ। सिर्फ नाम बदल गया है।”

12. असली Twist शुरू होता है

अर्जुन शहर लौट आया।

उसने हवेली बेचने का फैसला cancel कर दिया। उसने buyer को call किया और कहा—

“Property अब available नहीं है।”

दूसरी तरफ से आवाज़ आई—

“अर्जुन जी, आप देर कर चुके हैं। Agreement sign हो चुका है।”

“क्या? मैंने तो sign नहीं किया!”

Buyer हँसा।

“आपने कल रात किया था।”

अर्जुन ने email खोला।

Agreement attached था।

नीचे signature था—

अर्जुन प्रताप सिंह

लेकिन signature के नीचे एक और line थी—

Witness: गर्मियों की रात

अर्जुन के हाथ से phone गिर गया।

दरवाज़े पर knock हुआ।

टक…टक…टक…

वह धीरे-धीरे दरवाज़े तक गया।

बाहर courier boy खड़ा था।

“Sir, आपके लिए parcel है।”

Parcel पर sender address था—

काली हवेली, गाँव रतनपुर

अर्जुन ने parcel खोला।

अंदर वही काला पत्थर था।

और उस पर नया नाम लिखा था—

“मीरा”

मीरा अर्जुन की पत्नी थी।

अर्जुन की सांस रुक गई।

तभी bedroom से मीरा की आवाज़ आई—

“अर्जुन… आज बहुत गर्मी है ना?”

कमरे में AC चल रहा था।

फिर भी हवा गर्म थी।

गर्मियों की वो रात – Part 2

The Final Horror Chapter | Mystery, Paranormal & Suspense Ending

13. काला पत्थर वापस आ गया

अर्जुन के हाथ काँप रहे थे।

टेबल पर रखा काला पत्थर गर्म होता जा रहा था। उस पर खुदा नाम — “मीरा” — धीरे-धीरे लाल चमकने लगा।

Bedroom से मीरा बाहर आई।

उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी।

“कौन आया था?” उसने पूछा।

अर्जुन ने जल्दी से पत्थर अखबार में लपेट दिया।
“कुछ नहीं… गलत parcel था।”

मीरा उसके करीब आई।

“तुम ठीक तो हो? तुम्हारा चेहरा इतना डरा हुआ क्यों लग रहा है?”

अर्जुन जवाब देने ही वाला था कि अचानक पूरे घर की बिजली चली गई।

टक!

कमरा अँधेरे में डूब गया।

AC बंद।

Fan बंद।

लेकिन गर्मी… पहले से ज्यादा।

ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने कमरे में आग जला दी हो।

तभी kitchen से बर्तनों के गिरने की आवाज़ आई।

धड़ाम!

मीरा डर गई।
“शायद बिल्ली होगी…”

लेकिन अर्जुन जानता था।

यह बिल्ली नहीं थी।

वो आ चुकी थी।

14. Video का दूसरा हिस्सा

मोबाइल अचानक अपने आप चालू हो गया।

वही टूटी हुई screen।

Video अपने आप play होने लगा।

इस बार footage पहले से अलग थी।

Screen पर रात का वही कमरा था।

लेकिन अब वहाँ सिर्फ उसके पिता नहीं थे।

एक और आदमी खड़ा था।

काले कपड़े।

चेहरे पर राख।

और आँखें… पूरी सफेद।

वह आदमी अर्जुन के पिता से कह रहा था—

“नाम देने के बाद पीछे नहीं हट सकते।”

पिता काँपती आवाज़ में बोले—
“मुझे सिर्फ पैसा चाहिए था…”

वह आदमी हँसा।

“हर इंसान यही कहता है।”

फिर उसने पूछा—

“क्या तुम जानते हो… गर्मियों की वो रात क्या है?”

अर्जुन video के और करीब आ गया।

आदमी ने जवाब दिया—

“ये कोई आत्मा नहीं। ये भूख है।”

अचानक video glitch हुआ।

Screen पर एक सेकंड के लिए वही सफेद आँखों वाला आदमी दिखाई दिया…

लेकिन इस बार वो camera के अंदर नहीं…

अर्जुन के पीछे खड़ा था।

15. Mirror Horror

अर्जुन धीरे-धीरे मुड़ा।

पीछे कोई नहीं था।

लेकिन सामने wall mirror में…

वो आदमी खड़ा था।

सिर्फ mirror के अंदर।

उसकी गर्दन टेढ़ी थी।

चेहरा मुस्कुरा रहा था।

मीरा ने mirror की तरफ देखा।

“अर्जुन… ये कौन है?”

अर्जुन का गला सूख गया।

Mirror में खड़ा आदमी धीरे-धीरे हाथ उठाने लगा।

फिर उसने उंगली से mirror पर कुछ लिखा—

“नाम वापस दो।”

Mirror अचानक crack हो गया।

चटाऽऽऽक!

मीरा चीख पड़ी।

अर्जुन ने उसका हाथ पकड़ा और दोनों घर से बाहर भागे।

लेकिन बाहर पहुँचते ही अर्जुन रुक गया।

उनका apartment corridor गायब था।

सामने वही पुरानी हवेली थी।

काली हवेली।

16. हवेली शहर तक आ चुकी थी

गर्मी इतनी तेज थी कि साँस लेना मुश्किल हो रहा था।

अर्जुन समझ गया—

हवेली गाँव में नहीं थी।

हवेली उसके साथ आ गई थी।

पीछे apartment door बंद हो चुका था। अब वहाँ सिर्फ टूटी दीवारें थीं।

मीरा रोने लगी।

“ये क्या हो रहा है अर्जुन?!”

अर्जुन ने पहली बार उसे सब सच बताया—
गाँव… diary… सौदा… काला पत्थर… और उसका नाम।

मीरा कुछ सेकंड तक चुप रही।

फिर धीरे से बोली—

“तो मतलब… अब वो मुझे लेने आएगा?”

अर्जुन ने कुछ नहीं कहा।

तभी ऊपर balcony से किसी बच्चे की हँसी सुनाई दी।

हाहाहा…

अर्जुन का दिल जम गया।

वो उसकी बचपन वाली हँसी थी।

17. असली मौत किसकी हुई थी?

ऊपर balcony में एक छोटा बच्चा खड़ा था।

सफेद कपड़े।

आधा जला चेहरा।

वो अर्जुन जैसा दिखता था।

मीरा फुसफुसाई—
“ये… तुम्हारे जैसा क्यों दिख रहा है?”

तभी बच्चे ने कहा—

“क्योंकि मैं अर्जुन हूँ।”

अर्जुन पीछे हट गया।

“नहीं… मैं अर्जुन हूँ!”

बच्चा मुस्कुराया।

“नहीं। तू सिर्फ वो चीज़ है जिसे हवेली ने बाहर भेजा था।”

अर्जुन का दिमाग सुन्न हो गया।

“क्या बकवास है ये?!”

बच्चा धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे आया।

“उस रात असली अर्जुन मर गया था।”

मीरा की आँखें फैल गईं।

बच्चे ने आगे कहा—

“तेरे पिता ने अपने बेटे को बचाने की कोशिश की… लेकिन हवेली ने उसे ले लिया।”

“झूठ!”

“तो अपनी माँ की diary का आखिरी छुपा पन्ना पढ़।”

अचानक अर्जुन की जेब में diary दिखाई दी।

वो खुद-ब-खुद खुल गई।

आखिरी hidden page पर लिखा था—

“मेरा बेटा उस रात मर चुका है। जो हमारे साथ रह रहा है… वो वही चीज़ है जिसे हवेली ने बनाया है।”

अर्जुन के पैरों तले जमीन खिसक गई।

18. कौन था अर्जुन?

उसके दिमाग में memories flash होने लगीं।

बचपन की कई बातें उसे याद ही नहीं थीं।

क्यों?

क्योंकि वो असली यादें थीं ही नहीं।

उसे याद आया—

माँ उसे कभी छूते हुए डरती थीं।

गाँव वाले उसे अजीब नजरों से देखते थे।

और सबसे बड़ा सच…

उसे कभी गर्मी नहीं लगती थी।

लेकिन पिछले कुछ दिनों से लग रही थी।

क्यों?

क्योंकि “वो” जाग रहा था।

तभी सफेद आँखों वाला आदमी सामने आ गया।

“अब समय पूरा हुआ।”

मीरा काँपती आवाज़ में बोली—
“तुम क्या चाहते हो?”

वो मुस्कुराया।

“जो मेरा है।”

19. हवेली का तहखाना

अचानक जमीन टूट गई।

अर्जुन और मीरा नीचे गिर पड़े।

वो हवेली के पुराने तहखाने में थे।

चारों तरफ राख।

दीवारों पर हजारों नाम लिखे थे।

हर नाम के नीचे एक तारीख।

और सबसे नीचे—

अर्जुन – 1999

मीरा रो पड़ी।

“हे भगवान…”

तभी तहखाने के बीचोंबीच वही काला पत्थर दिखाई दिया।

उसके ऊपर आग जैसी गर्म लकीरें चल रही थीं।

सफेद आँखों वाला आदमी बोला—

“हर गर्मियों में एक नाम लिया जाता है। तभी ये भूख शांत रहती है।”

अर्जुन ने पूछा—

“अगर नाम न दो तो?”

वो हँसा।

“फिर पूरा परिवार खत्म।”

मीरा पीछे हटने लगी।

“नहीं… नहीं…”

अर्जुन समझ गया।

अब choice सिर्फ एक थी।

या तो मीरा मरेगी…

या वो खुद।

20. Final Twist

अर्जुन पत्थर के सामने गया।

उसने हाथ रखा।

पत्थर जल रहा था।

तभी आवाज़ आई—

“अपना असली नाम बोल।”

अर्जुन चिल्लाया—

“मेरा कोई नाम नहीं है!”

पूरे तहखाने में सन्नाटा छा गया।

सफेद आँखों वाला आदमी पहली बार डरा हुआ लगा।

अर्जुन हँसने लगा।

धीरे-धीरे।

फिर जोर-जोर से।

“तुमने सही कहा था… असली अर्जुन तो मर चुका है।”

उसकी आँखें काली होने लगीं।

“लेकिन तुम भूल गए… जिसने उसे लिया था… वो मैं ही था।”

मीरा डर के मारे पीछे हट गई।

सफेद आँखों वाला आदमी चीखा—

“नहीं… तू वापस नहीं आ सकता!”

अर्जुन का शरीर बदलने लगा।

उसकी skin राख जैसी हो गई।

कमरे की गर्मी अचानक आग में बदल गई।

अब सच सामने था।

अर्जुन कोई इंसान नहीं था।

वो उसी “भूख” का हिस्सा था।

एक टुकड़ा… जो सालों पहले इंसानी रूप में बाहर भेजा गया था।

ताकि सही समय पर वापस लौट सके।

21. असली Monster

सफेद आँखों वाला आदमी भागने लगा।

पहली बार शिकारी डर गया था।

अर्जुन मुस्कुराया।

“तू मुझे control करना चाहता था?”

उसने आदमी की गर्दन पकड़ ली।

“तू पुजारी था… मालिक नहीं।”

आदमी चीखा।

पूरा तहखाना काँपने लगा।

दीवारों पर लिखे सारे नाम जलने लगे।

मीरा रोती हुई चिल्लाई—

“अर्जुन!”

अर्जुन उसकी तरफ मुड़ा।

कुछ सेकंड के लिए उसकी आँखें फिर इंसानों जैसी हो गईं।

“भाग जाओ…”

“लेकिन तुम—”

“मैं अर्जुन नहीं हूँ।”

तभी तहखाने में आग भड़क उठी।

22. अंतिम रात

मीरा किसी तरह हवेली से बाहर निकल आई।

पीछे पूरी हवेली जल रही थी।

गाँव वाले दूर खड़े थे।

आसमान लाल हो चुका था।

अंदर से चीखें आ रही थीं।

मानो हजारों लोग एक साथ चिल्ला रहे हों।

फिर अचानक सब शांत हो गया।

धड़ाम!

पूरी हवेली जमीन में धँस गई।

बस राख बची।

और गर्म हवा।

23. छह महीने बाद

मीरा शहर लौट आई।

उसने कभी किसी को सच नहीं बताया।

लोगों ने मान लिया कि हवेली में आग लग गई थी और अर्जुन मर गया।

धीरे-धीरे जिंदगी सामान्य होने लगी।

लेकिन एक बात अजीब थी।

अब हर रात उसे गर्म हवा महसूस होती।

और कभी-कभी mirror में…

उसे अर्जुन दिखाई देता।

एक रात उसने हिम्मत करके पूछा—

“क्या तुम सच में चले गए?”

Mirror में अर्जुन मुस्कुराया।

“कुछ भूखें कभी नहीं मरतीं।”

फिर उसका चेहरा अँधेरे में गायब हो गया।

24. The Viral Ending

एक साल बाद…

YouTube पर एक नया Paranormal channel viral हुआ।

Channel का नाम था—

“गर्मियों की वो रात”

उस channel पर सिर्फ एक video थी।

Title:

“अगर ये video आपको रात 2:13 पर दिखे… तो पूरा मत देखना।”

Video upload करने वाले का नाम था—

Arjun Lives

Video के last frame में वही काला पत्थर दिखाई देता था।

और उस पर धीरे-धीरे एक नया नाम उभरता था…

स्क्रीन के सामने बैठा इंसान…

यानी देखने वाले का नाम।

और तभी video में एक फुसफुसाहट सुनाई देती—

“अब तुम्हारी बारी है…”

समाप्त।

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