मैं जिस घर में रहता हूँ… वो भूतिया है | Bhutiya Ghar Ki Kahani

Writer – अनिकेत राज

मैं पहले भूत-प्रेत वगैरह में विश्वास नहीं करता था।
सच बोलूं तो मुझे लगता था ये सब बस YouTube Horror Videos और fake stories होती हैं views लेने के लिए।

लेकिन पिछले 6 महीने में मेरे साथ जो हुआ… उसके बाद मैं रात में अकेले washroom तक नहीं जा पाता।

ये कहानी मेरे उस घर की है… जहाँ मैं अभी भी रहता हूँ।
या शायद… फँसा हुआ हूँ।

Bhutiya Ghar Ki Kahani

नया घर

Bhutiya Ghar Ki Kahani करीब 7 महीने पहले मैं नौकरी के लिए शहर आया था। Budget कम था तो ज्यादा options नहीं थे। फिर एक दिन मुझे internet पर एक पुराना-सा घर दिखा।

Rent बहुत कम था।

इतना कम कि मुझे खुद शक हुआ।

मैं घर देखने गया। Colony पुरानी थी। सड़कें सुनसान। आसपास के लोग भी अजीब तरीके से घूर रहे थे।

घर बाहर से ठीक लग रहा था, बस थोड़ा पुराना।

Owner ने कहा,
“अगर पसंद हो तो आज ही shift हो जाओ।”

मैंने पूछा, “इतना सस्ता क्यों है?”

वो हँसने लगा।
“लोग पुराने घरों से डरते हैं।”

उस वक्त मुझे भी हँसी आई थी।

काश तब डर जाता।


पहली रात

पहली रात सब normal था।

मैंने सामान set किया, खाना खाया और सो गया। रात करीब 2 बजे मेरी आँख खुली।

ऐसा लगा जैसे कोई hall में चल रहा हो।

टक… टक… टक…

धीरे-धीरे कदमों की आवाज़।

मैंने सोचा शायद ऊपर वाले floor से आ रही होगी। लेकिन फिर याद आया…

ऊपर कोई रहता ही नहीं था।

मैंने हिम्मत करके बाहर देखा।

Hall खाली था।

लेकिन kitchen की light जली हुई थी।

मैं तो light बंद करके सोया था।

मैं धीरे-धीरे kitchen की तरफ गया।

वहाँ कोई नहीं था।

लेकिन sink में पानी चल रहा था।

पूरा tap खुला हुआ।

मैंने tap बंद किया और वापस कमरे में आ गया।

उस रात फिर नींद नहीं आई।


अजीब बातें शुरू हुईं

उसके बाद रोज कुछ ना कुछ होने लगा।

कभी रात में दरवाज़े पर knock होता।

दरवाज़ा खोलो तो बाहर कोई नहीं।

कभी ऐसा लगता कोई पीछे खड़ा है।

एक रात तो हद हो गई।

मैं mobile चला रहा था तभी मेरे कान के पास किसी ने धीरे से बोला—

“सो मत…”

मैं डर के मारे उछल पड़ा।

पूरा कमरा देखा।
कोई नहीं।

उस रात मैं light जलाकर सोया।

लेकिन सुबह उठकर देखा तो light बंद थी।

और दीवार पर उंगली से लिखा था—

“Lights से कुछ नहीं होगा।”

मेरे हाथ काँपने लगे।


पड़ोस वाली aunty

अगले दिन मैंने सामने वाली aunty से बात की।

मैंने casually पूछा,
“Aunty, इस घर में पहले कौन रहता था?”

उन्होंने पहले तो कुछ नहीं बोला।

फिर धीरे से पूछने लगीं,
“रात में आवाज़ें आती हैं क्या?”

मेरे रोंगटे खड़े हो गए।

मैंने पूछा, “आपको कैसे पता?”

वो बोलीं,
“क्योंकि उस घर में पहले भी लोग रहे हैं… लेकिन ज्यादा दिन नहीं।”

मैंने पूछा, “मतलब?”

Aunty ने सीधे जवाब नहीं दिया।

बस इतना कहा—

“अगर रात में कोई तुम्हारा नाम लेकर बुलाए… जवाब मत देना।”


ऊपर वाला कमरा

घर में ऊपर एक कमरा हमेशा बंद रहता था।

Owner ने कहा था वहाँ पुराना सामान रखा है।

लेकिन एक रात मुझे ऊपर से बच्चे के रोने की आवाज़ आई।

धीरे-धीरे…

जैसे कोई डरकर रो रहा हो।

मैं खुद को रोक नहीं पाया।

मैं ऊपर गया।

दरवाज़ा आधा खुला था।

अंदर बहुत अंधेरा था।

मैंने mobile flashlight on की।

कमरे में पुरानी चीजें पड़ी थीं। टूटी chair, एक पुरानी cycle, कुछ toys…

और दीवार पर बच्चों की drawing बनी थी।

एक family की drawing।

माँ।

पिता।

और एक छोटा बच्चा।

लेकिन पिता के चेहरे पर काला निशान बना हुआ था।

नीचे लिखा था—

“Papa monster.”

मेरे शरीर में अजीब-सी ठंड फैल गई।

तभी पीछे से दरवाज़ा बंद हो गया।

धड़ाम!

मैं डर गया।

मैंने तुरंत दरवाज़ा खोलने की कोशिश की लेकिन वो खुल नहीं रहा था।

फिर कमरे के कोने से आवाज़ आई—

“मम्मी…”

मेरी सांस अटक गई।

Flashlight उधर घुमाई।

एक छोटा बच्चा खड़ा था।

पतला।

गंदे कपड़े।

और उसकी आँखें…

पूरी काली।


वो बच्चा

मैं चीख पड़ा।

लेकिन वो बच्चा बस मुझे देखता रहा।

फिर धीरे-धीरे बोला—

“आप भी चले जाओ…”

मैंने काँपते हुए पूछा,
“तुम… कौन हो?”

उसने जवाब नहीं दिया।

बस उंगली से कमरे के floor की तरफ इशारा किया।

मैंने नीचे देखा।

Floor पर scratch marks थे।

जैसे किसी ने अंदर से दरवाज़ा नोचा हो।

मुझे लगा मैं बेहोश हो जाऊँगा।

अचानक दरवाज़ा अपने आप खुल गया।

मैं नीचे भागा और पूरी रात बाहर सड़क पर बैठा रहा।


इंटरनेट पर सच

अगले दिन मैंने internet पर उस घर के बारे में search किया।

पहले कुछ नहीं मिला।

फिर मुझे एक पुरानी news मिली।

करीब 20 साल पहले उस घर में एक परिवार रहता था।

पति। पत्नी। और उनका 10 साल का बेटा।

एक रात वो तीनों अचानक गायब हो गए।

Police को कुछ नहीं मिला।

बस घर के ऊपर वाले कमरे में खून के निशान मिले थे।

उसके बाद से लोग उस घर को haunted house बोलने लगे।

मेरा दिमाग घूम गया।

क्या वो बच्चा… वही था?


CCTV footage

अब मुझे डर लगने लगा था।

मैंने online camera मंगवाया और hall में लगा दिया।

पहली रात कुछ नहीं हुआ।

दूसरी रात भी नहीं।

लेकिन तीसरी रात…

करीब 3 बजे camera अपने आप on हो गया।

मैं सुबह recording देखने लगा।

शुरू में सब normal था।

फिर अचानक hall में एक shadow दिखी।

धीरे-धीरे वो shadow camera के पास आई।

और फिर साफ दिखाई दिया—

वो वही बच्चा था।

वो camera को देख रहा था।

कुछ seconds बाद उसने सीधे camera के सामने आकर कहा—

“ये घर छोड़ दो।”

Recording वहीं बंद हो गई।

मेरे हाथ सुन्न पड़ गए।


असली डर

मैंने उसी दिन घर छोड़ने का फैसला किया।

मैंने सामान pack किया।

लेकिन जैसे ही main door खोला… बाहर कोई नहीं था।

मतलब colony गायब थी।

सड़क नहीं।

घर नहीं।

बस अंधेरा।

पूरा काला अंधेरा।

मैं डरकर पीछे हट गया।

और तभी पीछे से आवाज़ आई—

“अब नहीं जा सकते…”

मैंने मुड़कर देखा।

वो बच्चा stairs पर खड़ा था।

लेकिन इस बार वो अकेला नहीं था।

उसके पीछे एक औरत खड़ी थी।

उसका गला कटा हुआ था।

और उसके पीछे एक आदमी।

जिसका चेहरा जला हुआ था।

मैं डर से जमीन पर गिर गया।


आखिर सच क्या था?

उस रात मुझे सब पता चला।

उस बच्चे के पिता बहुत violent आदमी थे।

वो रोज शराब पीकर अपनी पत्नी को मारता था।

एक रात उसने गुस्से में पत्नी को मार दिया।

बच्चे ने सब देख लिया।

फिर उसने अपने बेटे को ऊपर वाले कमरे में बंद कर दिया।

बच्चा कई दिनों तक वहीं भूखा-प्यासा रहा।

और वहीं मर गया।

उसके बाद पिता ने खुद को आग लगा ली।

तब से वो तीनों उसी घर में हैं।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

असल डर उसके बाद शुरू हुआ।


सबसे बड़ा twist

मैंने सोचा अगर मैं घर छोड़ दूँगा तो सब खत्म हो जाएगा।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मैं नया flat लेकर रहने लगा।

पहली रात सब ठीक था।

मैंने सोचा finally सब खत्म।

फिर रात में मेरे phone पर notification आया।

Unknown number से एक photo।

मैंने खोला।

मेरी photo थी।

मैं सो रहा था।

और मेरे पीछे वही बच्चा खड़ा था।

Caption लिखा था—

“हम भी shift हो गए।”

उस रात से आज तक…

जहाँ भी मैं जाता हूँ…

वो मेरे साथ आ जाते हैं।

कभी mirror में दिखते हैं।

कभी रात में whisper करते हैं।

कभी दरवाज़े पर knock करते हैं।

और सबसे डरावनी बात…

अब कभी-कभी वो बच्चा मुझे “पापा” बोलकर बुलाता है।

अगर ये कहानी पढ़ते वक्त तुम्हें भी पीछे किसी के चलने की आवाज़ आए…

तो पीछे मत देखना।

क्योंकि शायद…

वो अब नया घर ढूँढ रहे हैं।

मैं जिस घर में रहता हूँ… वो भूतिया है

Part 2 – वो मेरे साथ आ गए

उस रात के बाद मेरी जिंदगी पूरी बदल गई।

मैं नया flat लेकर रहने लगा था। 12th floor पर। अच्छी society, security guards, CCTV… सब कुछ safe था।

लेकिन डर घर का नहीं था।

डर उनका था…
जो मेरे साथ आ चुके थे।


पहली warning

नई जगह आने के दो दिन तक सब normal रहा।

मैंने खुद को समझाया कि शायद मैं mentally disturb हो गया हूँ।
जो कुछ पुराने घर में हुआ… वो trauma था।

लेकिन तीसरी रात…

करीब 2:30 बजे मेरी आँख खुली।

कमरे में बहुत ठंड थी।

AC बंद था।

फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे कोई बर्फीली हवा कमरे में घूम रही हो।

मैंने blanket हटाई और पानी पीने उठा।

तभी मेरी नजर bedroom के corner पर गई।

वहाँ कोई खड़ा था।

एक छोटा बच्चा।

पतला शरीर।

झुका हुआ सिर।

मैं वहीं freeze हो गया।

धीरे-धीरे उसने सिर ऊपर किया।

वही काली आँखें।

वही बच्चा।

राघव।

मेरे मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली।

वो बस मुझे देख रहा था।

फिर धीरे से बोला—

“उन्होंने हमें ढूँढ लिया।”

और अचानक गायब हो गया।


कौन “उन्होंने”?

सुबह तक मैं सो नहीं पाया।

मैंने खुद को समझाया hallucination होगा। लेकिन अंदर से मुझे पता था—वो सच था।

Office जाने का मन नहीं हुआ। मैं पूरे दिन room में बैठा रहा।

शाम को society के guard ने मुझे रोका।

“Sir, आपका बेटा कल रात बाहर घूम रहा था क्या?”

मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।

मैंने कहा, “मैं अकेला रहता हूँ।”

Guard थोड़ा confused हो गया।

“लेकिन CCTV में एक बच्चा दिखा था आपके flat के बाहर।”

उसने mobile में footage दिखाई।

रात 3:01।

मेरे flat के बाहर corridor में एक बच्चा खड़ा था।

Camera blurry था लेकिन चेहरा साफ दिख रहा था।

राघव।

और सबसे डरावनी बात…

वो camera की तरफ नहीं देख रहा था।

वो मेरे flat के अंदर देख रहा था।


वो औरत

उस रात मैंने सारे lights on रखे।

करीब 1 बजे kitchen से बर्तन गिरने की आवाज़ आई।

मैं डरते-डरते बाहर गया।

Kitchen खाली था।

लेकिन fridge पर उंगली से लिखा था—

“मत खोलो।”

मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।

मैं पीछे हटने ही वाला था कि fridge अपने आप खुल गया।

अंदर कुछ नहीं था।

सिर्फ पीछे की दीवार पर खून से लिखा था—

“वो आ गया।”

तभी मेरे पीछे किसी औरत के रोने की आवाज़ आई।

धीमी… दर्द भरी।

मैंने पीछे देखा।

Kitchen के दरवाज़े पर वही औरत खड़ी थी।

राघव की माँ।

उसका गला कटा हुआ था। बाल बिखरे हुए। आँखों से खून बह रहा था।

वो लगातार सिर हिलाकर “ना” बोल रही थी।

जैसे मुझे warning दे रही हो।

फिर अचानक उसने काँपते हुए कहा—

“दरवाज़ा बंद करो…”

और उसी वक्त पूरे घर की lights बंद हो गईं।


अंधेरे में कोई और था

पूरा flat अंधेरे में डूब गया।

मैंने phone flashlight on की।

और तभी मुझे महसूस हुआ…

कमरे में सिर्फ मैं नहीं था।

कोई और भी था।

भारी साँसें।

धीरे-धीरे मेरे पीछे आती हुई।

मैंने flashlight घुमाई।

कुछ नहीं।

लेकिन अगले ही second मेरे कान के पास किसी आदमी की आवाज़ आई—

“मेरा परिवार कहाँ है?”

मैं चीख पड़ा।

Flashlight नीचे गिर गई।

और अंधेरे में मुझे एक जला हुआ चेहरा दिखाई दिया।

वही आदमी।

राघव का पिता।

लेकिन इस बार वो पहले जैसा नहीं था।

उसका चेहरा आधा जला हुआ था… और उसकी आँखों में कुछ अलग था।

गुस्सा नहीं।

जैसे… वो किसी से डर रहा हो।

उसने मेरा collar पकड़ लिया।

“वो आ रहा है…” उसने कहा।

“कौन?” मैंने काँपते हुए पूछा।

उसका हाथ और जोर से कस गया।

“जिसने हमें यहाँ बाँधा।”


पुरानी diary

अगले दिन मैं वापस पुराने घर गया।

Police ने घर seal कर दिया था लेकिन somehow दरवाज़ा खुला हुआ था।

पूरा घर पहले से ज्यादा सड़ा हुआ लग रहा था।

जैसे सालों से कोई वहाँ रहा ही न हो।

मैं सीधे ऊपर वाले कमरे में गया।

वहाँ सब वैसा ही था।

लेकिन इस बार floor पर एक नई diary पड़ी थी।

मैंने उसे खोला।

पहले page पर लिखा था—

“अगर तुम ये पढ़ रहे हो तो मतलब वो तुम्हारे पीछे आ चुका है।”

मेरे हाथ काँपने लगे।

आगे लिखा था—

“हम इस घर में अकेले नहीं थे।”

“घर में कुछ पहले से था।”

“वो इंसान नहीं है।”

“वो आवाज़ बनकर आता है।”

“वो पहले तुम्हें डराता है… फिर तुम्हारी यादों में रहने लगता है।”

“और जब तुम उससे डरना बंद कर देते हो…”

“वो तुम्हारा चेहरा पहन लेता है।”

मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

तभी ऊपर ceiling से किसी के दौड़ने की आवाज़ आई।

धम… धम… धम…

जैसे कोई चार पैरों पर भाग रहा हो।


CCTV का असली वीडियो

मैं नीचे भागा।

तभी hall में रखा पुराना TV अपने आप on हो गया।

Screen पर black and white footage चल रही थी।

Date थी—2003.

यानी उसी साल की जब वो family गायब हुई थी।

Video में राघव अपनी माँ के साथ खेल रहा था।

फिर अचानक camera glitch हुआ।

Screen पर कुछ seconds के लिए एक लंबा काला आदमी दिखाई दिया।

बहुत लंबा।

इतना लंबा कि उसका सिर ceiling से टकरा रहा था।

उसका चेहरा नहीं था।

बस पूरा काला।

Video में राघव अचानक डर गया।

उसने camera की तरफ देखकर कहा—

“मम्मी… वो फिर आ गया।”

और अगले second footage बंद हो गई।

TV screen पर सिर्फ एक line आई—

“अब तुम्हारी बारी है।”


असली भूत

अब मुझे समझ आया।

राघव और उसका परिवार असली भूत नहीं थे।

वो भी victims थे।

घर में कुछ और था।

कुछ बहुत पुराना।

कुछ ऐसा जो लोगों के डर से ताकतवर होता था।

और अब…

उसे मेरे बारे में पता चल चुका था।


रात 3:33

उस रात मैं सो नहीं पाया।

Clock में 3:33 हुए।

और अचानक पूरे flat की walls से knock होने लगा।

टक… टक… टक…

हर तरफ से।

Bedroom।

Kitchen।

Bathroom।

Ceiling।

जैसे दर्जनों लोग दीवारों के अंदर फँसे हों।

फिर एक साथ सबकी आवाज़ आई—

“दरवाज़ा खोलो…”

मैं रोने लगा।

मैंने कान बंद कर लिए।

लेकिन आवाज़ और तेज हो गई।

“दरवाज़ा खोलो…”

“हमें अंदर आने दो…”

फिर अचानक सब शांत हो गया।

पूरे घर में मौत जैसी चुप्पी।

और तभी bedroom का दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला।

चर्ररर…

अंधेरे में कोई खड़ा था।

लेकिन इस बार वो राघव नहीं था।

वो मैं था।

Same face.

Same clothes.

बस उसकी आँखें पूरी काली थीं।

वो मुस्कुराया।

और बोला—

“अब मैं यहाँ रहूँगा।”**

उसके बाद मुझे कुछ याद नहीं।


अगली सुबह

जब मेरी आँख खुली तो सुबह हो चुकी थी।

मैं floor पर पड़ा था।

Phone में 47 missed calls थीं।

लेकिन सबसे डरावनी चीज़ अभी बाकी थी।

मेरे Instagram account से रात में live गया था।

करीब 12 लाख लोग वो live देख चुके थे।

मैंने trembling hands से video खोला।

Live में मैं camera के सामने बैठा था।

लेकिन मुझे याद नहीं कि मैंने live किया।

Video में मैं लगातार camera को देखकर मुस्कुरा रहा था।

फिर अचानक मैंने कहा—

“अब ये सिर्फ मेरे घर में नहीं है…”

“अब ये हर उस इंसान के घर जाएगा जिसने हमें देखा है…”

उसके बाद screen में पीछे वही काला लंबा आदमी दिखाई दिया।

और live खत्म हो गया।

उस दिन से internet पर लोग अजीब चीज़ें report करने लगे।

किसी को रात में knocks सुनाई देने लगे।

किसी के घर में black shadow दिखने लगी।

किसी के phone में अपने आप वो live video download हो गया।

और सबसे डरावनी बात…

हर video के आखिर में सिर्फ एक आवाज़ सुनाई देती है—

“दरवाज़ा खोलो…”

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