उसने नागमणि छू ली… फिर शुरू हुआ मौत का खेल

WRITER – YASH RAJPUT

बरसात की वह रात आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा थी।
महाराष्ट्र के घने जंगलों के बीच बसा छोटा-सा गाँव “कुंडेश्वर” दिन में जितना शांत दिखाई देता था, रात होते ही उतना ही डरावना बन जाता था। वहाँ के लोग कहते थे कि जंगल के बीचोंबीच एक प्राचीन मंदिर है, जहाँ सदियों पहले एक नागराज अपनी नागमणि की रक्षा करता था।

कहते हैं, जिसने भी उस मणि को पाने की कोशिश की… उसकी मौत साधारण नहीं हुई।

कोई पागल हो गया…
कोई जिंदा जल गया…
और कुछ लोग ऐसे गायब हुए कि उनका नाम तक मिट गया।

लेकिन शहरों में रहने वाले लोग इन बातों को सिर्फ folklore और superstition मानते थे।

Swapnil भी उन्हीं लोगों में से एक था।

नागमणि

पहला अध्याय – रहस्यमयी डायरी

Swapnil एक लेखक था।
उसे horror stories लिखने का जुनून था। इंटरनेट पर उसके articles viral होने लगे थे, लेकिन उसे हमेशा लगता था कि उसकी कहानियों में “real fear” की कमी है।

एक दिन उसे अपने दादाजी के पुराने सामान में एक चमड़े की डायरी मिली।

नागमणि डायरी पर धूल जमी थी और उसके ऊपर लाल स्याही से लिखा था—

“नागमणि को कभी मत छूना…”

Swapnil हँस पड़ा।

“Classic horror line…” उसने खुद से कहा।

लेकिन जैसे ही उसने डायरी खोली, कमरे का तापमान अचानक ठंडा हो गया।

बाहर तेज़ हवा चलने लगी।

पन्नों में एक जगह लिखा था—

“कुंडेश्वर के जंगल में एक प्राचीन मंदिर है।
वहाँ नागमणि आज भी मौजूद है।
लेकिन वह किसी इंसान की नहीं… मौत की अमानत है।”

डायरी के आखिरी पन्ने पर खून जैसे रंग से एक नक्शा बना था।

Swapnil की आँखों में excitement चमक उठी।

उसे लगा… यही उसकी next horror novel का perfect content होगा।


दूसरा अध्याय – कुंडेश्वर गाँव

दो दिन बाद Swapnil अपनी jeep लेकर कुंडेश्वर पहुँच गया।

गाँव में अजीब सन्नाटा था।
लोग उसे देखकर डर रहे थे।

एक बूढ़ा आदमी उसके पास आया।

“शहर से आए हो?”

“हाँ।”

“जंगल में मत जाना।”

“क्यों?”

बूढ़े की आँखें काँपने लगीं।

“क्योंकि वहाँ मौत साँस लेती है…”

Swapnil मुस्कुरा दिया।

“बाबा, मैं ghost stories लिखता हूँ। मुझे डराना आसान नहीं।”

बूढ़े ने उसकी तरफ झुककर धीमी आवाज़ में कहा—

“डर इंसान को नहीं मारता बेटा…
लेकिन कुछ चीज़ें डर से भी ज़्यादा खतरनाक होती हैं।”

उस रात Swapnil गाँव के पुराने guest house में रुका।

आधी रात को उसे खिड़की पर किसी के फुफकारने की आवाज़ सुनाई दी।

“स्स्स्स्स्स…”

उसने बाहर देखा।

अंधेरे में दो चमकती हुई आँखें थीं।

फिर अचानक… सब गायब हो गया।


तीसरा अध्याय – जंगल का रास्ता

अगली सुबह Swapnil कैमरा और flashlight लेकर जंगल की ओर निकल पड़ा।

जंगल बेहद घना था।

पेड़ों की जड़ें ज़मीन से ऐसे बाहर निकली थीं जैसे किसी मृत शरीर की उंगलियाँ।

रास्ते में उसे टूटे हुए पत्थर मिले जिन पर नागों की आकृतियाँ बनी थीं।

कुछ दूर जाने पर उसे एक पत्थर का विशाल द्वार दिखाई दिया।

उस पर संस्कृत में लिखा था—

“जो लालच में आएगा… उसका अंत निश्चित है।”

Swapnil ने दरवाज़ा धक्का देकर खोला।

अंदर एक प्राचीन मंदिर था।

दीवारों पर हजारों साँपों की आकृतियाँ उकेरी गई थीं।

मंदिर के बीचोंबीच एक काला शिवलिंग था… और उसके ऊपर हवा में तैरती हुई नीली रोशनी।

Swapnil की साँसें रुक गईं।

वह नागमणि थी।

उसकी चमक इतनी अजीब थी कि आँखें हटाना मुश्किल था।

पूरे मंदिर में एक hypnotic energy फैल रही थी।

तभी अचानक…

पीछे से किसी औरत की आवाज़ आई—

“उसे मत छुओ…”

Swapnil पलटा।

सफेद साड़ी पहने एक बेहद खूबसूरत लड़की खड़ी थी।

उसकी आँखें हल्की हरी थीं।

“तुम कौन हो?” Swapnil ने पूछा।

“यह सवाल तुम्हें नहीं पूछना चाहिए…”

“क्या मतलब?”

“तुम यहाँ से चले जाओ। अभी।”

Swapnil हँसा।

“इतनी मुश्किल से treasure मिला है। अब मैं वापस नहीं जाऊँगा।”

लड़की की आँखों में डर उतर आया।

“तुम समझ नहीं रहे।
वह मणि जाग चुकी है।”


चौथा अध्याय – पहली मौत

Swapnil ने लड़की की बात अनसुनी कर दी।

जैसे ही उसने नागमणि को हाथ लगाया…

पूरा मंदिर काँप उठा।

दीवारों से सैकड़ों साँप निकलने लगे।

लड़की चीखी—

“भागो!!”

लेकिन देर हो चुकी थी।

मंदिर के अंधेरे कोनों से एक विशाल काला नाग बाहर आया।

उसकी आँखें लाल थीं।

उसकी लंबाई लगभग बीस फीट थी।

Swapnil का शरीर डर से जम गया।

नाग ने फुफकारते हुए कहा—

“मानव…”

Swapnil की रूह काँप उठी।

“तुमने श्राप जगा दिया है…”

अचानक नाग गायब हो गया।

मंदिर शांत हो गया।

लेकिन लड़की भी गायब थी।

सिर्फ उसकी आवाज़ गूँज रही थी—

“अब मौत तुम्हारा पीछा करेगी…”


पाँचवाँ अध्याय – श्राप की शुरुआत

Swapnil वापस guest house लौट आया।

लेकिन अब सब कुछ बदल चुका था।

रात को उसे नींद नहीं आई।

हर जगह उसे साँप दिखाई देने लगे।

Bathroom में…

बिस्तर के नीचे…

यहाँ तक कि आईने में भी।

सुबह जब वह उठा, उसके हाथ पर साँप के दाँतों जैसे दो निशान थे।

वह घबरा गया।

तभी उसे दरवाज़े पर दस्तक सुनाई दी।

वही बूढ़ा आदमी खड़ा था।

उसने Swapnil का हाथ देखा और डर गया।

“तुमने मणि छू ली…”

Swapnil चौंक गया।

“आपको कैसे पता?”

बूढ़ा काँपती आवाज़ में बोला—

“अब सात रातों तक मौत तुम्हारे साथ चलेगी।
आठवीं रात… नागराज तुम्हारी आत्मा ले जाएगा।”

Swapnil गुस्से में बोला—

“Enough! ये सब drama है।”

बूढ़ा चिल्लाया—

“अगर drama होता तो मेरा बेटा जिंदा होता!”

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

“वो भी तुम्हारी तरह गया था…
और आठवीं रात उसकी चीखें पूरे जंगल में गूँजी थीं।”


छठा अध्याय – आईने वाला कमरा

उस रात Swapnil ने शराब पीकर खुद को calm करने की कोशिश की।

लेकिन रात के ठीक 2:13 बजे कमरे की सारी lights बंद हो गईं।

फिर bathroom का आईना अपने आप crack होने लगा।

धीरे-धीरे आईने पर खून से शब्द उभरने लगे—

“मणि वापस करो…”

Swapnil का गला सूख गया।

अचानक आईने में उसे अपना reflection दिखाई दिया…

लेकिन reflection मुस्कुरा रहा था।

जबकि Swapnil नहीं मुस्कुरा रहा था।

Reflection धीरे-धीरे snake में बदलने लगा।

Swapnil चीख पड़ा।

तभी पीछे से किसी ने उसके कान में फुसफुसाया—

“सात रातें…”

वह पलटा।

कोई नहीं था।

लेकिन ज़मीन पर सैकड़ों छोटे साँप रेंग रहे थे।


सातवाँ अध्याय – रहस्य

अगले दिन Swapnil फिर मंदिर गया।

इस बार वह लड़की फिर मिली।

“तुम वापस क्यों आए?”

“मुझे सच जानना है।”

लड़की कुछ देर चुप रही।

फिर बोली—

“मेरा नाम नयना है।”

“तुम इंसान हो?”

वह हल्का मुस्कुराई।

“काश होती…”

Swapnil की धड़कन तेज हो गई।

नयना ने बताया कि सदियों पहले एक तांत्रिक ने नागमणि चुराने की कोशिश की थी।

उसने पूरे नागवंश को जला दिया।

मरते समय नागराज ने श्राप दिया—

“जो भी लालच में मणि छुएगा…
उसकी आत्मा साँपों के अंधेरे लोक में कैद होगी।”

“और तुम?” Swapnil ने पूछा।

नयना की आँखें भर आईं।

“मैं उसी तांत्रिक की बेटी हूँ…”

“क्या?”

“मेरे पिता के पाप की वजह से मैं भी इस श्राप से बंध गई।”

“तो इसे खत्म कैसे किया जाए?”

नयना धीरे से बोली—

“जिसने मणि उठाई है… उसे अपनी सबसे प्रिय चीज़ त्यागनी होगी।”

“मतलब?”

“या तो तुम्हारी जान जाएगी…
या तुम्हारी आत्मा।”


आठवाँ अध्याय – गाँव में आतंक

उसी रात गाँव में अजीब घटनाएँ शुरू हो गईं।

पशु मरने लगे।

लोगों के घरों में साँप निकलने लगे।

एक बच्चे की मौत हो गई।

गाँव वाले डरकर मंदिर के बाहर इकट्ठा हो गए।

सब Swapnil को दोष देने लगे।

“ये शहर वाला श्राप लाया है!”

“इसे गाँव से निकालो!”

लेकिन तभी…

आसमान काला हो गया।

जमीन हिलने लगी।

और मंदिर की दिशा से हजारों साँप गाँव की ओर बढ़ने लगे।

लोग चीखने लगे।

Swapnil को पहली बार एहसास हुआ…

ये सब सच था।


नौवाँ अध्याय – मौत का सपना

उस रात Swapnil को एक भयानक सपना आया।

वह खुद को किसी अंधेरी गुफा में देखता है।

चारों तरफ साँप ही साँप।

बीच में वही विशाल नागराज बैठा था।

उसकी आँखें आग जैसी जल रही थीं।

“मानव…”

“मुझे छोड़ दो…” Swapnil काँपते हुए बोला।

“तुमने हमारी शक्ति चुराई है।”

“मैं वापस कर दूँगा।”

नागराज की आवाज़ गूँज उठी—

“अब देर हो चुकी है…”

अचानक हजारों साँप उसके शरीर पर चढ़ने लगे।

Swapnil चीखते हुए जाग गया।

लेकिन इस बार सपना खत्म नहीं हुआ था।

उसके बिस्तर पर सचमुच एक काला साँप बैठा था।


दसवाँ अध्याय – सातवीं रात

अब सिर्फ एक रात बची थी।

नयना Swapnil को मंदिर ले गई।

“आज अंतिम रात है।”

मंदिर के अंदर हवा भारी हो चुकी थी।

दीवारों से खून टपक रहा था।

नागमणि की रोशनी अब लाल हो गई थी।

अचानक नागराज प्रकट हुआ।

उसकी फुफकार से पूरा मंदिर काँप उठा।

“मानव… समय पूरा हुआ।”

Swapnil काँपते हुए बोला—

“मैं मणि वापस करने आया हूँ।”

नागराज हँसा।

उसकी हँसी किसी तूफान जैसी थी।

“मणि वापस करने से श्राप खत्म नहीं होगा।”

“तो क्या होगा?”

“बलिदान…”

नयना आगे बढ़ी।

“मैं तैयार हूँ।”

Swapnil चौंक गया।

“नहीं!”

नयना मुस्कुराई।

“मेरे पिता ने ये श्राप शुरू किया था।
इसे खत्म करना मेरा कर्तव्य है।”

नागराज की आँखें चमक उठीं।

“एक आत्मा के बदले एक आत्मा…”

अचानक मंदिर के चारों तरफ आग लग गई।

नयना धीरे-धीरे साँप में बदलने लगी।

Swapnil की आँखों में आँसू आ गए।

“मत जाओ…”

नयना ने आखिरी बार उसकी तरफ देखा।

“कुछ श्राप प्यार से नहीं… बलिदान से खत्म होते हैं…”

और अगले ही पल…

वह आग में समा गई।

नागमणि की चमक बुझ गई।

पूरा मंदिर शांत हो गया।


ग्यारहवाँ अध्याय – वापसी

सुबह जब Swapnil गाँव लौटा, सब कुछ सामान्य था।

साँप गायब थे।

आसमान साफ था।

गाँव वाले उसे अजीब नज़रों से देख रहे थे।

बूढ़ा आदमी उसके पास आया।

“श्राप खत्म हो गया…”

Swapnil ने धीमे से पूछा—

“नयना…?”

बूढ़े ने आँखें बंद कर लीं।

“कुछ आत्माएँ मुक्ति पा जाती हैं बेटा…”

Swapnil बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया।


बारहवाँ अध्याय – अधूरा अंत

छह महीने बाद…

Swapnil की नई horror novel पूरे देश में famous हो चुकी थी।

नाम था—

“नागमणि का श्राप”

लोग उसे fictional masterpiece कह रहे थे।

लेकिन Swapnil जानता था…

वो कहानी fiction नहीं थी।

एक रात वह अपने apartment में अकेला बैठा था।

अचानक उसकी table पर रखी diary अपने आप खुल गई।

उसके आखिरी पन्ने पर नए शब्द उभरने लगे—

“श्राप कभी खत्म नहीं होता…”

Swapnil का चेहरा सफेद पड़ गया।

कमरे की lights blink करने लगीं।

फिर उसे वही फुफकार सुनाई दी—

“स्स्स्स्स्स…”

धीरे-धीरे उसके पीछे कोई खड़ा हुआ।

वही हरी आँखें…

लेकिन इस बार उनमें इंसानियत नहीं थी।

सिर्फ अंधेरा।

Swapnil की साँस रुक गई।

और तभी…

कमरे का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।


अंतिम पंक्तियाँ

आज भी कहते हैं…

अगर किसी रात जंगल में नीली रोशनी दिखाई दे…
तो पीछे मुड़कर मत देखना।

क्योंकि हो सकता है…

नागमणि ने तुम्हें चुन लिया हो।

READ MORE STORIES

The Secret of The Nagas (Shiva Trilogy Book 2) 👇

https://amzn.to/4u2bns8

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top