WRITER – Karan Mehta
रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे। मुंबई की बारिश अपने पूरे शोर के साथ शहर को निगल रही थी। सड़कों पर पानी का बहाव ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने आसमान की सारी नदियाँ खोल दी हों। हर तरफ लाल-पीली lights धुंधली होकर तैर रही थीं। हवा में गीली मिट्टी, diesel और पुराने लोहे की मिली-जुली smell घुली हुई थी।

haunted bus stop story मैं उस रात देर तक office में फँसा हुआ था। पूरा floor खाली हो चुका था। सिर्फ मेरे cabin की सफेद tube light जल रही थी और उसके नीचे मैं laptop पर आखिरी presentation complete कर रहा था।
करीब ग्यारह बजे boss का message आया—
“File mail कर देना और निकल जाना। Building lock हो जाएगी।”
मैंने जल्दी-जल्दी काम खत्म किया, laptop bag उठाया और lift की तरफ बढ़ गया। पूरी building में सन्नाटा पसरा हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे दीवारें भी सो चुकी हों। Lift का button दबाते ही ऊपर कहीं से metallic आवाज आई। कुछ seconds बाद दरवाजा खुला।
Lift खाली थी।
मैं अंदर गया और ground floor का button दबा दिया। दरवाजा बंद हुआ ही था कि अचानक lift बीच में झटके से रुक गई। Light दो बार blink हुई।
“Shit…”
मैंने emergency button दबाया लेकिन कोई response नहीं आया। Mobile network भी गायब था। सिर्फ ऊपर लगे छोटे fan की चर्र-चर्र सुनाई दे रही थी।
तभी…
किसी ने बाहर से धीरे-धीरे lift के दरवाजे पर उँगलियाँ घसीटनी शुरू कीं।
खर्ररररर…
मैं जम गया।
पहले लगा शायद security guard होगा। मैंने जोर से कहा,
“Hello! Lift अटक गई है!”
लेकिन बाहर से कोई जवाब नहीं आया। सिर्फ वही घिसटने की आवाज।
फिर अचानक आवाज बंद हो गई।
कुछ seconds बाद lift अपने-आप चल पड़ी। Ground floor पर पहुँचते ही दरवाजा खुला।
बाहर कोई नहीं था।
पूरा lobby खाली पड़ा था। Security desk भी खाली था। कुर्सी हल्की-हल्की हिल रही थी जैसे अभी कोई उठकर गया हो।
मैंने तेज कदमों से बाहर निकलना ही बेहतर समझा।
Building के बाहर आते ही एहसास हुआ कि बारिश और तेज हो चुकी थी। सड़क लगभग सुनसान थी। कभी-कभार कोई taxi पानी चीरते हुए निकल जाती। मैंने cab book करने की कोशिश की लेकिन network बार-बार गायब हो रहा था।
करीब दस मिनट इंतजार करने के बाद मुझे सड़क के दूसरे किनारे पर एक पुराना bus stop दिखाई दिया। उसके नीचे एक आदमी खड़ा था।
उसने लंबा dark grey coat पहना हुआ था। सिर पर पुरानी cap थी और हाथ में काला umbrella। उसकी आँखें दूर सड़क पर टिकी थीं।
मैं भी भागकर उसी bus stop के नीचे चला गया।
“बहुत खराब मौसम है,” मैंने कहा।
उसने धीरे से मेरी तरफ देखा। उसकी आँखें अजीब थीं। बहुत फीकी। जैसे उनमें नींद नहीं… बल्कि कई सालों की थकान भरी हो।
वो हल्का-सा मुस्कुराया।
“रात अभी और खराब होने वाली है।”
उसकी आवाज बहुत धीमी थी, लेकिन साफ।
मैंने awkward होकर phone निकाला और cab app refresh करने लगा। लेकिन signal फिर गायब।
कुछ seconds तक हम दोनों चुप खड़े रहे।
फिर उसने पूछा,
“तुम रोज इसी रास्ते से जाते हो?”
“हाँ… office यहीं है।”
“आज पहली बार देर हुई?”
मैंने सिर हिलाया।
वो कुछ देर तक मुझे देखता रहा। फिर बोला,
“देर रात इस इलाके में रुकना ठीक नहीं।”
“क्यों?”
उसने सामने अँधेरी सड़क की तरफ देखा।
“कुछ चीजें रात के बाद घर नहीं जातीं।”
मेरे शरीर में हल्की सिहरन दौड़ गई।
मैंने बात बदलने के लिए पूछा,
“आप यहीं रहते हैं?”
“पहले रहता था।”
उसने ये जवाब ऐसे दिया कि मैं समझ नहीं पाया क्या कहूँ।
बारिश की बूंदें bus stop की tin roof पर लगातार टकरा रही थीं। दूर कहीं बिजली चमकी। एक पल के लिए उसका चेहरा साफ दिखाई दिया।
उसकी skin बहुत पीली थी। होंठ सूखे हुए। और सबसे अजीब… उसके coat पर पानी की एक बूंद भी नहीं थी।
इतनी तेज बारिश में भी वो पूरी तरह सूखा था।
मेरे अंदर अचानक बेचैनी बढ़ने लगी।
“आपकी bus आने वाली है?” मैंने पूछा।
वो मुस्कुराया।
“मैं किसी का इंतजार नहीं कर रहा।”
“फिर?”
“मैं सिर्फ देख रहा हूँ… कौन आज रात बचकर जाएगा।”
उसके शब्द सुनते ही मेरे हाथ ठंडे पड़ गए।
मैंने तुरंत दूसरी तरफ देखने की कोशिश की। शायद वो कोई mentally disturbed आदमी हो। लेकिन फिर मैंने notice किया…
उसके पैरों के पास जमीन पर कोई shadow नहीं थी।
Street light सीधे उसके ऊपर पड़ रही थी। मेरी shadow साफ दिख रही थी। लेकिन उसकी नहीं।
मेरी सांस अटक गई।
तभी उसने धीरे से कहा,
“तुम्हें भी महसूस हो रहा है ना?”
“क्या?”
“वो हमारे पीछे खड़ा है।”
मैंने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।
वहाँ कोई नहीं था।
लेकिन उसी पल bus stop के पीछे की अंधेरी गली से किसी के भागने की आवाज आई। पानी में छप-छप करते कदम। बहुत तेज। जैसे कोई पूरी ताकत से भाग रहा हो।
फिर अचानक… आवाज बंद।
सन्नाटा।
मैंने nervous होकर पूछा,
“कौन था?”
उस आदमी ने जवाब नहीं दिया। वो बस उसी गली को घूरता रहा।
कुछ seconds बाद उसने धीमे से कहा,
“तीन दिन पहले भी यही हुआ था।”
“क्या?”
“एक लड़का भागते हुए उस गली में गया था। अगली सुबह उसका शरीर नाले में मिला।”
मेरे गले में सूखापन उतर गया।
“आपने police को बताया?”
वो हल्का हँसा।
“Police को सब पता है। लेकिन कुछ मौतों की investigation नहीं होती।”
मैंने तय किया कि अब यहाँ रुकना बेवकूफी होगी। चाहे जैसे भी हो, मुझे निकलना चाहिए।
मैंने सड़क पर नजर दौड़ाई। दूर से एक empty taxi आती दिखाई दी। मैंने तुरंत हाथ हिलाया। Taxi धीरे-धीरे हमारी तरफ आने लगी।
मुझे राहत महसूस हुई।
लेकिन तभी मेरे पास खड़े उस आदमी ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
उसकी उँगलियाँ बर्फ की तरह ठंडी थीं।
“उस taxi में मत बैठना।”
मैंने घबराकर हाथ छुड़ाया।
“क्यों?”
उसने taxi की तरफ देखते हुए कहा,
“Driver अकेला नहीं है।”
मेरे शरीर में झटका-सा लगा।
Taxi करीब आकर रुकी। Driver ने शीशा नीचे किया।
“कहाँ जाना है साहब?”
उसकी आवाज normal थी। चेहरा भी बिल्कुल सामान्य।
मैं कुछ बोल पाता उससे पहले bus stop वाला आदमी अचानक पीछे हट गया। उसका चेहरा एकदम गंभीर हो गया था।
वो फुसफुसाया—
“उसके पीछे देखो…”
मैंने धीरे से taxi के अंदर झाँका।
Driver की सीट के पीछे अँधेरे में कोई बैठा था।
पहले लगा कोई passenger होगा। लेकिन अगले ही पल बिजली चमकी…
और मैं जम गया।
पीछे बैठी चीज इंसान नहीं थी।
उसका चेहरा पूरी तरह काला था। जैसे जल चुका हो। आँखें सफेद। और वो बिना पलक झपकाए मुझे घूर रही थी।
मैं डरकर पीछे हट गया।
Driver ने फिर पूछा,
“आना है क्या?”
उसकी आवाज अब पहले जैसी नहीं थी। भारी। खुरदुरी।
मैंने तुरंत सिर हिलाया।
“नहीं।”
Taxi धीरे-धीरे आगे बढ़ गई।
मैंने घबराकर bus stop वाले आदमी की तरफ देखा।
लेकिन वो वहाँ नहीं था।
पूरा bus stop खाली था।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने चारों तरफ देखा। वो आदमी कहीं नहीं दिखा। इतनी जल्दी कोई गायब कैसे हो सकता था?
तभी मेरे phone में अचानक network आया। मैंने तुरंत cab book की। इस बार booking हो गई। Driver दस मिनट दूर था।
मैं अकेला खड़ा बारिश में सड़क को देखता रहा।
लेकिन अब मुझे हर तरफ अजीब चीजें दिखाई देने लगी थीं।
सड़क के दूसरी तरफ एक बूढ़ी औरत खड़ी थी। उसने सफेद साड़ी पहन रखी थी। वो बिना हिले मुझे देख रही थी।
जब मैंने दोबारा blink किया… वो गायब थी।
दूर बिजली के खंभे के पास कोई आदमी खड़ा दिखा। उसका सिर अजीब angle पर झुका हुआ था।
फिर वो धीरे-धीरे अँधेरे में पीछे चला गया।
मुझे लगने लगा कि शायद डर की वजह से मेरा दिमाग hallucinate कर रहा है।
तभी phone पर cab driver का call आया।
“Sir, मैं पहुँच गया।”
एक सफेद sedan मेरे सामने आकर रुकी। इस बार मैंने पहले अंदर ध्यान से देखा। Driver normal लग रहा था। कार खाली थी।
मैं जल्दी से अंदर बैठ गया।
“जल्दी चलिए।”
Driver ने mirror से मेरी तरफ देखा।
“डरे हुए लग रहे हो।”
मैंने कोई जवाब नहीं दिया।
Car आगे बढ़ गई।
बारिश शीशों पर लगातार पड़ रही थी। बाहर शहर धुंधला दिख रहा था। कुछ देर तक सिर्फ wiper की आवाज आती रही।
फिर driver बोला,
“उस bus stop पर रात में मत रुका करो।”
मेरे हाथ ठिठक गए।
“आपको कैसे पता मैं कहाँ था?”
वो मुस्कुराया।
“मैंने देखा।”
“क्या देखा?”
“तुम उससे बात कर रहे थे।”
मेरी रीढ़ में ठंड उतर गई।
“किससे?”
Driver कुछ seconds चुप रहा। फिर बोला,
“Grey coat वाले आदमी से।”
मेरे होंठ सूख गए।
“आप उसे जानते हैं?”
उसने धीरे-धीरे सिर हिलाया।
“पूरा इलाका जानता है।”
“कौन है वो?”
Driver ने mirror में मेरी आँखों में देखा।
“दस साल पहले उसी bus stop के पास उसकी मौत हुई थी।”
मेरा दिल धक से रुक गया।
“क्या?”
“बारिश वाली रात थी। Late night accident। Truck ने कुचल दिया था।”
मेरे हाथ काँपने लगे।
“नहीं… नहीं… मैं अभी उससे बात करके आया हूँ।”
Driver ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने बस car की speed थोड़ी बढ़ा दी।
मैंने पीछे मुड़कर सड़क की तरफ देखा। दूर वही bus stop दिखाई दे रहा था।
और वहाँ…
Grey coat वाला आदमी अभी भी खड़ा था।
वो सीधा मेरी car को देख रहा था।
फिर उसने धीरे-धीरे अपना हाथ उठाया।
जैसे goodbye कह रहा हो।
उस रात मैं घर पहुँचा तो करीब एक बज चुका था। लेकिन असली डर तब शुरू हुआ।
मैंने apartment का दरवाजा खोला। अंदर पूरा घर अंधेरे में डूबा था। मैंने lights on कीं और सीधे kitchen में जाकर पानी पिया। हाथ अभी भी काँप रहे थे।
मैं खुद को समझाने की कोशिश कर रहा था कि शायद driver ने मजाक किया होगा। शायद कोई coincidence हो। शायद वो आदमी कोई और रहा होगा।
लेकिन अंदर कहीं न कहीं मुझे पता था… जो मैंने देखा वो सामान्य नहीं था।
मैंने TV चलाया ताकि दिमाग distract हो सके। News channel पर बारिश और accidents की खबरें चल रही थीं। तभी screen के नीचे एक breaking headline आई—
“पुराने dockyard इलाके में फिर मिली रहस्यमयी लाश।”
मेरे हाथ रुक गए।
Anchor बोल रहा था,
“पिछले दो महीनों में यह पाँचवीं unexplained death है। सभी bodies रात में पुराने eastern road के आसपास मिली हैं…”
Eastern road.
वही इलाका जहाँ वो bus stop था।
TV पर blurry footage दिखाई गई। Police tape। भीगी सड़क। flashing lights।
और फिर… कुछ seconds के लिए camera उसी bus stop पर गया।
मेरी सांस रुक गई।
Camera के corner में वही grey coat वाला आदमी खड़ा था।
लेकिन reporter या police में से कोई उसकी तरफ देख भी नहीं रहा था। जैसे वो वहाँ था ही नहीं।
अचानक screen glitch हुई। Image distort होने लगी। फिर TV अपने-आप बंद हो गया।
पूरे घर में सन्नाटा छा गया।
मैं धीरे-धीरे sofa से उठा। तभी मुझे एहसास हुआ…
मेरे apartment का main door खुला हुआ था।
मैंने साफ याद था कि मैंने उसे lock किया था।
दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
मैं धीरे-धीरे दरवाजे तक गया। बाहर corridor खाली था। लेकिन floor पर पानी के निशान बने हुए थे।
जैसे कोई भीगा हुआ आदमी अभी-अभी अंदर आया हो।
वो निशान सीधे मेरे bedroom की तरफ जा रहे थे।
मेरे पैरों से जैसे जान निकल गई।
मैंने काँपते हुए bedroom की तरफ देखा। अंदर अंधेरा था।
और उस अंधेरे में… कोई खड़ा था।
बस उसकी outline दिखाई दे रही थी। लंबा शरीर। झुका हुआ सिर।
मैं डर के मारे वहीं जम गया।
तभी बिजली चमकी।
एक पल के लिए पूरा कमरा रोशन हुआ।
वहाँ वही grey coat वाला आदमी खड़ा था।
उसका चेहरा अब पहले जैसा शांत नहीं था। उसकी आँखों के नीचे काले निशान थे। Skin फटी हुई। और उसके सिर का आधा हिस्सा खून से कुचला हुआ।
जैसे किसी truck ने सचमुच उसे रौंद दिया हो।
मैं चीख पड़ा।
अगले ही पल कमरा फिर अंधेरे में डूब गया।
जब मैंने light on की… कमरा खाली था।
लेकिन floor पर पानी अब भी फैला हुआ था।
उस रात मैं सो नहीं पाया। हर कुछ मिनट बाद मुझे लगता कोई corridor में चल रहा है। कभी kitchen से बर्तन खिसकने की आवाज आती। कभी bathroom का tap अपने-आप खुल जाता।
करीब तीन बजे अचानक मेरे phone पर unknown number से call आया।
मैंने काँपते हुए receive किया।
कुछ seconds तक सिर्फ static noise सुनाई दी।
फिर बहुत धीमी आवाज आई—
“वो तुम्हें देख रहा है…”
Call कट गया।
मैंने तुरंत number वापस dial किया।
Response आया—
“This number does not exist.”
मेरे माथे पर ठंडा पसीना आ गया।
सुबह होने तक मैं living room की light जलाकर बैठा रहा।
अगले दिन office पहुँचा तो मेरी हालत खराब थी। आँखें लाल। सिर भारी। मैंने तय किया कि मुझे उस bus stop और उस आदमी के बारे में पता लगाना होगा।
Lunch break में मैं office के पुराने security guard के पास गया। उसका नाम देशमुख था। वो पिछले पंद्रह साल से उसी building में काम कर रहा था।
मैंने casually पूछा,
“यहाँ पास वाले bus stop पर कोई accident हुआ था क्या?”
देशमुख का चेहरा तुरंत बदल गया।
“किसने बताया?”
“बस ऐसे ही सुना…”
वो कुछ देर चुप रहा। फिर धीमे से बोला,
“रात में वहाँ मत जाया करो।”
“लेकिन हुआ क्या था?”
उसने इधर-उधर देखा, फिर कुर्सी पास खींचकर बैठ गया।
“दस साल पहले एक आदमी हर रात उस bus stop पर खड़ा मिलता था। लोगों की मदद करता था। बारिश में lift देता, taxi रोकता… अच्छा इंसान था।”
“फिर?”
“एक रात कुछ लोग उसका पीछा कर रहे थे। कहते हैं उसने किसी murder को अपनी आँखों से देख लिया था।”
मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।
देशमुख आगे बोला,
“वो police तक पहुँच नहीं पाया। Truck ने उसे कुचल दिया।”
“Accident?”
देशमुख ने धीरे से सिर हिलाया।
“Police ने accident कहा। लेकिन इलाके वाले जानते थे… वो accident नहीं था।”
“उसका नाम क्या था?”
देशमुख अचानक चुप हो गया।
उसने मेरी आँखों में देखते हुए पूछा,
“तुमने उसे देखा है क्या?”
मैंने जवाब नहीं दिया।
लेकिन शायद मेरे चेहरे से उसे सब समझ आ गया।
उसने काँपती आवाज में कहा,
“अगर उसने तुमसे बात की है… तो इसका मतलब कुछ बहुत बुरा होने वाला है।”
मेरे गले में सूखापन उतर गया।
“क्यों?”
देशमुख ने फुसफुसाकर कहा,
“वो सिर्फ उन्हें दिखाई देता है… जिनका नाम अगली मौत में होता है।”
मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।
उस दिन के बाद सब बदल गया।
मुझे हर जगह वही आदमी दिखने लगा।
कभी office के glass reflection में। कभी metro platform के दूसरे छोर पर। कभी भीड़ के बीच खड़ा हुआ।
और हर बार… वो मुझे ही देख रहा होता।
तीसरी रात सबसे भयानक थी।
मैंने तय किया कि आज जल्दी सो जाऊँगा। शायद ये सब stress और lack of sleep की वजह से हो रहा हो।
करीब ग्यारह बजे मैं bed पर लेटा था। बाहर बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।
तभी apartment की बिजली चली गई।
पूरा घर अंधेरे में डूब गया।
मैंने phone flashlight on की। उसी पल bedroom के बाहर corridor में किसी के चलने की आवाज आई।
ठक… ठक… ठक…
धीरे-धीरे कदम।
मेरी सांस रुक गई।
आवाज bedroom के दरवाजे तक आई… और रुक गई।
फिर दरवाजे पर तीन बार knock हुआ।
टक… टक… टक…
मैंने डरते हुए पूछा,
“कौन?”
कुछ जवाब नहीं आया।
फिर वही knock। इस बार थोड़ा जोर से।
मैं धीरे-धीरे दरवाजे के पास गया। Peephole नहीं था। सिर्फ लकड़ी का पुराना दरवाजा।
अचानक बाहर से धीमी आवाज आई—
“मत खोलो…”
मैं जम गया।
ये आवाज उसी grey coat वाले आदमी की थी।
लेकिन उसके साथ दूसरी आवाज भी थी। बहुत भारी। जैसे किसी जानवर की गुर्राहट।
फिर अचानक दरवाजे पर जोरदार चोट पड़ी।
धड़ाम!
पूरा दरवाजा हिल गया।
मैं डरकर पीछे हट गया।
दूसरी चोट।
धड़ाम!
लकड़ी crack होने लगी।
मैंने तुरंत police को call करने की कोशिश की। No network.
तीसरी चोट के साथ दरवाजे के नीचे से काला पानी अंदर आने लगा।
उस पानी से सड़ी हुई smell आ रही थी। जैसे कई दिनों पुरानी लाश की।
मैं चीखते हुए पीछे हट गया।
तभी बाहर से grey coat वाले आदमी की आवाज आई—
“Window से भागो!”
मैं तुरंत bedroom की window की तरफ दौड़ा। मेरा apartment तीसरी मंजिल पर था। नीचे parking area था।
पीछे दरवाजा टूटने की आवाज आने लगी।
मैंने डरकर पीछे देखा। दरवाजे की लकड़ी के बीच से लंबी काली उँगलियाँ अंदर घुस रही थीं। इंसान जैसी नहीं। बहुत पतली। बहुत लंबी।
मैंने बिना सोचे window खोली और नीचे कूद गया।
गिरते ही मेरे पैर में जोरदार चोट लगी लेकिन मैं उठा और भागने लगा।
ऊपर apartment की window में किसी का चेहरा दिखाई दिया।
सफेद आँखें। काला चेहरा।
वही चीज जो taxi के पीछे बैठी थी।
वो मुझे घूर रही थी।
मैं पूरी रात सड़क पर भटकता रहा। सुबह होने के बाद ही वापस apartment गया।
दरवाजा टूटा हुआ नहीं था। सब normal था।
लेकिन floor पर काले पानी के निशान अब भी थे।
और दीवार पर उँगलियों के लंबे निशान बने हुए थे।
मैंने उसी दिन apartment छोड़ दिया। कुछ दिनों के लिए hotel में रहने लगा।
लेकिन डर खत्म नहीं हुआ।
हर रात वही सपने आने लगे।
मैं खुद को उसी bus stop पर खड़ा देखता। सामने grey coat वाला आदमी। और उसके पीछे अंधेरे में खड़ी वो चीज।
फिर वो आदमी मुझे देखकर कहता—
“अब मेरी जगह तुम्हारी है।”
एक हफ्ते बाद मैंने फैसला किया कि मुझे सच जानना ही होगा।
मैं पुराने newspaper archives देखने गया। घंटों search करने के बाद आखिर मुझे वो खबर मिल गई।
Date—17 जुलाई, 2016.
Headline—
“Dockyard Road पर रहस्यमयी hit-and-run में युवक की मौत।”
नीचे blurred फोटो थी।
Grey coat वाला वही आदमी।
Article में लिखा था कि उसका नाम विनय मल्होत्रा था। वो एक shipping company में accountant था। Police के मुताबिक वो drunk था और सड़क पार करते समय truck से टकरा गया।
लेकिन article के आखिरी paragraph ने मेरा खून जमा दिया।
“मृतक ने अपनी मौत से कुछ घंटे पहले police control room में कई बार call किया था। Calls में उसने दावा किया था कि कोई ‘अमानवीय चीज’ उसका पीछा कर रही है।”
मेरे हाथ काँपने लगे।
मैंने तुरंत उस article की copy print करवाई और बाहर निकल आया।
तभी मुझे एहसास हुआ कि सामने सड़क के उस पार कोई खड़ा था।
Grey coat.
वही आदमी।
इस बार उसका चेहरा बेहद उदास था।
उसने धीरे-धीरे सिर हिलाया… जैसे मुझे कहीं आने का इशारा कर रहा हो।
मैं जाने क्यों उसके पीछे चल पड़ा।
वो मुझे पुराने dockyard इलाके की तरफ ले गया। बारिश फिर शुरू हो चुकी थी। पूरा इलाका वीरान था। बंद warehouses। जंग लगे containers। टूटी सड़कें।
आखिर वो एक पुराने warehouse के सामने रुक गया।
दरवाजा आधा खुला था। अंदर अंधेरा।
मैंने डरते हुए पूछा,
“तुम क्या चाहते हो?”
पहली बार उसने सीधे जवाब दिया।
“सच।”
फिर वो warehouse के अंदर चला गया।
मैं भी पीछे गया।
अंदर सड़ांध भरी smell थी। छत से पानी टपक रहा था। हर तरफ rusted machinery पड़ी थी।
अचानक मुझे जमीन पर पुराने खून के धब्बे दिखाई दिए।
और फिर…
दीवार पर खरोंच से लिखा एक वाक्य—
“वो इंसान नहीं है।”
मेरी सांस अटक गई।
तभी warehouse के दूसरे छोर से आवाज आई।
किसी के घिसटते हुए चलने की।
मैंने flashlight उधर घुमाई।
अंधेरे में कोई खड़ा था।
बहुत लंबा। असामान्य रूप से पतला। उसके हाथ जमीन तक पहुँच रहे थे।
और उसका चेहरा…
चेहरा था ही नहीं। सिर्फ काला गड्ढा।
मेरे शरीर ने जैसे काम करना बंद कर दिया।
वो चीज धीरे-धीरे मेरी तरफ आने लगी।
उसके चलने से floor पर काला पानी फैल रहा था।
तभी मेरे पीछे grey coat वाले आदमी की आवाज आई—
“भागो!”
मैं पूरी ताकत से warehouse से बाहर भागा। पीछे से उस चीज की चीख सुनाई दी। इंसानी नहीं। ऐसी आवाज जिसे सुनकर कानों में दर्द होने लगे।
मैं सड़क पर गिरते-पड़ते भागता रहा।
लेकिन जब आखिर मैंने पीछे मुड़कर देखा…
Warehouse खाली था।
ना वो चीज। ना grey coat वाला आदमी।
कुछ भी नहीं।
उस रात के बाद मैंने शहर छोड़ने का फैसला कर लिया।
मैंने नौकरी छोड़ी। नया phone लिया। नया apartment। नया शहर।
मुझे लगा सब खत्म हो गया।
कई महीने तक सब normal रहा।
फिर एक रात…
दिल्ली में नई job join किए हुए करीब छह महीने हो चुके थे। उस दिन भी बारिश हो रही थी। मैं देर रात office से निकला और सड़क किनारे cab का इंतजार करने लगा।
तभी मैंने सामने bus stop पर किसी को खड़े देखा।
Grey coat।
मेरा खून जम गया।
वो आदमी धीरे-धीरे मेरी तरफ मुड़ा।
लेकिन इस बार उसका चेहरा पहले से ज्यादा खराब था। उसकी आँखें काली हो चुकी थीं। Skin सड़ रही थी।
और सबसे डरावनी बात…
अब उसके पीछे shadow थी।
एक बहुत बड़ी shadow.
जो इंसान जैसी नहीं थी।
उसने मुझे देखकर धीमे से कहा—
“अब वो तुम्हारे साथ आ चुका है।”
अगले ही पल पूरी street light बंद हो गई।
अंधेरा।
सिर्फ बारिश की आवाज।
और फिर…
मेरे बिल्कुल पीछे किसी ने फुसफुसाया—
“मैंने तुम्हें ढूँढ लिया।”
उस रात के बाद मैं कभी normal नहीं रह पाया।
आज भी हर बारिश वाली रात मैं किसी नए शहर में छुपा होता हूँ। Hotels बदलता रहता हूँ। कोई permanent address नहीं रखता।
लेकिन वो चीज अब भी मेरा पीछा कर रही है।
मैं उसे reflections में देखता हूँ। CCTV footage में। भीड़ के बीच।
कभी-कभी आधी रात को मेरे phone पर unknown calls आते हैं। दूसरी तरफ सिर्फ भारी साँसों की आवाज होती है।
और हर बार call कटने से पहले एक ही sentence सुनाई देता है—
“तुम अगला हो…”
अगर तुम ये कहानी पढ़ रहे हो… और कभी बारिश वाली रात किसी सुनसान bus stop पर grey coat पहने किसी आदमी से मिलो…
तो उसकी बात जरूर सुनना।
क्योंकि हो सकता है…
वो पहले ही मर चुका हो।
विश्व प्रसिद्ध भूत-प्रेत घटनाएं👇
