रात के साढ़े दस बजे मुंबई की सड़कों पर ट्रैफिक धीरे-धीरे कम होने लगा था। बारिश अभी कुछ देर पहले ही रुकी थी और सड़क पर जगह-जगह पानी जमा था। स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी उन गड्ढों में चमक रही थी। Ghost Passenger Story
राहुल मेहता पिछले चार साल से Uber चलाता था। पहले वह एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था, लेकिन कंपनी बंद होने के बाद उसने कार लोन लेकर कैब चलाना शुरू कर दिया। रात की शिफ्ट में इंसेंटिव ज्यादा मिलता था, इसलिए वह अक्सर देर रात तक ड्राइव करता था।

उस रात उसका टारगेट पूरा होने में सिर्फ तीन राइड बाकी थीं।
मोबाइल पर नई बुकिंग आई।
Pickup Location: Level P5 – Orion Corporate Parking
Passenger: No Name Available
Payment: Corporate Account
राहुल ने सोचा शायद किसी कंपनी का कर्मचारी होगा जो देर तक ऑफिस में रुका होगा।
पार्किंग बेसमेंट शहर के सबसे बड़े कॉर्पोरेट टावरों में से एक के नीचे था।
वह नीचे पहुंचा।
पूरे बेसमेंट में दर्जनों गाड़ियां खड़ी थीं लेकिन इंसान एक भी नहीं दिखाई दे रहा था।
मोबाइल स्क्रीन पर लिखा था—
Passenger is arriving…
राहुल इंतजार करने लगा।
एक मिनट…
दो मिनट…
पांच मिनट…
कोई नहीं आया।
वह Cancel करने ही वाला था कि अचानक उसकी कार का पिछला दरवाजा अपने आप खुला।
राहुल तुरंत पीछे मुड़ा।
सीट खाली थी।
लेकिन अगले ही सेकंड…
दरवाजा धीरे से बंद हो गया।
Uber ऐप पर लिखा आया—
Passenger Onboard
राहुल कुछ पल तक स्क्रीन देखता रह गया।
उसने सोचा शायद ऐप में बग होगा।
फिर उसने कार आगे बढ़ा दी।
Destination शहर के दूसरे छोर पर था।
करीब तीस किलोमीटर दूर।
पूरे रास्ते उसे ऐसा महसूस होता रहा जैसे पीछे कोई बैठा हो।
रियर व्यू मिरर में सीट खाली दिख रही थी।
लेकिन कार का सस्पेंशन बिल्कुल वैसा दबा हुआ था जैसे पीछे कोई भारी आदमी बैठा हो।
राहुल ने जानबूझकर ब्रेक लगाया।
Ghost Passenger Story
उसे साफ महसूस हुआ…
पीछे बैठा कोई व्यक्ति हल्का-सा आगे झटका खाकर फिर सीट पर टिक गया।
उसकी रीढ़ में ठंडक दौड़ गई।
उसने हिम्मत करके पूछा—
“सर… AC ठीक है?”
कोई जवाब नहीं।
कुछ सेकंड बाद…
पीछे से सीट बेल्ट लॉक होने की आवाज आई।
टक…
राहुल का गला सूख गया।
उसने शीशे में देखा।
सीट फिर भी खाली थी।
करीब दस मिनट बाद अचानक कार के अंदर अजीब सी खुशबू फैल गई।
जैसे किसी पुराने अस्पताल में इस्तेमाल होने वाली दवा।
राहुल ने नाक सिकोड़ ली।
उसी समय मोबाइल पर Uber का मैसेज आया।
Passenger has rated your ride.
राहुल चौंक गया।
राइड अभी खत्म भी नहीं हुई थी।
रेटिंग कैसे दे सकता है?
उसने स्क्रीन देखी।
★★★★★
नीचे एक कमेंट लिखा था।
“इस बार जल्दी पहुंचाना…”
राहुल का दिल धड़कना भूल गया।
“इस बार?”
मतलब…
पहले भी?
उसने तुरंत ब्रेक लगाया।
पीछे मुड़कर देखा।
सीट बिल्कुल खाली।
लेकिन सीट पर पानी की बूंदें थीं।
ऐसा लग रहा था जैसे कोई पूरी तरह भीगा हुआ इंसान वहां बैठा हो।
राहुल ने हाथ लगाया।
सीट बर्फ जैसी ठंडी थी।
उसने राइड कैंसल करने की कोशिश की।
स्क्रीन पर Error आया।
Trip Cannot Be Cancelled. Passenger Must Reach Destination.
उसने ऐप बंद किया।
दोबारा खोला।
वही स्क्रीन।
उसने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया।
लेकिन कुछ सेकंड बाद…
मोबाइल अपने आप चालू हो गया।
और Google Maps बिना खोले ही रास्ता दिखाने लगा।
आवाज आई—
“आठ सौ मीटर बाद दाईं ओर मुड़िए…”
अब सड़क पूरी तरह सुनसान थी।
रास्ता उसे शहर से बाहर एक पुराने इंडस्ट्रियल एरिया की तरफ ले जा रहा था।
राहुल ने कभी यह रास्ता इस्तेमाल नहीं किया था।
आगे जाकर एक विशाल बंद फैक्ट्री दिखाई दी।
मैप बोला—
Destination Reached.
राहुल ने कार रोक दी।
बाहर कोई नहीं था।
फैक्ट्री के बड़े लोहे के गेट पर जंग लगी हुई थी।
ऐसा लग रहा था जैसे वर्षों से यहां कोई आया ही न हो।
तभी…
पीछे वाला दरवाजा धीरे से खुला।
इस बार राहुल ने शीशे में साफ देखा।
दरवाजा खुला…
जैसे कोई उतरा हो…
फिर दरवाजा बंद हो गया।
लेकिन बाहर…
कोई दिखाई नहीं दिया।
राइड अपने आप Complete हो गई।
Fare: ₹0
नीचे लिखा था—
Corporate Complimentary Ride
राहुल ने राहत की सांस ली।
“बस खत्म…”
उसी समय मोबाइल बजा।
Uber Support Calling.
उसने कॉल उठाई।
“Hello राहुल जी… आपकी अभी जो राइड हुई है उसके बारे में पूछना था।”
“क्या हुआ?”
दूसरी तरफ कुछ सेकंड खामोशी रही।
फिर महिला बोली—
“सर… हमारे सिस्टम में आपकी कार पिछले तीस मिनट से कहीं गई ही नहीं है।”
राहुल सन्न रह गया।
“क्या मतलब?”
“GPS के अनुसार आपकी कार अभी भी Orion Corporate Parking के P5 बेसमेंट में खड़ी है।”
राहुल ने बाहर देखा।
उसके सामने तो फैक्ट्री थी।
महिला बोली—
“सर… क्या आप मजाक कर रहे हैं?”
राहुल ने घबराकर वीडियो रिकॉर्डिंग चालू की।
स्क्रीन पर लाइव वीडियो आया…
लेकिन उसमें…
वह सचमुच बेसमेंट में खड़ा था।
कोई फैक्ट्री नहीं।
कोई सुनसान सड़क नहीं।
सिर्फ वही पार्किंग।
उसने कैमरा नीचे किया।
सामने फिर फैक्ट्री दिखाई दी।
मोबाइल स्क्रीन पर बेसमेंट।
आंखों के सामने फैक्ट्री।
दो अलग-अलग दुनिया।
अचानक कार के पीछे वाली सीट पर किसी के बैठने की आवाज आई।
धप्प…
इस बार रियर व्यू मिरर में…
एक आदमी दिखाई दिया।
उसका चेहरा आधा जला हुआ था।
आंखें बंद थीं।
वह धीरे-धीरे सिर उठाकर बोला—
“पिछली बार तुम मुझे छोड़कर भाग गए थे…”
राहुल की सांस रुक गई।
“मैं… मैं आपको जानता भी नहीं…”
वह मुस्कुराया।
“आज नहीं…”
“…लेकिन पांच साल पहले…”
राहुल की आंखों के सामने अचानक एक याद कौंध गई।
कॉलेज के दिनों में उसने दोस्तों के साथ शराब पीकर कार चलाई थी।
बारिश की रात।
एक अजनबी लिफ्ट मांग रहा था।
राहुल ने गाड़ी रोकी।
फिर दोस्तों के कहने पर हंसते हुए उसे वहीं छोड़कर तेज रफ्तार से निकल गया।
पीछे मुड़कर देखा था…
तो वही आदमी सड़क पार करने लगा था।
और अगले ही पल…
एक ट्रक ने उसे कुचल दिया था।
डर के मारे चारों दोस्त वहां से भाग गए थे।
कभी पुलिस के पास नहीं गए।
कभी किसी को कुछ नहीं बताया।
राहुल ने उस घटना को जिंदगी से मिटा दिया था।
लेकिन…
किसी और ने नहीं।
भूत धीरे-धीरे बोला—
“उस रात मुझे अस्पताल पहुंचा देते…”
“…तो शायद मैं बच जाता।”
राहुल रोने लगा।
“मुझसे गलती हो गई… मुझे माफ कर दो…”
कुछ देर तक कार में सन्नाटा रहा।
फिर वह आदमी बोला—
“आज तुमने मुझे आखिर मेरी मंजिल तक पहुंचा दिया…”
उसकी आवाज बदलने लगी।
चेहरा धीरे-धीरे सामान्य होने लगा।
वह मुस्कुराया।
“अब मैं वापस नहीं आऊंगा।”
इतना कहकर वह धुएं की तरह गायब हो गया।
राहुल की आंख खुली।
वह अपनी कार में बैठा था।
सामने वही Orion Corporate Parking का P5 बेसमेंट।
घड़ी में सिर्फ दस बजकर बयालीस मिनट थे।
मतलब…
पूरी घटना सिर्फ बारह मिनट में हुई थी।
मोबाइल पर Uber ऐप खुला था।
राइड हिस्ट्री में कोई रिकॉर्ड नहीं था।
कोई किराया नहीं।
कोई यात्री नहीं।
सब कुछ जैसे कभी हुआ ही नहीं।
राहुल ने राहत की सांस ली और कार स्टार्ट करने लगा।
तभी उसकी नजर पीछे वाली सीट पर गई।
सीट पर एक पुराना, भीगा हुआ कॉर्पोरेट आईडी कार्ड रखा था।
उस पर धुंधली फोटो थी।
नाम मुश्किल से पढ़ा जा रहा था।
लेकिन नीचे लिखा था—
Employee Status: Deceased
और Issue Date…
ठीक वही तारीख थी…
जिस रात राहुल ने एक अनजान आदमी को सड़क पर छोड़कर भागने का फैसला किया था।
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