Raat 3 Baje Bawdi Par Kaun Aata Tha? | Haunted Well Story Hindi

मिट्टी पर किसी के footsteps साफ दिखाई दे रहे थे।
हल्की drizzle हुई थी, इसलिए footprints पूरी तरह wet soil पर छप चुके थे।

मंजिरी ने पहले ही मना किया था —
“उस दिशा में मत जाओ…”

लेकिन राघव किसी की सुनने को तैयार नहीं था।

वो गुस्से में बोला,
“ना यहाँ electricity है, ना proper water supply… और हमारे दो छोटे बच्चे thirst से परेशान हैं। अब तू कह रही है कि उस पुरानी बावड़ी से पानी भी ना लाएँ?”

Haunted Well Story Hindi

उसने आगे कहा,
“जो stories गाँव वाले बता रहे हैं ना… वो बाद में सोचेंगे। पहले बच्चों को पानी पिलाना जरूरी है।”

राघव आगे बढ़ गया।

चलते-चलते उसने मंजिरी से कहा,
“देख… यहाँ किसी के आने के निशान हैं। बारिश अभी थोड़ी देर पहले ही हुई थी… फिर भी footprints fresh हैं।”

मंजिरी डरते हुए बोली,
“मैं वही तो कह रही हूँ… वो औरत आज भी वहाँ आती है। पानी भरती है… खाना बनाती है… और हर शाम lullaby गाती है।
लोग कहते हैं उस abandoned hut में आज भी पालना अपने आप हिलता है…”

Haunted Well Story Hindi राघव हँस पड़ा।
“तू भी ना… हर ghost story पर believe कर लेती है।”

लेकिन मंजिरी चुप रही। उसके चेहरे पर साफ fear दिखाई दे रहा था।

दोनों बावड़ी तक पहुँचे।
राघव ने रस्सी से घड़ा नीचे छोड़ा।
कुछ ही देर में उसने पानी भरकर copper pot में डाल दिया।

दोनों वापस मुड़ने ही वाले थे कि अचानक…

“छपाक!”

किसी और घड़े के पानी में गिरने की आवाज़ आई।

मंजिरी फुसफुसाई—
“लगता है… शारदा फिर आ गई…”

राघव चिढ़कर बोला,
“बस कर अब। कोई गाँव वाली होगी।”

लेकिन इस बार उसके अंदर भी uneasiness पैदा हो चुकी थी।


शाम धीरे-धीरे dark होती जा रही थी।
आसमान में black clouds भर चुके थे।
चारों तरफ एक अजीब silence फैल गया था।

झोपड़ी में पहुँचते ही बच्चे पानी के लिए भागे।

“पापा… पानी!” छोटा ओम खुशी से चिल्लाया।

राघव ने उन्हें पानी पिलाया।
कुछ देर बाद दोनों बच्चे सो गए।

रात गहरी हो चुकी थी।
बाहर heavy rain हो रही थी।

राघव दरवाजे पर बैठा mobile network search कर रहा था।
इस पुराने mansion में आने के बाद उसे एक भी peaceful रात नहीं मिली थी।

तभी…

दूर कहीं से एक आवाज़ आई।

“आऽऽई…”

मंजिरी अचानक डरकर उठ बैठी।

“सुना तुमने?”

फिर वही आवाज़ आई।

“आईऽऽऽ…”

इस बार वो आवाज़ किसी छोटी बच्ची जैसी लग रही थी।

राघव बाहर निकला।
“कौन है वहाँ?”

कोई जवाब नहीं।

सिर्फ बारिश की आवाज़।

वो वापस मुड़ने ही वाला था कि फिर वही चीख सुनाई दी—

“आईऽऽऽ!”

इस बार आवाज़ सीधे बावड़ी की तरफ से आ रही थी।

मंजिरी काँपते हुए बोली,
“मैंने कहा था ना… वही है…”


अगले दिन राघव गाँव गया।

एक बूढ़ा आदमी tea stall पर बैठा था।
उसने राघव को देखते ही पूछा—

“तुम लोग उस पुराने वाड़े में रहने आए हो ना?”

“हाँ।”

बूढ़ा धीरे से बोला—
“तो सावधान रहना…”

राघव हँसा।
“क्यों? वहाँ ghost है क्या?”

बूढ़े का चेहरा गंभीर हो गया।

“भूत नहीं… एक आवाज़ है।”

फिर उसने कहानी सुनानी शुरू की।

बीस साल पहले शारदा नाम की एक औरत उसी वाड़े में रहती थी। उसका पति alcoholic था। उसकी चार साल की एक बेटी थी।

हर शाम शारदा उसी बावड़ी पर पानी भरने जाती थी।

एक दिन उसकी बेटी अचानक missing हो गई।

पूरा गाँव search करता रहा… जंगल तक छान मारे गए… लेकिन बच्ची कभी नहीं मिली।

उसके बाद शारदा पागल जैसी हो गई।
हर रात बावड़ी के पास जाकर अपनी बेटी को पुकारती थी।

लोग कहते थे कि रात में बच्ची की आवाज़ सुनाई देती थी—

“आईऽऽऽ…”

और शारदा दावा करती थी कि उसकी बेटी अभी भी उसे बुलाती है।

फिर एक रात…

शारदा भी गायब हो गई।

सुबह सिर्फ उसका घड़ा बावड़ी के किनारे मिला।

उसकी dead body कभी नहीं मिली।


उस रात राघव को नींद नहीं आई।

आधी रात को फिर वही आवाज़ सुनाई दी—

“आईऽऽऽ!”

इस बार बहुत पास से।

मंजिरी ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“बाहर मत जाओ…”

लेकिन राघव बाहर निकल गया।

हल्की बारिश हो रही थी।
Moon बादलों के पीछे छिपा था।

सामने रास्ते पर एक औरत खड़ी थी।

उसके हाथ में घड़ा था।
भीगे हुए बाल चेहरे से चिपके थे।

राघव ने mobile torch जलाई।

रोशनी पड़ते ही वो औरत मुड़ी…

और अगले ही पल पेड़ों के पीछे गायब हो गई।

राघव उसके पीछे भागा।

वो सीधा बावड़ी तक पहुँची।

बावड़ी के किनारे खड़ी होकर उसने धीरे से उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में इतना दर्द था कि राघव का शरीर काँप उठा।

उसने कुछ नहीं कहा।

बस बावड़ी की तरफ इशारा किया…

और हवा में गायब हो गई।


अगले दिन गाँव वालों की मदद से बावड़ी का पानी निकाला गया।

नीचे से एक rusted metal box मिली।

जब पेटी खोली गई तो सबके होश उड़ गए।

अंदर एक छोटी लड़की की silver payal, कुछ toys… और एक छोटा skeleton था।

पूरा गाँव shock में था।

बीस साल से missing शारदा की बेटी आखिर मिल चुकी थी।

शायद खेलते समय वो बावड़ी में गिर गई थी।

उस रात पूरे गाँव में rituals हुए।
शारदा और उसकी बेटी के लिए prayers की गईं।

और उसी रात…

राघव ने दूर धुंध में एक औरत को देखा।

उसके साथ एक छोटी बच्ची थी।

दोनों हाथ पकड़कर चलते हुए fog में गायब हो गईं।

उस दिन के बाद…

बावड़ी से कभी कोई आवाज़ नहीं आई।

गाँव वालों का कहना था कि बीस साल बाद माँ और बेटी आखिर मिल चुकी थीं।


लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…

दो हफ्ते बाद राघव को वाड़े में एक old diary मिली।

उस डायरी में लिखा था—

“शारदा की बेटी बावड़ी में नहीं गिरी थी…”

राघव के होश उड़ गए।

डायरी में आगे लिखा था—

“उस रात बावड़ी के पास एक आदमी था… उसके हाथ में lantern थी… बच्ची रो रही थी…”

कई pages फटे हुए थे।

फिर एक hidden page में लिखा मिला—

“अगर ये diary किसी को मिले… तो मंदिर के पीछे वाले पत्थर के नीचे सच छुपा है…”

राघव ने वहाँ खुदाई की।

उसे एक wooden box मिली।

अंदर पुराने photos, letters और blood stains वाला कपड़ा था।

एक photo में ज़मींदार गोविंदपंत के साथ एक छोटी लड़की थी।

लेकिन पीछे लिखा था—

“Savitri. 1981.”

राघव हैरान रह गया।

शारदा की बेटी का नाम सावित्री नहीं था।

फिर ये लड़की कौन थी?

बाद में records से पता चला—

उसी साल गाँव से दो लड़कियाँ missing हुई थीं।

एक शारदा की बेटी।

दूसरी सावित्री।

लेकिन गाँव ने सिर्फ पहली कहानी याद रखी।

दूसरी लड़की की कहानी अंधेरे में दबा दी गई थी।


उस रात फिर storm आया।

राघव को पीछे के mango orchard से आवाज़ सुनाई दी—

“बाबा…”

वो टॉर्च लेकर वहाँ पहुँचा।

मिट्टी पर छोटी बच्ची के footprints बने हुए थे।

वो निशान एक पुरानी abandoned well तक जा रहे थे।

राघव ने नीचे रोशनी डाली।

और उसकी साँस रुक गई।

गीली दीवार पर उँगलियों से लिखा था—

“मेरी चीख आज तक किसी ने नहीं सुनी…”

नीचे एक छोटे हाथ का निशान बना था।


अगले दिन well की खुदाई हुई।

वहाँ से एक और skeleton मिला।

साथ ही एक letter भी मिला—

“सावित्री मेरी बेटी है… अगर ये पत्र किसी को मिले… तो समझ लेना मेरे पाप की सजा मुझे मिल चुकी है…”

सच्चाई सामने आ चुकी थी।

गोविंदपंत ने अपनी ही बेटी को कैद करके रखा था।

भागने की कोशिश में वो पुरानी well में गिर गई थी।

उसकी कहानी कभी किसी ने नहीं सुनी।


उस रात गाँव में दोनों बच्चियों के लिए अंतिम rituals हुए।

राघव वाड़े के बाहर खड़ा था।

तभी उसने देखा—

धुंध में दो छोटी बच्चियाँ खड़ी थीं।

उनके पीछे शारदा मुस्कुरा रही थी।

तीनों धीरे-धीरे fog में गायब हो गईं।

इस बार ना कोई scream थी…

ना कोई haunting आवाज़…

सिर्फ शांति।

कुछ महीनों बाद राघव और मंजिरी ने वो वाड़ा छोड़ दिया।

लेकिन जाते-जाते उन्होंने दोनों wells के पास एक छोटा memorial बनवाया।

जिस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

“हर चीख को एक दिन जवाब जरूर मिलता है…”

और उस दिन के बाद…

उस गाँव में किसी ने फिर कभी रात में कोई आवाज़ नहीं सुनी।

शारदा और उसकी बेटी की आत्माओं को शांति मिलने के बाद गाँव में फिर से normal life लौटने लगी थी।
पुरानी बावड़ी के आसपास अब पहले जैसी डरावनी feeling नहीं आती थी। लोग शाम के समय भी उस रास्ते से गुजरने लगे थे।

राघव को लगने लगा था कि horror आखिर खत्म हो चुका है।

लेकिन कुछ mysteries ऐसी होती हैं…
जो खत्म होने का illusion देती हैं…
जबकि असली nightmare तब शुरू होता है।

दो हफ्ते बीत चुके थे।

उस रात मौसम अचानक बहुत खराब हो गया।
तेज़ storm चल रहा था। बिजली आसमान को बार-बार चीर रही थी।
पुराने वाड़े की खिड़कियाँ हवा से काँप रही थीं।

मंजिरी बच्चों को सुला रही थी।

राघव hall में बैठा पुराने documents देख रहा था।
उसने यह mansion बहुत सस्ते दामों में खरीदा था।
मालिक ने बिना ज्यादा सवालों के तुरंत बेच दिया था।
तब उसे ये deal lucky लगी थी…
लेकिन अब सब कुछ suspicious लगने लगा था।

पुराने cupboard में उसे कुछ गीले papers मिले।
अधिकतर कागज़ moisture से खराब हो चुके थे।

तभी…

एक पुरानी yellow diary उसके हाथ लगी।

पहले पेज पर लिखा था—

“विठ्ठलराव देशमुख. सन 1978.”

राघव ने diary पढ़ना शुरू किया।

शुरुआत में farming accounts और जमीन के records थे।

लेकिन आगे जाकर handwriting बदल गई।

“आज फिर वही चीख सुनाई दी…”

राघव की heartbeat तेज हो गई।

वो आगे पढ़ने लगा।

“गाँव वाले शारदा की बेटी के बारे में बात करते हैं…
लेकिन उन्हें सच नहीं पता।
वो बच्ची बावड़ी में नहीं गिरी थी…”

राघव अचानक सीधा बैठ गया।

बारिश की आवाज़ बाहर और तेज हो चुकी थी।

वो आगे पढ़ने लगा—

“उस रात बावड़ी के पास एक आदमी था।
उसके हाथ में lantern थी।
बच्ची रो रही थी…
फिर अचानक उसकी आवाज़ बंद हो गई…”

बस।

पेज वहीं खत्म हो गया था।

अगला page फटा हुआ था।

राघव पूरी diary search करने लगा।
कई pages गायब थे।

ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने जानबूझकर evidence हटाया हो।

अगले दिन वो गाँव गया।

गाँव के सबसे बूढ़े आदमी भाऊसाहेब अभी भी जिंदा थे।

उन्होंने diary देखते ही चेहरा बदल लिया।

“ये तुम्हें कहाँ मिली?”

“वाड़े में।”

कुछ देर silence रहा।

फिर भाऊसाहेब धीमे स्वर में बोले—

“विठ्ठलराव झूठ बोलने वाला आदमी नहीं था।”

“मतलब?”

“शारदा की बेटी की मौत के बारे में बहुत rumors थे।
लेकिन कुछ लोग कहते थे कि वो accident नहीं था।”

राघव चौंका।

“फिर क्या था?”

भाऊसाहेब ने इधर-उधर देखा…
जैसे आज भी किसी से डरते हों।

“उस समय यहाँ एक ज़मींदार रहता था…
गोविंदपंत।”

“कैसा आदमी था?”

“बहुत cruel.”

राघव ध्यान से सुन रहा था।

“शारदा का पति उसी के खेतों में काम करता था।
दोनों में एक बार बड़ा झगड़ा हुआ था।
और कुछ दिनों बाद बच्ची गायब हो गई।”

“आपको उस पर शक था?”

“हाँ…
लेकिन proof नहीं था।”

उस रात राघव वापस वाड़े में लौटा।

उसके दिमाग में सवालों का तूफान चल रहा था।

अगर बच्ची बावड़ी में नहीं गिरी थी…
तो उसका skeleton वहाँ कैसे मिला?

आधी रात हो चुकी थी।

अचानक…

धाड़!

पीछे वाले कमरे से कुछ गिरने की आवाज़ आई।

राघव तुरंत उठ गया।

उसने torch उठाई और धीरे-धीरे पीछे गया।

कमरा खाली था।

लेकिन फर्श पर कुछ पड़ा था।

एक फटा हुआ diary page।

राघव का गला सूख गया।

ये page यहाँ आया कैसे?

उसने काँपते हाथों से page उठाया।

उस पर लिखा था—

“अगर ये diary किसी को मिले…
तो मंदिर के पीछे वाले देवघर के नीचे का पत्थर हटाना।
सच वहीं छुपा है…”

सुबह होने का इंतजार किए बिना राघव देवघर पहुँचा।

पुराना stone बहुत भारी था।

काफी कोशिश के बाद वो हट पाया।

नीचे एक wooden box छुपा हुआ था।

पूरा box धूल और मिट्टी से भरा था।

राघव ने box खोला।

अंदर कुछ old photographs थे।
कुछ letters थे।
और एक कपड़े का टुकड़ा… जिस पर सूखे blood stains थे।

एक photo देखकर उसका दिल रुक गया।

फोटो में गोविंदपंत खड़ा था।

उसके बगल में एक छोटी लड़की थी।

वही चेहरा…

लेकिन पीछे लिखा था—

“Savitri. 1981”

राघव उलझ गया।

शारदा की बेटी का नाम सावित्री नहीं था।

फिर ये लड़की कौन थी?

उसने letter खोला।

उसमें लिखा था—

“गोविंदपंत…
मेरी बेटी मुझे वापस दे दो।
वो तुम्हारी नहीं है।
अगर उसकी माँ को सच पता चला…
तो सब खत्म हो जाएगा।”

Letter पर किसी का नाम नहीं था।

उस दिन के बाद राघव की नींद गायब हो गई।

वो लगातार truth खोजने लगा।

कुछ दिनों बाद district archive में उसे shocking information मिली।

सन 1981 में गाँव से दो लड़कियाँ missing हुई थीं।

पहली — शारदा की बेटी।

दूसरी — सावित्री।

लेकिन गाँव वाले सिर्फ एक कहानी जानते थे।

दूसरी बच्ची का इतिहास जैसे मिटा दिया गया था।

उस रात फिर storm शुरू हुआ।

राघव घर के बाहर खड़ा था।

तभी…

उसे एक आवाज़ सुनाई दी।

“बाबा…”

राघव जम गया।

ये आवाज़ शारदा की बेटी की नहीं थी।

आवाज फिर आई—

“बाबा…”

इस बार आवाज़ पीछे के पुराने mango orchard से आ रही थी।

राघव torch लेकर उधर गया।

वहाँ कोई नहीं था।

लेकिन मिट्टी पर छोटे footprints बने हुए थे।

एक बच्ची के।

वो निशान सीधे orchard के आखिरी हिस्से तक जा रहे थे।

वहाँ एक पुरानी abandoned well थी।

जिसके बारे में गाँव में कोई बात नहीं करता था।

राघव धीरे-धीरे well के पास पहुँचा।

उसने torch नीचे डाली।

और उसकी साँस रुक गई।

गीली दीवार पर उँगलियों से लिखा था—

“मेरी चीख आज तक किसी ने नहीं सुनी…”

नीचे एक छोटे हाथ का निशान था।

राघव समझ चुका था।

शारदा की कहानी खत्म हो चुकी थी…

लेकिन दूसरी आत्मा अब भी trapped थी।

अगले दिन well के आसपास digging शुरू हुई।

कुछ घंटों बाद एक rusted iron box मिला।

उसमें एक doll… silver chain… और कुछ documents थे।

एक letter पर गोविंदपंत की signature थी।

राघव ने पढ़ना शुरू किया—

“सावित्री मेरी बेटी है।
उसकी माँ मुझे छोड़कर जाना चाहती थी।
इसलिए मैंने उसे यहाँ लाकर छुपा दिया।
अगर ये letter किसी को मिले…
तो समझ लेना कि मेरे पाप की सज़ा मुझे मिल चुकी है।”

पूरा गाँव shock में था।

गोविंदपंत ने अपनी ही बेटी को कैद करके रखा था।

एक रात भागने की कोशिश में वो पुरानी well में गिर गई।

और हमेशा के लिए गायब हो गई।

गाँव वालों ने सिर्फ शारदा की कहानी सुनी थी।

सावित्री की चीख कभी किसी ने नहीं सुनी।

उस रात पूरे गाँव में दोनों बच्चियों के लिए अंतिम rituals हुए।

राघव अकेला courtyard में खड़ा था।

अचानक…

हल्की हवा चली।

दूर रास्ते पर उसे दो छोटी बच्चियाँ दिखाई दीं।

दोनों मुस्कुरा रही थीं।

उनके पीछे शारदा खड़ी थी।

उसने राघव की तरफ देखा…
और धीरे से सिर झुका दिया।

फिर तीनों धुंध में गायब हो गईं।

इस बार…

ना कोई scream थी।
ना कोई crying voice।
ना कोई haunting sound।

सिर्फ शांति।

कुछ महीनों बाद राघव और मंजिरी ने वो वाड़ा छोड़ दिया।

लेकिन जाने से पहले उन्होंने दोनों wells के पास एक छोटा memorial बनवाया।

उस पर सिर्फ एक line लिखी थी—

“हर चीख को एक दिन जवाब जरूर मिलता है…
चाहे सच सामने आने में सालों लग जाएँ।”

उस दिन के बाद गाँव में कभी किसी ने रात में कोई आवाज़ नहीं सुनी।

The Horror Finally Ended.

क्योंकि जिन आत्माओं की कहानी अधूरी रह गई थी…
उन्हें आखिरकार सुनने वाला मिल चुका था।

राघव के हाथ काँप रहे थे।

पुरानी well की गीली दीवार पर लिखे शब्द अभी भी उसकी आँखों के सामने थे—

“मेरी चीख आज तक किसी ने नहीं सुनी…”

उसके नीचे छोटे हाथ का निशान बना था।

रात की ठंडी हवा अचानक और भारी लगने लगी।

ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई invisible presence अब भी उस जगह पर मौजूद हो।

राघव पीछे हट गया।

लेकिन उसके मन में अब एक ही सवाल घूम रहा था—

अगर शारदा की बेटी की आत्मा को शांति मिल चुकी थी…
तो फिर ये दूसरी आवाज़ किसकी थी?

अगली सुबह उसने पूरे गाँव को बुलाया।

भाऊसाहेब भी आए।

जैसे ही उन्होंने पुरानी well देखी… उनका चेहरा सफेद पड़ गया।

“हे भगवान…”
उन्होंने धीमे स्वर में कहा,
“ये जगह फिर से खुल गई…”

राघव ने पूछा,
“आप इस well के बारे में जानते थे?”

भाऊसाहेब कुछ देर चुप रहे।

फिर बोले—

“गोविंदपंत की मौत के बाद इस जगह को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था।
लोग कहते थे यहाँ bad spirits रहती हैं…”

खोदाई शुरू हुई।

मिट्टी बहुत सख्त थी।

घंटों की digging के बाद अचानक फावड़ा किसी metal object से टकराया।

एक छोटी rusted iron box निकली।

सभी लोग घबराकर पीछे हट गए।

राघव ने box खोला।

अंदर एक छोटी doll थी…
एक silver chain…
कुछ पुराने documents…
और एक folded letter।

letter पर पुराने dried blood stains थे।

राघव ने काँपते हाथों से उसे खोला।

उसमें लिखा था—

“अगर कोई ये पढ़ रहा है…
तो समझ लेना कि मैं बहुत बड़ा पापी हूँ।

सावित्री मेरी बेटी है।

उसकी माँ मुझे छोड़कर भागना चाहती थी।

मैंने गुस्से में बच्ची को यहाँ छुपा दिया।

लेकिन उस रात वो भागने लगी…

और अंधेरे में इस well में गिर गई।

मैंने किसी को नहीं बताया।

मैं डर गया था।

मैंने उसकी मौत छुपा दी…”

पूरा गाँव सन्न रह गया।

गोविंदपंत ने अपनी ही बेटी को मरने दिया था।

और फिर उसकी पूरी कहानी मिटा दी गई।

भाऊसाहेब की आँखों में आँसू थे।

“हम सबने सिर्फ शारदा की कहानी सुनी…
लेकिन असली horror तो इससे भी बड़ा था…”

उस दिन well को पूरी तरह खाली किया गया।

नीचे से कुछ छोटे bones मिले।

एक छोटी बच्ची का skeleton।

सावित्री आखिर मिल चुकी थी।

उसकी lost soul अब भी जवाब तलाश रही थी।

शाम तक पूरा गाँव shock में था।

लोगों को एहसास हो रहा था कि इतने सालों तक दो आत्माएँ इस गाँव में भटक रही थीं।

एक माँ और उसकी बेटी…

और दूसरी…
जिसकी चीख कभी किसी ने सुनी ही नहीं।

उस रात village temple में special rituals रखे गए।

पूरा गाँव इकट्ठा हुआ।

पंडित मंत्र पढ़ रहे थे।

हवा में incense smoke फैल रही थी।

अचानक…

मंदिर के बाहर तेज हवा चलने लगी।

दीये एक साथ बुझ गए।

लोग डरकर इधर-उधर देखने लगे।

तभी…

राघव ने दूर रास्ते पर तीन आकृतियाँ देखीं।

दो छोटी बच्चियाँ।

और उनके पीछे एक औरत।

शारदा।

उसकी आँखों में अब दर्द नहीं था।

वो शांत लग रही थी।

दोनों बच्चियाँ उसके हाथ पकड़े हुए थीं।

एक पल के लिए तीनों ने राघव की तरफ देखा।

फिर धीरे-धीरे white fog में गायब हो गईं।

और उसी पल…

मंदिर की घंटी अपने आप बज उठी।

गाँव में अजीब शांति फैल गई।

जैसे कई सालों पुराना curse खत्म हो चुका हो।

उस रात पहली बार गाँव में किसी ने कोई चीख नहीं सुनी।

ना “आईऽऽऽ…”

ना “बाबा…”

कुछ भी नहीं।

सिर्फ silence।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

कुछ दिनों बाद राघव पुराने mansion को छोड़ने की तैयारी कर रहा था।

वो आखिरी बार attic साफ कर रहा था।

तभी उसे एक पुराना wooden trunk मिला।

उस trunk में बहुत पुराने newspaper clippings थे।

एक headline पढ़कर उसका खून जम गया—

“1975 में इसी वाड़े से एक और बच्चा गायब।”

राघव की सांस रुक गई।

उसने पूरा article पढ़ा।

उसमें लिखा था कि कई साल पहले भी इस mansion से एक लड़का अचानक missing हुआ था।

उसका नाम कहीं दर्ज नहीं था।

बस इतना लिखा था—

“बच्चे की आवाज़ आखिरी बार पीछे के जंगल से सुनाई दी थी।”

राघव का दिमाग घूम गया।

क्या ये सब सिर्फ coincidences थे?

या ये mansion शुरुआत से ही cursed था?

उसी रात…

जब वो packing कर रहा था…

उसे ऊपर attic से धीमी footsteps सुनाई दीं।

टक…

टक…

टक…

राघव जम गया।

मंजिरी नीचे बच्चों के साथ थी।

ऊपर कोई नहीं था।

फिर आवाज़ आई।

इस बार और साफ।

जैसे कोई slowly चल रहा हो।

राघव ने flashlight उठाई।

धीरे-धीरे attic की सीढ़ियाँ चढ़ने लगा।

ऊपर पूरा अंधेरा था।

पुरानी लकड़ी की smell हवा में फैली हुई थी।

फिर अचानक…

Flashlight अपने आप बंद हो गई।

पूरा attic pitch black darkness में डूब गया।

राघव की सांसें तेज हो गईं।

तभी…

उसके बिल्कुल पास किसी बच्चे की आवाज़ आई—

“तुम जा रहे हो?”

राघव का दिल रुक गया।

उसने तुरंत flashlight दोबारा चालू की।

लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

सिर्फ dust particles हवा में उड़ रहे थे।

फिर उसकी नज़र दीवार पर गई।

दीवार पर उँगलियों से लिखा था—

“कुछ कहानियाँ कभी खत्म नहीं होतीं…”

अगले ही पल attic का दरवाजा जोर से बंद हो गया।

धाड़!!!

नीचे से मंजिरी चीखी—

“राघव!”

राघव पूरी ताकत से दरवाजा खोलने लगा।

कुछ सेकंड बाद दरवाजा खुल गया।

वो तेजी से नीचे भागा।

उसका चेहरा पूरी तरह सफेद पड़ चुका था।

उस रात किसी ने नहीं सोया।

सुबह होते ही राघव ने फैसला कर लिया—

वो इस mansion में एक पल भी नहीं रुकेगा।

जाने से पहले उसने दोनों wells के पास एक छोटा memorial बनवाया।

उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी—

“हर चीख को जवाब मिलना चाहिए…”

फिर वो हमेशा के लिए गाँव छोड़कर चला गया।

लेकिन…

कई साल बाद भी…

कुछ travelers दावा करते हैं कि बारिश वाली रातों में उस पुराने वाड़े की attic में आज भी footsteps सुनाई देते हैं।

और कभी-कभी…

एक बच्चे की धीमी आवाज़ हवा में गूंजती है—

“तुम जा रहे हो…?”

सुबह होते ही राघव ने फैसला कर लिया था कि वो इस cursed mansion में अब और नहीं रुकेगा।

मंजिरी भी पूरी तरह टूट चुकी थी।

बच्चे रातभर डर के मारे सो नहीं पाए थे।

Packing शुरू हो चुकी थी।

लेकिन राघव के दिमाग में एक बात लगातार घूम रही थी—

अगर ये सब खत्म हो चुका था…
तो attic में वो बच्चा कौन था?

उसने किसी को इस बारे में नहीं बताया।

क्योंकि वो खुद समझ नहीं पा रहा था कि उसने जो सुना…
वो सच था या सिर्फ डर का illusion।

दोपहर तक सामान almost तैयार हो चुका था।

तभी बाहर से किसी vehicle के रुकने की आवाज़ आई।

एक पुरानी jeep वाड़े के सामने आकर रुकी।

उसमें से लगभग साठ साल का एक आदमी उतरा।

उसकी आँखें बहुत अजीब थीं।

जैसे वो इस जगह को अच्छी तरह जानता हो।

उसने वाड़े को कुछ सेकंड तक देखा।

फिर धीरे-धीरे अंदर आया।

“तुम राघव हो?”

राघव ने हाँ में सिर हिलाया।

आदमी ने अपना नाम बताया—

“मेरा नाम माधवराव है।”

“आप कौन?”

उसने धीमे स्वर में कहा—

“मैं गोविंदपंत का बेटा हूँ।”

राघव का खून जम गया।

कुछ सेकंड के लिए पूरा hall शांत हो गया।

मंजिरी डरकर बच्चों को अपने पास खींचने लगी।

माधवराव ने चारों तरफ नजर घुमाई।

उसकी आँखों में guilt साफ दिखाई दे रहा था।

“मैं बहुत सालों बाद यहाँ आया हूँ…”

राघव गुस्से में बोला—

“तुम्हारे बाप ने दो बच्चों की जान ली थी!”

माधवराव ने सिर झुका लिया।

“मुझे सब पता है…”

उसने जेब से एक पुरानी key निकाली।

“लेकिन तुम्हें पूरी सच्चाई अभी तक नहीं पता।”

राघव चुप हो गया।

माधवराव ने धीरे से कहा—

“इस वाड़े में सिर्फ दो बच्चों की मौत नहीं हुई थी…”

कमरे का तापमान जैसे अचानक गिर गया।

बाहर हवा तेज चलने लगी।

“मतलब?”

माधवराव ने काँपती आवाज़ में कहा—

“मेरे पिता occult rituals करते थे।”

मंजिरी डरकर बोली—

“क्या?”

“उन्हें अमर होने का जुनून था।
वो मानते थे कि कुछ dark rituals इंसान को मौत से बचा सकते हैं।”

राघव को अचानक attic की दीवार पर लिखा sentence याद आया—

“कुछ कहानियाँ कभी खत्म नहीं होतीं…”

माधवराव आगे बोला—

“उन्होंने इस वाड़े के नीचे कुछ बनाया था…”

“क्या?”

“एक hidden basement।”

राघव का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“वो basement कहाँ है?”

माधवराव ने धीरे से पीछे वाले storeroom की तरफ इशारा किया।

“फर्श के नीचे।”

कुछ मिनट बाद तीनों storeroom में खड़े थे।

माधवराव ने floor पर बने पुराने iron symbol की तरफ इशारा किया।

“यहीं।”

राघव ने crowbar से floor तोड़ना शुरू किया।

कुछ देर बाद लकड़ी का trapdoor दिखाई दिया।

जैसे ही वो खुला…

नीचे से सड़ी हुई बदबू ऊपर आई।

मंजिरी तुरंत पीछे हट गई।

नीचे सिर्फ darkness थी।

राघव ने flashlight नीचे डाली।

पुरानी सीढ़ियाँ basement में जा रही थीं।

माधवराव डरते हुए बोला—

“मैं कभी नीचे नहीं गया…”

राघव धीरे-धीरे नीचे उतरा।

हर कदम पर लकड़ी चरमराने लगी।

नीचे पहुँचते ही उसका गला सूख गया।

पूरा basement पुराने occult symbols से भरा था।

दीवारों पर अजीब marks बने थे।

कई छोटे toys जमीन पर पड़े थे।

और बीच में…

एक पुरानी rocking chair अपने आप हिल रही थी।

टक…

टक…

टक…

राघव जम गया।

उसने flashlight घुमाई।

दीवार पर दर्जनों बच्चों के नाम लिखे थे।

कुछ नामों पर लाल रंग का cross बना हुआ था।

तभी…

उसकी flashlight एक फोटो पर पड़ी।

फोटो देखकर उसका शरीर सुन्न पड़ गया।

फोटो में गोविंदपंत खड़ा था।

उसके आसपास कई बच्चे थे।

और उनमें से एक…

माधवराव था।

लेकिन सबसे पीछे…

एक लड़का खड़ा था।

जिसकी आँखों पर काला रंग पोता गया था।

फोटो के पीछे लिखा था—

“पहला दरवाज़ा खुल चुका है।”

अचानक basement में किसी बच्चे की हँसी गूँज उठी।

ही… ही… ही…

राघव का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“कौन है वहाँ?!”

कोई जवाब नहीं।

फिर अचानक rocking chair रुक गई।

पूरा basement एकदम silent हो गया।

और उसी पल…

राघव की flashlight अपने आप बंद हो गई।

पूरा basement pitch black हो गया।

ऊपर से मंजिरी चीखी—

“राघव!!!”

तभी darkness में किसी ने फुसफुसाया—

“तुमने हमें जगा दिया…”

राघव का शरीर काँपने लगा।

उसने flashlight दोबारा चालू करने की कोशिश की।

लेकिन तभी…

किसी छोटे हाथ ने उसका पैर पकड़ लिया।

राघव जोर से चीखा और पीछे गिर पड़ा।

Flashlight चालू हुई।

लेकिन वहाँ कुछ नहीं था।

सिर्फ जमीन पर छोटे wet footprints बने हुए थे।

जैसे कोई बच्चा अभी-अभी वहाँ खड़ा था।

राघव तेजी से ऊपर भागा।

जैसे ही वो basement से बाहर आया…

trapdoor अपने आप बंद हो गया।

धड़ाम!!!

माधवराव का चेहरा सफेद पड़ चुका था।

वो बड़बड़ाया—

“हे भगवान…
उन्होंने दरवाज़ा खोल दिया…”

“कौन?”

माधवराव की आँखों में डर था।

“जो नीचे बंद थे…”

उस रात किसी ने घर से बाहर कदम नहीं रखा।

आधी रात के करीब…

पूरे वाड़े में बच्चों की footsteps गूँजने लगीं।

टक…

टक…

टक…

जैसे कई बच्चे corridors में दौड़ रहे हों।

मंजिरी रोने लगी।

बच्चे डर से काँप रहे थे।

अचानक ऊपर attic से loud banging शुरू हुई।

धड़ाम!

धड़ाम!

धड़ाम!

फिर…

एक साथ कई बच्चों की आवाज़ें सुनाई दीं—

“हमें बाहर आने दो…”

राघव का खून जम गया।

दरवाजे अपने आप खुलने-बंद होने लगे।

खिड़कियाँ जोर-जोर से हिलने लगीं।

और तभी…

दीवार पर खून जैसा लाल liquid बहने लगा।

मंजिरी चीख पड़ी।

माधवराव काँपते हुए बोला—

“ये वही ritual है…”

“कौन सा ritual?!”

“जिसमें आत्माओं को बाँधकर रखा जाता था…”

अचानक basement के नीचे से जोरदार आवाज़ आई।

जैसे कोई भारी चीज़ जमीन के अंदर से टकरा रही हो।

धड़ाम!!!

धड़ाम!!!

पूरा mansion हिलने लगा।

राघव समझ चुका था—

असल horror अब शुरू हुआ था।

विहिरी की दीवार पर लिखे शब्द देखकर राघव का पूरा शरीर काँप उठा था।

“मेरी चीख आज तक किसी ने नहीं सुनी…”

उसके नीचे छोटे हाथ का निशान बना था।

अब उसे समझ आ चुका था कि ये horror सिर्फ शारदा और उसकी बेटी तक सीमित नहीं था।

इस वाड़े में एक और lost soul थी…

जिसकी कहानी गाँव ने कभी सुनी ही नहीं।

अगली सुबह राघव ने गाँव वालों को बुलाया।

भाऊसाहेब भी वहाँ आए।

पुरानी abandoned well को देखते ही उनके चेहरे का रंग उड़ गया।

“ये जगह…”
उन्होंने काँपती आवाज़ में कहा,
“गोविंदपंत के मरने के बाद हमेशा के लिए बंद कर दी गई थी…”

खोदाई शुरू हुई।

मिट्टी बहुत सख्त थी।

कई घंटों बाद अचानक फावड़ा किसी hard object से टकराया।

मिट्टी हटाई गई।

एक छोटी rusted iron box दिखाई दी।

गाँव वालों ने डरते हुए उसे बाहर निकाला।

राघव ने धीरे-धीरे box खोला।

अंदर एक छोटी doll थी।
एक silver chain थी।
कुछ पुराने papers थे।

और एक folded letter।

उस letter पर गोविंदपंत की signature थी।

राघव ने letter पढ़ना शुरू किया—

“सावित्री मेरी बेटी है।

उसकी माँ मुझे छोड़कर जाना चाहती थी।

मैंने गुस्से में बच्ची को यहाँ छुपा दिया।

अगर ये पत्र किसी को मिले…
तो समझ लेना कि मेरे पाप की सज़ा मुझे मिल चुकी है।”

पूरा गाँव shock में था।

गोविंदपंत ने अपनी ही बेटी को कैद करके रखा था।

एक रात वो भागने की कोशिश में इस पुरानी well में गिर गई थी।

और उसकी मौत हमेशा के लिए छुपा दी गई।

गाँव वालों ने सिर्फ शारदा की कहानी सुनी थी…

लेकिन सावित्री की चीख कभी किसी ने नहीं सुनी।

उस दिन well को पूरी तरह खाली किया गया।

नीचे से कुछ छोटे bones मिले।

सावित्री आखिरकार मिल चुकी थी।

उसकी lost soul सालों से सिर्फ किसी के सुनने का इंतजार कर रही थी।

उस रात पूरे गाँव में special rituals किए गए।

शारदा…

उसकी बेटी…

और सावित्री…

तीनों आत्माओं के लिए prayers की गईं।

रात गहरी हो चुकी थी।

राघव अकेला वाड़े के courtyard में खड़ा था।

अचानक हल्की हवा चली।

दूर पगडंडी पर उसे दो छोटी बच्चियाँ दिखाई दीं।

दोनों मुस्कुरा रही थीं।

उनके पीछे एक औरत खड़ी थी।

शारदा।

इस बार उसके चेहरे पर दर्द नहीं था।

उसने राघव की तरफ देखा…

और धीरे से सिर झुका दिया।

फिर तीनों धुंध में धीरे-धीरे गायब हो गईं।

इस बार ना कोई चीख थी।

ना कोई आवाज़।

ना कोई haunting presence।

सिर्फ शांति।

कुछ महीनों बाद राघव और मंजिरी ने वो पुराना mansion छोड़ दिया।

लेकिन जाने से पहले उन्होंने दोनों wells के पास एक छोटा memorial बनवाया।

उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी गई—

“हर चीख को एक दिन जवाब जरूर मिलता है…
चाहे सच सामने आने में कितने भी साल क्यों ना लग जाएँ।”

उस दिन के बाद गाँव में किसी ने फिर कभी रात में कोई आवाज़ नहीं सुनी।

The Horror Finally Ended.

क्योंकि जिन आत्माओं की कहानी अधूरी रह गई थी…

उन्हें आखिरकार सुनने वाला मिल चुका था।

राघव के हाथ से torch लगभग गिर चुकी थी।

पुरानी well की गीली दीवार पर उँगलियों से लिखा था—

“मेरी चीख आज तक किसी ने नहीं सुनी…”

उसके नीचे छोटे हाथ का निशान बना था।

अब सब कुछ धीरे-धीरे clear होने लगा था।

शारदा की बेटी की आत्मा को शांति मिल चुकी थी…

लेकिन दूसरी बच्ची…

सावित्री…

अब भी इस cursed जगह में फँसी हुई थी।

अगले दिन सुबह-सुबह गाँव के लोग फिर से उस abandoned well के पास जमा हुए।

भाऊसाहेब की आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।

उन्होंने धीमे स्वर में कहा—

“गोविंदपंत की मौत के बाद इस जगह को बंद कर दिया गया था…
क्योंकि लोग कहते थे कि यहाँ से रात में बच्चों के रोने की आवाज़ आती थी…”

खोदाई शुरू हुई।

मिट्टी बहुत भारी और गीली थी।

लगभग तीन घंटे बाद अचानक फावड़ा किसी metal चीज़ से टकराया।

टन्न!

सभी लोग रुक गए।

धीरे-धीरे मिट्टी हटाई गई।

नीचे एक छोटी iron box दबाई गई थी।

उस पर जंग लगी हुई थी।

राघव ने काँपते हाथों से box बाहर निकाली।

आसपास पूरा silence था।

सिर्फ हवा की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

जैसे पूरा गाँव सांस रोककर खड़ा हो।

राघव ने box खोली।

अंदर एक छोटी doll थी…

एक silver chain…

कुछ पुराने papers…

और एक folded letter।

letter पर पुराने blood stains बने हुए थे।

राघव ने धीरे-धीरे उसे खोला।

उसमें लिखा था—

“अगर ये letter किसी को मिले…

तो समझ लेना कि मैं बहुत बड़ा पापी हूँ।

सावित्री मेरी बेटी है।

उसकी माँ मुझे छोड़कर भागना चाहती थी।

मैंने बच्ची को उससे दूर कर दिया।

लेकिन उस रात वो भागने लगी…

और अंधेरे में इस well में गिर गई।

मैं डर गया।

मैंने किसी को सच नहीं बताया।

अगर भगवान है…

तो वो मुझे कभी माफ नहीं करेगा…”

नीचे signature था—

“गोविंदपंत।”

पूरा गाँव shock में था।

सच्चाई सामने आ चुकी थी।

गोविंदपंत ने अपनी ही बेटी की मौत छुपा दी थी।

और सालों तक उसकी आत्मा उसी जगह trapped रही।

भाऊसाहेब की आँखों से आँसू निकल आए।

“हम सबने सिर्फ शारदा की कहानी सुनी…

लेकिन दूसरी बच्ची की चीख कभी किसी ने सुनने की कोशिश ही नहीं की…”

उस दिन पूरी well खाली की गई।

तलहटी से कुछ छोटे bones मिले।

एक बच्ची का skeleton।

सावित्री आखिरकार मिल चुकी थी।

गाँव में शाम तक सिर्फ उसी चर्चा थी।

लोगों को एहसास हो रहा था कि इतने सालों तक दो नहीं…

तीन आत्माएँ इस जगह पर भटक रही थीं।

उस रात पूरे गाँव में special rituals रखे गए।

मंदिर में दीप जलाए गए।

पंडित मंत्र पढ़ रहे थे।

हवा में धूप और incense की खुशबू फैल रही थी।

रात गहरी होती जा रही थी।

राघव मंदिर के बाहर अकेला खड़ा था।

तभी अचानक…

हल्की हवा चली।

उसने दूर रास्ते पर किसी को देखा।

दो छोटी बच्चियाँ।

दोनों सफेद कपड़ों में थीं।

दोनों मुस्कुरा रही थीं।

उनके पीछे एक औरत खड़ी थी।

शारदा।

इस बार उसके चेहरे पर दर्द नहीं था।

सिर्फ शांति थी।

उसने राघव की तरफ देखा…

और हल्के से सिर झुका दिया।

फिर दोनों बच्चियों का हाथ पकड़कर वो धीरे-धीरे धुंध में आगे बढ़ने लगी।

कुछ सेकंड बाद…

तीनों पूरी तरह fog में गायब हो गईं।

उसी पल…

मंदिर की घंटी अपने आप बज उठी।

टनननन…

पूरा गाँव सन्न रह गया।

लेकिन इस बार किसी को डर नहीं लगा।

क्योंकि पहली बार उस जगह पर भय नहीं…

शांति महसूस हो रही थी।

उस रात किसी ने कोई चीख नहीं सुनी।

ना “आईऽऽऽ…”

ना “बाबा…”

ना रोने की आवाज़।

कुछ भी नहीं।

बस silence।

कुछ महीनों बाद राघव और मंजिरी ने वो पुराना mansion हमेशा के लिए छोड़ दिया।

लेकिन जाने से पहले उन्होंने दोनों wells के पास एक छोटा memorial बनवाया।

उस पर सिर्फ एक sentence लिखा गया—

“हर चीख को एक दिन जवाब जरूर मिलता है…”

उस दिन के बाद गाँव में फिर कभी कोई paranormal घटना नहीं हुई।

लोग कहते हैं कि जिन आत्माओं की कहानी अधूरी रह जाती है…

वो तब तक भटकती रहती हैं…

जब तक कोई उनकी सच्चाई दुनिया के सामने ना ले आए।

और शायद…

इसीलिए उस रात…

तीनों आत्माएँ आखिरकार हमेशा के लिए शांत हो गईं।

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