मुंबई की ऊँची इमारतों में रहने वालों को अक्सर लगता है कि वे शहर के सबसे सुरक्षित हिस्से में हैं। नीचे सिक्योरिटी गार्ड, हर कोने पर CCTV, लिफ्ट में एक्सेस कार्ड, पार्किंग में नंबर प्लेट स्कैनर और सोसाइटी ऐप पर हर विजिटर की एंट्री। सब कुछ इतना व्यवस्थित दिखता है कि डर जैसी चीज़ पुराने जमाने की लगने लगती है। लेकिन डर हमेशा अंधेरे से नहीं आता। कभी-कभी वह सिस्टम के अंदर से आता है, उस जगह से जहाँ हर चीज़ रिकॉर्ड हो रही होती है, फिर भी कोई सच्चाई पकड़ में नहीं आती।

राघव मेहता बत्तीस साल का था और एक प्रॉपर्टी ऑक्यूपेंसी ऑडिटर के तौर पर काम करता था। उसका काम सुनने में नीरस था, पर मुंबई जैसे शहर में उसकी बहुत कीमत थी। नई-नई बनी लग्जरी सोसाइटियों में कितने फ्लैट सचमुच खाली हैं, कितनों में किरायेदार हैं, कितने मालिकों ने फर्निशिंग दिखाकर टैक्स बचाया है, किस फ्लैट में बिजली-पानी का उपयोग बिना रजिस्टर्ड एंट्री के हो रहा है—इन सबकी रिपोर्ट बनाना उसका रोज़ का काम था। वह किसी जासूस की तरह नहीं, बल्कि एक्सेल शीट, बिजली मीटर रीडिंग, पानी के बिल, सोसाइटी लॉग और लिफ्ट एक्सेस डेटा के बीच सच खोजता था। उसे लोगों के चेहरे से ज्यादा उनके खर्च किए गए यूनिट्स पर भरोसा था। Apartment Horror Story Hindi
उस सुबह वह अंधेरी ईस्ट की एक नई सोसाइटी, “नक्षत्र एलिवन” पहुँचा था। पैंतीस मंज़िला टॉवर, काँच की बालकनियाँ, चमकदार लॉबी और रिसेप्शन पर रखे महंगे नकली पौधे। बाहर से यह जगह बिल्कुल वैसी दिखती थी जैसी बिल्डर अपने ब्रोशर में दिखाते हैं—“स्काई लाइफ, अर्बन पीस, प्रीमियम कम्युनिटी।” राघव ने रिसेप्शन पर अपना ID कार्ड रखा और बोला, “मेहता, ऑक्यूपेंसी वेरिफिकेशन। आज B-विंग की फाइनल रिपोर्ट बंद करनी है।”
रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने सिस्टम में उसका नाम देखा। “सर, आपको मेल आया होगा। सेक्रेटरी साहब ने कहा है पहले 18वीं फ्लोर देख लीजिए। वहाँ एक mismatch है।”
“किस तरह का mismatch?”
“फ्लैट B-1804 खाली दिख रहा है, लेकिन maintenance team कह रही है कि वहाँ से complaints आती हैं।”
राघव ने भौंहें हल्की सी चढ़ाईं। “खाली फ्लैट से complaint?”
लड़की ने स्क्रीन से नजर नहीं हटाई। “हाँ सर। बस इतना ही लिखा है।”
ऊपर 18वीं मंज़िल पर सोसाइटी मैनेजर, विकास सावंत, पहले से उसका इंतज़ार कर रहा था। चालीस के आसपास उम्र, पेट थोड़ा निकला हुआ, हाथ में फाइल और चेहरे पर वह थकान जो रोज़ अमीर लोगों की छोटी-छोटी शिकायतें सुनते-सुनते आ जाती है। उसने राघव से हाथ मिलाया और सीधे मुद्दे पर आ गया। “देखिए सर, B-1804 पिछले आठ महीने से vacant है। मालिक दुबई में रहता है। चाबी हमारे पास नहीं रहती, सिर्फ emergency key sealed box में है। लेकिन issue यह है कि पिछले दो महीने से उस फ्लैट के नाम पर अजीब entries आ रही हैं।”
“किस तरह की entries?”
विकास ने फाइल खोली। “कभी water usage आता है। कभी electricity consumption. बहुत ज्यादा नहीं, पर इतना कि बंद फ्लैट में नहीं होना चाहिए। और सबसे अजीब बात—उस फ्लैट से complaints register हुई हैं।”
राघव ने कागज अपने हाथ में लिया। सोसाइटी ऐप की प्रिंटेड शिकायतें थीं।
“ऊपर वाले फ्लैट से रात में furniture घसीटने की आवाज़ आती है।”
“Kitchen exhaust से जलने जैसी smell आ रही है।”
“कृपया पड़ोसियों से कहें कि balcony में देर रात बात न करें।”
राघव ने शिकायतकर्ता का नाम देखा। तीनों शिकायतें B-1804 से दर्ज थीं।
उसने शांत आवाज़ में पूछा, “App login किसने किया?”
“यही तो problem है,” विकास ने कहा। “मालिक का नंबर बंद है। ऐप में login OTP से होता है। Dubai वाला नंबर active नहीं है। फिर भी complaints submit हुई हैं। हमारी tech team कहती है शायद पुराना session active होगा, लेकिन आठ महीने से?”
राघव ने दरवाजे की तरफ देखा। B-1804 का दरवाजा बाकी फ्लैट्स जैसा ही था—मैट ब्राउन laminate, silver handle, ऊपर छोटा-सा digital doorbell। बाहर कोई नेमप्लेट नहीं थी। बस एक खाली holder, जिसमें मालिक का नाम कभी लगाया ही नहीं गया था।
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“आसपास कौन रहता है?” राघव ने पूछा।
“1803 में एक बुजुर्ग couple है। 1805 में एक cabin crew लड़की रहती है, ज्यादातर बाहर। 1802 में एक family है। सबको अलग-अलग समय पर कुछ न कुछ सुनाई दिया है, पर कोई खुलकर complaint नहीं करता। High-end society है, लोग drama avoid करते हैं।”
राघव ने दरवाजे के नीचे की पतली लाइन देखी। अंदर अंधेरा था। कोई रोशनी नहीं। उसने कान दरवाजे के पास ले जाकर नहीं लगाया, बस सामान्य दूरी से खड़ा रहा। अंदर से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।
“Emergency key खोलिए,” उसने कहा।
विकास थोड़ा रुका। “सर, procedure के हिसाब से sealed key खोलने के लिए दो witness चाहिए।”
“तो बुला लीजिए।”
दस मिनट बाद सिक्योरिटी सुपरवाइजर और हाउसकीपिंग इंचार्ज वहाँ खड़े थे। मोबाइल से सील की फोटो ली गई, रजिस्टर में एंट्री हुई, फिर बॉक्स खुला। विकास ने चाबी दरवाजे में डाली। लॉक ने हल्की सी कराह जैसी आवाज़ की, जैसे लंबे समय बाद घुमाया जा रहा हो। दरवाजा खुलते ही भीतर की बंद हवा बाहर आई। उसमें नमी नहीं थी, सड़न नहीं थी, धूल की सामान्य गंध थी—पर उसके नीचे एक बहुत हल्की महक थी, जैसे किसी ने कुछ देर पहले ही सस्ती अगरबत्ती जलाई हो।
फ्लैट बड़ा था, पर खाली। फर्श पर सफेद टाइल्स, दीवारें ऑफ-व्हाइट, हॉल में कोई फर्नीचर नहीं, कोई परदा नहीं, कोई जूता नहीं। रसोई में सिंक सूखा था। बेडरूम में सिर्फ बिल्डर की तरफ से दिया गया wardrobe था, जो खुला और खाली था। बाथरूम में बाल्टी तक नहीं। बालकनी में धूल की परत थी, लेकिन उसके बीच एक जगह साफ थी, जैसे किसी ने वहाँ खड़े होकर शहर देखा हो।
राघव ने अपने फोन से तस्वीरें लीं। उसने बिजली का main switch देखा। सब off था। फ्रिज नहीं, AC नहीं, कुछ नहीं। फिर भी meter reading पिछले महीने चार यूनिट बढ़ी थी। बहुत कम, पर असंभव नहीं—अगर कोई electrician test करे, या common wiring leak हो। लेकिन पानी की खपत? वह sink के नीचे झुका। पाइप सूखे थे। flush tank खाली था।
“किसी ने अंदर आकर साफ-सफाई की?” उसने पूछा।
हाउसकीपिंग इंचार्ज ने तुरंत कहा, “नहीं सर। Owner ने allow नहीं किया। खाली फ्लैट में हम बाहर से ही dusting करते हैं, अंदर नहीं जाते।”
राघव ने बालकनी की साफ जगह फिर देखी। वहाँ धूल में जूतों के निशान नहीं थे। यह बात अजीब थी। धूल साफ थी, पर निशान नहीं। जैसे किसी ने पैर रखे बिना ही धूल हटा दी हो।
वह कुछ बोलता, उससे पहले उसके फोन पर सोसाइटी ऐप का notification आया। विकास का फोन भी बजा। दोनों ने लगभग साथ में स्क्रीन देखी।
नई complaint दर्ज हुई थी।
Flat: B-1804
Message: “कृपया मेरे फ्लैट में बिना अनुमति घुसना बंद करें।”
विकास का चेहरा पीला नहीं पड़ा, लेकिन उसकी आँखें कुछ पल के लिए खाली हो गईं। सिक्योरिटी सुपरवाइजर ने धीरे से दरवाजे की तरफ देखा, जैसे उसे उम्मीद हो कि कोई बाहर खड़ा मिलेगा। राघव ने अपना फोन जेब में रखा और एक बार फिर फ्लैट के खाली हॉल को देखा। वह जानता था कि डरने का सही समय अभी नहीं था। अभी यह technical glitch भी हो सकता था। Spoofed login. पुराने session से कोई मजाक. किसी निवासी की हरकत. लेकिन कमरे की हवा में अभी जो चुप्पी थी, वह किसी glitch जैसी नहीं लग रही थी।
“किसी ने हमारे entry के बाद complaint डाली,” राघव ने कहा। “मतलब या तो कोई हमें देख रहा है, या सिस्टम में बैठे-बैठे trigger कर रहा है।”
विकास ने तुरंत कहा, “CCTV check करते हैं।”
वे नीचे सिक्योरिटी रूम पहुँचे। वहाँ दीवार पर बारह स्क्रीन थीं। लिफ्ट लॉबी, पार्किंग, गेट, कॉरिडोर, सर्विस एरिया। 18वीं मंज़िल का कैमरा साफ दिख रहा था। पिछले आधे घंटे की recording निकाली गई। स्क्रीन पर राघव, विकास और बाकी लोग फ्लैट के बाहर खड़े दिखे। सील खोली गई। दरवाजा खुला। वे अंदर गए। कॉरिडोर खाली रहा।
“किसी ने बाहर से तो नहीं डाला,” विकास ने कहा।
राघव ने पूछा, “App admin panel खोलिए। Complaint का IP या device log दिखेगा?”
“Limited access है, फिर भी try करता हूँ।”
विकास ने laptop खोला। complaint record खुला। Device ID अजीब था—ना Android, ना iOS। बस “KIOSK-18B” लिखा था।
“यह क्या है?” राघव ने पूछा।
विकास ने माथा सिकोड़ लिया। “हमारे पास कोई kiosk नहीं है।”
“18B मतलब 18th floor B-wing?”
“शायद। लेकिन ऐसी device society में installed नहीं है।”
राघव ने कुर्सी खींचकर बैठते हुए कहा, “मुझे पिछले तीन महीने के logs चाहिए—electricity, water, access card, visitor entry, complaint history, lift stop records. और 18वीं मंज़िल के camera की रात 11 से सुबह 5 तक की फुटेज।”
विकास ने उसे देखा। “आपको लगता है कोई अंदर रह रहा है?”
“खाली फ्लैट में कोई रहता हो, यह मुंबई में नई बात नहीं है,” राघव ने कहा। “लेकिन बिना चाबी, बिना CCTV, बिना footprint, बिना सामान… यह तरीका नया है।”
उस रात राघव ने ऑफिस लौटकर रिपोर्ट शुरू नहीं की। वह data देखने बैठ गया। ऐसे मामलों में अक्सर सच नाटकीय नहीं होता था। कई बार बिल्डर की टीम बिजली चोरी कर रही होती थी। कभी मेंटेनेंस staff खाली फ्लैट में आराम करते थे। कभी किसी broker ने prospective tenant को चुपचाप रहने दिया होता था। कभी मालिक ने illegal paying guest रखे होते थे। लेकिन B-1804 में pattern अलग था। बिजली हर मंगलवार और शुक्रवार रात 2:10 से 2:18 के बीच बढ़ती थी। पानी की खपत महीने में सिर्फ तीन बार दिखती थी—हर बार 11 लीटर। Complaint submissions भी लगभग इसी समय के आसपास थे।
सबसे अजीब चीज़ lift logs में थी। 18वीं मंज़िल पर लिफ्ट कई रातों में रुकी थी, पर किसी access card ने उस floor का selection नहीं किया था। जैसे लिफ्ट अपने आप वहाँ रुक गई हो। CCTV फुटेज में लिफ्ट का दरवाजा खुलता, कॉरिडोर खाली दिखता, फिर दरवाजा बंद हो जाता। कोई उतरता नहीं, कोई चढ़ता नहीं। लेकिन हर बार लिफ्ट बंद होने के बाद B-1804 के doorbell camera में एक blank motion event दर्ज होता—image black, duration 3 seconds.
राघव ने footage बार-बार देखी। उसकी आदत थी कि वह घटना से ज्यादा pattern को देखता था। तीसरी बार देखने पर उसे एक छोटी चीज़ दिखी। जब लिफ्ट 18वीं मंज़िल पर खुलती थी, कॉरिडोर की light सामान्य से आधा सेकंड देर से जलती थी। इतना छोटा फर्क कि कोई ध्यान न दे। लेकिन उस आधे सेकंड में स्क्रीन पर अंधेरा नहीं था; बहुत हल्की grey outline थी। जैसे कैमरे के सामने कोई पारदर्शी चीज़ नहीं, बल्कि कोई गर्म हवा का स्तंभ गुजरा हो।
उसने वीडियो pause किया। zoom किया। pixel टूट गए। कुछ साबित नहीं होता था।
अगले दिन वह फिर नक्षत्र एलिवन पहुँचा। इस बार उसने सीधा 1803 का दरवाजा खटखटाया। दरवाजा एक दुबली, शांत बुजुर्ग महिला ने खोला। उनके पीछे हॉल में टीवी mute पर चल रहा था। “जी?”
“मैं society audit से हूँ। B-1804 के बारे में कुछ पूछना था।”
महिला ने तुरंत दरवाजे की chain नहीं खोली। “विकास ने भेजा है?”
“जी।”
उन्होंने अंदर किसी को आवाज़ दी, “प्रकाश, audit वाला आया है।”
कुछ देर बाद उनके पति आए। चेहरे पर चिढ़ और सावधानी दोनों थीं। “देखिए, हमने कोई complaint नहीं की। हमें किसी चक्कर में नहीं पड़ना।”
राघव ने नरम आवाज़ रखी। “मैं complaint के लिए नहीं आया। बस यह जानना चाहता हूँ कि आपको वहाँ से कोई आवाज़ आती है?”
प्रकाश ने पत्नी की तरफ देखा। पत्नी ने नजरें नीचे कर लीं। फिर वह बोले, “आवाज़ आती है, लेकिन रोज़ नहीं। कभी-कभी रात में लगता है कोई दीवार पर धीरे-धीरे हथेली फेर रहा है। पहले लगा pipes होंगे। फिर एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि किसी ने हमारे दरवाजे के बाहर खड़े होकर हमारा नाम लिया।”
“कब?”
“करीब दो हफ्ते पहले। रात में नहीं, शाम को। मैं बाहर गया था। ये अकेली थीं। आवाज़ आई—‘सरला जी, नमक खत्म हो गया है क्या?’”
राघव ने नोटबुक खोली। “किसकी आवाज़ थी?”
सरला जी पहली बार बोलीं। “सामान्य आवाज़ थी। औरत की। जैसे पड़ोसन पूछती है। मैं दरवाजे तक गई, तो बाहर कोई नहीं था। लेकिन मुझे डर इस बात से लगा कि… नमक सच में खत्म हुआ था। मैं उसी वक्त किचन में डिब्बा खोलकर देख रही थी।”
राघव ने कुछ नहीं कहा। उसने सिर्फ लिखा। मन में उसने संभव कारणों की सूची बनाई—hidden mic, staff surveillance, पड़ोसियों का मजाक, cognitive coincidence। लेकिन उसके अंदर एक और बात बैठ गई। B-1804 से complaint आई थी कि “balcony में देर रात बात न करें।” यानी जो भी था, वह आसपास के लोगों की निजी बातों से परिचित था।
इसके बाद वह 1805 गया। दरवाजा एक युवा महिला ने खोला—नाम था नेहा सूद। वह नींद से उठी लग रही थी, शायद late flight से लौटी थी। उसने बात जल्दी खत्म करने के अंदाज में कहा, “देखिए, मुझे horror-वगैरह में interest नहीं है। मैं crew हूँ, odd hours पर आती-जाती हूँ। Empty flat है तो आवाज़ echo भी कर सकती है।”
“आपको कुछ सुनाई दिया?”
नेहा ने होंठ भींचे। “एक बार।”
“क्या?”
“मैं सुबह चार बजे लौटी। लिफ्ट से उतरी तो 1804 के अंदर से phone vibration जैसी आवाज़ आ रही थी। जैसे किसी का मोबाइल floor पर रखा हो और लगातार vibrate कर रहा हो। मैंने सोचा owner आया होगा। फिर अंदर से किसी ने कहा—‘Late again?’”
वह हँसी, लेकिन हँसी में असली हल्कापन नहीं था। “मुझे लगा मेरे दिमाग ने flight fatigue में कुछ बना लिया। लेकिन आवाज़ मेरी माँ जैसी थी। मेरी माँ दिल्ली में रहती हैं। और वही line बोलती हैं जब मैं late call करती हूँ।”
राघव ने पूछा, “आपने दरवाजा knock किया?”
“नहीं। मैं अपने flat में चली गई। और अगले दिन मैंने notice किया कि मेरे door mat पर हल्का-सा पानी था। जैसे किसी ने गीले पैर रखे हों। मगर corridor dry था।”
राघव ने उसके door mat की तरफ देखा। नया था। कोई निशान नहीं।
“आपने किसी को बताया?”
“नहीं। यहाँ लोग जल्दी judge करते हैं। अकेली लड़की हो, तो हर बात का मतलब अलग निकाल लेते हैं।”
राघव यह समझता था। शहर में डर भी status देखकर बोला जाता है। अमीर सोसाइटी में लोग कहेंगे—stress है। मध्यमवर्गीय बिल्डिंग में कहेंगे—कुछ गड़बड़ है। और गरीब बस्ती में कहेंगे—सावधान रहो।
दोपहर तक राघव ने पूरा फ्लोर देख लिया। कोई secret passage नहीं, कोई shared duct accessible नहीं, कोई ऐसा service balcony नहीं जिससे कोई अंदर जा सके। B-1804 की खिड़कियाँ अंदर से बंद थीं। बालकनी से दूसरे फ्लैट में आना नामुमकिन था। दरवाजे के lock में tampering नहीं थी।
शाम को वह फिर सिक्योरिटी रूम में बैठा था, तभी विकास ने धीरे से कहा, “सर, एक बात है जो मैंने कल नहीं बताई।”
राघव ने स्क्रीन से नजर हटाई। “क्यों?”
“क्योंकि मुझे खुद भरोसा नहीं था। और honestly, मैं अपनी job बचाना चाहता हूँ।”
“बोलिए।”
विकास ने laptop में एक पुरानी फाइल खोली। “तीन महीने पहले B-1804 के मालिक ने हमें mail किया था कि flat बिल्कुल खाली रखना है। किसी broker को access मत देना। लेकिन उसी mail में एक attachment था—occupancy declaration. उसमें लिखा था कि flat temporarily occupied है.”
“किसके नाम पर?”
विकास ने स्क्रीन घुमाई।
Occupant Name: “अनुपस्थित”
राघव ने सोचा शायद यह किसी form का placeholder होगा। “यह किसने भरा?”
“Owner के registered email से आया था। हमने clarification मांगा, reply नहीं मिला। फिर owner unreachable हो गया।”
राघव ने attachment zoom किया। बाकी details खाली थीं। बस एक line नीचे लिखी थी—“निवासी को disturb न किया जाए।”
वह line official form का हिस्सा नहीं लग रही थी। font अलग था। जैसे किसी ने PDF पर बाद में type किया हो।
“Owner का नाम?”
“हर्षद ठक्कर। Dubai based. Real estate investor. यहाँ कई flats हैं, लेकिन इस society में सिर्फ एक।”
“उससे contact करवाइए।”
“Number बंद है। Email bounce हो रहा है।”
राघव ने कुर्सी से उठते हुए कहा, “मुझे आज रात यहाँ रुकना पड़ेगा।”
विकास ने तुरंत कहा, “सर, इसकी जरूरत नहीं है। हम footage भेज देंगे।”
“Footage से इतना ही पता चल रहा है कि कुछ दिख नहीं रहा। मुझे देखना है कि जब कुछ नहीं दिखता, तब क्या होता है।”
विकास ने उसे ऐसे देखा जैसे वह कोई बहादुरी नहीं, बेवकूफी कर रहा हो। “आप अकेले रुकेंगे?”
“नहीं। CCTV room में security रहेगा। मैं 18वीं floor की service lobby में बैठूंगा। Door खुला नहीं रहेगा। बस observe करूँगा।”
विकास ने कुछ पल सोचा। “ठीक है। But officially मैं यह allow नहीं कर सकता। Unofficially… अगर आप लिखित में देंगे कि responsibility आपकी है।”
राघव मुस्कुराया नहीं। “मैं लिख दूँगा।”
रात 1:45 पर 18वीं मंज़िल दिन से अलग लग रही थी। वही कॉरिडोर, वही सफेद दीवारें, वही recessed lights, वही polished floor—लेकिन लोगों की अनुपस्थिति ने उसकी बनावट बदल दी थी। शहर की आवाज़ काँच के पीछे दब चुकी थी। दूर कहीं AC compressor की बहुत हल्की गूंज थी। राघव service lobby में कुर्सी पर बैठा था। उसके पास फोन, power bank, notebook, छोटा torch और voice recorder था। उसने कोई तांत्रिक सामान नहीं रखा था, कोई धार्मिक चीज़ नहीं, कोई हथियार नहीं। वह यहाँ सच पकड़ने आया था, डर से लड़ने नहीं।
2:07 पर लिफ्ट का indicator बिना किसी बटन के नीचे से ऊपर आने लगा।
राघव सीधा बैठ गया।
लिफ्ट 11वीं, 12वीं, 13वीं… फिर 18वीं पर आकर रुक गई। दरवाजा खुला। अंदर कोई नहीं था। लिफ्ट की सफेद रोशनी खाली केबिन में फैली थी। दो सेकंड। तीन सेकंड। फिर एक बहुत धीमी आवाज़ आई—जैसे कोई अंदर से सांस छोड़ रहा हो। दरवाजा बंद हो गया।
कॉरिडोर की light आधा सेकंड के लिए झपकी। B-1804 का doorbell camera हल्का-सा चमका। फिर राघव के फोन पर notification आया।
Complaint submitted.
उसने फोन खोला।
Flat: B-1804
Message: “आज वह अकेला नहीं आया।”
राघव की गर्दन में ठंडक उतर गई। उसने आसपास देखा। service lobby में उसके अलावा कोई नहीं था। सिक्योरिटी रूम से वॉकी-टॉकी पर आवाज़ आई, “सर, सब clear दिख रहा है। आप alone हैं।”
राघव ने जवाब दिया, “लिफ्ट किसने call की?”
“कोई नहीं सर। System में auto door test दिख रहा है।”
“इस समय?”
“नहीं होना चाहिए।”
राघव धीरे-धीरे B-1804 के सामने गया। दरवाजा बंद था। भीतर से कोई आवाज़ नहीं। उसने दरवाजे को छुआ नहीं। बस सामने खड़ा रहा। तभी दरवाजे के नीचे की पतली अंधेरी लाइन में हल्की रोशनी जली। पीली नहीं, सफेद नहीं—जैसे मोबाइल स्क्रीन की नीली चमक हो। वह रोशनी तीन सेकंड रही और बुझ गई।
उसके voice recorder में उस पल एक आवाज़ कैद हुई, जो उसने उस समय अपने कानों से नहीं सुनी थी।
सुबह जब उसने recording सुनी, तो उसमें बहुत धीमे, लगभग टूटे हुए शब्द थे—
“खाली मत लिखना।”
और उसके तुरंत बाद राघव की अपनी आवाज़ थी, जबकि उसे याद नहीं था कि उसने कुछ कहा था।
“तो क्या लिखूँ?”
रिकॉर्डिंग में तीसरी आवाज़ आई—
“Occupied.”