Vashikaran Hospital Horror Story

 This is a Real Horror Story based on a shocking crime incident…

🔴 Real Incident Start

इस कहानी के लेखक हैं विजेन्द्र कुमार कर्ण ….

Hospital Horror Story

Hospital Horror Story in Hindi: यह एक डरावनी कहानी है एक ऐसे लड़के की, जिसे एक भयानक हादसे और वशीकरण की काली शक्तियों ने मौत के रास्ते पर धकेल दिया। इस crime horror story में suspense, revenge और paranormal घटनाएं आपको अंत तक डराती रहेंगी।

Real Hospital Horror Story Based on Vashikaran

रात के साढ़े बारह बज रहे थे……हर ओर सन्नाटा ही सन्नाटा था……एक अजीब मनहूस सा सन्नाटा…. 17 साल का मयंक अपनी बिस्तर पर गहरी नींद में सोया हुआ था……अचानक उसे लगा कि कोई उसके कानों में बार बार एक ही बात बोल रहा है……

जाग जा….चल जाग जा….कितना सोएगा…..चल छत पर चल…..तुझसे बातें करनी है…..जल्दी चल……सुन लिफ्ट से मत आना….सीढ़ियों से चल कर आना… और सीढ़ियां गिनते हुए आना

मयंक गहरी नींद से जाग गया….और फिर सम्मोहित सा छत की ओर सीढ़ियों को गिनते हुए चल पड़ा……….जैसे जैसे वो छत पर जाने की सीढ़ियां चढ़ रहा था वैसे वैसे रात का सन्नाटा शोर में बदल रहा था… क्योंकि ना जाने कहां से बहुत सारे कुत्ते एक साथ रोने लगे थे…..कुत्तों का रोना अपशगुन होता है……..अक्सर ये लेकर आता है किसी की मौत…… मयंक अपने पांच मंज़िला आलीशान घर की छत पर पहुंच गया….और उसके बाद वो छत की रेलिंग पर चढ़ गया…….फिर वो नीचे की ओर देखने लगा……. कुत्तों के रोने की आवाज़ अब और तेज़ हो गई थी……मयंक छत की रेलिंग पर चलने लगा……..उसका पैर ज़रा सा इधर या उधर होता तो वो सीधा नीचे गिरता…..और इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद उसे शायद ही कोई बचा पाता….. लेकिन मयंक को अपनी ज़िंदगी की परवाह कहां थी…..वो तो बस छत की रेलिंग पर चला जा रहा था …चला जा रहा था……अचानक मयंक के घर के गार्ड की नज़र छत की ओर गई…उसने अपनी टॉर्च जलाई और ऊपर की ओर देखा…..और जैसे ही उसने मयंक को छत की रेलिंग पर देखा…..उसके मुंह से चीख निकल गई….

गार्ड- मयंक बाबा……………………………

वो भागता हुआ छत की और जाने लगा….इस बीच उसने घर के और नौकरों को भी इस बारे में बता दिया …..नौकरों ने जैसे ही ये बात मयंक के पापा डॉ. गिरीश और उसकी माँ डॉ. दामिनी को बताई उनके चेहरे का रंग उड़ गया….वे सभी भागते हुए छत की ओर गए….

डॉ. दामिनी- बेटा….बेटा………उतरो…उतरो वहां से…..

डॉ गिरीश  – मयंक..मयंक…. बेटा….मयंक…. वहां….वहां क्यों चल रहे हो तुम….

मयंक की माँ और पापा बार बार उससे गुज़ारिश कर रहे थे कि वो नीचे उतर आए….मयंक के घर के सारे नौकर भी वही बात दोहरा रहे थे लेकिन मयंत छत की रेलिंग पर चला जा रहा था……अगर कोई उसके पास आने की कोशिश करता तो वो कहता …

मयंक- अगर कोई मेरे पास आएगा तो मैं नीचे कूद जाऊंगा……

पापा- नहीं बेटा…कोई …कोई भी तुम्हारे पास नहीं जाएगा..प्लीज़ तुम नीचे उतर जाओ……प्लीज़ बेटा …तुम ऐसा क्यों कर रहे हो…प्लीज़ नीचे उतर जाओ….

लेकिन मयंक ने किसी की नहीं सुनी….वो छत की रेलिंग पर चलता ही रहा……..और जब कई बार उसके पापा ने ये पूछा कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो तो वो कहता

मयंक- पापा….वो मुझे कह रहा है ऐसा करने…..

मंयक के पापा- कौन…कौन कह रहा है बेटा…

मयंक- मुझे उनका नहीं पता…पर ….पर मुझे उनकी बात सुननी ही होगी पापा…प्लीज़….आपलोग जाओ यहां से….सब के सब चले जाओ नहीं तो मैं कूद जाऊंगा……..पापा….जाओ यहां से…वो मुझे कूदने कह रहा है…..पापा जाओ………………जाओ यहां से….

किसी के पास कोई चारा नहीं था……कोई वहां से जाना भी नहीं चाहता था….लेकिन मयंक बार बार एक ही बात दोहरा रहा था कि अगर वो लोग वहां से नहीं गए तो वो नीचे कूद जाएगा…… पूरी रात वो घर जागता रहा….मयंक सारी रात छत की रेलिंग पर चलता रहा……और जैसे ही पूरब में सूरज ने अपनी दस्तक दी………मयंक रेलिंग से उतरकर नीचे आ गया और फिर वहीं बेहोश हो गया……. घर वालों ने उसपर तो नज़र बना ही रखी थी…जैसे वो नीचे उतरा और बेहोश हुआ सभी लोग भागकर उसके पास गए और उसे उठाकर उसे उसके कमरे में ले आए……

डॉ. गिरीश और डॉ. दामिनी ने अपने इकलौते बेटे को होश में लाने की बहुत कोशिश की……लेकिन मयंक होश में नहीं आया… डॉ. गिरीश और डॉ. दामिनी शहर के सबसे बड़े डॉक्टर होने के साथ साथ शहर के सबसे बड़े और महंगे अस्पताल के मालिक भी थे…….लेकिन आज उनकी सारी की सारी डॉक्टरी धरी रह गई थी……क्योंकि उनकी लाख कोशिश भी मयंक को होश में नहीं ला पा रही थी.. मयंक दो दिनों तक बेहोश रहा …तीसरे दिन अचानक उसकी बेहोशी टूटी….लेकिन बेहोशी टूटने के बाद वो बिलकुल नॉर्मल था…उसे तो ये तक याद नहीं था कि तीन दिन पहले उसने क्या किया था….. घरवाले इस बात से बेहद खुश थे कि मयंक अब ठीक है…हालांकि ये बात सभी को अटपटी सी लग रही थी कि मयंक को कुछ भी याद क्यों नहीं है…..एक महीने तक मयंक बिलकुल नॉर्मल रहा ……..डॉ. गिरीश और डॉ. दामिनी की लाइफ भी अब नॉर्मल हो गई थी……वो अब टेंशन फ्री थे…लेकिन उन्हें क्या पता था कि ये वो शांति है जो तूफान के पहले की होती है……. एक महीने बाद ही मयंक का बर्थ डे था… वो 18 साल का होने वाला था……उसके बर्थ डे की आलीशान तरीके से तैयारी की गई थी….शहर के बड़े से बड़े लोगों को इनवाइट किया गया था…..क्या नेता….क्या बिजनेस मैन…..क्या पुलिस के बड़े अधिकारी….सभी उस शानदार पार्टी के गेस्ट थे…..

पार्टी पूरे शबाब पर थी… म्यूज़िक की धुन पर सभी थिरक रहे थे….मेहमानों की हंसी की आवाज़ हर ओर से आ रही थी….सब कुछ बिल्कुल सामान्य था…. मयंक भी सबके बीच खड़ा था… ….आज वो काली सूट में बहुत ही हैंडसम दिख रहा था…….वो धीरे-धीरे मुस्कुरा तो रहा था लेकिन उसकी मुस्कुराहट में खुशी का भाव बिलकुल नहीं था…..वो खोया खोया सा था…..बार बार वो अजीब नज़र से ऊपर की ओर देखता और अपना सिर हिलाता…..उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे वो किसी से आँखों ही आँखों में बातें कर रहा है…..

डॉ. दामिनी ने धीरे से डॉ. गिरीश से कहा—
आपको नहीं लग रहा… ये कुछ अलग सा behave कर रहा है…?”

डॉ. गिरीश ने ध्यान से मयंक को देखा… वो लोगों से बात तो कर रहा था… लेकिन उसकी नज़र बार-बार… एक ही दिशा में जा रही थी… जहाँ… कोई नहीं था… कुछ ही देर बाद  केक काटने का समय हुआ… जैसे ही मयंक ने चाकू उठाया… एक पल के लिए… उसका हाथ रुक गया… उसकी आँखें शून्य में टिक गईं… और होंठ बहुत हल्के से हिले—और उसने बोला …हाँ हाँ  मैं सुन रहा हूँ…” तुम बोलो मुझे क्या करना है…

पास खड़े एक दोस्त ने पूछा— क्या बोला तू?”

मयंक ने तुरंत मुस्कुरा कर बात टाल दी— कुछ नहीं…” मैंने कहां कुछ बोला

लेकिन…उसके बाद से… वो हर कुछ सेकंड में… हल्का सा सिर झुकाकर जैसे किसी की बात सुनता… फिर बहुत धीरे से… होंठ हिलाता… जैसे जवाब दे रहा हो… डॉ. गिरीश  ने अपनी नज़र उसपर बना रखी थी……उसकी बार बार की इस हरकत से अब वे बेचैन हो चुके थे…उनके दिमाग के अंदर डर के बादल छाने लगे थे…..

उन्होंने मयंक को अलग ले जाकर पूछा— बेटा… सब ठीक है ना?” तुम….किससे बातें कर रहे हो…..किसे देख रहे हो…

मयंक कुछ सेकंड चुप रहा…हाँ पापा… सब ठीक है…” ….मैं…मैं अपने दोस्तों से बातें कर रहा हूं…आपसे बातें कर रहा हूं……

और फिर…उसके चेहरे पर आई वही मुस्कान…वो मुस्कान जो जबरदस्ती की होती है जिसमें खुशी लेश मात्र भी नहीं होती है कुछ देर बाद वो फिर से धीरे से फुसफुसाहट के साथ बातें करने लगा..

मयंक- हां….हां मैं करूंगा…..हां….ज़रूर करूंगा….तुम जैसा बोलोगे वैसा करूंगा

उसी वक्त घर की सारी ट्यूबलाइंटें अचानक से जलने बुझने लगी……और कुछ पलों के बाद सारी की सारी लाइटें बुझ गई…..हर और अँधेरा ही अँधेरा छा गया…उसी वक्त… घर के बाहर फिर से कुत्तों के रोने की आवाज़ शुरू हो गई… रोने की आवाज़ इतनी खतरनाक थी कि कुछ पल तो पार्टी में आए सभी लोग ठिठक गए…..इसी बीच किसी ने मोबाइल के टार्च को जलाया…….थोड़ी सी रोशनी हुई…..उसी रोशनी में मयंक के पापा और मम्मी ने देखा कि

मयंक ने एक बार फिर… बिना किसी को देखे… हल्का सा सिर झुकाया… और इस बार… उसने साफ़-साफ़ कहा—

ठीक है… मैं करूँगा…”

डॉ. गिरीश ने ये सुन लिया… उनका दिल एक पल के लिए रुक सा गया… अचानक लाइट आ गई…..

मयंक के पापा ने घबराकर मंयक से पूछा— क्या करोगे बेटा…?”

मयंक ने धीरे से उनकी तरफ देखा… उसकी आँखें बिल्कुल शांत थीं… बहुत ज़्यादा शांत… और वो बोला— जो वो कहेगा…” मयंक अब भी लोगों के बीच था… लेकिन अब वो कम बोल रहा था… बस सुन रहा था… और कभी-कभी हल्का सा सिर हिला देता… जैसे कोई उसे अंदर ही अंदर निर्देश दे रहा हो… थोड़ी देर बाद… मयंक चुपचाप भीड़ से निकलकर एक कोने में चला गया… जहाँ हल्की सी अंधेरी जगह थी… वो वहीं खड़ा रहा… बिल्कुल स्थिर…डॉ. दामिनी धीरे-धीरे उसके पास गईं—
बेटा… यहाँ क्यों खड़े हो… चलो सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं…”

मयंक ने उनकी तरफ देखा… लेकिन ऐसे जैसे कि वो उसकी माँ नहीं कोई और हो…  वो उन्हें देख तो रहा है…पर पहचान नहीं पा रहा था…

फिर उसने बहुत धीरे से बोला— अभी नहीं… उसने मना किया है…”

डॉ. दामिनी के हाथ ठंडे पड़ गए— किसने मना किया बेटा…?”

मयंक कुछ सेकंड चुप रहा… फिर उसने अपनी नज़रें दीवार पर टिका दीं… और बहुत हल्की आवाज़ में बोला— वो यहीं है…”डॉ. दामिनी ने घबराकर पीछे देखा…दीवार खाली थी…

उसी वक्त… बाहर से आवाज़ आई— मयंक… केक कटिंग का टाइम हो गया…”

मयंक धीरे-धीरे वापस हॉल की तरफ चला… उसका चेहरा बिल्कुल शांत था  इतना शांत… कि डर लगने लगे…

केक के सामने पूरा हॉल खड़ा था… सब लोग मुस्कुरा रहे थे… ताली बजा रहे थे…लेकिन… डॉ. गिरीश और डॉ. दामिनी के दिल में अजीब सा डर बैठ चुका था… जैसे ही मयंक ने केक काटने के लिए चाकू उठाया… उसका हाथ हवा में रुक गया… पूरे हॉल में अचानक सन्नाटा छा गया… मयंक की आँखें ऊपर टिक गईं… जैसे वो किसी को देख रहा हो… जो बाकी किसी को नहीं दिख रहा… फिर… उसने बहुत धीरे से कहा— सबके सामने…?” पास खड़े लोगों को लगा… वो मजाक कर रहा है…

कुछ लोग हँस भी दिए…  लेकिन अगले ही पल…  मयंक हाथों में  चाकू लेकर वहां से सीधा किचन की ओर भागा और किचन से सब्जी काटने वाला चाकू उठा ले आया…..

 उसकी पकड़ चाकू पर कस गई… इतनी कस गई… कि उसकी उंगलियाँ सफेद पड़ गईं… डॉ. गिरीश घबराकर आगे बढ़े— मयंक… बेटा… क्या हुआ…?” ये.. ये चाकू तू क्यों उठा लाया…

उसने बहुत धीरे से कहा….पापा वो केट काटने से मना कर रहा है…वो कुछ और काटने के लिए कह रहा है…..

यह कहकर  मयंक अचानक चाकू अपनी कलाई के बहुत पास ले आया… और बोला ….पापा मुझे काटना होगा…..लेकिन केक नहीं…… और फिर उसने चाकू को अपनी कलाई पर लगाया…

भीड़ में से एक चीख निकली— अरे… रोकिए उसे!!”

डॉ. दामिनी चीख उठीं— मयंक!!!”

लेकिन… मयंक बिल्कुल शांत था जैसे उसे दर्द का एहसास ही नहीं… उसने बहुत धीरे से कहा— वो कह रहा है… आज काम पूरा करना है…

उसी पल… बाहर कुत्तों के रोने की आवाज़ अचानक बहुत तेज़ हो गई… इतनी तेज़… कि हॉल के अंदर तक गूंजने लगी…कुछ मेहमान डर के मारे पीछे हट गए…लेकिन… मयंक वहीं खड़ा था… उसने अपनी कलाई पर चाकू और दबाया… हल्की सी खून की लाइन उभर आई… डॉ. गिरीश घुटनों के बल बैठ गए—

नहीं बेटा… प्लीज़..मत कर ऐसा मत कर

मयंक- नहीं पापा….मुझे आज करना ही होगा…वो कह रहा है….आज अगर मैंने नहीं किया तो फिर वो सबको मार देगा….हम सबको मार देगा…….

गिरीश- कौन…कौन मार देगा…….किसकी बात तुम कर रहे हो मयंक….यहां कौन है जो तुम्हें दिख रहा है हमें…नहीं….. वो कौन है जिसके इशारे पर तू अपनी जान को जोखिम में डाल रहा है…..नहीं बेटा…..मत कर…मत कर ऐसा …..तू हमारा इकलौता बेटा है…तुझे कुछ हो गया तो फिर हमारा क्या होगा……

मयंक- पापा……..ये सब बोल कर क्या होगा……मुझे …मुझे उसकी बात सुननी होगी…क्योंकि वो कह रहा है कि उसका भी तो बेटा इकलौता था जिसे आप दोनों ने सही समय पर इलाज नहीं दिया….आपकी और मम्मी की लापरवाही से उनका बच्चा मर गया……और पापा मैं भी तो कसूरवार हूँ इन सबका…सब मेरा ही किया धरा है ना……अगर मैं उस दिन कार लेकर नहीं निकला होता तो ये सब नहीं होता..

मयंक की आँखों से आँसू रुक ही नहीं रहे थे… उसकी आवाज़ काँप रही थी… पापा… याद है… एक साल पहले…?”

 फ्लैशबैक इन

🔴 The Accident Night

एक साल पहले की बात है रात का समय था… सड़क लगभग खाली थी.. मयंक अपनी कार तेज़ रफ्तार में चला रहा था… उसके चेहरे पर घमंड… और बेपरवाही थी…होता भी क्यों ना शहर के सबसे अमीर लोगों में उसके पिता और माता का नाम जो आता था….

जैसे ही वो रेड लाइट पर पहुंचा उसने देखा कि  एक छोटा बच्चा… हाथ में गुब्बारे लिए… धीरे-धीरे सड़क पार कर रहा था…मयंक ने उसे देखा… लेकिन…  ना स्पीड कम की… ना ब्रेक लगाया… बस हल्के से कहा—

हट जाएगा…”

और अगले ही पल… उसकी कार से उस बच्चे की ज़ोरदार टक्कर हुई… बच्चा दूर जाकर गिरा… उसके गुब्बारे हवा में बिखर गए…

यह देखकर भी मयंक एक पल भी वहां नहीं रुका… उसने एक्सेलरेटर दबाया… और वहाँ से भाग गया…

कुछ ही पलों में… उसका बाप…  गरीब गुब्बारे बेचने वाला… दौड़ता हुआ आया… वो अपने बच्चे के लिए चॉकलेट लेने गया था….उसने उस एक्सीडेंट को अपनी आँखों से देखा उसने अपने बच्चे को उठाया…

बेटा… कुछ नहीं होगा… मैं हूँ…”

उसने आते जाते लोगों से मदद मांगी …लेकिन ग़रीब की मदद कौन करता है कोई गाड़ी नहीं रुकी… कोई मदद नहीं मिली…  वो अपने बच्चे को गोद में उठाकर… सीधे अस्पताल की ओर दौड़ा…

🔴 Hospital Truth

वो आदमी जिस अस्पताल में पहुँचा… वही अस्पताल था… डॉ. गिरीश और डॉ. दामिनी का वो हांफते हुए अंदर घुसा… “डॉक्टर साहब… मेरा बच्चा बचा लो…”

डॉक्टरों ने देखा… बच्चे की हालत गंभीर थी… लेकिन…रिसेप्शन से आवाज़ आई—

पहले एडवांस जमा करो…” पूरे दो लाख रुपये

वो आदमी रो पड़ा— साहब… मेरे पास अभी नहीं है… लेकिन दे दूँगा… कसम से दे दूँगा…” उसी वक्त… डॉ. गिरीश और डॉ. दामिनी भी वहाँ आ गए… उन्होंने बच्चे को देखा… फिर उस आदमी को देखा… और फिर… ठंडी आवाज़ में कहा—

पहले पैसे… फिर इलाज…”क्योंकि ये कोई चैरिटी अस्पताल नहीं है…

वो आदमी उनके पैरों में गिर गया—साहब… बचा लो मेरे बच्चे को….… भगवान के लिए बचा लो……

लेकिन… उन्होंने मुँह फेर लिया…उसी वक्त मयंक भी वहीं आया…वो दूर खड़ा सब देख रहा था…

 तभी… उस आदमी की नज़र मयंक पर पड़ी… फिर बाहर खड़ी कार पर…उसकी आँखें फैल गईं…

उसे सब समझ आ गया…वो चिल्लाया—

यही है… यही है वो… इसी की कार से मेरे बच्चे का एक्सीडेंट हुआ है…”

लेकिन… डॉ. गिरीश गुस्से में बोले— चुप रहो… यहाँ से निकलो…” बिना मतलब पैसे ऐंठने के लिए कुछ भी उल जलूल इल्जाम लगा रहा है….सिक्यूरिटी…सिक्यूरिटी इस भिखारी को यहां से बाहर निकालो….

और… सिक्योरिटी ने उसे धक्के मारकर बाहर निकाल दिया…उसके बच्चे का इलाज नहीं हो सका और वो मर गया…

इसके बाद वो आदमी सीधे थाने पहुँचा… रोते हुए बोला—

साहब… मेरे बच्चे को मार दिया… उन्होंने मार दिया मेरे बच्चे को …..रिपोर्ट लिखिए…”गिरफ्तार करिए उन राक्षसों को..

लेकिन… जैसे ही उसने डॉ. गिरीश के बेटे का नाम लिया उसे थाने से भी भगा दिया गया…

क्योंकि… सामने वाला कोई आम आदमी नहीं था…वो बेचारा रोता रहा..गिड़गिड़ाता रहा और फिर अपने बच्चे की लाश को लेकर शम्शान घाट पहुंचा…वो आदमी अपने बेटे की चिता के सामने बैठा था… उसकी आँखों में आँसू नहीं थे…. बस खालीपन था. लकड़ियाँ जल रही थीं…और उसके साथ… उसका सब कुछ खाक हो रहा था वो धीरे से बोला—तुम्हें अस्पताल में नहीं बचाया… मुझे थाने में न्याय नहीं मिला… अब मैं खुद न्याय लूँगा…”

तभी… पीछे से एक भारी आवाज़ आई— “न्याय चाहिए… या बदला…?” वो मुड़ा ….

🔴 The Revenge

उसके सामने एक अघौरी खड़ा था… राख से लिपटा हुआ… आँखों में अजीब चमक थी उसके..

आदमी ने बिना सोचे कहा—बदला…” अघौरी मुस्कुराया— उस रात के बाद… वो आदमी बदल गया…

उसने अघौरी से वशीकरण की क्रिया सीखी…

Flash back ends

मयंक जोर-जोर से रो रहा था— पापा… वो कह रहा है… आपने उसे अस्पताल से भगा दिया था…
अब वो मुझे नहीं छोड़ेगा…” उसका हाथ काँप रहा था… चाकू और गहरा दब चुका था…उसकी कलाई में…….वो अब पूरी तरह वशीकरण की क्रिया के वश में था…

कुछ ही देर बाद

🔴 Final Death Scene

मयंक ज़मीन पर पड़ा था… उसकी साँसें अब टूटने लगी थीं… हर साँस जैसे उसे अंदर से चीर रही थी
डॉ. दामिनी उसके सिर को अपनी गोद में लेकर फूट-फूटकर रो रही थीं, बार-बार उसका नाम पुकार रही थीं… लेकिन मयंक अब जवाब देने की हालत में नहीं था
डॉ. गिरीश, जो कभी दूसरों की जान बचाते थे, आज अपने ही बेटे के सामने घुटनों के बल बैठे थे… हाथ जोड़कर बस एक ही बात दोहरा रहे थे—“भगवान… मेरा बेटा बचा लो…
मयंक ने आखिरी बार अपनी धुंधली आँखों से अपने माँ-बाप को देखा… होंठ हल्के से हिले… जैसे वो कहना चाहता हो—“मुझे माफ कर दो…
और अगले ही पल… उसकी साँस थम गई… और उस घर में सिर्फ चीखें रह गईं…

Related Horror Stories

Read more horror and paranormal stories on Wikipedia Horror Fiction .

More Horror Stories

Read our other scary stories: Real Ghost Story in Hindi

Also read: Kala Kuan Ka Rahasya

3 thoughts on “Vashikaran Hospital Horror Story”

  1. Pingback: 8 PM Ke Baad Darwaza Mat Kholna | Haunted Apartment Story - Scary Crocodile

  2. Pingback: Haunted Railway Station Horror Story in Hindi | आखिरी ट्रेन का रहस्य - Scary Crocodile

  3. Pingback: डरावनी कॉल जिसने जिंदगी बदल दी | Real Incident Horror Story - Scary Crocodile

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top