BY TEAM SCARY CROCODILE
शाम के करीब साढ़े सात बजे होंगे जब रवि finally ऑफिस से निकला।
पूरा दिन खराब गया था।
सुबह manager ने client call पर उसकी बेइज्जती कर दी थी, laptop दो बार hang हुआ, ऊपर से बाहर लगातार बारिश हो रही थी। Pune की बारिश वैसे भी अजीब होती है। कभी धीरे-धीरे गिरती रहती है, कभी अचानक ऐसा लगता है जैसे पूरा आसमान नीचे आ गया हो। Haunted Apartment Story

उसने helmet पहना, बाइक स्टार्ट की और traffic में निकल गया।
सड़क पर पानी भरा था। Auto वाले बिना indicator के कट मार रहे थे। सामने buses की red lights बारिश के पानी में धुंधली चमक रही थीं। Ravi बार-बार jacket की sleeve से visor साफ कर रहा था।
उसका मन बस घर पहुंचने का था।
उस रात कुछ भी unusual नहीं लग रहा था।
कम से कम शुरुआत में तो नहीं।
जब वह अपने apartment के बाहर पहुंचा तब मोबाइल में 7:56 PM हो रहे थे।
Building पुरानी थी। तीन मंजिल की। नीचे medical store, उसके बगल में बंद laundry shop, और ऊपर किराए के छोटे फ्लैट।
रवि पिछले चार महीने से वहीं रह रहा था।
किराया कम था इसलिए उसने ज्यादा सवाल नहीं किए थे।
बस एक चीज शुरू से अजीब लगती थी।
रात में building बहुत जल्दी शांत हो जाती थी।
इतनी जल्दी कि कभी-कभी लगता था अंदर कोई रहता ही नहीं।
उसने बाइक पार्क की। बारिश अब थोड़ी कम हो चुकी थी। पानी छत से टपक रहा था। Gate के पास बैठे watchman ने उसे देखकर सिर उठाया।
“Late हो गए आज।”
रवि ने थकी हुई आवाज में कहा, “Office था…”
Watchman कुछ बोलने ही वाला था फिर चुप हो गया।
उसकी नजर अचानक रवि के पीछे कहीं चली गई।
रवि ने मुड़कर देखा।
सड़क खाली थी।
“क्या हुआ?” रवि ने पूछा।
“कुछ नहीं।”
फिर बूढ़े ने धीरे से कहा —
“आज ऊपर जल्दी दरवाजा बंद कर लेना।”
रवि हल्का हंसा।
“क्यों?”
लेकिन बूढ़े ने जवाब नहीं दिया।
उसने बस बीड़ी का लंबा कश लिया और दूसरी तरफ देखने लगा।
रवि सीढ़ियां चढ़ने लगा।
Lift महीनों से खराब थी। दूसरी मंजिल तक आते-आते उसके जूते सीढ़ियों पर पानी छोड़ रहे थे। Corridor में tube light बार-बार blink कर रही थी।
तीसरी मंजिल पर पहुंचकर वह कुछ सेकंड रुका।
उसके कमरे के बाहर light बंद थी।
Normally sensor light on हो जाती थी।
आज नहीं हुई।
“Great…”
वह बड़बड़ाया।
उसने pocket से keys निकालीं।
तभी अंदर से हल्की सी आवाज आई।
टक।
जैसे कोई छोटी चीज गिरकर रुकी हो।
रवि freeze हो गया।
उसने ध्यान से सुना।
कुछ नहीं।
शायद ऊपर वाले flat से आया होगा, उसने सोचा।
उसने दरवाजा खोला।
कमरा वैसा ही था जैसा वह छोड़कर गया था।
Single bed।
Laptop table।
गीले कपड़ों की हल्की बदबू।
Window के पास रखी आधी सूखी coffee mug।
उसने राहत की सांस ली।
“तू भी ना…”
वह खुद पर हंसा।
उसने bag नीचे रखा, shoes उतारे और सीधे bathroom में चला गया। चेहरा धोते समय उसने mirror में खुद को देखा।
आंखों के नीचे dark circles।
थका हुआ चेहरा।
कुछ सेकंड तक वह बस sink पकड़कर खड़ा रहा।
उसे अचानक महसूस हुआ कि room जरूरत से ज्यादा शांत है।
बहुत ज्यादा।
ना ऊपर fan की आवाज।
ना बाहर traffic।
ना किसी TV की।
बस bathroom tap से गिरती पानी की बूंदें।
टप…
टप…
टप…
उसने tap बंद किया।
Silence।
फिर अचानक पूरी building की बिजली चली गई।
Bathroom अंधेरे में डूब गया।
रवि के मुंह से automatically निकला —
“Shit…”
बाहर कहीं किसी बच्चे के रोने की आवाज आई, फिर किसी औरत ने जोर से कहा —
“Light गई क्या?”
उसके बाद फिर वही silence।
रवि ने mobile flashlight on की।
कमरे में वापस आया।
बारिश की हल्की आवाज अब भी खिड़की से सुनाई दे रही थी।
उसने phone charging पर लगाया और bed पर बैठ गया।
Network बहुत कमजोर था।
Instagram खुल नहीं रहा था।
उसने bored होकर कमरे में flashlight घुमाई।
और उसी समय…
उसे लगा cupboard के पास कोई खड़ा है।
बस एक सेकंड के लिए।
एक इंसानी shape।
रवि सीधा बैठ गया।
उसने दोबारा flashlight वहां डाली।
कुछ नहीं।
सिर्फ उसका jacket टंगा था।
वह कुछ सेकंड तक खुद को गालियां देता रहा।
“Sleep कम हो रही है भाई…”
उसने लंबी सांस ली।
फिर kitchen में जाकर पानी पीने लगा।
लेकिन glass होंठों तक पहुंचा ही था कि उसे पीछे corridor में कदमों की आवाज सुनाई दी।
धीरे।
गीले पैरों जैसी।
छप…
छप…
छप…
रवि रुक गया।
उसका flat corridor के आखिर में था। Normally कोई आता तो पहले stairs की आवाज सुनाई देती।
इस बार सीधे corridor में footsteps सुनाई दिए थे।
वह दरवाजे के पास गया।
Peephole से बाहर देखा।
कोई नहीं।
Empty corridor।
बस लाल emergency light जल रही थी।
वह वापस मुड़ा ही था कि…
ठक।
दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।
रवि का दिल जोर से धड़का।
कुछ सेकंड तक वह वहीं खड़ा रहा।
फिर पूछा —
“कौन?”
कोई जवाब नहीं।
उसने दोबारा peephole से देखा।
इस बार corridor के आखिर में कोई खड़ा था।
एक औरत।
सफेद कपड़े।
भीगे बाल।
चेहरा नीचे।
रवि की सांस हल्की अटक गई।
पहले उसे लगा शायद कोई tenant होगी।
लेकिन कुछ गड़बड़ थी।
वह हिल नहीं रही थी।
बिल्कुल भी नहीं।
इतनी देर में कोई इंसान थोड़ा तो move करता है।
रवि कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
फिर अचानक corridor की light blink हुई।
बस एक सेकंड।
और जब रोशनी वापस आई…
वह औरत पहले से करीब खड़ी थी।
अब corridor के बीच में।
रवि तुरंत पीछे हट गया।
उसका पहला reaction डर नहीं था।
Confusion था।
“ये आई कैसे?”
उसने फिर peephole में देखा।
अब वहां कुछ नहीं था।
पूरा corridor खाली।
रवि को genuinely uneasy महसूस होने लगा।
उसने तुरंत दरवाजा lock किया।
एक नहीं, दोनों locks।
फिर खुद को समझाने लगा —
“कोई prank होगा… शायद drunk होगी…”
लेकिन दिल मान नहीं रहा था।
उसने phone उठाया और नीचे watchman को call लगाया।
Network नहीं।
Call failed।
उसी समय…
Bathroom से हल्की आवाज आई।
टक।
जैसे mirror पर किसी ने उंगली मारी हो।
रवि धीरे-धीरे bathroom की तरफ गया।
Flashlight अंदर डाली।
सब normal।
लेकिन mirror पर पानी जैसा कुछ फैला हुआ था।
उसने पास जाकर देखा।
कोई उंगली से कुछ लिख गया था।
“8 PM”
रवि कुछ सेकंड समझ ही नहीं पाया।
फिर उसका दिमाग automatically explanation ढूंढने लगा।
शायद पहले से लिखा होगा।
शायद steam में दिखा।
लेकिन bathroom तो ठंडा था।
Steam थी ही नहीं।
उसी पल पीछे corridor में किसी के दौड़ने की आवाज आई।
धप धप धप धप—
फिर अचानक silence।
अब डर धीरे-धीरे उसके अंदर बैठने लगा था।
वह कमरे के बीच में खड़ा रहा।
Phone हाथ में।
Flashlight on।
सांसें तेज।
उसने खुद को distract करने के लिए YouTube खोलने की कोशिश की लेकिन videos load ही नहीं हो रहे थे।
तभी phone vibrate हुआ।
Unknown Number.
उसने तुरंत उठा लिया।
“Hello?”
कुछ सेकंड सिर्फ भारी सांसों की आवाज आती रही।
फिर बहुत धीमी आवाज सुनाई दी।
एक औरत की।
“दरवाजा मत खोलना…”
Call कट गई।
रवि के हाथ ठंडे पड़ गए।
अब उसके शरीर को सच में खतरा महसूस होने लगा था।
वह दरवाजे से दूर हट गया।
कुछ मिनट तक कुछ नहीं हुआ।
बस बारिश।
और ceiling fan की धीमी घरघराहट जो अब बिजली आने के बाद शुरू हुई थी।
रवि को लगा शायद उसने overreact कर दिया।
उसने nervous होकर हंसने की कोशिश की।
फिर…
ठक।
दरवाजे पर फिर दस्तक हुई।
इस बार पहले से थोड़ी जोर से।
रवि वहीं जम गया।
दूसरी दस्तक।
ठक।
फिर तीसरी।
धीरे।
लगभग प्यार से।
और उसके बाद एक आवाज।
बहुत पास से।
“रवि…”
उसके शरीर में जैसे करंट दौड़ गया।
उसने किसी को अपना नाम नहीं बताया था।
उसका गला सूख गया।
“कौन है?”
बाहर कुछ सेकंड silence रहा।
फिर वही औरत की आवाज।
“दरवाजा खोलो… मुझे ठंड लग रही है…”
आवाज अजीब थी।
जैसे कोई इंसान बोलना भूल गया हो।
शब्द सही थे…
लेकिन tone नहीं।
रवि पीछे हट गया।
उसका दिमाग अब logically सोचने की कोशिश कर रहा था लेकिन body panic mode में जा चुकी थी।
उसे महसूस हो रहा था कि अगर उसने दरवाजा खोला तो कुछ बहुत गलत होगा।
फिर अचानक दरवाजे के नीचे से पानी अंदर आने लगा।
काला।
गंदा।
उसमें से सड़ी हुई बदबू आ रही थी।
रवि का पेट मिचलाने लगा।
अब बाहर scratching की आवाज आने लगी।
धीमी।
लकड़ी पर नाखून रगड़ने जैसी।
घरररर…
घरररर…
उसकी आंखों में आंसू आने लगे थे।
डर की वजह से नहीं।
Pure panic की वजह से।
उसने trembling हाथों से kitchen drawer खोला और knife निकाली।
उसी समय बाहर से बहुत धीमी हंसी सुनाई दी।
एकदम धीमी।
लेकिन इंसानी नहीं।
फिर अचानक सब शांत हो गया।
Complete silence।
इतना गहरा कि रवि को अपनी heartbeat सुनाई देने लगी।
धक…
धक…
धक…
करीब एक मिनट तक कुछ नहीं हुआ।
फिर bathroom की light अपने आप on हुई।
रवि धीरे-धीरे उधर मुड़ा।
Mirror पर अब नया message लिखा था।
“वो अंदर आ चुकी है।”
उसके हाथ से knife गिर गई।
टन्न।
और उसी आवाज के साथ उसे अपने पीछे किसी की सांस महसूस हुई।
बहुत ठंडी।
बहुत पास।
जैसे कोई उसके कंधे के ठीक पीछे खड़ा हो।
रवि धीरे-धीरे मुड़ा।
लेकिन वहां कुछ नहीं था।
सिर्फ उसका कमरा।
उसका bed।
उसका laptop।
लेकिन अब room वैसा नहीं लग रहा था।
कुछ बदल गया था।
जैसे कमरे के अंदर हवा भारी हो गई हो।
तभी cupboard के अंदर से आवाज आई।
टक।
फिर एक और।
टक।
रवि पीछे हट गया।
Cupboard का दरवाजा बहुत धीरे-धीरे खुद खुलने लगा।
क्रीईईक…
अंदर अंधेरा था।
फिर उस अंधेरे में…
दो आंखें खुलीं।
सफेद।
स्थिर।
रवि चीख पड़ा।
उसी सेकंड पूरी building की lights वापस आ गईं।
Cupboard खाली था।
सिर्फ कपड़े लटक रहे थे।
रवि जोर-जोर से सांस ले रहा था।
उसकी हालत ऐसी थी जैसे कई किलोमीटर भागकर आया हो।
कुछ सेकंड बाद नीचे से normal आवाजें आने लगीं।
लोगों की बातें।
TV।
किसी के बर्तन रखने की आवाज।
सब normal।
जैसे पिछले आधे घंटे में कुछ हुआ ही नहीं।
उस रात रवि सोया नहीं।
सुबह होते ही उसने building छोड़ दी।
उसने किसी को पूरी बात नहीं बताई।
बस इतना कहा कि जगह ठीक नहीं है।
तीन महीने बाद उसने नीचे वाले watchman को फिर देखा।
एक tea stall पर।
बूढ़े ने उसे पहचान लिया।
कुछ देर दोनों चुप बैठे रहे।
फिर रवि ने धीरे से पूछा —
“उस रात… वो क्या था?”
Watchman काफी देर तक चुप रहा।
फिर बोला —
“तीन साल पहले तीसरी मंजिल पर एक लड़की रहती थी।”
उसने चाय नीचे रखी।
“हर रात ठीक 8 बजे उसका fiancé उसे call करता था।”
“फिर?”
बूढ़े ने नजरें झुका लीं।
“एक रात उसने दरवाजा खोला… लेकिन बाहर उसका fiancé नहीं था।”
रवि कुछ नहीं बोला।
उसके हाथ ठंडे पड़ चुके थे।
“अगली सुबह वो अपने कमरे में मिली थी।”
“मरी हुई?”
बूढ़े ने धीरे से सिर हिलाया।
“और mirror पर लिखा था…”
वह रुक गया।
फिर रवि की आंखों में देखकर बोला —
“8 PM.”
