Meri Wife Ek Chudail Thi | Chudail Horror Story

BY SCARY CROCODILE TEAM

पहली बार मुझे डर तब नहीं लगा था जब मैंने अपनी पत्नी को आधी रात में कब्रिस्तान की तरफ जाते देखा। डर तब लगा… जब उसने पीछे मुड़कर मुझे देखा…
और उसकी आंखों में इंसानों वाला प्यार नहीं था। कुछ और था। कुछ ऐसा… जो भूखा था। Chudail Horror Story

Chudail Horror Story

मेरा नाम विवेक है। अगर तुम ये कहानी पढ़ रहे हो, तो शायद तुम्हें लगे मैं पागल हूं। पहले मुझे भी यही लगता था। मैं उन लोगों में से था जो horror stories सुनकर हंसते हैं। Ghosts, chudail, black magic… सब imagination लगता था।

लेकिन इंसान तब तक किसी चीज़ पर विश्वास नहीं करता…
जब तक वो चीज़ उसके बिस्तर के दूसरी तरफ सोने न लगे।


मेरी शादी राधिका से हुई थी। Arranged marriage। पहली बार मैंने उसे हरिद्वार में देखा था। घर में सब लोग बातें कर रहे थे। उसकी मां चाय serve कर रही थीं। पापा उसके बारे में अच्छी बातें बता रहे थे। लेकिन राधिका… वो बस चुप बैठी थी। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें कभी मेरी तरफ उठतीं… फिर तुरंत नीचे झुक जातीं। उस वक्त मुझे वो cute लगी थी। अब सोचता हूं… शायद वो मुझे देख नहीं रही थी।

शायद वो मुझे पहचान रही थी।


शादी के बाद शुरुआती दिन बहुत अच्छे थे।

सच कहूं तो मैंने उससे प्यार करना शुरू कर दिया था।

वो ज्यादा बोलती नहीं थी, लेकिन छोटी-छोटी चीज़ें notice करती थी। मुझे कैसे चाय पसंद है। Office से लौटूं तो पहले पानी देती थी। अगर मैं थका होता तो बिना कुछ पूछे मेरे सिर में तेल लगा देती।

कई बार मैं उसे बस चुपचाप देखता रहता।

और सोचता…

इतनी शांत लड़की को लोग “अजीब” क्यों कहते थे?


लेकिन कुछ चीज़ें धीरे-धीरे मेरे अंदर चुभने लगीं।

राधिका कभी गहरी नींद में नहीं सोती थी।

मैं रात को कभी भी उठ जाऊं…
वो अक्सर जागती मिलती।

कभी balcony में।
कभी kitchen में।
कभी अंधेरे कमरे में खिड़की के पास खड़ी।

एक रात मैंने पीछे से जाकर उसे hug किया।

उसका शरीर बर्फ जैसा ठंडा था।

मैं हंस पड़ा।
“तुम इंसान हो ना?”

उसने धीरे से मेरी तरफ देखा।

फिर मुस्कुराई।

लेकिन उसकी मुस्कान आंखों तक नहीं पहुंची।

“पता नहीं…” उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा।

Chudail Horror Story

उस वक्त मुझे लगा वो मजाक कर रही है।

काश वो मजाक होता।


धीरे-धीरे घर बदलने लगा।

हमारा छोटा सा rented house पहले बहुत warm लगता था। लेकिन अब वहां हर वक्त अजीब सी नमी रहती। जैसे दीवारें सांस ले रही हों।

रात को kitchen से बर्तनों की हल्की आवाज़ आती।

कभी bathroom का tap खुद खुल जाता।

कभी ceiling पर कदमों जैसी आवाज़ सुनाई देती।

मैं खुद को समझाता —
“Old house है… normal होगा।”

लेकिन दिल मानता नहीं था।


एक रात मैं office से बहुत देर से लौटा।

बारिश हो रही थी। पूरा रास्ता खाली था। सड़क पर सिर्फ street lights की पीली रोशनी और पानी की आवाज़।

घर पहुंचा तो main door खुला था।

मेरे कदम वहीं रुक गए।

मैंने अंदर झांका।

पूरा घर अंधेरे में था।

“राधिका?”

कोई जवाब नहीं।

मेरा दिल तेज़ धड़कने लगा।

तभी ऊपर bedroom से धीमी humming की आवाज़ आई।

मैं सीढ़ियां चढ़कर ऊपर गया।

दरवाज़ा आधा खुला था।

और अंदर…

राधिका फर्श पर बैठी थी।

उसके लंबे बाल पूरे चेहरे पर फैले थे।
वो धीरे-धीरे झूल रही थी।

और किसी अनजान भाषा में गाना गा रही थी।

मेरे पैरों में जान नहीं रही।

“राधिका…”

वो अचानक रुक गई।

धीरे-धीरे उसने सिर उठाया।

उसकी आंखों के नीचे काले निशान थे।

और होंठों पर…

खून लगा था।


“ये क्या है?” मेरी आवाज़ कांप रही थी।

उसने होंठ छिपाने की कोशिश की।
“कुछ नहीं…”

“खून क्यों लगा है?”

कुछ सेकंड वो चुप रही।

फिर बोली,
“मैंने गलती से होंठ काट लिया।”

लेकिन वो झूठ बोल रही थी।

मुझे पता था।

क्योंकि उसके दांतों के बीच…
कुछ काला फंसा हुआ था।

जैसे कच्चा मांस।

उस रात मैं उसके बगल में लेटा जरूर…
लेकिन सो नहीं पाया।

मुझे पहली बार अपनी ही पत्नी से डर लग रहा था।

और उस डर से ज्यादा दर्द इस बात का था…

कि मैं अब भी उससे प्यार करता था।


कुछ दिनों बाद मैंने notice किया कि मोहल्ले के कुत्ते उसे देखकर रोने लगते थे।

एक बूढ़ी औरत तो उसे देखकर सड़क पार कर गई।

राधिका ने सिर्फ हल्का सा मुस्कुराकर मुझे देखा।

“लोग मुझे पसंद नहीं करते,” उसने कहा।

“तुम बेकार सोच रही हो।”

“नहीं विवेक… लोग महसूस कर लेते हैं।”

“क्या?”

उसने जवाब नहीं दिया।

बस खिड़की से बाहर देखने लगी।


फिर वो रात आई जिसने मेरी जिंदगी खत्म कर दी।

करीब 3:13 AM।

मैं अचानक जाग गया।

कमरे में राधिका नहीं थी।

बाहर हवा चल रही थी। खिड़की हल्का-हल्का हिल रही थी।

फिर मुझे नीचे main door बंद होने की आवाज़ सुनाई दी।

मैंने curtain हटाकर बाहर देखा।

राधिका सफेद shawl पहनकर सड़क पर चल रही थी।

बारिश के बाद की गीली सड़क पर उसके पैर दिख रहे थे।

और तभी…

मेरा खून जम गया।

उसके पैर उल्टे थे।


मेरे हाथ कांपने लगे।

मैं कई मिनट तक वहीं खड़ा रहा।

मेरा दिमाग बार-बार कह रहा था —
“नहीं… ये impossible है…”

लेकिन आंखें झूठ नहीं बोल रही थीं।


पता नहीं क्यों…
लेकिन मैं उसके पीछे चला गया।

शायद प्यार इंसान को बेवकूफ बना देता है।

या शायद मैं सच जानना चाहता था।

सड़कें पूरी खाली थीं।

दूर कहीं ट्रेन की आवाज़ आ रही थी।
पेड़ों से पानी टपक रहा था।
ठंडी हवा मेरे कानों में सीटी जैसी आवाज़ कर रही थी।

राधिका बिना पीछे देखे चलती रही।

फिर वो पुराने कब्रिस्तान के सामने रुकी।

मुझे याद है उस वक्त मेरे हाथ इतने कांप रहे थे कि mobile पकड़ना मुश्किल हो रहा था।

वो अंदर चली गई।

और मैं…

डर के बावजूद उसके पीछे गया।


कब्रिस्तान के अंदर मिट्टी की गंध बहुत तेज़ थी।

पुरानी टूटी कब्रें।
गीली घास।
सफेद fog।

राधिका एक कब्र के सामने घुटनों पर बैठ गई।

फिर उसने धीरे-धीरे रोना शुरू किया।

पहले धीमे।

फिर जोर से।

इतना दर्द था उसकी आवाज़ में…
कि कुछ पल के लिए मैं डर भूल गया।

वो किसी इंसान की तरह रो रही थी।

जैसे उसके अंदर सालों का दुख दबा हो।

“मुझे छोड़कर क्यों गए…” वो बुदबुदा रही थी।

मेरे सीने में अजीब कसाव होने लगा।

उस पल वो monster नहीं लगी।

बस एक टूटी हुई औरत लगी।


फिर अचानक उसने सिर घुमाया।

सीधे मेरी तरफ।

उसकी आंखें पूरी सफेद थीं।

“तुम्हें यहां नहीं आना चाहिए था…”

उसकी आवाज़ अब उसकी नहीं थी।

उसमें कई आवाज़ें थीं।

और तभी…

उसके पीछे की मिट्टी हिलने लगी।

मैं जड़ हो गया।

मिट्टी के अंदर से एक हाथ बाहर निकला।

सड़ा हुआ।
काला।
इंसानी।

मेरी चीख निकल गई।


राधिका उठी।

धीरे-धीरे मेरी तरफ आने लगी।

उसके पैर जमीन को छू नहीं रहे थे।

“डरो मत…” उसने कहा।

लेकिन उसके चेहरे पर इंसानी skin फटने लगी थी।

नीचे कुछ और था।

कुछ सड़ा हुआ।

कुछ मरा हुआ।


मैं भागा।

पूरी ताकत से।

पीछे से उसकी आवाज़ आ रही थी।

“विवेक… प्लीज मत भागो…”

और उस आवाज़ में इतना दर्द था…
कि मेरे कदम एक पल के लिए रुक गए।

लेकिन फिर…

मैंने पीछे मुड़कर देखा।

और मेरी चीख निकल गई।

वो अब इंसान नहीं दिख रही थी।

उसके बाल हवा में ऐसे उड़ रहे थे जैसे पानी में हों।
उसका मुंह असामान्य रूप से लंबा हो चुका था।
और उसकी आंखें…

खाली थीं।

पूरी तरह खाली।


घर पहुंचकर मैं फर्श पर बैठ गया।

मेरे हाथ कांप रहे थे।
सांस टूट रही थी।

और सबसे बुरी बात…

मैं रो रहा था।

क्योंकि जिस औरत से मैं प्यार करता था…
वो शायद कभी इंसान थी ही नहीं।


सुबह doorbell बजी।

मैं डरते हुए दरवाज़े तक गया।

राधिका बाहर खड़ी थी।

हाथ में दूध का packet।

बाल बंधे हुए।
चेहरा normal।

जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

उसने मुझे देखा।

फिर बहुत धीरे से पूछा —

“क्या अब भी मुझसे प्यार करते हो?”

उस सवाल ने मुझे तोड़ दिया।

क्योंकि मेरे पास जवाब नहीं था।

मैं डरता भी था…

और उससे दूर जाने की सोचकर अंदर से टूट भी रहा था।


उस रात उसने पहली बार सच बताया।

उसने कहा उसे सालों पहले गांव वालों ने जिंदा जला दिया था।

उसका कसूर बस इतना था कि जहां वो जाती…
वहां मौतें होने लगतीं।

लोग उसे अशुभ मानने लगे।

और जिस आदमी ने सबसे पहले उसे आग लगाई थी…

वो मेरा पिता था।


मेरे पैरों के नीचे से जमीन निकल गई।

मैं कुछ बोल भी नहीं पाया।

राधिका रो रही थी।

सच में रो रही थी।

“मैं बदला लेने आई थी…” उसने कहा।
“लेकिन फिर मुझे तुमसे प्यार हो गया।”

उसकी आवाज़ टूट रही थी।

“मैंने बहुत कोशिश की खुद को रोकने की…”

“किससे रोकने की?”

उसने धीरे-धीरे मेरी तरफ देखा।

“उस चीज़ से… जो मेरे अंदर रहती है।”


कमरे की lights अपने आप blink करने लगीं।

बाहर अचानक सारे कुत्ते रोने लगे।

और फिर…

मैंने पहली बार उसके अंदर वाली चीज़ को देखा।

उसकी skin फटने लगी।
मुंह असामान्य तरीके से खुल गया।
आंखों से काला पानी बहने लगा।

लेकिन वो अब भी रो रही थी।

“भाग जाओ विवेक…”

“राधिका…”

“PLEASE भाग जाओ…”

उसकी आवाज़ अब इंसानी और गैर-इंसानी आवाज़ों के बीच फंस गई थी।

और उस पल मुझे एहसास हुआ…

वो मुझे मारना नहीं चाहती थी।

वो खुद से लड़ रही थी।


मैं भाग नहीं पाया।

क्योंकि मैं उससे प्यार करता था।

और शायद यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी।


अगली सुबह वो गायब थी।

बस दीवार पर nails से लिखा था —

“मैं वापस आऊंगी।”


आज चार साल बाद भी…

मैं अकेला नहीं हूं।

हर रात 3:13 AM पर मेरे bedroom का दरवाज़ा धीरे-धीरे खुलता है।

गीले पैरों के निशान अंदर आते हैं।

और कोई मेरे कान के पास झुककर फुसफुसाता है —

“क्या अब भी मुझसे प्यार करते हो…?”

और सबसे डरावनी बात?

हर बार…

मेरे मुंह से जवाब निकलता है —

“हाँ…”

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