जिस लड़की से मैं बात करता था… वो भूत थी | Haunted Girl on WhatsApp

WRITER – Aryan Dev

Chapter 1: Unknown Number

रात के लगभग 1:13 बज रहे थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी। आसमान में बिजली चमक रही थी और पुराने मकानों की दीवारों पर पड़ती उसकी रोशनी सब कुछ डरावना बना रही थी। कमरे में सिर्फ मोबाइल की हल्की नीली रोशनी जल रही थी।

Haunted Girl on WhatsApp

मैं बिस्तर पर लेटा हुआ Instagram Reels स्क्रॉल कर रहा था। पूरा दिन खराब गया था। Job interview भी खराब गया, दोस्तों ने भी प्लान कैंसिल कर दिया था और ऊपर से बिजली बार-बार जा रही थी। तभी अचानक मोबाइल स्क्रीन पर WhatsApp notification आया।

Unknown Number: “जाग रहे हो?”

मैंने नंबर देखा। कोई DP नहीं। कोई About नहीं। बस एक blank profile।

Haunted Girl on WhatsApp पहले लगा किसी दोस्त का prank होगा। लेकिन रात के उस वक्त कोई मजाक करने की हालत में नहीं था।

मैंने reply किया।

“कौन?”

करीब दस सेकंड तक typing… दिखाई देता रहा।

फिर message आया।

“तुम मुझे नहीं जानते… लेकिन मैं तुम्हें बहुत अच्छे से जानती हूँ।”

मेरे शरीर में हल्की सिहरन दौड़ गई। मैंने सोचा कोई random stalker होगी। आजकल social media पर fake accounts बहुत होते हैं।

मैंने पूछा।

“नाम बताओ।”

उसने जवाब दिया।

“नाम जानकर क्या करोगे? आवाज़ पहचान लोगे?”

उसके बाद अचानक मेरे फोन पर call आने लगी। Unknown Number Calling…

मैंने hesitant होकर call उठा ली।

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक सिर्फ बारिश की आवाज़ थी। फिर बहुत धीमी लड़की की आवाज़ सुनाई दी।

“तुम अकेले हो?”

उसकी आवाज़ अजीब थी। बहुत soft… लेकिन उसमें कुछ ऐसा था जो सीधा दिमाग के अंदर उतर रहा था।

मैंने पूछा, “तुम हो कौन?”

वो हल्का सा हँसी।

“तुम्हें डर लगता है क्या?”

मैं irritate हो गया। “देखो, अगर prank है तो बंद करो।”

कुछ सेकंड चुप्पी रही।

फिर उसने कहा…

“तुम्हारे कमरे की खिड़की खुली हुई है। बारिश अंदर आ रही है। बंद कर लो।”

मेरे हाथ ठंडे पड़ गए।

मैंने तुरंत पीछे मुड़कर देखा। सच में खिड़की आधी खुली हुई थी और बारिश की बूंदें अंदर आ रही थीं।

मैं झटके से उठा। पूरे कमरे में नजर दौड़ाई। कोई नहीं था।

“तुम… देख कैसे रही हो?” मैंने डरते हुए पूछा।

फोन कट गया।

उस रात मैं सो नहीं पाया। बार-बार लगता रहा कोई कमरे के बाहर खड़ा है। कभी खिड़की पर shadow दिखती, कभी corridor में footsteps सुनाई देते। लेकिन जब बाहर जाकर देखता… वहां कोई नहीं होता।

सुबह उठकर मैंने उस नंबर को block कर दिया।

लेकिन शाम होते-होते एक नया नंबर फिर से message करने लगा।

“Block करके भी भाग नहीं पाओगे।”

मेरी धड़कन रुक गई।

उसके नीचे दूसरा message आया।

“आज रात terrace पर मत जाना।”

मैंने phone side में रख दिया। अब irritation से ज्यादा डर लगने लगा था।

शाम को मेरा दोस्त मिलने आया। उसने मुझे इतना परेशान देखा तो पूछा क्या हुआ। मैंने सारी बात बता दी।

वो जोर से हँस पड़ा।

“भाई कोई लड़की timepass कर रही है। Horror movie ज्यादा देख ली क्या?”

उसने मेरा फोन उठाकर वो chats पढ़नी शुरू कीं। अचानक उसका चेहरा बदल गया।

“ये… ये कैसे possible है?”

मैंने पूछा, “क्या हुआ?”

उसने phone मुझे दिखाया।

Last message के नीचे एक photo आई थी।

Photo मेरे terrace की थी।

अभी की photo।

बारिश में भीगा हुआ terrace… और corner में सफेद कपड़ों में कोई लड़की खड़ी थी।

मैं freeze हो गया।

उस photo के नीचे लिखा था:

“मैंने मना किया था ना?”

Chapter 2: Midnight Chat

उस रात मेरे दोस्त ने insist किया कि वो मेरे घर पर ही रुकेगा। उसने कहा शायद कोई stalker आसपास घूम रही होगी। लेकिन अंदर ही अंदर मैं जानता था… मामला normal नहीं था।

रात के 12 बजे हम दोनों drawing room में बैठे थे। बाहर तूफान बढ़ चुका था। पुरानी खिड़कियाँ हवा से कांप रही थीं।

तभी मेरा फोन फिर vibrate हुआ।

Unknown Number.

इस बार message नहीं… video call थी।

मेरे दोस्त ने कहा, “उठा ना।”

मैंने trembling हाथों से call receive की।

स्क्रीन पूरी dark थी। सिर्फ static noise आ रही थी। फिर धीरे-धीरे camera clear हुआ।

कोई लड़की एक अंधेरे कमरे में बैठी थी। उसके लंबे गीले बाल चेहरे पर पड़े थे। Camera quality खराब थी लेकिन उसकी आंखें साफ दिख रही थीं। पूरी सफेद।

मेरे दोस्त ने डरकर phone लगभग गिरा दिया।

“ये filter होगा…” उसने खुद को convince करने की कोशिश की।

लड़की ने camera के पास आकर कहा—

“तुम्हारे साथ दूसरा कौन है?”

हम दोनों चुप हो गए।

वो अचानक हँसी। लेकिन उसकी हँसी इंसानों जैसी नहीं थी। जैसे किसी पुराने broken speaker से आवाज़ निकल रही हो।

फिर उसने कहा—

“उसे घर भेज दो। आज रात उसे मरना नहीं चाहिए।”

Call कट गई।

कमरे में सन्नाटा छा गया।

मेरा दोस्त अब clearly डरा हुआ था। उसने कहा, “भाई ये prank नहीं है।”

मैंने उसे रुकने के लिए कहा लेकिन वो जाने की जिद करने लगा। आखिरकार करीब 1 बजे वो चला गया।

उसके जाने के कुछ मिनट बाद मुझे उसका call आया।

उसकी सांसें तेज चल रही थीं।

“भाई… पीछे कोई चल रहा है…”

“क्या?”

“मैं सड़क पर अकेला हूँ… लेकिन footsteps आ रहे हैं…”

फोन पर सच में किसी के पैरों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। धीरे… धीरे… उसके करीब आती हुई।

फिर अचानक वो चिल्लाया।

“कौन है?!”

और उसी सेकंड line कट गई।

मैंने बार-बार उसे call किया लेकिन phone switched off आने लगा।

पूरी रात मैं panic में बैठा रहा। सुबह होते ही मैं उसके घर गया।

दरवाजा उसकी माँ ने खोला। उनका चेहरा रोने से सूजा हुआ था।

“रात accident हो गया…”

मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।

उन्होंने बताया कि रात करीब 1:30 बजे उसका bike accident हुआ। लोग कह रहे थे वो खुद ही अचानक सड़क से नीचे गिर गया। लेकिन मरने से पहले वो सिर्फ एक ही बात बोल रहा था।

“सफेद कपड़ों वाली लड़की…”

मेरे शरीर में बर्फ जैसी ठंड उतर गई।

मैं वापस घर आया तो फोन पर फिर notification आया।

“मैंने कहा था ना… उसे मरना नहीं चाहिए था।”

उसके बाद दूसरा message आया।

“अब तुम अकेले हो।”

Chapter 3: The Old Hospital

अगले कुछ दिनों तक मैं लगभग पागल होने लगा। हर रात वही unknown messages आते। कभी empty audio files, कभी blurred photos, कभी किसी लड़की के रोने की आवाज़।

मैंने नंबर trace करने की कोशिश की। Truecaller पर कुछ नहीं मिला। Cyber cafe वाले दोस्त ने भी check किया। Number हर बार different city का दिखता… लेकिन location कभी stable नहीं रहती।

एक रात उसने message भेजा:

“क्या तुम सच जानना चाहते हो?”

मैंने पहली बार reply नहीं किया।

फिर दूसरा message आया।

“पुराने City Hospital आ जाओ। रात 2 बजे।”

वो hospital कई साल पहले बंद हो चुका था। वहां आग लगी थी जिसमें कई लोग मारे गए थे। लोग कहते थे रात में वहां से चीखें सुनाई देती हैं।

मैंने जाने का फैसला नहीं किया।

लेकिन रात 1:45 पर अचानक मेरे कमरे की lights बंद हो गईं। पूरा घर अंधेरे में डूब गया। उसी समय phone अपने आप on हुआ।

Screen पर सिर्फ एक line थी।

“मैं इंतजार कर रही हूँ।”

पता नहीं क्यों… लेकिन जैसे किसी ने मेरे दिमाग पर control कर लिया हो। मैं घर से निकल पड़ा।

बारिश फिर शुरू हो चुकी थी। सड़कें खाली थीं। सिर्फ street lights की पीली रोशनी और दूर कुत्तों के भौंकने की आवाज़।

Hospital शहर के किनारे पर था। टूटी हुई building… जले हुए walls… shattered windows…

Main gate आधा खुला था।

मैं अंदर गया। बदबू इतनी भयानक थी जैसे सड़ती हुई चीज़ें अभी भी वहां पड़ी हों।

मेरे phone की flashlight blink करने लगी। तभी corridor के end पर मुझे कोई दिखाई दिया।

सफेद कपड़ों में एक लड़की।

वो धीरे-धीरे पीछे मुड़ी।

उसका चेहरा आधा जला हुआ था। Skin काली पड़ चुकी थी। लेकिन उसकी आंखें… बिल्कुल वैसी ही थीं जैसी video call में थीं।

मेरे पैर जम गए।

वो बोली—

“तुम आखिर आ गए।”

मैंने कांपते हुए पूछा, “तुम क्या चाहती हो?”

वो मुस्कुराई।

“सिर्फ इतना… कि तुम मुझे भूलो मत।”

अचानक पीछे से किसी metal के गिरने की आवाज़ आई। मैं पलटा। Corridor खाली था। लेकिन जब दोबारा उसकी तरफ देखा… वो गायब थी।

सिर्फ दीवार पर खून से लिखा था:

ROOM 307

मैं धीरे-धीरे stairs चढ़कर तीसरी मंजिल पर गया। पूरा floor burnt था। छत से पानी टपक रहा था।

Room 307 का दरवाजा आधा खुला था।

अंदर जाते ही मेरी सांस रुक गई।

कमरे की दीवारों पर दर्जनों photos लगी थीं।

मेरी photos।

बचपन की… school की… recent selfies तक।

और room के बीचोंबीच एक पुराना hospital bed था।

उस पर कोई लेटा हुआ था। सफेद चादर से ढका हुआ।

मैंने कांपते हाथों से चादर हटाई।

और मेरी चीख निकल गई।

वो… मैं था।

मेरा ही चेहरा।

सड़ा हुआ… मरा हुआ।

तभी पीछे से लड़की की आवाज़ आई।

“तुम पहले ही मर चुके हो…”

Chapter 4: Forgotten Death

मैं shock में पीछे हट गया।

“ये झूठ है!” मैंने चिल्लाकर कहा।

लेकिन लड़की की आवाज़ हर तरफ गूंज रही थी।

“याद करो…”

अचानक मेरे सिर में तेज दर्द शुरू हुआ। जैसे कोई पुरानी याद जबरदस्ती दिमाग में घुस रही हो।

Flashbacks दिखने लगे।

बारिश वाली रात… सड़क… तेज speed… brakes fail…

और फिर… accident।

मैंने खुद को सड़क पर खून से लथपथ पड़ा देखा। आसपास लोग चिल्ला रहे थे। Ambulance की आवाज़… और फिर darkness।

मैं जमीन पर गिर पड़ा।

“नहीं… ये impossible है…”

लड़की धीरे-धीरे मेरे सामने आ गई।

“तीन महीने पहले तुम मर चुके थे। तुम्हें बस याद नहीं था।”

मेरी सांसें तेज हो गईं। “अगर मैं मर चुका हूँ तो…”

“तुम बीच में फंसे हुए हो।”

उसकी आवाज़ अचानक उदास हो गई।

“जैसे मैं फंसी हुई हूँ।”

मैंने पहली बार उसे ध्यान से देखा। उसके चेहरे का जला हिस्सा धीरे-धीरे normal होने लगा। वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। लेकिन उसकी आंखों में गहरा दर्द था।

“तुम कौन हो?”

वो कुछ सेकंड चुप रही।

“मैं उस आग में मरी थी।”

उसने hospital की तरफ देखा।

“लोगों ने मुझे अंदर बंद कर दिया था। मैं चीखती रही… लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला।”

कमरे का temperature अचानक गिर गया। दीवारों से जलने की बदबू आने लगी।

“तब से मैं अकेली हूँ।”

मैं धीरे-धीरे पीछे हटने लगा।

“मुझे जाने दो…”

वो मुस्कुराई।

“तुम जा नहीं सकते।”

अचानक पूरा room हिलने लगा। दीवारों से खून बहने लगा। Lights flicker करने लगीं।

और फिर hospital के हर corridor से चीखें सुनाई देने लगीं।

मैं दौड़ पड़ा।

लेकिन चाहे जितना भागता… corridor खत्म ही नहीं हो रहा था। हर turn के बाद वही जगह। वही burnt walls। वही darkness।

तभी अचानक सामने mirror दिखाई दिया।

मैं उसके पास गया।

Mirror में मैं नहीं था।

सिर्फ वही लड़की खड़ी थी।

और उसके पीछे दर्जनों shadow figures।

उन सबकी आंखें मेरी तरफ थीं।

लड़की ने mirror के अंदर से कहा—

“अब तुम भी हमारे साथ रहोगे।”

Mirror अचानक crack हो गया।

और उसी सेकंड किसी ने पीछे से मेरा गला पकड़ लिया।

Chapter 5: Shadow People

मैंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन वो पकड़ इंसानी नहीं थी। बर्फ जैसी ठंडी उंगलियां मेरी गर्दन में धंस रही थीं।

मैंने पीछे मुड़कर देखा।

एक shadow figure मेरे पीछे खड़ा था। उसका चेहरा नहीं था। सिर्फ काली खाली जगह… और उसमें दो चमकती आंखें।

मैंने पूरी ताकत से उसे धक्का दिया और corridor में भागने लगा।

अब hospital बदल चुका था। दीवारों पर handprints थे। Ceiling से खून टपक रहा था। दूर कहीं बच्चे रो रहे थे।

अचानक मेरे phone पर फिर notification आया।

“भागने से कुछ नहीं होगा।”

मैंने phone फेंक दिया। लेकिन कुछ सेकंड बाद वो फिर मेरी जेब में था।

मेरे हाथ कांपने लगे।

तभी सामने operation theatre का दरवाजा खुला। अंदर bright white light जल रही थी।

मैं डरते हुए अंदर गया।

कमरे में पुराने surgical tools पड़े थे। Rusted scissors… खून लगे gloves… और बीच में operation table।

Table पर वही लड़की बैठी थी।

इस बार उसका चेहरा पूरी तरह normal था।

“डरो मत,” उसने कहा।

“तुम मुझे मारना चाहती हो?”

वो हँसी।

“मरे हुए इंसान को कोई कैसे मार सकता है?”

मैं चुप हो गया।

उसने धीरे से कहा—

“तुम्हारी problem ये नहीं कि तुम मर चुके हो। Problem ये है कि तुम सच accept नहीं कर पा रहे।”

मैंने पूछा, “फिर मेरे दोस्त की मौत?”

उसकी आंखें dark हो गईं।

“वो accident नहीं था।”

कमरे की light अचानक बंद हो गई।

Darkness में उसकी आवाज़ गूंजी—

“उसे shadows ने लिया।”

फिर अचानक light वापस आई।

लेकिन अब operation table खाली थी।

मेरे पीछे footsteps सुनाई दिए।

धीरे… धीरे… करीब आते हुए।

मैंने पलटकर देखा।

दर्जनों shadow people operation theatre के दरवाजे पर खड़े थे।

उनके शरीर इंसानों जैसे थे लेकिन सबके चेहरे गायब थे।

और हर shadow की गर्दन टेढ़ी थी… जैसे किसी ने तोड़ दी हो।

वे धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ने लगे।

मैं panic में बाहर भागा। Stairs उतरते हुए मैं गिर पड़ा। घुटने छिल गए लेकिन दर्द महसूस नहीं हुआ।

क्योंकि शायद सच में मैं अब इंसान नहीं था।

Ground floor पर पहुंचते ही main gate दिखाई दिया।

मैं पूरी ताकत से उसकी तरफ दौड़ा।

लेकिन जैसे ही बाहर निकलने वाला था… किसी ने मेरा नाम फुसफुसाया।

मैं रुक गया।

वो लड़की gate के पास खड़ी थी।

उसकी आंखों से खून बह रहा था।

“अगर बाहर गए… तो वो तुम्हें ढूंढ लेंगे।”

मैंने पूछा, “कौन?”

उसने धीरे से पीछे अंधेरे की तरफ इशारा किया।

और वहां… सैकड़ों shadows खड़ी थीं।

Chapter 6: The Burned Diary

उस रात के बाद मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

मैं hospital से कैसे बाहर निकला… मुझे याद नहीं। बस अगली सुबह मैं अपने कमरे में था। कपड़े मिट्टी और खून से सने हुए थे।

लेकिन सबसे डरावनी चीज़ कुछ और थी।

मेरे कमरे में जलने की बदबू आ रही थी।

मैंने पूरा घर check किया लेकिन कहीं कुछ नहीं था। फिर मेरी नजर study table पर गई। वहां एक पुरानी जली हुई diary रखी थी।

मैंने उसे उठाया। Cover आधा जला हुआ था। अंदर के pages काले पड़ चुके थे।

पहले page पर लिखा था:

“अगर कोई ये diary पढ़ रहा है… तो शायद वो भी फंस चुका है।”

मेरे हाथ कांपने लगे।

Diary उसी लड़की की थी।

उसमें लिखा था कि hospital में आग accident नहीं थी। किसी ने जानबूझकर fire लगाई थी। कई मरीज अंदर locked रह गए थे। Staff भाग गया था।

और सबसे आखिर में उसने लिखा था:

“मौत के बाद भी हम यहां से जा नहीं पाए।”

अचानक diary के बीच से एक photo गिरा।

Photo में hospital staff खड़ा था। लेकिन पीछे glass window में वही shadow figures दिखाई दे रहे थे।

मैंने photo zoom करके देखा।

उन shadows में से एक… मैं था।

मेरी सांस रुक गई।

तभी diary के आखिरी page पर कुछ words अपने आप उभरने लगे। जैसे कोई invisible हाथ लिख रहा हो।

“आज रात basement में आओ।”

उसके नीचे समय लिखा था।

3:00 AM

मैंने diary बंद कर दी। अब डर इतना बढ़ चुका था कि दिमाग काम करना बंद कर रहा था। लेकिन अंदर कहीं curiosity भी थी।

मैं सच जानना चाहता था।

रात 3 बजे मैं फिर hospital पहुंचा।

इस बार वहां अजीब सन्नाटा था। ना हवा… ना बारिश… ना कुत्तों की आवाज़।

Basement का रास्ता अंधेरे में डूबा हुआ था। जैसे ही नीचे उतरा, temperature अचानक बहुत कम हो गया। सांस से धुंध निकलने लगी।

नीचे पहुंचकर मैंने flashlight जलाई।

Basement में पुराने wheelchairs, broken beds और burnt files पड़ी थीं।

लेकिन सबसे आखिर में लोहे का एक बड़ा दरवाजा था।

उस पर अंदर से scratch marks बने हुए थे।

जैसे किसी ने बाहर निकलने की कोशिश की हो।

तभी पीछे से लड़की की आवाज़ आई।

“यहीं सब शुरू हुआ था।”

मैं धीरे से मुड़ा।

वो इस बार बिल्कुल इंसानों जैसी लग रही थी। ना जला चेहरा… ना सफेद आंखें।

“तुम्हारा नाम क्या है?” मैंने पूछा।

उसने कुछ सेकंड मुझे देखा।

“नाम भूल चुकी हूँ।”

उसकी आंखों में अजीब खालीपन था।

“मौत के बाद memories धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं।”

फिर उसने दरवाजे की तरफ देखा।

“लेकिन इनके अंदर जो है… वो कभी नहीं भूलता।”

अचानक दरवाजे के पीछे से जोरदार धमाका हुआ।

मैं डरकर पीछे हट गया।

फिर दूसरा धमाका।

और उसके बाद… किसी के सैकड़ों हाथ दरवाजे के नीचे से बाहर निकलने लगे।

Chapter 7: Basement Entity

मैं चीखते हुए पीछे हटा। उन हाथों की skin जली हुई थी। कुछ हाथों की उंगलियां आधी गायब थीं। वे सब मेरी तरफ बढ़ रहे थे।

लड़की ने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया।

उसका स्पर्श बर्फ जैसा ठंडा था।

“भागो!”

हम दोनों basement corridor में दौड़ने लगे। पीछे से दरवाजा टूटने की आवाज़ आई।

मैंने पलटकर देखा… और मेरी चीख निकल गई।

दरवाजे के पीछे कोई इंसान नहीं था।

वो एक विशाल काला आकार था। Smoke जैसा शरीर… और उसमें सैकड़ों चेहरे। सब चीख रहे थे।

उस entity की आंखें जलते कोयले जैसी थीं।

वो धीरे-धीरे corridor में घुस रहा था। दीवारें उसके touch से काली पड़ रही थीं।

लड़की ने कहा—

“ये वही चीज़ है जिसने हमें यहां बांध रखा है।”

“ये क्या है?”

“भूख।”

उसका जवाब सुनकर मैं confused हो गया।

“ये डर पर जीता है। मौत पर जीता है। जितने लोग यहां मरते गए… ये उतना मजबूत होता गया।”

हम stairs चढ़कर ऊपर पहुंचे। लेकिन पूरा hospital अब बदल चुका था।

हर corridor में dead bodies पड़ी थीं। Walls पर खून से messages लिखे थे।

DON’T LOOK BACK

RUN

IT SEES YOU

मेरे phone की flashlight अचानक बंद हो गई।

Darkness में सिर्फ footsteps सुनाई दे रहे थे। भारी… धीमे… लेकिन बहुत करीब।

फिर किसी ने मेरे कान के पास फुसफुसाया—

“तुम्हारी बारी…”

मैंने पीछे मुड़कर देखा।

वो entity मेरे ठीक पीछे खड़ी थी।

उसके शरीर से दर्जनों हाथ निकल रहे थे। हर हाथ किसी dead इंसान का था।

मैं panic में भागा लेकिन अचानक floor टूट गया और मैं नीचे गिर पड़ा।

जब आंख खुली तो मैं hospital के mortuary room में था।

कमरे में freezer drawers लगे थे। सब आधे खुले हुए।

और हर drawer के अंदर कोई body थी।

तभी एक drawer धीरे-धीरे अपने आप खुला।

उसके अंदर मेरा dead body पड़ा था।

इस बार body की आंखें खुल गईं।

और उसने मुस्कुराकर कहा—

“घर वापस आ गए?”

Chapter 8: Possession

मैं पीछे हट गया। लेकिन mortuary room का दरवाजा बंद हो चुका था।

मेरी dead body धीरे-धीरे freezer से बाहर निकलने लगी। उसकी हड्डियों के टूटने की आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी।

उसकी skin सड़ी हुई थी। आंखें पूरी काली।

“तुम कौन हो?” मैंने कांपते हुए पूछा।

वो हँसा।

“मैं तुम हूँ।”

उसकी आवाज़ मेरी ही जैसी थी।

अचानक कमरे की सारी lights blink करने लगीं। बाकी freezer drawers भी खुलने लगे।

उनमें से bodies बाहर आने लगीं। जले हुए मरीज… बिना आंखों वाले लोग… टूटे जबड़ों वाले बच्चे।

वे सब मेरी तरफ घूर रहे थे।

तभी वही लड़की दरवाजा तोड़कर अंदर आई।

“उसकी तरफ मत देखो!”

लेकिन देर हो चुकी थी।

मेरी dead body ने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया।

और उसी सेकंड मेरे दिमाग में हजारों आवाज़ें गूंजने लगीं।

चीखें… रोना… आग… मौत…

मैंने खुद को सड़क पर accident होते देखा। फिर hospital… फिर मेरा शरीर यहां लाया गया…

लेकिन कुछ गलत था।

मैं accident में नहीं मरा था।

मुझे किसी ने मारा था।

Flashback में मैंने किसी को देखा। Dark hoodie पहने एक आदमी। उसने मेरे सिर पर लोहे की rod मारी थी। फिर मेरी body को सड़क पर फेंक दिया था ताकि accident लगे।

मैं shock में जमीन पर गिर पड़ा।

लड़की ने मेरा चेहरा पकड़कर कहा—

“याद करो उसका चेहरा!”

लेकिन मैं साफ नहीं देख पाया।

तभी entity की आवाज़ पूरे mortuary में गूंजी।

“Truth belongs to the dead.”

कमरे की सारी bodies अचानक मेरी तरफ दौड़ पड़ीं।

हम दोनों भागकर बाहर निकले। Corridor में darkness फैल चुकी थी। पूरा hospital जैसे जिंदा हो गया था।

दीवारों के अंदर से लोग चीख रहे थे। Ceiling से हाथ बाहर निकल रहे थे।

मैंने लड़की से पूछा, “अब क्या करें?”

वो कुछ सेकंड चुप रही।

फिर बोली—

“अगर तुम्हें यहां से निकलना है… तो पहले अपनी मौत का सच जानना होगा।”

Chapter 9: CCTV Footage

अगले दिन मैं सीधे शहर के पुराने police station गया। वहां मेरे accident की file अभी भी बंद पड़ी थी। Official report में लिखा था— drunk driving accident.

लेकिन अब मुझे यकीन था… ये murder था।

मैंने somehow वहां काम करने वाले एक पुराने constable को convince किया कि मुझे case files देखने दे। उसने कहा case बहुत जल्दी बंद कर दिया गया था क्योंकि कोई evidence नहीं मिला।

फाइल में एक CD थी।

Hospital के बाहर लगे CCTV camera की footage।

मैं उसे लेकर घर आया। Laptop में CD चलाते ही screen पर grainy video दिखाई देने लगी।

रात… बारिश… empty road…

फिर video में मैं दिखाई दिया। मैं सड़क पर लड़खड़ाते हुए चल रहा था। शायद घायल था।

कुछ सेकंड बाद एक black car वहां रुकी।

उसमें से hoodie पहना आदमी उतरा।

उसने इधर-उधर देखा… फिर मेरे सिर पर rod से वार किया।

मैं जमीन पर गिर गया।

उस आदमी ने मुझे सड़क के बीच में घसीटा। फिर car लेकर मेरे ऊपर चढ़ा दी।

मेरी सांस रुक गई।

Video में उसका चेहरा कुछ सेकंड के लिए clear हुआ।

और मैं freeze हो गया।

वो मेरे ही apartment building का caretaker था।

मैं तुरंत नीचे भागा। लेकिन building पहुंचते ही पता चला…

वो दो महीने पहले ही मर चुका था।

Heart attack.

मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।

तभी lift के mirror में मुझे पीछे कोई खड़ा दिखाई दिया।

वही caretaker।

उसकी आंखें पूरी सफेद थीं।

उसने mirror के अंदर से मुस्कुराकर कहा—

“तुम्हें सच नहीं जानना चाहिए था।”

Lift अचानक बंद हो गई। Lights off।

और darkness में किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया।

Chapter 10: The Real Killer

मैंने panic में lift का emergency button दबाया लेकिन कुछ नहीं हुआ। अंदर घुटन बढ़ती जा रही थी।

अचानक lift अपने आप नीचे जाने लगी। Basement level… जो इस building में था ही नहीं।

Doors खुले।

बाहर वही पुराना hospital corridor था।

मैं समझ चुका था… अब reality और उस haunted दुनिया के बीच फर्क खत्म हो रहा था।

Caretaker darkness में खड़ा था।

“तुम्हें वहां नहीं जाना चाहिए था,” उसने कहा।

मैंने गुस्से में पूछा, “तुमने मुझे क्यों मारा?”

उसका चेहरा अजीब तरह से मुड़ने लगा। जैसे skin के नीचे कुछ और हो।

फिर उसने कहा—

“मैंने नहीं मारा। उसने करवाया।”

“किसने?”

तभी पीछे से वो entity दिखाई दी।

पूरा corridor उसकी darkness से भर गया।

Caretaker घुटनों पर गिर गया।

“ये सबको control करता है,” वो कांपते हुए बोला। “जितनी मौतें… उतनी ताकत…”

Entity की आवाज़ मेरे दिमाग में गूंजी।

“तुम खास हो…”

अचानक मुझे समझ आया।

वो लड़की मुझे बचा नहीं रही थी।

वो मुझे यहां रोककर रखना चाहती थी।

क्योंकि जितना मैं डरता जा रहा था… entity उतनी strong होती जा रही थी।

मैंने पीछे मुड़कर देखा।

वो लड़की corridor के end पर खड़ी थी।

इस बार उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी। सिर्फ emptiness।

“तुमने झूठ बोला…” मैंने कहा।

उसकी आंखों में आंसू आ गए।

“मैं अकेली थी…”

उसकी आवाज़ टूट गई।

“मुझे कोई चाहिए था जो मेरे साथ रहे।”

Entity उसके पीछे खड़ी थी। जैसे उसकी shadow।

तभी अचानक मुझे diary की एक line याद आई।

“अगर कोई हमें याद रखे… तो शायद हम खत्म नहीं होंगे।”

मैं समझ गया।

ये ghosts लोगों की memories से जुड़े थे।

जितना कोई उन्हें याद रखता… वो उतने strong रहते।

और अगर उन्हें भुला दिया जाए…

तो शायद वे खत्म हो सकते थे।

लेकिन तभी entity ने जोरदार चीख मारी। पूरा corridor टूटने लगा। Walls crack होने लगीं।

और shadows मेरी तरफ दौड़ पड़ीं।

Chapter 11: Final Ritual

मैं corridor में भागा। पूरा hospital collapse होने लगा था। Ceiling से concrete गिर रहा था। हर तरफ चीखें गूंज रही थीं।

लड़की ने पीछे से आवाज़ दी—

“रुको!”

लेकिन मैं नहीं रुका।

Main hall में पहुंचते ही मुझे burnt chapel दिखाई दिया। शायद hospital के अंदर कभी prayer room था।

बीच में एक पुराना mirror रखा था। वही mirror जो मैंने पहले देखा था।

उसकी cracked surface में shadows हिल रही थीं।

Entity की आवाज़ फिर गूंजी।

“कोई यहां से नहीं जाता…”

तभी लड़की मेरे सामने आ गई।

उसकी body धीरे-धीरे जलने लगी। Skin crack हो रही थी। आंखों से काला धुआं निकल रहा था।

“तुम समझते नहीं,” वो रोते हुए बोली। “अगर तुम चले गए… मैं फिर अकेली हो जाऊंगी।”

पहली बार मुझे उसके लिए डर नहीं… दुख महसूस हुआ।

वो सच में सालों से यहां फंसी हुई थी।

मैंने पूछा, “तुम्हें मुक्ति चाहिए?”

उसने धीरे से सिर हिलाया।

“लेकिन ये हमें जाने नहीं देगा।”

मैंने mirror की तरफ देखा।

उसमें countless faces थे। सब trapped souls।

मुझे अचानक समझ आया क्या करना होगा।

मैंने diary निकाली। आखिरी page पर faded words थे:

“Mirror is the gate.”

Entity मेरी तरफ बढ़ने लगी। पूरा room darkness से भर गया।

मैंने पूरी ताकत से mirror उठाया और chapel के center में fire pit पर दे मारा।

Mirror हजारों pieces में टूट गया।

उसी सेकंड hospital हिल उठा।

Entity ने ऐसी चीख मारी कि मेरे कानों से खून निकलने लगा।

Shadows एक-एक करके धुएं में बदलने लगे।

लड़की ने मुझे देखा। पहली बार उसके चेहरे पर शांति थी।

“धन्यवाद…”

उसकी body धीरे-धीरे रोशनी में बदलने लगी।

लेकिन तभी entity ने आखिरी बार हमला किया।

उसका काला हाथ सीधे मेरे सीने में घुस गया।

मेरी सांस रुक गई।

और फिर… सब कुछ सफेद हो गया।

Chapter 12: Last Message

जब मेरी आंख खुली… मैं hospital में था। लेकिन इस बार normal hospital।

Doctor मेरे ऊपर झुके हुए थे।

“Finally होश आ गया।”

उन्होंने बताया कि मेरा road accident हुआ था। मैं तीन दिन coma में था।

मैं confused हो गया।

तो क्या ये सब सपना था?

मैंने तुरंत phone मांगा।

WhatsApp खोला। Unknown Number गायब था। सारी chats deleted थीं।

मैंने राहत की सांस ली।

शायद सब hallucination था।

कुछ दिनों बाद मैं घर लौट आया। Life धीरे-धीरे normal होने लगी। लेकिन रात को कभी-कभी अब भी जलने की बदबू आती। कभी mirror में shadows दिखते।

एक रात करीब 2 बजे phone vibrate हुआ।

मैं freeze हो गया।

Screen पर सिर्फ एक message था।

Unknown Number.

“क्या तुम सच में सोचते हो… कि ये खत्म हो गया?”

मेरे हाथ कांपने लगे।

फिर दूसरा message आया।

एक photo।

Photo मेरे कमरे की थी।

मैं bed पर सो रहा था।

और मेरे पीछे… वही लड़की खड़ी थी।

लेकिन इस बार वो अकेली नहीं थी।

उसके पीछे दर्जनों shadows खड़े थे।

और सबसे पीछे… वो entity मुस्कुरा रही थी।

उसके नीचे आखिरी line लिखी थी:

“We are still here.”

उस रात मेरे कमरे की lights अपने आप बंद हो गईं।

और darkness में किसी ने धीरे से फुसफुसाया—

“अब तुम्हारी बारी है… किसी और को message भेजने की।”

फोन screen अपने आप glow होने लगी।

WhatsApp खुला।

एक नया unknown number सामने था।

Cursor blink कर रहा था।

जैसे कोई इंतजार कर रहा हो कि मैं पहला message भेजूं।

मेरी उंगलियां अपने आप keyboard पर चलने लगीं।

और मैंने type किया—

“जाग रहे हो?”

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