Hostel Mein Koi Ghoom Raha Tha | Haunted Hostel Story

BY SCARY CROCODILE TEAM

यह हमारे कॉलेज हॉस्टल की सबसे डरावनी रात थी, जब आधी रात को शुरू हुई paranormal activity ने हमारी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।

हमारा कॉलेज शहर से काफी दूर था। आसपास सिर्फ जंगल, पुरानी बिल्डिंग्स और एक अजीब सा सन्नाटा। दिन में सब ठीक लगता था, लेकिन जैसे ही रात होती… पूरा माहौल बदल जाता था। हॉस्टल के लंबे खाली corridors, टिमटिमाती tube lights, दीवारों से आती अजीब आवाज़ें… और हर समय ऐसा महसूस होना कि कोई हमें देख रहा है। Haunted Hostel Story

Haunted Hostel Story

Boys Hostel काफी पुराना था और उसके बारे में तरह-तरह की बातें सुनने को मिलती थीं। कोई कहता तीसरे फ्लोर पर रात में किसी लड़की के चलने की आवाज़ आती है। कोई बोलता washroom के mirror में पीछे कोई खड़ा दिखाई देता है। लेकिन हम लोगों ने कभी इन चीज़ों को seriously नहीं लिया।

मैं, रवि और समीर room number 213 में रहते थे। First year शुरू हुए अभी कुछ ही महीने हुए थे और honestly, हमें ghost stories सुनकर मज़ा आता था। रात में बैठकर डरावनी बातें करना, seniors को छेड़ना… यही चलता रहता था।

लेकिन एक रात सब कुछ बदल गया।

उस दिन शाम से ही मौसम बहुत खराब था। लगातार बारिश हो रही थी। बाहर हवा इतनी तेज चल रही थी कि खिड़कियां बार-बार हिल रही थीं। आसमान में बिजली चमकती तो कुछ सेकंड के लिए पूरा hostel सफेद रोशनी में दिखाई देता… फिर दोबारा अंधेरा।

करीब रात के 10:45 बजे corridor में footsteps सुनाई दिए। वॉर्डन हर कमरे में जाकर कुछ बोल रहे थे।

जब वो हमारे कमरे में आए तो उनका चेहरा देखकर पहली बार थोड़ा अजीब लगा। वो genuinely डरे हुए लग रहे थे।

उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और धीरे से बोले—

“आज रात कोई भी कमरे से बाहर नहीं निकलेगा… चाहे कुछ भी सुनाई दे।”

रवि तुरंत हंस पड़ा।

“क्यों सर? आज ghost घूमने वाली है क्या?”

लेकिन वॉर्डन बिल्कुल नहीं हंसे।

उन्होंने सीधा हमारी तरफ देखा और कहा—

“अगर कोई तुम्हारा नाम लेकर बुलाए… तब भी दरवाज़ा मत खोलना।”

इतना बोलकर वो तुरंत चले गए।

उनके जाते ही कमरे का माहौल बदल गया। कुछ सेकंड तक कोई कुछ नहीं बोला।

फिर समीर धीरे से बोला—

“भाई… ये warning normal नहीं थी।”

रवि अभी भी cool बनने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी आवाज़ में भी डर साफ महसूस हो रहा था।

करीब रात के 12 बजे अचानक पूरे hostel की बिजली चली गई।

पूरा फ्लोर अंधेरे में डूब गया।

बस corridor के आखिर में लगी लाल emergency light जल रही थी। उसकी light में पूरा hallway और भी creepy लग रहा था।

तभी…

ठक…

ठक…

ठक…

किसी ने हमारे दरवाज़े पर दस्तक दी।

हम तीनों एकदम चुप हो गए।

रवि ने धीरे से पूछा—

“कौन है?”

बाहर से कोई जवाब नहीं आया।

कुछ सेकंड बाद फिर वही knock हुई। इस बार पहले से ज्यादा तेज।

मैं धीरे-धीरे दरवाज़े के पास गया और peephole से बाहर देखा।

कॉरिडोर पूरी तरह खाली था।

कोई नहीं।

तभी बाहर से एक लड़की की आवाज़ आई—

“आदित्य… दरवाज़ा खोलो…”

मेरे शरीर में जैसे करंट दौड़ गया।

वो आवाज़ मेरी छोटी बहन जैसी थी।

Exactly वही आवाज़।

लेकिन वो यहां कैसे हो सकती थी?

समीर तुरंत बोला—

“दरवाज़ा मत खोलना… भाई ये कुछ गड़बड़ है।”

फिर बाहर से दोबारा आवाज़ आई—

“भैया… मुझे बहुत डर लग रहा है…”

इस बार आवाज़ रोने जैसी लग रही थी।

सच बताऊं तो एक पल के लिए मेरा मन हुआ दरवाज़ा खोल दूं। ऐसा लग रहा था सच में मेरी बहन बाहर खड़ी है।

लेकिन तभी मुझे वॉर्डन की बात याद आई।

“अगर कोई नाम लेकर बुलाए… तब भी दरवाज़ा मत खोलना…”

मेरे हाथ कांपने लगे।

फिर मेरी नजर दरवाज़े के नीचे गई।

वहां किसी की shadow दिखाई दे रही थी।

लेकिन उसके पैर…

उल्टे थे।

मेरी सांस वहीं अटक गई।

उस रात हमने दरवाज़ा नहीं खोला।

सुबह होते ही हम सीधे वॉर्डन के पास गए और उन्हें सब बता दिया।

हमारी बात सुनते ही उनके चेहरे का रंग बदल गया।

उन्होंने ऑफिस का दरवाज़ा बंद किया और कुछ देर चुप बैठे रहे।

फिर बोले—

“तुम लोगों ने उसे देख लिया…”

उसके बाद उन्होंने जो बताया, वो सुनकर हमारे होश उड़ गए।

करीब दस साल पहले इसी हॉस्टल में नेहा नाम की एक लड़की रहती थी। वो बहुत शांत रहती थी और किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी। एक रात उसकी मौत हो गई।

Officially कहा गया कि उसने खुद अपनी जान ले ली।

लेकिन असली बात कुछ और थी।

उसके साथ बहुत गलत हुआ था। उसने कई बार मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।

मरने से पहले उसने सिर्फ एक बात कही थी—

“अब कोई भी यहां चैन से नहीं रहेगा।”

उसकी मौत के बाद हॉस्टल में अजीब घटनाएं शुरू हो गईं।

Haunted Hostel Story

रात में लोगों को किसी लड़की के रोने की आवाज़ सुनाई देती। कई छात्रों ने corridor में सफेद कपड़ों में किसी को घूमते देखा।

लेकिन सबसे डरावनी बात ये थी—

वो लोगों को उनके अपने family members की आवाज़ में बुलाती थी।

जो भी उसके पीछे गया…

वो कभी normal नहीं रहा।

कुछ students mentally disturb हो गए।

और दो छात्र अचानक गायब हो गए।

तब से rule बना दिया गया—

रात 11 बजे के बाद कोई भी कमरे से बाहर नहीं निकलेगा।

उस दिन के बाद hostel में रहना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो गया।

हर रात डर लगता था।

हर छोटी आवाज़ suspicious लगती थी।

लेकिन असली डर अभी बाकी था।

अगली रात करीब 1 बजे अचानक हमारी खिड़की अपने आप खुल गई।

इतनी ठंडी हवा अंदर आई कि पूरा कमरा बर्फ जैसा लगने लगा।

तभी corridor में किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी।

जैसे कोई नंगे पैर धीरे-धीरे चल रहा हो।

वो footsteps हमारे कमरे के सामने आकर रुक गए।

फिर दरवाज़े पर किसी ने नाखून रगड़ने शुरू किए।

खरररर…

खरररर…

समीर डर के मारे रोने लगा।

रवि कांपती आवाज़ में बोला—

“क… कौन है?”

कुछ सेकंड तक बिल्कुल सन्नाटा रहा।

फिर बाहर से आवाज़ आई—

“दरवाज़ा खोलो…”

इस बार वो इंसानी आवाज़ नहीं लग रही थी।

ऐसा लग रहा था जैसे कई लोग एक साथ बोल रहे हों।

मैंने नीचे देखा।

दरवाज़े के नीचे से लंबे काले बाल अंदर आ रहे थे।

मेरे हाथ-पैर ठंडे पड़ गए।

तभी अचानक emergency light बंद हो गई।

पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

और उसी पल…

दरवाज़ा अपने आप खुलने लगा।

हम तीनों बिस्तर के कोने में सिमट गए।

अंधेरे में बस एक आकृति दिखाई दे रही थी।

सफेद कपड़े।

लंबे बाल।

और उल्टे पैर।

वो धीरे-धीरे कमरे के अंदर आई।

उसका चेहरा बालों से ढका हुआ था।

फिर उसने धीरे-धीरे सिर उठाया।

उसकी आंखें पूरी काली थीं।

और उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी।

वो सीधे मेरी तरफ देखने लगी।

फिर उसने मेरी बहन की आवाज़ में कहा—

“भैया…”

मेरे मुंह से जोर से चीख निकल गई।

उसी समय बाहर से मंत्र पढ़ने की आवाज़ आने लगी।

वॉर्डन दरवाज़े के बाहर खड़े थे।

उन्होंने कमरे के अंदर पवित्र जल फेंका।

अचानक वो लड़की जोर-जोर से चीखने लगी।

उसकी चीख इतनी डरावनी थी कि हमारे कान सुन्न हो गए।

कुछ सेकंड बाद वो धुएं की तरह गायब हो गई।

उस रात के बाद हमने तय कर लिया कि अब इस हॉस्टल में नहीं रहेंगे।

लेकिन जाने से एक रात पहले आखिरी घटना हुई।

करीब 3 बजे मेरी अचानक आंख खुली।

कमरे में अजीब सन्नाटा था।

मैं पानी पीने उठा तभी मेरी नजर दरवाज़े पर गई।

दरवाज़े के नीचे किसी की shadow दिखाई दे रही थी।

मैं वहीं जम गया।

फिर बाहर से धीमी आवाज़ आई—

“आदित्य…”

मेरे पूरे शरीर में डर दौड़ गया।

तभी दरवाज़े के नीचे से एक कागज़ अंदर आया।

उस पर लिखा था—

“इस बार वॉर्डन तुम्हें नहीं बचा पाएगा…”

मेरे हाथ कांपने लगे।

मैंने तुरंत रवि और समीर को उठाया।

हमने हिम्मत करके दरवाज़ा खोला।

कॉरिडोर पूरी तरह खाली था।

लेकिन hallway के आखिर में कोई खड़ा था।

सफेद कपड़ों में।

लंबे बालों के साथ।

और उसके पैर…

उल्टे थे।

उसने धीरे-धीरे अपना सिर हमारी तरफ घुमाया।

और मुस्कुराने लगी।

फिर अचानक पूरी corridor light बंद हो गई।

उस रात के बाद हमने वो हॉस्टल हमेशा के लिए छोड़ दिया।

लेकिन आज भी…

जब भी देर रात तेज बारिश होती है…

मुझे कभी-कभी वही आवाज़ सुनाई देती है—

और फिर कोई धीरे से कहता है—

“दरवाज़ा खोलो…”

Horror genre की जानकारी: Horror Fiction Guide

अगर आपको यह Hostel Horror Story पसंद आई, तो हमारी दूसरी डरावनी कहानी भी पढ़ें:

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