Karva Chauth Horror Story in Hindi

अक्टूबर की हल्की ठंड शुरू हो चुकी थी। पूरे शहर में करवा चौथ की तैयारियाँ कई दिनों से चल रही थीं। ज्वेलरी शोरूम, ब्यूटी पार्लर और कपड़ों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही थी। शाम होते-होते हर सोसाइटी रंग-बिरंगी लाइटों से सज जाती। छतों पर महिलाएँ पूजा की थालियाँ लेकर चाँद निकलने का इंतज़ार करतीं और बच्चे इधर-उधर दौड़ते रहते। Karva Chauth Horror Story in Hindi

Karva Chauth Horror Story in Hindi

मुंबई के पॉश इलाके में बनी स्काई हेवन रेजिडेंसी भी उस शाम कुछ अलग ही दिख रही थी।

सोसाइटी के सेंट्रल गार्डन में करवा चौथ का सामूहिक कार्यक्रम रखा गया था। स्टेज, फूलों की सजावट, लाइटें और संगीत—सब कुछ बिल्कुल परफेक्ट था।

इसी कार्यक्रम की शूटिंग के लिए पहुँचा था अभिषेक मेहरा

उम्र बत्तीस साल।

पिछले आठ वर्षों से वह प्रोफेशनल इवेंट फोटोग्राफर था। शादी, कॉर्पोरेट इवेंट, फैशन शो—हर तरह की शूटिंग कर चुका था। कैमरे के पीछे उसका आत्मविश्वास इतना मजबूत था कि लोग मजाक में कहते थे, “अभिषेक की नज़र से कुछ भी नहीं बच सकता।”

उसे भूत-प्रेत जैसी बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था।

शाम सात बजे तक उसने सैकड़ों तस्वीरें ले ली थीं।

बच्चे खेल रहे थे।

महिलाएँ मेहंदी दिखा रही थीं।

पति-पत्नी हँसते हुए फोटो खिंचवा रहे थे।

सब कुछ सामान्य था।

लेकिन पहली अजीब बात तब हुई जब उसने कैमरे की स्क्रीन पर एक फोटो ज़ूम की।

पीछे, स्टेज से काफी दूर…

एक लाल साड़ी पहने घूँघट वाली महिला खड़ी दिखाई दे रही थी।

चेहरा पूरी तरह ढका हुआ।

अभिषेक ने सिर उठाकर उसी दिशा में देखा।

वहाँ कोई नहीं था।

उसे लगा शायद फोटो लेते समय कोई महिला वहाँ से गुज़री होगी।

उसने ध्यान नहीं दिया।

कुछ मिनट बाद उसने दूसरी तस्वीर ली।

इस बार वही महिला बच्चों के झूले के पास दिखाई दी।

फिर वही घूँघट।

वही लाल साड़ी।

लेकिन आसपास खड़े किसी भी व्यक्ति का ध्यान उसकी तरफ नहीं था।

अभिषेक तुरंत कैमरा नीचे करके वहाँ पहुँचा।

जगह खाली थी।

उसने गार्ड से पूछा,

“अभी यहाँ लाल साड़ी में कोई महिला खड़ी थी क्या?”

गार्ड ने इधर-उधर देखा।

“नहीं सर।”

“अभी तो…”

“मैं यहीं हूँ पिछले बीस मिनट से।”

अभिषेक थोड़ा असहज हुआ, लेकिन काम में लग गया।

रात बढ़ती गई।

चाँद निकलने का समय करीब आ रहा था।

अब सभी महिलाएँ छत पर पहुँच चुकी थीं।

अभिषेक लगातार फोटो क्लिक कर रहा था।

Karva Chauth Horror Story in Hindi

फिर उसने गलती से कैमरे का बर्स्ट मोड ऑन कर दिया।

एक ही पल में दस तस्वीरें खिंच गईं।

जब उसने उन्हें देखा…

पहली तस्वीर सामान्य थी।

दूसरी में…

वही महिला।

तीसरी में…

वह थोड़ी और करीब।

चौथी में…

और करीब।

पाँचवीं…

अब वह कैमरे के बिल्कुल सामने खड़ी थी।

लेकिन अजीब बात यह थी कि बाकी सभी लोग अपनी जगह बिल्कुल स्थिर थे।

जैसे किसी ने सिर्फ उसी महिला को हर फ्रेम में आगे बढ़ाया हो।

अभिषेक का गला सूख गया।

उसने तुरंत ऊपर देखा।

सामने कोई नहीं था।

उसने कैमरे का मेमोरी कार्ड निकाला।

सोचा शायद कार्ड खराब हो गया है।

तभी उसके पीछे से एक महिला की आवाज आई।

“फोटो अच्छे आए?”

अभिषेक पलटा।

सोसाइटी की सेक्रेटरी थी।

उसने मुस्कुराकर कहा,

“हाँ… बस कैमरा थोड़ा अजीब व्यवहार कर रहा है।”

“कैसा?”

अभिषेक ने तस्वीरें दिखाईं।

महिला कुछ सेकंड तक स्क्रीन देखती रही।

फिर उसका चेहरा उतर गया।

“ये… ये तस्वीरें किसने लीं?”

“मैंने।”

“नहीं… मेरा मतलब… इसमें जो औरत है…”

“आप पहचानती हैं?”

महिला ने तुरंत कैमरा बंद कर दिया।

“ये बातें यहाँ मत कीजिए।”

इतना कहकर वह चली गई।

उसकी घबराहट ने अभिषेक की बेचैनी और बढ़ा दी।

कार्यक्रम खत्म होने के बाद वह पार्किंग में अपना सामान पैक कर रहा था।

तभी वही सेक्रेटरी उसके पास आई।

धीरे से बोली,

“अगर सच जानना है… तो मेरे साथ आइए।”

दोनों सोसाइटी के पुराने रिकॉर्ड रूम में पहुँचे।

कमरे में धूल भरी फाइलें रखी थीं।

महिला ने एक पुरानी फाइल निकाली।

उसमें पाँच साल पुरानी अखबार की कटिंग थी।

‘स्काई हेवन रेजिडेंसी में महिला लापता।’

नाम था—

सोनल अरोड़ा।

वह इसी सोसाइटी में रहती थी।

करवा चौथ की रात अचानक गायब हो गई।

उसके पति ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई।

लेकिन न तो शव मिला…

न कोई सुराग।

कुछ महीनों बाद मामला बंद हो गया।

महिला ने धीमी आवाज में कहा,

“उसके बाद से हर साल… सिर्फ इसी रात… कुछ लोग लाल साड़ी वाली किसी औरत को देखने की बात कहते हैं।”

अभिषेक ने पूछा,

“पुलिस ने पति पर शक नहीं किया?”

“किया था… लेकिन सबूत नहीं मिले।”

“और अब?”

“वह दो साल बाद यह फ्लैट बेचकर चला गया।”

अभिषेक पूरी रात उन तस्वीरों को देखता रहा।

एक बात बार-बार उसका ध्यान खींच रही थी।

हर तस्वीर में वह महिला…

अपनी उंगली से एक ही दिशा की ओर इशारा कर रही थी।

लेकिन पहले उसने इस पर ध्यान ही नहीं दिया था।

उस दिशा में था…

सोसाइटी का पुराना मेंटेनेंस ब्लॉक।

जो पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा था।

अगली सुबह…

अभिषेक अकेले वहाँ पहुँचा।

दरवाज़े पर जंग लगा ताला था।

लेकिन अंदर से हल्की बदबू आ रही थी।

उसने पुलिस को सूचना दी।

ताला तोड़ा गया।

अंदर वर्षों पुराना स्टोर रूम था।

दीवार नई सीमेंट से पैच की हुई थी।

पुलिस ने उसे तोड़ा।

कुछ ही देर बाद…

अंदर से इंसानी कंकाल बरामद हुआ।

डीएनए रिपोर्ट ने पुष्टि की—

वह सोनल अरोड़ा ही थी।

जाँच दोबारा शुरू हुई।

पुराने कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांज़ैक्शन और छिपाए गए दस्तावेज़ों के आधार पर पुलिस ने उसके पूर्व पति को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि संपत्ति और बीमा के पैसों के लालच में उसने सोनल की हत्या कर दी थी और शव को उसी स्टोर रूम की दीवार में चुनवा दिया था।

मामला वर्षों बाद सुलझ गया।

कुछ दिन बाद पुलिस ने अभिषेक से वे सभी तस्वीरें माँगीं।

लेकिन जब उसने मेमोरी कार्ड खोला…

हर तस्वीर सामान्य थी।

लाल साड़ी वाली महिला कहीं नहीं थी।

जैसे वह कभी वहाँ थी ही नहीं।

अभिषेक ने सोचा शायद उसने सब कुछ भ्रम में देखा था।

लेकिन उसी समय उसे कैमरे के बैग की छोटी जेब में एक पुरानी, फीकी तस्वीर मिली।

वह तस्वीर उसने कभी नहीं खींची थी।

उसमें वही लाल साड़ी वाली महिला खड़ी थी…

इस बार उसका घूँघट थोड़ा हट चुका था।

चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।

और तस्वीर के पीछे सिर्फ एक पंक्ति लिखी थी—

“सच को सामने लाने के लिए कभी-कभी किसी एक गवाह की ज़रूरत होती है…”

अभिषेक ने फिर कभी उस तस्वीर को किसी को नहीं दिखाया।

लेकिन आज भी…

हर करवा चौथ की रात जब वह किसी इवेंट की शूटिंग करता है…

तो पहली फोटो लेने से पहले एक पल के लिए कैमरे की स्क्रीन ज़रूर देखता है।

उसे डर अब चाँद से नहीं लगता…

बल्कि इस बात से लगता है कि कहीं फिर कोई ऐसा चेहरा कैमरे में न आ जाए…

जिसे वहाँ मौजूद कोई और देख ही न सके।

अभिषेक ने उस पुरानी तस्वीर को कई बार उलट-पलट कर देखा।

कागज़ इतना पुराना था कि उसके किनारे पीले पड़ चुके थे, लेकिन तस्वीर में दिख रही लाल साड़ी वाली महिला का चेहरा बिल्कुल साफ था।

वह मुस्कुरा रही थी।

डरावनी मुस्कान नहीं…

बल्कि ऐसी मुस्कान, जैसे वर्षों बाद किसी को न्याय मिला हो।

अभिषेक ने तस्वीर अपने बैग में रख ली और किसी से उसका ज़िक्र नहीं किया।

उसने सोचा कि अब सब खत्म हो चुका है।

कातिल जेल जा चुका था।

सोनल की आत्मा को शायद शांति मिल गई होगी।

लेकिन वह गलत था।

लगभग एक महीने बाद उसे एक नया फोन आया।

इस बार शहर के दूसरे छोर पर बनी एक आलीशान सोसाइटी में दिवाली समारोह की शूटिंग करनी थी।

रात भर उसने हजारों तस्वीरें खींचीं।

काम खत्म होने के बाद आदत के अनुसार वह कैमरे की स्क्रीन पर फोटो देखने लगा।

अचानक उसका दिल धड़कना बंद सा हो गया।

एक तस्वीर में…

लाल साड़ी वाली वही महिला फिर दिखाई दे रही थी।

लेकिन यह जगह तो स्काई हेवन रेजिडेंसी नहीं थी।

यह दूसरी सोसाइटी थी।

अभिषेक ने तुरंत बाकी तस्वीरें देखीं।

अब वह महिला हर तस्वीर में नहीं थी।

सिर्फ एक फ्रेम में दिखाई दी थी।

और इस बार उसके हाथ का इशारा किसी इंसान की तरफ नहीं…

बल्कि पार्किंग में खड़ी एक काली एसयूवी की तरफ था।

अभिषेक के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

उसने कैमरा बंद कर दिया।

“नहीं… अब मैं किसी मामले में नहीं पड़ूँगा।”

उसने खुद से कहा।

लेकिन अगले ही दिन सुबह टीवी पर खबर चली।

उसी सोसाइटी के एक कारोबारी की लाश उसकी कार के अंदर मिली थी।

पुलिस इसे आत्महत्या मान रही थी।

अभिषेक की नज़र तुरंत टीवी स्क्रीन पर गई।

कार वही थी…

जिसकी ओर तस्वीर में वह महिला इशारा कर रही थी।

उसने पहली बार महसूस किया कि यह कोई साधारण संयोग नहीं था।

उसने हिम्मत करके उस इंस्पेक्टर से संपर्क किया जिसने सोनल का केस दोबारा खोला था।

इंस्पेक्टर निखिल देशमुख ने सारी तस्वीरें ध्यान से देखीं।

उन्होंने कहा,

“अगर पिछली बार तुम्हारी तस्वीरों ने सच तक पहुँचाया था… तो इस बार भी इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”

जाँच शुरू हुई।

कार की दोबारा फोरेंसिक जाँच हुई।

जो आत्महत्या दिखाई दे रही थी, वह असल में बेहद योजनाबद्ध हत्या निकली।

कुछ ही दिनों में कारोबारी के बिजनेस पार्टनर को गिरफ्तार कर लिया गया।

अभिषेक अब पूरी तरह उलझ चुका था।

दो अलग-अलग घटनाएँ…

दो अलग-अलग शहर…

लेकिन हर बार वही महिला।

उसने तय किया कि अब उसे इस रहस्य की जड़ तक पहुँचना ही होगा।

उसने सोनल के पुराने परिवार वालों से मुलाकात की।

सोनल की बूढ़ी माँ ने एक पुराना एल्बम निकालकर उसके सामने रख दिया।

उसमें सोनल की कई तस्वीरें थीं।

एक तस्वीर के पीछे हाथ से लिखा था—

“अगर कभी मेरी आवाज़ कोई न सुन सके… तो शायद मेरी तस्वीरें सच बोलें।”

अभिषेक ने चौंककर पूछा,

“ये किसने लिखा था?”

बूढ़ी महिला की आँखें भर आईं।

“सोनल बचपन से फोटोग्राफी की शौकीन थी। वह कहती थी कि कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता।”

उसी रात अभिषेक अपने स्टूडियो में बैठा पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना कर रहा था।

अचानक कंप्यूटर अपने आप चालू हो गया।

स्क्रीन पर एक नई तस्वीर खुली।

वह तस्वीर उसने कभी खींची ही नहीं थी।

उसमें एक लंबा अँधेरा गलियारा था।

आखिरी छोर पर वही लाल साड़ी वाली महिला खड़ी थी।

इस बार उसने पहली बार अपना घूँघट पूरी तरह हटा दिया।

उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था।

उसने कैमरे की ओर देखा…

फिर धीरे-धीरे अपने होंठ हिलाए।

स्पीकर बंद होने के बावजूद अभिषेक को साफ सुनाई दिया—

“अब मेरा काम पूरा हो गया।”

अगले ही पल तस्वीर अपने आप गायब हो गई।

साथ ही…

सोनल की हर तस्वीर, हर परछाईं और हर रहस्यमयी फ्रेम कैमरे से हमेशा के लिए मिट गए।

उस दिन के बाद अभिषेक ने हजारों इवेंट शूट किए।

करवा चौथ…

दिवाली…

शादियाँ…

कोई अजीब तस्वीर फिर कभी नहीं मिली।

उसे यकीन हो गया कि सब समाप्त हो चुका है।

लेकिन ठीक एक साल बाद…

फिर करवा चौथ की रात आई।

आदत के मुताबिक उसने पहली फोटो ली।

स्क्रीन पर नज़र डाली।

इस बार वहाँ कोई लाल साड़ी वाली महिला नहीं थी।

अभिषेक ने राहत की साँस ली।

तभी उसने फोटो के बिल्कुल कोने में कुछ देखा।

एक सात-आठ साल की बच्ची अपनी माँ का हाथ पकड़े खड़ी थी।

उसके पीछे…

धुँधली सी एक वृद्ध महिला दिखाई दे रही थी।

चेहरे पर सफेद घूँघट।

वह बच्ची की ओर नहीं…

सीधे कैमरे की ओर देख रही थी।

और उसके होंठ धीरे-धीरे हिले—

“अब किसी और को मेरी ज़रूरत है…”

अगले ही पल वह आकृति गायब हो गई।

अभिषेक ने उसी रात कैमरा हमेशा के लिए बेच दिया।

लोगों को लगा कि उसने पेशा बदल लिया है।

लेकिन सच सिर्फ वही जानता था।

कुछ कैमरे…

सिर्फ तस्वीरें नहीं खींचते।

वे उन सच्चाइयों को भी कैद कर लेते हैं…

जो दुनिया की किसी अदालत में दिखाई नहीं देतीं।

और शायद…

जब तक इस दुनिया में कोई छिपा हुआ अपराध बाकी है…

किसी न किसी कैमरे के लेंस में…

एक अनजान परछाईं हमेशा दिखाई देती रहेगी।

National Portal of India – Indian Festivals
https://www.india.gov.in/

READ MORE HORROR STORIES

1 thought on “Karva Chauth Horror Story in Hindi”

  1. Pingback: Danav: Haunted Cave – पहाड़ की गुफा में कैद दानव | Hindi Horror Story - Scary Crocodile

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top