WRITER- Prakash Yadav
रात के ठीक 2:13 बजे हॉस्टल की तीसरी मंज़िल से किसी लड़की के रोने की आवाज़ आई… जबकि उस फ्लोर पर पिछले 6 महीनों से कोई रहता ही नहीं था।
गार्ड ने ऊपर जाकर देखा… कमरा नंबर 307 अंदर से बंद था।
लेकिन खिड़की के शीशे पर उंगलियों से लिखा था —
“Mujhe yahan se nikalo…”
Chapter 1 — Kota की वो बारिश वाली रात
Kota Real Horror Story का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में IIT-JEE, coaching institutes, toppers और pressure आता है। लेकिन इस शहर की कुछ गलियाँ ऐसी भी हैं जहाँ रात के बाद लोग अकेले नहीं जाते।
साल 2021।

बारिश का मौसम था। पूरी Kota city गीली सड़कों, dim street lights और coaching banners से भरी हुई थी। हर दूसरी बिल्डिंग पर AIR-1 की फोटो लगी थी… लेकिन उन चमकते चेहरों के पीछे हजारों टूटे हुए बच्चे भी थे।
Talwandi area के पास एक पुराना हॉस्टल था — Shiv Residency।
चार मंज़िला बिल्डिंग। बाहर से बिल्कुल normal। लेकिन आस-पास वाले लोग रात में उस तरफ देखना भी पसंद नहीं करते थे।
मैं वहाँ रहने नहीं गया था। मेरा cousin, Ritesh, वहाँ NEET की तैयारी कर रहा था।
एक शाम उसका कॉल आया।
“Bhai… tu 2-3 दिन के लिए aa sakta hai?”
उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“क्या हुआ?”
कुछ सेकंड चुप्पी रही।
Kota Real Horror Story फिर उसने धीरे से कहा…
“Yahan kuch theek nahi hai…”
Chapter 2 — पहला शक
मैं अगले दिन Kota पहुँच गया।
बारिश लगातार हो रही थी। स्टेशन से auto लेकर जब Shiv Residency पहुँचा, तो बिल्डिंग को देखकर अजीब feeling आई।
सामने टूटी हुई नेम प्लेट।
गलियारे में सीलन की बदबू।
ऊपर जाते वक्त लोहे की सीढ़ियाँ हर कदम पर चरमराती थीं।
Ritesh तीसरी मंज़िल पर रहता था।
कमरा खोला तो उसका चेहरा देखकर मैं रुक गया।
आँखों के नीचे काले घेरे।
चेहरा पीला।
कमरे में किताबें बिखरी हुई थीं… लेकिन सबसे अजीब चीज़ थी कमरे की दीवार।
एक कोने में बार-बार पेन से लिखा गया था —
“Sone mat dena…”
मैंने पूछा, “ये क्या है?”
उसने तुरंत notebook रखकर दीवार छुपा दी।
“कुछ नहीं… बस मज़ाक था।”
लेकिन उसकी आँखें झूठ बोल रही थीं।
रात को करीब 11 बजे हम दोनों Maggi खा रहे थे।
तभी ऊपर वाली मंज़िल से भारी चीज़ घसीटने की आवाज़ आई।
घ्ररररररर…
मैंने पूछा, “ऊपर कौन रहता है?”
Ritesh चुप हो गया।
फिर बोला —
“कोई नहीं।”
“फिर आवाज़?”
उसने सीधे मेरी आँखों में देखा।
“यही तो problem है…”
Chapter 3 — Room 307
अगले दिन मैंने हॉस्टल explore करना शुरू किया।
वॉर्डन, Mahesh uncle, हमेशा nervous रहते थे। बात करते-करते अचानक चुप हो जाते।
तीसरी मंज़िल के आखिर में एक बंद कमरा था।
307।
उसके बाहर पुराना ताला लगा था।
लेकिन सबसे डरावनी चीज़ थी दरवाज़े पर खरोंच के निशान।
ऐसे जैसे किसी ने अंदर से नाखूनों से दरवाज़ा नोचा हो।
मैंने नीचे चाय वाले से पूछा।
वो पहले चुप रहा।
फिर धीरे से बोला —
“भैया… उस कमरे का नाम मत लिया करो रात में।”
“क्यों?”
उसने इधर-उधर देखा।
“दो साल पहले एक लड़की रहती थी वहाँ। Coaching pressure… depression… फिर suicide।”
मैंने पूछा, “बस इतनी सी बात?”
चाय वाले ने सिगरेट बुझाई।
“Suicide के बाद भी उस कमरे से आवाज़ें आती थीं…”
बारिश और तेज़ हो गई।
मेरे हाथ अपने-आप ठंडे पड़ने लगे।
Chapter 4 — वो रात
उस रात करीब 1 बजे मेरी नींद खुली।
कमरे में अंधेरा था।
लेकिन बाहर corridor में किसी के चलने की आवाज़ आ रही थी।
टक…
टक…
टक…
धीरे-धीरे।
जैसे कोई नंगे पैर चल रहा हो।
मैंने सोचा कोई student होगा।
फिर अचानक आवाज़ रुक गई।
हमारे दरवाज़े के ठीक बाहर।
कुछ सेकंड silence।
फिर…
ठक… ठक… ठक…
तीन बार knock हुआ।
Ritesh पसीने में भीगा बैठा था।
उसने फुसफुसाकर कहा —
“दरवाज़ा मत खोलना…”
Knock फिर हुआ।
इस बार थोड़ा तेज़।
ठक… ठक… ठक…
मैंने पूछा, “कौन है?”
कोई जवाब नहीं।
फिर बहुत धीमी लड़की की आवाज़ आई —
“Please… दरवाज़ा खोल दो…”
मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।
Ritesh ने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया।
“मत खोल…”
लेकिन उसी समय corridor की light अपने-आप blink करने लगी।
और फिर…
दरवाज़े के नीचे से किसी के लंबे बाल अंदर दिखाई दिए।
जैसे कोई बाहर झुककर नीचे देख रहा हो।
मेरी सांस रुक गई।
अचानक बाहर से scratching की आवाज़ आने लगी।
खर्र… खर्र…
जैसे नाखून लकड़ी पर रगड़ रहे हों।
फिर वही आवाज़ —
“Tum log so kyu nahi rahe…”
और उसके बाद सब शांत।
पूरी रात हम दोनों बैठे रहे।
Chapter 5 — CCTV Footage
अगली सुबह मैंने तय किया कि अब ये सब पता करना पड़ेगा।
Ground floor पर छोटा CCTV room था।
पुराना monitor।
मैंने guard से रात की recording दिखाई।
पहले वो मना करता रहा।
फिर बोला, “देखोगे तो पछताओगे।”
Footage शुरू हुई।
रात 1:07 AM।
Corridor खाली था।
फिर अचानक camera में static आया।
Screen हिली।
और अगले frame में…
एक लड़की दिखाई दी।
पतली।
भीगे बाल।
सफेद T-shirt।
वो धीरे-धीरे corridor में चल रही थी।
लेकिन सबसे खतरनाक चीज़…
उसके पैर उल्टी दिशा में थे।
मेरी रीढ़ जम गई।
वो हमारे कमरे के सामने रुकी।
Camera के बिल्कुल पास आकर उसने ऊपर देखा।
उसका चेहरा साफ दिखा।
आँखें पूरी काली।
और होंठों पर अजीब मुस्कान।
फिर screen बंद।
मैंने guard की तरफ देखा।
वो काँप रहा था।
“ये footage delete हो जाती है अपने-आप… हर बार…”
Chapter 6 — असली कहानी
शाम को Mahesh uncle ने खुद मुझे बुलाया।
कमरे में पुराने papers पड़े थे।
उन्होंने धीरे से कहा —
“उस लड़की का नाम Niharika था।”
NEET aspirant।
Topper।
लेकिन घरवालों का pressure बहुत ज्यादा था।
दिन-रात पढ़ाई।
No friends.
No life.
एक दिन result खराब आया।
उस रात उसने Room 307 में fan से लटककर suicide कर लिया।
मैंने पूछा, “फिर?”
Mahesh uncle की आँखें नीचे झुक गईं।
“तीन दिन बाद उस कमरे में रहने आए नए लड़के ने भी suicide कर लिया…”
“कैसे?”
“उसने diary में लिखा था —
‘रात में कोई लड़की मेरे कान में बोलती है… Sone mat dena…’”
कमरे में silence छा गया।
बारिश की बूंदें खिड़की पर पड़ रही थीं।
टक… टक… टक…
अचानक Mahesh uncle ने कहा —
“तुम्हारा cousin safe नहीं है।”
“क्या मतलब?”
“जो लोग उसे सुन लेते हैं… वो धीरे-धीरे बदल जाते हैं…”
Chapter 7 — बदलाव
अगले दो दिन में Ritesh पूरी तरह बदल गया।
वो रात में जागता रहता।
दीवारों को घूरता।
कभी-कभी खुद से बातें करता।
एक रात मैंने उसे balcony में खड़े देखा।
तीसरी मंज़िल।
बारिश हो रही थी।
वो नीचे देख रहा था।
मैंने पीछे से पूछा —
“क्या कर रहा है?”
उसने बिना मुड़े कहा —
“नीचे बहुत शांति है…”
उसकी आवाज़ normal नहीं थी।
फिर धीरे से बोला —
“वो कहती है… अगर नीचे कूद जाऊँ तो सब pressure खत्म हो जाएगा…”
मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।
मैंने उसे पकड़कर अंदर लाया।
उस रात उसने सोया नहीं।
बस एक ही लाइन बार-बार बोलता रहा —
“वो अकेली है…”
Chapter 8 — Room 307 खुला
तीसरी रात।
पूरे हॉस्टल की बिजली चली गई।
Emergency lights जल रही थीं।
अचानक ऊपर से जोरदार चीख सुनाई दी।
मैं और guard दौड़कर तीसरी मंज़िल पहुँचे।
307 का दरवाज़ा खुला हुआ था।
अंदर अंधेरा।
लेकिन कमरे से किसी के रोने की आवाज़ आ रही थी।
Guard अंदर जाने से डर रहा था।
मैंने phone torch on की।
कमरे की दीवारों पर black marks थे।
छत पर fan हिल रहा था।
और floor पर बैठा था…
Ritesh।
उसकी पीठ हमारी तरफ थी।
वो किसी से बात कर रहा था।
“मैं आ जाऊँगा… बस इन्हें मत छूना…”
मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
“Ritesh…”
वो अचानक पलटा।
उसकी आँखें लाल थीं।
चेहरे पर अजीब मुस्कान।
और उसके गले पर नाखूनों के निशान।
तभी कमरे के कोने से किसी लड़की की हँसी आई।
धीमी…
लेकिन बेहद डरावनी।
मैंने torch उस तरफ घुमाई।
वहाँ कोई नहीं था।
लेकिन दीवार पर ताज़ा लिखा था —
“Ek aur mil gaya…”
Chapter 9 — Diary
कमरे में एक पुरानी diary मिली।
शायद Niharika की।
उसके pages गीले थे।
लेकिन कुछ बातें साफ लिखी थीं।
“यह शहर इंसानों को machine बना देता है…”
“सबको rank चाहिए… किसी को इंसान नहीं चाहिए…”
“मैं तीन दिन से सोई नहीं हूँ…”
“कल रात फिर वही लड़की आई…”
मैं रुक गया।
लड़की?
मतलब Niharika भी किसी और को देखती थी?
आगे लिखा था —
“उसने कहा, अगर मैं मर जाऊँगी तो वो अकेली नहीं रहेगी…”
मेरे हाथ काँपने लगे।
Diary का आखिरी page फटा हुआ था।
लेकिन नीचे एक लाइन बची थी —
“असल में Room 307 में मैंने suicide नहीं किया…”
Chapter 10 — सच
अगले दिन मैंने पुराने पुलिस records निकलवाए।
जो पता चला, उसने सब बदल दिया।
दो साल पहले सिर्फ Niharika नहीं मरी थी।
उससे पहले भी उसी कमरे में एक और student की मौत हुई थी।
नाम — Kavya.
Official report — Suicide.
लेकिन postmortem में उसकी उंगलियों के नाखून टूटे हुए थे।
जैसे उसने मरने से पहले बहुत struggle किया हो।
और सबसे shocking बात…
उसकी मौत के बाद ही Niharika उस कमरे में shift हुई थी।
मतलब…
शायद शुरुआत Niharika से नहीं हुई थी।
Chapter 11 — आखिरी रात
मैंने फैसला किया कि Ritesh को लेकर सुबह Kota छोड़ दूँगा।
लेकिन उस रात सब खत्म हो गया।
करीब 3 बजे अचानक Ritesh गायब था।
पूरा हॉस्टल अंधेरे में डूबा था।
ऊपर terrace का दरवाज़ा खुला हुआ था।
बारिश और तेज़।
मैं दौड़कर ऊपर गया।
Terrace पर Ritesh खड़ा था।
किनारे पर।
उसके सामने कोई लड़की खड़ी थी।
पीठ हमारी तरफ।
लंबे भीगे बाल।
सफेद कपड़े।
वो धीरे-धीरे उसके कान में कुछ बोल रही थी।
मैं चिल्लाया —
“Ritesh!”
लड़की ने धीरे से गर्दन घुमाई।
उसका चेहरा देखकर मेरे पैरों से ताकत निकल गई।
वो Niharika नहीं थी।
उसका चेहरा सड़ा हुआ था।
आँखें नहीं थीं।
और गर्दन टेढ़ी थी।
वो मुस्कुराई।
फिर अचानक Ritesh ने terrace से छलांग लगा दी।
मैं दौड़ा।
नीचे देखा।
उसका शरीर खून में पड़ा था।
लेकिन…
उसके चेहरे पर अजीब सुकून था।
Chapter 12 — Twist
पुलिस ने इसे suicide कहा।
Case बंद।
मैं Kota छोड़कर वापस आ गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
तीन महीने बाद मुझे courier मिला।
अंदर वही diary थी।
और उसके साथ एक pen drive।
मैंने footage खोली।
ये Shiv Residency का पुराना CCTV था।
Date — 2017.
Room 307.
Video में Kavya कमरे में अकेली पढ़ रही थी।
फिर अचानक camera के पीछे से कोई अंदर आया।
एक आदमी।
Hostel warden.
Mahesh uncle.
वो लड़की डर गई।
Camera हिलने लगा।
Video cut हो गई।
मेरे हाथ सुन्न पड़ गए।
मतलब…
वो suicide नहीं थी।
फिर मुझे diary का आखिरी hidden page मिला।
उसमें लिखा था —
“Mahesh sir रात में कमरे में आए थे… मैंने चिल्लाने की कोशिश की…”
“उन्होंने कहा अगर मैंने किसी को बताया तो मेरा career खत्म कर देंगे…”
“उस रात Kavya भी रो रही थी…”
और आखिरी लाइन —
“हमने खुद को नहीं मारा… हमें डर ने मार दिया…”
मैंने तुरंत police को call किया।
लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
Mahesh uncle तीन दिन पहले ही गायब हो चुके थे।
आज तक नहीं मिले।
Epilogue
2024।
Shiv Residency अब बंद पड़ा है।
लोग कहते हैं रात में तीसरी मंज़िल की खिड़की में कोई लड़की दिखती है।
कुछ students ने claim किया कि वहाँ से आज भी आवाज़ आती है —
“सोना मत…”
लेकिन सबसे डरावनी बात?
पिछले साल उस बिल्डिंग को तोड़ने गए मजदूरों ने Room 307 की दीवार के अंदर से तीन skeletons निकाले।
तीन।
जबकि officially वहाँ सिर्फ दो deaths हुई थीं।
और तीसरा skeleton…
एक आदमी का था।
उसकी गर्दन टूटी हुई थी।
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