तांत्रिक ने मुझे जो दिया | Tantrik Horror Story in Hindi

BY SCARY CROCODILE TEAM

मेरा नाम अर्जुन है, और जो मेरे साथ उस श्मशान घाट में हुआ, उसने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी। यह एक ऐसी Real Horror Story है जिसमें एक तांत्रिक द्वारा दिया गया रहस्यमयी डिब्बा मेरे लिए मौत का श्राप बन गया।

मेरा नाम अर्जुन है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव “भैरवपुर” में रहता था। गाँव बहुत पुराना था। चारों तरफ घना जंगल, टूटी हवेलियाँ और गाँव के बाहर एक पुराना श्मशान घाट।

Tantrik Horror Story in Hindi

दिन में सब कुछ सामान्य लगता था, लेकिन रात होते ही पूरे गाँव का माहौल बदल जाता था। लोग जल्दी दरवाज़े बंद कर लेते। बच्चे बाहर नहीं निकलते। और अगर कोई गलती से भी श्मशान घाट का नाम ले लेता, तो बुज़ुर्ग तुरंत उसे चुप करा देते।

लोग कहते थे कि रात के बाद वहाँ कुछ जागता है। Tantrik Horror Story in Hindi

कई लोगों ने वहाँ अजीब परछाइयाँ देखने की बात कही थी। कुछ ने औरत के रोने जैसी आवाजें सुनी थीं। लेकिन मुझे इन सब बातों पर कभी भरोसा नहीं था।

मेरे लिए Ghost Stories, Black Magic और तंत्र-मंत्र बस लोगों का डर था।

लेकिन फिर माँ बीमार पड़ गईं।

शुरुआत में लगा सामान्य बुखार होगा। फिर हालत अचानक बिगड़ने लगी। दवाइयाँ असर नहीं कर रही थीं। डॉक्टर बार-बार एक ही बात बोल रहे थे—

“जो करना है जल्दी करो…”

हर दिन माँ को उस हालत में देखकर मैं अंदर से टूटता जा रहा था।

तभी एक शाम गाँव का एक बूढ़ा आदमी हमारे घर आया। उसने कुछ देर माँ को देखा, फिर मुझे बाहर बुलाकर बोला—

“अगर अपनी माँ को बचाना चाहता है… तो श्मशान वाले तांत्रिक के पास जा।”

मैंने चिढ़कर कहा—
“ये सब fake लोग होते हैं।”

बूढ़ा आदमी कुछ सेकंड तक बस मुझे देखता रहा। फिर धीरे से बोला—

“ढोंग तब तक लगता है… जब तक मौत घर के अंदर खड़ी न हो।”

उसकी बात सुनकर पहली बार मेरे अंदर अजीब सा डर पैदा हुआ।

उस रात मैं सो नहीं पाया।

बार-बार माँ की खाँसी की आवाज़ सुनाई देती रही। ऐसा लग रहा था जैसे समय धीरे-धीरे खत्म हो रहा हो।

आखिर आधी रात के करीब मैं घर से निकल गया।

गाँव से बाहर जाने वाला रास्ता पूरी तरह सुनसान था। हवा में जली लकड़ियों और गीली मिट्टी की smell फैली हुई थी। दूर कहीं कुत्ते भौंक रहे थे।

जितना मैं श्मशान घाट के करीब पहुँच रहा था… उतना ही दिल तेज धड़क रहा था।

फिर मैंने दूर एक लाल रोशनी देखी।

उस रोशनी के सामने कोई बैठा था।

काले कपड़े।
लंबे बाल।
गले में हड्डियों जैसी दिखने वाली मालाएँ।

मैं उसके पास पहुँचा भी नहीं था कि उसने बिना मेरी तरफ देखे कहा—

“माँ की जान बचानी है?”

मेरे कदम वहीं रुक गए।

मैंने उससे पहले कभी उस आदमी को नहीं देखा था। फिर भी उसे सब कैसे पता था?

मैं डरते हुए उसके सामने जाकर खड़ा हो गया।

उसने धीरे-धीरे सिर उठाया।

उसकी आँखें देखकर मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे नहीं… मेरे अंदर कुछ देख रहा हो।

फिर उसने अपने पास रखा एक छोटा लकड़ी का डिब्बा उठाया। डिब्बा पुराने काले कपड़े में लिपटा हुआ था।

उसने वह डिब्बा मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा—

“इसे घर ले जा… लेकिन याद रखना… इसे कभी मत खोलना।”

मैंने पूछा—
“इसके अंदर क्या है?”

कुछ सेकंड तक वह बस मुझे घूरता रहा। फिर हल्का सा हँसा।

उसकी हँसी सुनकर मेरे हाथ-पैर ठंडे पड़ गए।

“अगर जानना चाहता है… तो अपनी मौत देखने के लिए तैयार रह।”

उस समय मुझे लगा शायद वह मुझे डराने की कोशिश कर रहा है। लेकिन माँ की हालत देखकर मेरे पास सोचने का समय नहीं था।

मैं वह डिब्बा लेकर घर लौट आया।

अजीब बात यह थी कि अगले ही दिन माँ की हालत सुधरने लगी।

जो माँ कई दिनों से उठ नहीं पा रही थीं… वो खुद चलकर पानी लेने गईं।

पूरा गाँव हैरान था।

लोग कहने लगे—
“श्मशान वाला बाबा सच में शक्तिशाली है…”

लेकिन उसी दिन से घर का माहौल बदल गया।

रात को किसी के चलने की आवाज आने लगी। कभी रसोई में बर्तन अपने आप गिर जाते। कभी ऐसा लगता जैसे कोई पीछे खड़ा मुझे देख रहा हो।

पहले मुझे लगा शायद मैं ज़्यादा सोच रहा हूँ।

लेकिन फिर एक रात मेरी नींद अचानक खुल गई।

कमरे में बहुत ठंड थी।

इतनी ठंड… जैसे कोई बर्फ के बीच खड़ा हो।

मैंने धीरे से दरवाज़े की तरफ देखा।

वहाँ एक औरत खड़ी थी।

उसके लंबे काले बाल पूरे चेहरे पर फैले हुए थे। वह बिल्कुल चुप खड़ी थी।

न हिल रही थी।
न कुछ बोल रही थी।

कुछ सेकंड तक मैं डर के मारे हिल भी नहीं पाया।

फिर अचानक वह गायब हो गई।

उस रात पहली बार मुझे महसूस हुआ कि घर में कुछ गलत है।

उसके बाद हर रात वह डिब्बा जैसे मुझे अपनी तरफ बुलाने लगा।

कभी उसके अंदर से खरोंचने की आवाज आती।
कभी धीमी फुसफुसाहट सुनाई देती—

“मुझे बाहर निकालो…”

मैं डर जाता, लेकिन curiosity भी बढ़ती जा रही थी।

आखिर उस डिब्बे के अंदर क्या था?

एक रात मैं खुद को रोक नहीं पाया।

पूरा घर सो रहा था। मैं धीरे से उठा और वह डिब्बा अपने सामने रख लिया।

जैसे ही मैंने उसे हाथ लगाया… वह बर्फ की तरह ठंडा हो गया।

उसी समय मेरे कान के पास किसी ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—

“मत खोल…”

मैं तुरंत पीछे मुड़ा।

कमरे में कोई नहीं था।

लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।

मैंने धीरे से डिब्बे का ढक्कन खोल दिया।

और उसी पल पूरे कमरे की लाइट चली गई।

खिड़कियाँ अपने आप खुलने लगीं। तेज हवा चलने लगी। फिर डिब्बे के अंदर से काला धुआँ निकलने लगा।

धीरे-धीरे वह धुआँ इंसानी आकार लेने लगा।

मेरी साँसें रुक गईं।

वह वही औरत थी।

लेकिन इस बार उसका चेहरा साफ दिखाई दे रहा था।

उसकी आँखें पूरी काली थीं।
चेहरा जला हुआ था।
होंठ फटे हुए थे।

वह मुझे ऐसे घूर रही थी जैसे बहुत लंबे समय बाद उसे कोई मिला हो।

फिर वह धीरे-धीरे मुस्कुराई।

उस मुस्कान को देखकर मेरे शरीर का खून जैसे जम गया।

वह मेरी तरफ बढ़ने लगी।

मैं पीछे हटने लगा।

तभी उसने बेहद भारी आवाज़ में कहा—

“तूने मुझे आज़ाद किया है…”

अगले ही पल उसने मेरा गला पकड़ लिया।

उसके हाथ इतने ठंडे थे कि ऐसा लगा मेरी साँस वहीं रुक जाएगी।

मैं खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था तभी माँ कमरे में आ गईं।

उन्होंने जैसे ही उसे देखा… जोर से चीख पड़ीं।

और उसी पल वह औरत अचानक गायब हो गई।

लेकिन जाते-जाते दीवार पर कुछ लिख गई।

मैंने काँपते हुए दीवार की तरफ देखा।

वहाँ लिखा था—

“अब तुम्हारी बारी है…”

अगली सुबह मैं सीधे श्मशान घाट पहुँचा।

लेकिन वहाँ कुछ नहीं था।

न लाल रोशनी।
न तांत्रिक।
न कोई निशान।

ऐसा लग रहा था जैसे वहाँ कभी कोई था ही नहीं।

तभी पीछे से एक बूढ़े आदमी की आवाज आई—

“उसे ढूँढ रहा है?”

मैंने पलटकर देखा। एक बूढ़ा आदमी मुझे घूर रहा था।

मैंने जल्दी से पूछा—
“वो तांत्रिक कहाँ गया?”

बूढ़ा आदमी कुछ सेकंड चुप रहा। फिर बोला—

“वह बीस साल पहले मर चुका है।”

मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।

मैंने काँपती आवाज़ में पूछा—
“क्या मतलब?”

बूढ़ा आदमी धीरे-धीरे बोला—

“वह लोगों को एक डिब्बा देता था। उस डिब्बे में एक खतरनाक आत्मा बंद रहती थी।”

“जो भी उसे खोलता… वो आत्मा उसके परिवार को खत्म कर देती।”

मेरे हाथ सुन्न पड़ गए।

मैंने डरते हुए पूछा—
“उससे बचने का कोई तरीका है?”

बूढ़े आदमी ने तुरंत नज़रें नीचे कर लीं।

फिर बहुत धीमी आवाज़ में बोला—

“नहीं…”

उस दिन के बाद सब कुछ और डरावना हो गया।

पहले हमारे पड़ोसी की अचानक मौत हुई।

फिर गाँव के दो लोग गायब हो गए।

हर मौत से पहले लोगों ने उसी औरत को देखने की बात कही।

और हर रात वह मेरे सपनों में आने लगी।

वह बस एक ही बात कहती—

“अब तेरी बारी है…”

मैं धीरे-धीरे पागल होने लगा था।

मैंने गाँव छोड़ने की कोशिश की। लेकिन जहाँ भी जाता… ऐसा लगता वह मेरे पीछे आ जाती।

कभी ट्रेन की खिड़की में उसका चेहरा दिखाई देता।
कभी रात में किसी बंद कमरे से उसकी फुसफुसाहट सुनाई देती।

एक रात मैंने फैसला किया कि अब इसका अंत करना ही पड़ेगा।

मैं फिर से श्मशान घाट गया।

और इस बार…

वह तांत्रिक फिर दिखाई दिया।

लेकिन अब उसका चेहरा इंसानों जैसा नहीं था।

त्वचा सड़ चुकी थी।
आँखों में कीड़े रेंग रहे थे।

वह मुझे देखकर हँस रहा था।

मैं डर के मारे पीछे हट गया।

तभी उसने बेहद भारी आवाज़ में कहा—

“जिसे मैंने दिया… वह कभी वापस नहीं होता…”

अचानक उसकी गर्दन उल्टी घूम गई।

और अगले ही पल वह गायब हो गया।

आज उस घटना को छह महीने हो चुके हैं।

मैं यह सब एक सुनसान कमरे में बैठकर लिख रहा हूँ।

बाहर तेज बारिश हो रही है।

लेकिन मुझे पता है…

वह आ चुकी है।

अभी कुछ देर पहले मेरे कमरे का दरवाज़ा अपने आप खुला।

और दीवार पर फिर वही शब्द दिखाई दिए—

“मैं आ गई…”

मुझे उसके कदमों की आवाज़ सुनाई दे रही है।

धीरे-धीरे…

बहुत करीब…

मुझे महसूस हो रहा है कि मेरे पीछे कोई खड़ा है।

उसकी ठंडी साँसें अब बिल्कुल मेरे कान के पास हैं।

अगर तुम्हें यह कहानी कभी किसी पुराने कागज़ पर… किसी बंद कमरे में… या किसी सुनसान जगह पर मिले…

तो एक बात हमेशा याद रखना—

अगर कोई तांत्रिक तुम्हें कोई डिब्बा दे…

तो उसे कभी मत खोलना।

क्योंकि कुछ चीज़ें कैद ही अच्छी लगती हैं…

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External Resources:

  1. https://en.wikipedia.org/wiki/Tantra
  2. https://en.wikipedia.org/wiki/Paranormal
  3. https://www.britannica.com/topic/tantrism

श्मशान घाट की सच्ची घटना

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