1. वह रात, जब कहानी शुरू हुई
Unique Hindi Horror Story मेरा नाम अर्जुन है। मैं पेशे से एक travel vlogger था। मेरी videos में अक्सर haunted places, abandoned forts, mysterious temples और cursed villages जैसी चीजें होती थीं। लोग कहते थे कि मैं fearless हूँ, लेकिन सच यह था कि मैं डरता था। फर्क सिर्फ इतना था कि मैं डर को camera के सामने हंसी में बदल देता था।
मेरे YouTube channel का नाम था “Dark Routes India”। शुरू में यह बस एक hobby थी, लेकिन धीरे-धीरे यह मेरा career बन गया। लोग मेरी videos इसलिए देखते थे क्योंकि मैं सिर्फ जगहों की कहानी नहीं सुनाता था, मैं वहां रात भी बिताता था।
लेकिन उस रात जो हुआ, उसके बाद मैंने camera, tripod, mic, सब बेच दिया।
और सबसे ज्यादा अफसोस मुझे इस बात का है कि मैंने एक बूढ़े तांत्रिक की चेतावनी को मजाक समझ लिया।
उसने मुझे सिर्फ एक बात कही थी—
“अगर रात के बारह बजे के बाद कोई तुम्हारा नाम लेकर पुकारे, तो जवाब मत देना। चाहे आवाज तुम्हारी मां की हो, चाहे तुम्हारी खुद की।”
मैंने हंसकर कहा था,
“बाबा, अब audience को डराने के लिए ये line ठीक है। Thumbnail में डाल दूंगा।”
बाबा ने मेरी आंखों में देखते हुए कहा,
“Thumbnail के लिए मत हंस बेटा। कुछ चीजें viral होने के लिए नहीं होतीं। कुछ चीजें सिर्फ खत्म करने के लिए होती हैं।”
उस वक्त मुझे लगा बूढ़ा आदमी drama कर रहा है।
मुझे क्या पता था कि वह मेरी जिंदगी की आखिरी normal evening थी।
2. Viral Content की तलाश
यह बात लगभग दो साल पहले की है। मैं उत्तराखंड के एक छोटे से गांव भैरवनाथ घाटी गया था। यह गांव maps पर barely दिखता था। Internet पर इसके बारे में बहुत कम information थी। बस कुछ old forums पर लिखा था—

“Bhairavnath Valley is cursed.”
“No one stays near the black shrine after sunset.”
“People hear their own voice calling them.”
मेरे लिए यह perfect content था।
मेरे साथ मेरी टीम में दो लोग थे। मेरा cameraman रवि और मेरी editor-cum-friend नैना। नैना videos shoot भी करती थी और research भी।
रास्ते में नैना ने मुझे फोन दिखाते हुए कहा,
“अर्जुन, इस गांव के बारे में कोई verified info नहीं है। सिर्फ rumors हैं। लेकिन एक बात common है—हर जगह एक तांत्रिक का mention है।”
मैंने steering पकड़ते हुए पूछा,
“कौन तांत्रिक?”
“लोग उसे कालभैरव साधक कहते हैं। कहते हैं वही इस गांव को किसी चीज से बचाता है।”
रवि पीछे से हंस पड़ा।
“भाई, ये तो सोने पे सुहागा है। Haunted village, old tantric, black shrine, mysterious voices… video का title ready है।”
मैंने मजाक में कहा,
“Title होगा—तांत्रिक की चेतावनी जिसे मैंने नजरअंदाज कर दिया।”
नैना ने तुरंत मेरी तरफ देखा।
“ये title बहुत अच्छा है। लेकिन warning सच में मिली तो?”
मैंने कहा,
“फिर और अच्छा। Real reaction मिलेगा।”
उस वक्त कार की headlights पहाड़ी रास्ते पर फिसल रही थीं। शाम उतर रही थी। दूर पहाड़ों पर धुंध किसी सफेद जानवर की तरह रेंग रही थी। हवा में देवदार की गंध थी, लेकिन उसके पीछे कोई अजीब-सी सड़ी हुई नमी भी घुली थी।
हम गांव के entrance पर पहुंचे तो एक टूटा हुआ पत्थर दिखा। उस पर लाल paint से लिखा था—
“रात के बाद लौट जाओ।”
रवि ने camera उठाया।
“भाई, intro यहीं shoot करते हैं।”
मैंने camera की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा,
“दोस्तों, आज हम पहुंचे हैं भारत की सबसे mysterious valley में, जहां लोग कहते हैं कि रात के बाद अगर कोई आपका नाम पुकारे, तो पीछे मुड़कर नहीं देखना…”
मुझे नहीं पता था कि camera में मेरे पीछे, धुंध के अंदर, कुछ पल के लिए कोई खड़ा दिखा था।
वह हमें देख रहा था।
3. गांव जहां लोग सूर्यास्त के बाद बात नहीं करते
भैरवनाथ घाटी में मुश्किल से पच्चीस-तीस घर थे। ज्यादातर घर बंद थे। कुछ घरों के दरवाजों पर नींबू-मिर्च, राख और लाल धागे बंधे थे। एक-दो घरों की खिड़कियों से बूढ़ी आंखें हमें देखतीं और तुरंत पर्दा गिर जाता।
गांव के बीच एक छोटा-सा चबूतरा था, जिस पर काला पत्थर रखा था। उस पत्थर पर सिंदूर, राख और सूखे फूल चढ़े थे। पत्थर के पीछे लोहे की घंटी लटकी थी, लेकिन उसमें जीभ नहीं थी। यानी घंटी बज ही नहीं सकती थी।
नैना ने धीरे से कहा,
“यहां बहुत silence है। Too silent.”
रवि ने कहा,
“Sound design में काम आएगा।”
तभी एक बूढ़ा आदमी हमारे पास आया। उसकी दाढ़ी सफेद थी, आंखें लाल थीं, और कंधे पर काला कपड़ा पड़ा था। उसके हाथ में एक लकड़ी की माला थी, जिसकी हर मणि अलग आकार की लग रही थी। उसके माथे पर राख लगी थी।
उसने बिना greeting किए पूछा,
“शहर से आए हो?”
मैंने camera उसकी तरफ घुमाया।
“जी बाबा, हम एक documentary shoot कर रहे हैं।”
उसने camera पर हाथ रख दिया।
“इसे नीचे करो।”
मैंने हंसते हुए कहा,
“बाबा, बस थोड़ा interview—”
“जो चीज camera में कैद हो जाए, वह हमेशा picture नहीं रहती। कभी-कभी रास्ता बन जाती है।”
उसकी आवाज धीमी थी, लेकिन उसमें ऐसा दबाव था कि रवि ने camera नीचे कर लिया।
नैना ने पूछा,
“आप कालभैरव साधक हैं?”
बूढ़े ने उसे घूरकर देखा।
“नाम मत लो। यहां नाम लेना बुलावा होता है।”
मैंने पूछा,
“बाबा, इस गांव की कहानी क्या है?”
उसने मेरी तरफ देखा। मुझे लगा वह मेरी आंखों के पीछे कुछ पढ़ रहा है।
“कहानी नहीं है। दाग है। और दाग को कुरेदोगे तो खून निकलेगा।”
“लेकिन लोग कहते हैं यहां आवाजें आती हैं।”
बाबा ने तुरंत पूछा,
“तुम्हारा नाम क्या है?”
“अर्जुन।”
उसने जैसे मेरे नाम को मन ही मन दोहराया। फिर बोला,
“अर्जुन, रात को अगर कोई तुम्हारा नाम लेकर पुकारे, तो जवाब मत देना। चाहे आवाज दोस्त की हो, मां की हो, या तुम्हारी अपनी।”
रवि हंस पड़ा।
“बाबा, अगर Wi-Fi की आवाज आए तो?”
बाबा ने उसे देखा। रवि की हंसी धीरे-धीरे गायब हो गई।
“मजाक मत करो। यहां रात को कोई इंसान तुम्हें नहीं पुकारता। जो पुकारता है, वह पहले तुम्हारी आवाज सीखता है, फिर तुम्हारा चेहरा, फिर तुम्हारी यादें।”
मेरी रीढ़ में हल्की ठंडक दौड़ गई, लेकिन मैंने उसे छिपाते हुए पूछा,
“और अगर जवाब दे दिया?”
बाबा ने कहा,
“तो वह जान जाता है कि तुम अंदर से कहां कमजोर हो।”
“वह कौन?”
बाबा ने पीछे काले पत्थर की तरफ देखा।
“जिसे हमने बांध रखा है।”
4. काले मंदिर की Story
गांव के बाहर पहाड़ी ढलान पर एक पुराना मंदिर था। लोग उसे काला मंदिर कहते थे। मंदिर पूरी तरह काले पत्थर से बना था, लेकिन उस पर धुआं जमी हुई राख जैसा बैठा था। जैसे किसी ने उसे कभी जलाया हो।
बाबा ने हमें मंदिर के पास जाने से मना किया।
“सूरज डूबने से पहले घाटी छोड़ दो,” उसने कहा।
मैंने कहा,
“हम रात यहीं रुकेंगे। यही तो content है।”
“Content?” बाबा ने धीरे से शब्द दोहराया।
“तुम्हारे शहर में मौत को भी content कहते हैं?”
नैना ने मुझे कोहनी मारी।
“अर्जुन, शायद हमें सिर्फ दिन में shoot करना चाहिए।”
मैंने कहा,
“हम इतने दूर आए हैं। Night challenge ही main वीडियो है।”
बाबा ने मेरी कलाई पकड़ ली। उसकी उंगलियां बर्फ जैसी ठंडी थीं।
“तुम्हें लगता है तुम चुने हुए हो क्योंकि तुम camera लेकर आए हो। लेकिन इस घाटी में आने वाला हर घमंडी आदमी यही सोचता है। एक रात रह लो, फिर तुम सिर्फ video नहीं बनाओगे। तुम video बन जाओगे।”
मैंने उसकी पकड़ छुड़ाई।
“देखिए बाबा, हम respectful रहेंगे। कुछ गलत नहीं करेंगे।”
“गलत?” उसने कहा।
“गलत वह नहीं जो तुम करते हो। गलत वह है जिसे तुम जगाते हो।”
फिर उसने अपनी झोली से काला धागा निकाला और मेरी तरफ बढ़ाया।
“इसे बांध लो। बारह के बाद मत सोना। किसी की पुकार का जवाब मत देना। मंदिर के अंदर मत जाना। और अगर घंटी बजे…”
वह रुक गया।
मैंने पूछा,
“तो?”
उसने मेरी आंखों में देखकर कहा,
“तो समझना, किसी ने तुम्हें देख लिया है।”
मैंने धागा ले लिया, लेकिन बांधा नहीं। Pocket में डाल लिया।
रवि ने धीरे से कहा,
“Bro, ये बाबा acting बहुत real करता है।”
मैंने जवाब दिया,
“यही तो मजा है।”
नैना चुप थी। उसने अपने हाथ में वही काला धागा बांध लिया था।
5. First Strange Sign
हमने गांव के किनारे एक खाली मकान चुना। गांव वालों ने हमें अंदर आने नहीं दिया। सिर्फ एक बूढ़ी औरत ने हाथ के इशारे से उस मकान की तरफ इशारा किया और फिर अपने दरवाजे पर राख की रेखा खींच दी।
मकान पुराना था। अंदर लकड़ी की छत, मिट्टी की दीवारें और एक टूटा हुआ चूल्हा था। खिड़की से काला मंदिर दिखता था।
शाम होते-होते गांव की आवाजें गायब हो गईं। न कोई बर्तन बजा, न कोई कुत्ता भौंका, न कोई बच्चा रोया। जैसे पूरे गांव ने सांस रोक ली हो।
रवि ने camera setup किया।
“Night vision on. Audio recorder on. Static cam मंदिर की तरफ। Bro, episode आग लगा देगा।”
नैना ने laptop खोला और footage check करने लगी। अचानक उसने मुझे बुलाया।
“अर्जुन, ये देख।”
Intro वाले footage में गांव के entrance पर, धुंध के अंदर, एक काली आकृति खड़ी थी। वह बहुत दूर थी, लेकिन उसका सिर थोड़ा टेढ़ा था, जैसे camera की तरफ देख रहा हो।
रवि ने कहा,
“कोई गांव वाला होगा।”
नैना ने zoom किया। आकृति का चेहरा नहीं था। सिर्फ अंधेरा था।
मैंने कहा,
“Fog distortion.”
नैना बोली,
“Fog distortion इंसान की height में नहीं खड़ा होता।”
मैंने हंसकर बात टाल दी।
“Perfect teaser shot है।”
तभी बाहर से घंटी की हल्की आवाज आई।
टन…
हम तीनों जम गए।
रवि ने फुसफुसाते हुए कहा,
“गांव वाली घंटी?”
मैंने कहा,
“उसमें जीभ नहीं थी।”
नैना ने मेरी तरफ देखा। उसकी आंखों में वही डर था जो धीरे-धीरे कमरे में फैल रहा था।
दूसरी बार आवाज आई।
टन…
इस बार मंदिर की दिशा से।
मैंने camera उठाया।
“चलो। यह footage miss नहीं करनी।”
नैना ने मेरा हाथ पकड़ा।
“बाबा ने कहा था घंटी बजे तो—”
“तो समझना किसी ने हमें देख लिया है,” मैंने बात पूरी की।
“और अगर किसी ने देखा है, तो हमें भी उसे देखना चाहिए।”
मैं बाहर निकला।
मुझे नहीं पता था कि उसी पल से हम वापस आने की possibility खो चुके थे।
6. काला मंदिर और बंद दरवाजा
रात पूरी तरह उतर चुकी थी। पहाड़ों पर धुंध thick हो गई थी। हमारे torch की रोशनी कुछ फुट से आगे नहीं जा रही थी। रास्ते में सूखे पत्ते थे, लेकिन उन पर पैर रखते ही आवाज नहीं होती थी। जैसे जमीन आवाज खा रही हो।
मंदिर के पास पहुंचते ही हवा अचानक गर्म हो गई। यह अजीब था क्योंकि गांव में ठंड थी। मंदिर के सामने एक लोहे का दरवाजा था, जिस पर मोटी जंजीर बंधी थी। जंजीर पर राख और लाल धागे लिपटे थे।
दरवाजे के ऊपर वही घंटी लटकी थी।
और वह धीरे-धीरे हिल रही थी।
बिना हवा के।
रवि ने camera ऊपर किया।
“Guys, you can see this. No wind, but bell is moving.”
नैना ने कहा,
“बस shoot करो और वापस चलते हैं।”
मैं दरवाजे के पास गया। जंजीर पर एक ताला लगा था, लेकिन ताला बंद नहीं था। बस अटका हुआ था।
रवि ने पूछा,
“Open करें?”
नैना ने तुरंत कहा,
“No.”
मैंने कहा,
“हम अंदर नहीं जाएंगे। बस दरवाजा थोड़ा खोलकर देखेंगे।”
जैसे ही मैंने ताले को छुआ, मंदिर के अंदर से फुसफुसाहट आई।
“अर्जुन…”
मेरी उंगलियां जम गईं।
रवि ने पूछा,
“तूने सुना?”
मैंने धीमे से कहा,
“हाँ।”
नैना ने कहा,
“किसकी आवाज थी?”
मैं कुछ बोल नहीं पाया।
क्योंकि वह आवाज मेरी मां की थी।
मेरी मां की मौत पांच साल पहले हो चुकी थी।
वह आवाज फिर आई।
“अर्जुन… बेटा…”
मेरी आंखों में पानी आ गया। इतने साल बाद मैंने वही आवाज सुनी थी। वही नरमी। वही खिंचाव। वही तरीका जिससे वह बचपन में मुझे बुलाती थी।
नैना ने मेरी बांह पकड़ ली।
“Answer मत देना।”
रवि ने camera नीचे कर दिया।
“Bro, यह prank नहीं है न?”
मैंने दरवाजे से कान लगाया।
अंदर से मां की आवाज आई,
“इतनी दूर आ गया… मुझसे मिले बिना जाएगा?”
मेरे होंठ कांपे।
मैंने कहना चाहा—“मां?”
लेकिन तभी मेरी pocket में पड़ा काला धागा जैसे गर्म हो गया। मुझे बाबा की चेतावनी याद आई।
मैं पीछे हट गया।
नैना ने राहत की सांस ली।
लेकिन रवि ने अचानक दरवाजे की तरफ झुककर कहा,
“कौन है अंदर?”
मंदिर शांत हो गया।
फिर अंदर से रवि की ही आवाज आई।
“कौन है अंदर?”
रवि पीछे गिर पड़ा। उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
दरवाजे की जंजीर अपने आप खुलने लगी।
एक-एक धागा टूटने लगा।
नैना चीखी,
“भागो!”
हम भागे। पीछे से घंटी लगातार बज रही थी।
टन… टन… टन… टन…
लेकिन सबसे डरावनी चीज घंटी नहीं थी।
सबसे डरावनी चीज थी हमारे पीछे भागते कदमों की आवाज।
तीन लोगों के कदम नहीं।
चार लोगों के।
7. रात के बारह बजे
हम किसी तरह मकान में वापस पहुंचे। रवि ने दरवाजा बंद किया और लकड़ी की कुर्सी अड़ा दी। वह बुरी तरह कांप रहा था।
“मैंने बस पूछा था,” वह बार-बार कह रहा था।
“मैंने नाम नहीं लिया। मैंने कुछ नहीं किया।”
नैना ने कहा,
“तूने जवाब दिया। बाबा ने कहा था जवाब मत देना।”
रवि ने चिल्लाकर कहा,
“तो क्या करता? अंदर किसी ने मेरी आवाज में बात की!”
मैं चुप था। मेरी मां की आवाज अब भी मेरे कानों में गूंज रही थी। पांच साल से मैं उस आवाज को याद करने की कोशिश करता था, पर हर साल वह धुंधली होती जा रही थी। आज वह इतनी साफ सुनाई दी थी कि मेरा दिल टूट गया।
नैना ने धीरे से कहा,
“अर्जुन, हमें अभी गांव छोड़ना होगा।”
मैंने बाहर देखा। धुंध ने पूरा रास्ता ढक लिया था। हमारे phone में network नहीं था। GPS घुम रहा था। Battery तेजी से drain हो रही थी।
रवि ने अपना phone दिखाया।
“मेरी battery 78 से 12 कैसे हो गई?”
नैना ने कहा,
“मेरी भी 9 percent।”
मेरे phone पर समय था—11:57 PM.
तीन मिनट बाद वह समय आने वाला था जिसके बारे में बाबा ने चेताया था।
हमने तय किया कि कोई नहीं बोलेगा। कोई आवाज आए तो react नहीं करेंगे। सभी कमरे के बीच बैठेंगे। Cameras चालू रहेंगे।
मैंने अपने vlog के लिए बोलना शुरू किया, लेकिन नैना ने मेरा mic बंद कर दिया।
“अब भी content?” उसने गुस्से से कहा।
मैंने पहली बार खुद को शर्मिंदा महसूस किया।
12:00 AM.
घर के बाहर एकदम silence था।
फिर दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।
टक।
हमने सांस रोक ली।
टक।
रवि ने होंठ भींच लिए।
टक।
फिर बाहर से आवाज आई—
“नैना…”
यह आवाज किसी बच्चे की थी।
नैना का चेहरा सफेद पड़ गया।
फिर आवाज आई—
“नैना दीदी, दरवाजा खोलो…”
मैंने फुसफुसाकर पूछा,
“तुम किसी बच्चे को जानती हो?”
नैना ने सिर हिलाया।
“मेरी छोटी बहन मुझे ऐसे बुलाती थी।”
“थी?”
नैना की आंखें भर आईं।
“वह बचपन में मर गई थी।”
बाहर बच्ची रोने लगी।
“दीदी, ठंड लग रही है…”
नैना ने अपने कान बंद कर लिए।
“ये वह नहीं है। ये वह नहीं है।”
दरवाजे की दस्तक तेज हो गई।
टक। टक। टक।
फिर अचानक आवाज बदल गई।
“अर्जुन…”
इस बार मेरी मां नहीं। मेरी अपनी आवाज।
“अर्जुन, तू डर गया?”
मैंने अपने ही गले से निकली आवाज को बाहर से आते सुना। वही tone, वही हल्का मजाक, वही confidence।
“दरवाजा खोल। Audience इंतजार कर रही है।”
रवि ने मेरी तरफ देखा।
“ये तेरी आवाज है।”
बाहर मेरी आवाज हंसी।
“Viral होना है न?”
मैंने आंखें बंद कर लीं।
फिर बाहर से एक और आवाज आई। इस बार बाबा की।
“मैंने कहा था बेटा… जवाब मत देना…”
नैना ने कहा,
“यह भी fake हो सकता है।”
आवाज बोली,
“अंदर बैठकर बच नहीं पाओगे। रवि ने जवाब दिया है। अब वह रास्ता है।”
रवि ने घबराकर कहा,
“मैं रास्ता नहीं हूं। मैं कुछ नहीं हूं।”
बाहर से उसकी ही आवाज आई—
“मैं रास्ता हूं।”
और तभी रवि की नाक से खून निकलने लगा।
8. रवि के साथ कुछ गलत था
रवि ने अपनी नाक पकड़ी, लेकिन खून रुक नहीं रहा था। उसकी आंखें लाल हो गई थीं। वह बार-बार कह रहा था—
“मेरे सिर में कोई बोल रहा है।”
नैना ने पूछा,
“क्या बोल रहा है?”
रवि ने धीमे से कहा,
“कह रहा है कि camera चालू रखो।”
कमरे के कोने में रखा static camera अपने आप घूम गया। उसका lens अब रवि की तरफ था।
मैंने camera बंद करने की कोशिश की, लेकिन screen पर एक message blink कर रहा था—
RECORDING LOCKED
रवि अचानक हंसने लगा।
वह उसकी हंसी नहीं थी।
“अच्छा content मिलेगा,” उसने मेरी आवाज में कहा।
नैना पीछे हट गई।
“रवि?”
रवि ने मेरी तरफ देखा। उसकी pupils बहुत बड़ी हो गई थीं। इतनी बड़ी कि आंखों में सिर्फ काला रंग रह गया।
“अर्जुन,” उसने कहा, “तेरी मां अंदर इंतजार कर रही है।”
मैंने गुस्से में कहा,
“चुप!”
रवि मुस्कुराया।
“जवाब दिया।”
मेरे भीतर कुछ टूटकर गिरा। क्या मैंने अभी जवाब दे दिया था? क्या “चुप” भी जवाब था?
तभी बाहर से घंटी फिर बजी।
टन…
रवि ने दरवाजे की तरफ चलना शुरू किया।
नैना ने उसे रोका।
“रवि, होश में आ!”
रवि ने उसे धक्का दे दिया। वह दीवार से टकराई। मैं रवि पर झपटा, पर उसकी ताकत असामान्य थी। उसने मेरा हाथ पकड़कर इतना दबाया कि मेरी हड्डी चटकने लगी।
उसने मेरे कान में फुसफुसाया,
“दरवाजा खोल। मुझे बाहर जाना है। मैं अकेला नहीं जा सकता।”
मैंने पूछा,
“कौन है तू?”
रवि की गर्दन धीरे-धीरे मेरी तरफ मुड़ी।
“तूने पूछा। अब तू जानना चाहता है।”
कमरे की दीवारों पर नमी उभरने लगी। नमी से आकृतियां बन रही थीं—हाथ, चेहरे, खुली आंखें। चूल्हे की राख अपने आप हवा में उठी और floor पर एक गोल निशान बनने लगा।
नैना ने अचानक अपनी कलाई का काला धागा खोला और रवि के हाथ पर बांध दिया।
रवि चीखा।
वह चीख इंसानी नहीं थी।
उसके मुंह से काला धुआं निकला और कमरे की छत से चिपक गया। कुछ सेकंड बाद रवि बेहोश होकर गिर पड़ा।
बाहर सब शांत हो गया।
नैना कांपते हुए बोली,
“हमें बाबा को ढूंढना होगा।”
मैंने कहा,
“इस समय बाहर?”
“यहां रहेंगे तो सुबह नहीं देखेंगे।”
मैंने घड़ी देखी। 12:37 AM.
रात अभी बहुत लंबी थी।
9. गांव गायब था
हमने रवि को उठाया और बाहर निकले। धुंध अब इतनी घनी थी कि हाथ भी मुश्किल से दिख रहा था। गांव के घर दिखाई नहीं दे रहे थे। जिस रास्ते से हम आए थे, वह गायब था।
हमने बाबा की झोपड़ी ढूंढने की कोशिश की। दिन में वह चबूतरे के पास थी। लेकिन अब वहां सिर्फ खाली जमीन थी।
नैना ने कहा,
“यह possible नहीं है। झोपड़ी यहीं थी।”
रवि आधा बेहोश था। वह बड़बड़ा रहा था—
“घंटी… दरवाजा… मां…”
मैंने पूछा,
“किसकी मां?”
उसने आंखें खोले बिना कहा,
“सबकी।”
तभी दूर एक दीया दिखा। धुंध के बीच एक छोटी लौ। हम उसी तरफ बढ़े।
कुछ कदम बाद हमें एक झोपड़ी दिखी। दरवाजे पर राख की रेखा थी। भीतर से मंत्रों की आवाज आ रही थी।
मैंने दरवाजा खटखटाया।
अंदर से बाबा की आवाज आई—
“किसने जवाब दिया?”
मैं चुप रहा।
नैना बोली,
“बाबा, please help. रवि ने—”
दरवाजा खुला।
बाबा ने पहले रवि को देखा। फिर मेरी तरफ।
“तुमने भी जवाब दिया।”
मैंने कहा,
“मैंने सिर्फ चुप कहा था।”
“रात को जो सुनता है, वह शब्द नहीं पकड़ता। वह इरादा पकड़ता है।”
हम अंदर गए। झोपड़ी के भीतर दीवारों पर सूखी जड़ी-बूटियां लटक रही थीं। बीच में एक छोटा-सा हवनकुंड था। कोने में कई पुराने cameras, phones और watches रखे थे।
मैंने पूछा,
“ये सब क्या है?”
बाबा ने कहा,
“उन लोगों की चीजें जो तुम्हारी तरह आए थे। कुछ डर ढूंढने। कुछ proof ढूंढने। कुछ viral होने।”
नैना ने धीमे से पूछा,
“वे लोग कहां हैं?”
बाबा ने जवाब नहीं दिया।
रवि को जमीन पर लिटाया गया। बाबा ने उसके माथे पर राख लगाई। रवि अचानक आंखें खोलकर बैठ गया और बाबा की आवाज में बोला—
“तू बूढ़ा हो गया, रघुनाथ।”
मैंने पहली बार बाबा का नाम सुना—रघुनाथ।
बाबा की आंखें डोल गईं।
रवि बोला,
“कितने साल और रोकेगा? आज तीन आए हैं। एक ने जवाब दिया। एक ने चाहा। एक ने डर को छुआ। दरवाजा पतला हो गया।”
बाबा ने मंत्र तेज कर दिए।
रवि हंसने लगा।
“इसे सच बता। वरना मैं बताऊं?”
मैंने बाबा की तरफ देखा।
“कौन है ये?”
बाबा ने बहुत देर बाद कहा—
“ये कोई भूत नहीं है। ये भूख है।”
10. भूख की कहानी
बाबा ने हमें वह कहानी सुनाई जो गांव वाले किसी outsider को नहीं बताते।
करीब सौ साल पहले इस घाटी में एक साधक आया था। वह तंत्र सीखता था, लेकिन मुक्ति के लिए नहीं। शक्ति के लिए। वह मानता था कि इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी आवाज है। आवाज से मां बच्चे को बुलाती है, प्रेमी प्रेमिका को, दोस्त दोस्त को, और मन खुद को।
उस साधक ने एक अनुष्ठान किया—स्वर साधना। उसका उद्देश्य था हर जीवित इंसान की आवाज चुराना और उसके मन में प्रवेश करना।
लेकिन साधना गलत हो गई।
जिस शक्ति को वह बुला रहा था, वह कोई देवता या पिशाच नहीं थी। वह एक आदिम चेतना थी। एक ऐसी चीज जो नाम, आवाज और यादों से भोजन करती थी। उसे शरीर नहीं चाहिए था। उसे पहचान चाहिए थी।
साधक ने उसे मंदिर में बांधने की कोशिश की, पर वह खुद उसकी पहली खुराक बन गया।
तब से वह शक्ति मंदिर में बंद है।
बाबा के गुरु ने उसे बांधा था। बाबा उस बंधन के आखिरी रक्षक थे।
“वह बाहर क्यों नहीं आती?” मैंने पूछा।
बाबा ने कहा,
“क्योंकि उसे बुलावा चाहिए। जब कोई उसकी पुकार का जवाब देता है, वह उसके भीतर एक दरार बना देती है। फिर उस दरार से बाहर झांकती है।”
नैना ने पूछा,
“रवि बच सकता है?”
बाबा ने कहा,
“अगर सूरज निकलने तक वह अपना नाम याद रखे।”
“मतलब?”
बाबा ने रवि की तरफ देखा।
“यह पहले तुम्हारी आवाज लेती है। फिर तुम्हारी यादें। फिर तुम्हारा नाम। जब इंसान अपना नाम भूल जाता है, उसका शरीर खाली घर बन जाता है।”
रवि रोने लगा।
“मेरा नाम रवि है। मेरा नाम रवि है। मेरा नाम रवि है।”
बाबा ने मुझे देखा।
“और तुम, अर्जुन… तुमने जवाब नहीं दिया था मंदिर में। लेकिन तुमने चाहा था। तुम अपनी मां की आवाज के पीछे जाना चाहते थे। वह चाह को भी सुनती है।”
मैंने कहा,
“मैंने कुछ नहीं किया।”
“मन का दरवाजा हाथ से नहीं खुलता।”
झोपड़ी के बाहर अचानक किसी ने मेरी मां की आवाज में गाना शुरू किया। वह वही lullaby थी जो मां बचपन में गाती थी।
मेरा पूरा शरीर कांपने लगा।
बाबा ने जोर से कहा,
“कान बंद मत करो। डरोगे तो आवाज अंदर जाएगी। बस याद रखो—वह मां नहीं है। वह तुम्हारी याद की खाल पहने हुए है।”
मैंने दांत भींच लिए।
तभी नैना ने पूछा,
“हमें क्या करना होगा?”
बाबा ने कहा,
“मंदिर का दरवाजा फिर से बांधना होगा। इससे पहले कि भोर की पहली रेखा आए।”
मैंने कहा,
“भोर तो safe होगी न?”
बाबा ने सिर हिलाया।
“अगर दरवाजा खुला रहा, तो भोर उसे कमजोर नहीं करेगी। दुनिया मजबूत कर देगी।”
11. Final Ritual की तैयारी
बाबा ने हमें तीन चीजें दीं—राख, काला धागा और एक छोटा-सा तांबे का दर्पण।
“दर्पण क्यों?” नैना ने पूछा।
“वह चेहरा चुराती है। दर्पण उसे उसका अपना चेहरा दिखाता है।”
मैंने पूछा,
“उसका चेहरा कैसा है?”
बाबा ने कहा,
“जिसका कोई चेहरा नहीं होता, वह सबसे ज्यादा चेहरों का भूखा होता है।”
हमें मंदिर तक जाना था। वहां जंजीर फिर से बांधनी थी, मंत्र पूरा करना था, और घंटी की जीभ निकालनी थी। बाबा ने बताया कि घंटी असल में बंद थी। उसमें जीभ नहीं थी क्योंकि उसका बजना संकेत था कि अंदर की शक्ति ने बाहर की हवा छू ली है।
“अगर रास्ते में कोई पुकारे?” मैंने पूछा।
“जवाब मत देना। किसी भी हालत में नहीं।”
रवि ने कमजोर आवाज में कहा,
“मैं नहीं जा सकता।”
बाबा ने कहा,
“तुम्हें जाना ही होगा। दरार तुमसे खुली है। बंद भी तुम्हारे हाथ से होगी।”
रवि रो पड़ा।
“मैं मर जाऊंगा।”
बाबा ने शांत स्वर में कहा,
“यहां मौत सबसे बुरी चीज नहीं है।”
हम झोपड़ी से बाहर निकले। बाबा आगे, नैना उसके पीछे, फिर रवि और मैं। धुंध के भीतर गांव की गलियां अब किसी maze जैसी थीं। घरों की दीवारें लंबी हो गई थीं। कहीं-कहीं खिड़कियों में चेहरे दिखते, लेकिन पास जाने पर वे सिर्फ अंधेरा निकलते।
फिर आवाजें शुरू हुईं।
“अर्जुन…”
“नैना दीदी…”
“रवि बेटा…”
“रघुनाथ…”
हर आवाज किसी प्रिय की थी। किसी खोए हुए की। किसी ऐसे की, जिसे सुनने के लिए इंसान अपना जीवन दे दे।
नैना के कदम लड़खड़ाए।
“मेरी बहन…”
बाबा ने बिना मुड़े कहा,
“जो मर चुका है, वह रात को दरवाजा नहीं खटखटाता।”
तभी मेरे सामने मेरी मां खड़ी दिखी।
धुंध में। सफेद साड़ी में। वही चेहरा। वही आंखें। वही हल्की मुस्कान।
मैं जम गया।
मां ने हाथ बढ़ाया।
“अर्जुन, इतना बड़ा हो गया… मुझे गले नहीं लगाएगा?”
मेरे भीतर पांच साल का दबा हुआ दुःख फट पड़ा। मेरी आंखों से आंसू निकल आए।
नैना ने मेरी कलाई पकड़ी, लेकिन मैं आगे बढ़ने लगा।
बाबा ने जोर से कहा,
“उसके पैर देख!”
मैंने नीचे देखा।
मां के पैर उल्टे नहीं थे। वे थे ही नहीं।
साड़ी धुंध में खत्म हो रही थी।
मां मुस्कुराई।
“तू हमेशा detail देखता था न, vlogger?”
उसकी आवाज मेरी मां से मेरी आवाज में बदल गई।
मैं पीछे हट गया।
उसका चेहरा पिघलने लगा। आंखों की जगह काली दरारें खुल गईं।
“जवाब दे देता,” वह बोली।
“तो कम दुखता।”
बाबा ने राख फेंकी। आकृति धुंध में टूट गई।
लेकिन मेरे भीतर कुछ टूट चुका था।
12. मंदिर के अंदर
मंदिर का दरवाजा आधा खुला था। जंजीर जमीन पर पड़ी थी। धागे जल चुके थे।
बाबा ने हमें अंदर जाने को कहा। मैं डर गया।
“आपने तो कहा था मंदिर में मत जाना।”
बाबा ने कहा,
“जब घर में आग लग जाए, तो दरवाजे की मर्यादा नहीं देखी जाती।”
हम अंदर गए।
मंदिर बाहर से छोटा था, लेकिन अंदर बहुत बड़ा। Impossible बड़ा। जैसे पहाड़ के भीतर कोई खाली पेट हो।
दीवारों पर अनगिनत नाम लिखे थे। कुछ पुराने, कुछ नए। कुछ नामों के ऊपर camera symbols बने थे। कुछ जगह सिर्फ अधूरे अक्षर थे, जैसे लिखने वाला बीच में भूल गया हो कि वह कौन है।
रवि अचानक रुक गया।
दीवार पर उसका नाम लिखा था।
रवि।
उसके नीचे नया अक्षर उभर रहा था—
अर्जु…
मैंने घबराकर पीछे हटना चाहा।
बाबा ने कहा,
“डरो मत। नाम पूरा होने से पहले बंधन करो।”
मंदिर के बीच एक काला कुआं था। उसके ऊपर घंटी की आवाज गूंज रही थी, जबकि घंटी बाहर थी। कुएं के अंदर अंधेरा नहीं था। वह अंधेरा हमें देख रहा था।
बाबा ने मंत्र शुरू किए। नैना ने जंजीर उठाई। मैंने काला धागा खोला और दरवाजे की चौखट पर बांधने लगा।
रवि को कुएं के पास जाकर तांबे का दर्पण दिखाना था।
वह कांपता हुआ आगे बढ़ा।
कुएं से आवाज आई—
“रवि…”
रवि रोते हुए बोला,
“मैं जवाब नहीं दूंगा। मैं जवाब नहीं दूंगा।”
आवाज बदल गई। इस बार उसके पिता की थी।
“बेटा, मैं तुझसे नाराज नहीं हूं…”
रवि टूट गया।
“पापा?”
बाबा चिल्लाए,
“नहीं!”
लेकिन देर हो चुकी थी।
कुएं से काला हाथ निकला। वह हाथ धुएं का था, पर उसने रवि की गर्दन पकड़ ली। रवि हवा में उठ गया। उसकी आंखों से काली रोशनी निकलने लगी।
नैना चीखी।
“अर्जुन, दर्पण!”
दर्पण रवि के हाथ से गिर गया था। मैं दौड़ा, उसे उठाया और कुएं की तरफ किया।
पहली बार मैंने उसे देखा।
न चेहरा। न शरीर। न आंखें।
बस अनगिनत मुंह।
हर मुंह किसी की आवाज बोल रहा था। मां, पिता, दोस्त, बच्चा, प्रेमिका, गुरु, खुद की आत्मा। वह एक जीव नहीं था। वह हर अधूरी पुकार का जंगल था।
दर्पण में उसकी छवि पड़ी तो वह पीछे हट गया। रवि जमीन पर गिरा।
बाबा मंत्र पढ़ते हुए आगे बढ़े। उनकी आवाज भारी होती जा रही थी। मंदिर की दीवारें हिल रही थीं।
तभी वह चीज बाबा की आवाज में बोली—
“रघुनाथ, सच बताऊं इन्हें?”
बाबा रुक गए।
मैंने पूछा,
“कौन-सा सच?”
बाबा चिल्लाए,
“मंत्र पूरा करो!”
लेकिन अब मेरी curiosity जाग गई थी। और शायद वही उसकी सबसे बड़ी चाल थी।
कुएं से मेरी मां की आवाज आई—
“अर्जुन, यह बाबा वह नहीं है जो तुम समझते हो।”
मैंने दर्पण कसकर पकड़ा।
आवाज बोली—
“इसने भी कभी जवाब दिया था।”
बाबा का चेहरा राख जैसा पड़ गया।
13. बाबा का रहस्य
मंदिर की दीवार पर अचानक एक पुराना दृश्य उभर आया। जैसे किसी ने अतीत की movie play कर दी हो।
एक युवा आदमी—बाबा का जवान रूप—मंदिर के सामने खड़ा था। उसके साथ एक औरत थी और एक छोटा बच्चा। औरत रो रही थी। बच्चा बीमार था।
युवा रघुनाथ ने मंदिर से कहा,
“मेरे बेटे को बचा लो।”
अंदर से आवाज आई,
“नाम दो।”
रघुनाथ ने पूछा,
“किसका?”
आवाज बोली,
“जिसे बचाना है उसका नहीं। जिसे भूलना है उसका।”
फिर दृश्य टूट गया।
मैंने बाबा की तरफ देखा।
“आपने क्या किया था?”
बाबा चुप रहे।
कुएं से आवाज आई—
“इसने अपने बेटे को बचाने के लिए अपनी पत्नी का नाम दे दिया।”
नैना ने भय से बाबा को देखा।
बाबा की आंखों से आंसू बह निकले।
“मैंने उसे नहीं मारा। मैंने सोचा था सिर्फ याद जाएगी। मुझे नहीं पता था…”
आवाज हंसी।
“नाम गया, चेहरा गया, शरीर बचा। फिर वह घर में चलती रही, पर कोई नहीं जानता था वह कौन है। खुद वह भी नहीं।”
बाबा घुटनों पर गिर पड़े।
“मैंने उसी दिन बंधन लिया। उसी दिन से मैं इसकी रखवाली कर रहा हूं।”
मुझे गुस्सा आया।
“तो आप हमें बचा रहे हैं या अपनी गलती सुधार रहे हैं?”
बाबा ने मेरी तरफ देखा।
“दोनों।”
तभी दीवार पर मेरा नाम लगभग पूरा हो गया—
अर्जुन।
आखिरी बिंदु लगना बाकी था।
कुएं से मेरी ही आवाज आई—
“तू सच जानना चाहता था। अब जान। बाबा ने तुम्हें यहां से जाने नहीं दिया क्योंकि उसे नया रक्षक चाहिए।”
मैंने बाबा की तरफ देखा।
नैना ने पूछा,
“क्या यह सच है?”
बाबा ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह silence ही जवाब था।
14. Suspense Deepens: असली शिकार कौन?
मंदिर की हवा भारी हो गई। रवि बेहोश पड़ा था। नैना मेरे पास आ गई। बाबा मंत्र भूल चुके थे। और कुआं धीरे-धीरे चौड़ा हो रहा था।
मैंने कहा,
“आपने हमें intentionally रोका?”
बाबा ने कहा,
“मैंने तुम्हें जाने को कहा था।”
“लेकिन आप जानते थे कि हम नहीं जाएंगे।”
“घमंड को कोई रोक नहीं सकता।”
“और अब?”
बाबा ने थके हुए स्वर में कहा,
“अब या तो यह बाहर आएगा, या कोई भीतर रहेगा।”
नैना ने पूछा,
“भीतर रहेगा मतलब?”
बाबा ने कहा,
“बंधक। रक्षक। जो अपनी आवाज देकर बाकी आवाजों को रोकेगा।”
मेरे हाथ से दर्पण लगभग गिर गया।
कुएं से मां की आवाज आई—
“अर्जुन, मत मानना। वह तुझे बंद कर देगा।”
फिर नैना की आवाज आई—
“अर्जुन, मुझे बचा लो।”
मैंने नैना की तरफ देखा। वह मेरे बगल में खड़ी थी, लेकिन उसकी आवाज कुएं से भी आ रही थी।
फिर रवि की आवाज—
“भाई, content के लिए आए थे न? Ending strong होनी चाहिए।”
मेरे दिमाग में शोर भर गया।
अचानक नैना ने मेरे गाल पर जोर से थप्पड़ मारा।
“Focus! वह हमसे खेल रहा है।”
मैंने होश संभाला।
बाबा ने कहा,
“दर्पण कुएं पर रखो। धागा चारों दिशाओं में बांधो। और कोई अपना नाम तीन बार बोलेगा।”
“कौन?” मैंने पूछा।
बाबा ने कहा,
“जिसका नाम दीवार पर पूरा हो चुका हो।”
दीवार पर रवि का नाम चमक रहा था।
रवि ने आंखें खोलीं। वह मुश्किल से बोला,
“मैं करूँगा।”
नैना रो पड़ी।
“नहीं।”
रवि ने मेरी तरफ देखा।
“Bro, मेरी वजह से खुला है। मैं करूँगा।”
मैंने कहा,
“तू मर जाएगा।”
वह हल्का-सा मुस्कुराया।
“At least video viral तो होगा।”
उसने यह मजाक किया, पर उसकी आंखों में डर था। बहुत डर।
बाबा ने कहा,
“मृत्यु नहीं। उससे लंबी सजा।”
रवि ने आंखें बंद कीं।
“मेरा नाम रवि है।”
कुआं गरजा।
“मेरा नाम रवि है।”
मंदिर की दीवारें फटने लगीं।
“मेरा नाम—”
वह रुक गया।
उसके चेहरे पर confusion आ गया।
“मेरा नाम…”
कुएं से हजारों आवाजें बोलीं—
“भूल जा।”
रवि कांपने लगा।
“मेरा नाम… मेरा नाम…”
नैना चिल्लाई,
“रवि!”
रवि ने उसकी तरफ देखा, लेकिन पहचान नहीं पाया।
“मैं कौन हूं?” उसने पूछा।
कुएं से काला धुआं निकला और उसके मुंह में घुस गया।
दीवार पर उसका नाम मिटने लगा।
बाबा ने चिल्लाकर कहा,
“अब दूसरा नाम चाहिए। जल्दी!”
दीवार पर मेरा नाम चमक उठा।
अर्जुन।
अब वह मुझे चाहता था।
15. अंतिम खेल
मुझे लगा सब खत्म हो गया। मैं भागना चाहता था। मैं जीना चाहता था। मैं hero नहीं था। मैं सिर्फ एक आदमी था जिसने डर को career बना लिया था।
नैना ने मेरा हाथ पकड़ा।
“तू यह नहीं करेगा।”
बाबा ने कहा,
“अगर यह नहीं करेगा, तो यह चीज बाहर जाएगी। पहले गांव, फिर शहर, फिर हर screen।”
मैंने पूछा,
“हर screen?”
बाबा ने कहा,
“जिसने इसे record किया है, वह रास्ता बन सकता है।”
मेरे दिमाग में बिजली-सी कौंधी।
हमारे cameras। Static cam। Intro footage। Recordings।
अगर यह सच था, तो मेरे channel पर upload होते ही?
कुएं से मेरी आवाज आई—
“Millions views, अर्जुन। तेरी सबसे बड़ी video।”
मैंने अपने camera की तरफ देखा। वह अब भी record कर रहा था। Red light blink कर रही थी।
उस red light में मुझे पहली बार समझ आया—यह हमें डराने नहीं आया था। यह हमारे साथ बाहर जाना चाहता था। Internet पर। हर phone में। हर घर में। हर उस इंसान तक जो आवाज सुनकर react करे।
यह सिर्फ haunted village story नहीं थी।
यह एक digital curse बन सकता था।
मैंने camera उठाया और जमीन पर पटक दिया। Lens टूट गया। अंदर से काला धुआं निकला और चीख सुनाई दी।
नैना ने बाकी camera तोड़े। बाबा ने मंत्र फिर शुरू किए।
मैं कुएं के सामने खड़ा हुआ। दर्पण उठाया।
कुएं से मां की आवाज आई—
“बेटा, तू मुझे फिर छोड़ देगा?”
मैं रो पड़ा।
“तुम मेरी मां नहीं हो।”
“तो फिर किसकी आवाज है यह?”
मैंने कहा,
“मेरी याद की।”
आवाज हंसी।
“याद और मैं अलग कब थे?”
उसने मेरी मां का चेहरा बनाया। फिर मेरा। फिर नैना का। फिर रवि का। फिर हजारों लोगों का।
मैंने अपना नाम बोलना शुरू किया—
“मेरा नाम अर्जुन है।”
कुआं शांत हुआ।
“मेरा नाम अर्जुन है।”
मेरे दिमाग में मेरी memories टूटने लगीं। बचपन का घर। पिता की हंसी। मां की चूड़ियों की आवाज। मेरा पहला camera। नैना से पहली मुलाकात। सब धुंधला होने लगा।
मैंने तीसरी बार बोलना चाहा—
“मेरा नाम…”
मेरे होंठ रुक गए।
मैं सच में भूल रहा था।
मेरे सामने नैना खड़ी थी। वह रो रही थी।
“अर्जुन, मेरी तरफ देख। तू वही है जिसने मुझे पहली बार कहा था कि डर को story में बदलना चाहिए। तू वही है जो हर shot से पहले lens साफ करता है। तू वही है जिसे अपनी मां की चाय याद है। तू वही है जो दिखाता बहुत strong है, पर अकेले में पुराने voicemails सुनता है।”
मुझे कुछ याद आया।
मां की voice message।
मेरे phone में मां की आखिरी recording थी। वह मैंने कभी delete नहीं की थी।
मैंने कांपते हाथ से phone निकाला। Battery 1 percent थी।
मैंने recording play की।
मां की असली आवाज आई—
“अर्जुन, खाना खा लेना। काम के पीछे अपना ध्यान मत भूलना।”
कुएं से वही आवाज आई, लेकिन कुछ टूट गया। नकली आवाज और असली आवाज में फर्क था। असली आवाज में प्यार था। नकली में भूख।
मुझे याद आ गया।
मैंने तीसरी बार चिल्लाकर कहा—
“मेरा नाम अर्जुन है!”
बाबा ने जंजीर बांध दी। नैना ने धागा कस दिया। दर्पण कुएं पर रखा गया। काला धुआं अंदर खिंचने लगा।
लेकिन तभी कुएं से एक आखिरी हाथ निकला।
उसने बाबा को पकड़ लिया।
बाबा मुस्कुराए।
“शायद यही ठीक है।”
मैंने उनका हाथ पकड़ना चाहा, लेकिन उन्होंने मुझे धक्का दे दिया।
“जिंदा लोग बाहर जाते हैं। पापी पहरा देते हैं।”
कुएं ने उन्हें अंदर खींच लिया।
घंटी आखिरी बार बजी।
टन।
फिर सब शांत हो गया।
16. सुबह
जब मेरी आंख खुली, मैं मंदिर के बाहर था। सूरज निकल रहा था। धुंध हट चुकी थी। नैना मेरे पास बैठी थी। रवि कुछ दूर बेहोश पड़ा था, लेकिन सांस ले रहा था।
मंदिर का दरवाजा बंद था। जंजीर बंधी थी। घंटी स्थिर थी।
गांव वाले धीरे-धीरे घरों से बाहर आ रहे थे। किसी ने कुछ नहीं पूछा। जैसे उन्हें सब पता था।
हमने बाबा को ढूंढा। उनकी झोपड़ी खाली थी। अंदर सिर्फ उनकी माला पड़ी थी और एक दीवार पर राख से लिखा था—
“आवाज को मत मानना। स्मृति को पहचानना।”
रवि को होश आया। उसने हमें पहचाना, पर उसे रात की आधी बातें याद नहीं थीं। वह बार-बार अपना नाम पूछता, फिर खुद जवाब देता।
“मैं रवि हूं न?”
हम कहते, “हाँ।”
नैना ने कहा,
“हम यह footage upload नहीं करेंगे।”
मैंने टूटे camera के memory cards निकाले। कुछ जले हुए थे, लेकिन एक card सही था। मैंने laptop में लगाया।
उसमें सिर्फ एक file थी।
Title था—
OPEN ME FOR FINAL CUT
रवि ने कहा,
“Delete कर दे।”
मैंने बिना खोले delete किया। फिर recycle bin भी empty किया। फिर memory card तोड़कर आग में डाल दिया।
उस रात के बाद हमने भैरवनाथ घाटी छोड़ दी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
17. The Twist
तीन महीने बाद मैं शहर लौट आया था। मैंने channel बंद कर दिया। Ravi धीरे-धीरे normal होने लगा। नैना और मैं बहुत कम बात करते थे, क्योंकि हम दोनों जानते थे कि कुछ बातें बोलने से वापस जिंदा हो जाती हैं।
एक रात मैं अपने कमरे में बैठा था। बारिश हो रही थी। अचानक मेरे पुराने email पर notification आया।
Subject line थी—
Final Cut Ready
Sender:
DarkRoutesIndia@unknown
मेरे हाथ ठंडे पड़ गए।
मैंने email नहीं खोला।
लेकिन नीचे preview में एक line दिख रही थी—
“अर्जुन, तूने मुझे upload नहीं किया। इसलिए मैं खुद आ गया।”
मैंने तुरंत laptop बंद कर दिया।
तभी phone बजा।
Unknown number.
मैंने नहीं उठाया।
Call बंद हुई।
फिर voicemail आया।
मैंने delete करने के लिए screen खोली, लेकिन finger रुक गई।
Voicemail अपने आप play हो गया।
पहले static था।
फिर मेरी मां की आवाज आई—
“अर्जुन, खाना खा लेना…”
मैं रो पड़ा।
फिर आवाज अटक गई। जैसे tape फट रही हो।
और उसी आवाज के पीछे कोई फुसफुसाया—
“अब तो जवाब दे।”
मैंने phone फेंक दिया।
कमरे की बत्ती झपकने लगी। Laptop अपने आप खुल गया। Screen पर video play हो रहा था।
भैरवनाथ मंदिर।
कुआं।
दर्पण।
बाबा का चेहरा।
फिर camera धीरे-धीरे मेरी तरफ मुड़ा।
Screen में मैं दिख रहा था।
लेकिन वह मैं नहीं था।
वह मेरा चेहरा पहने कोई चीज थी।
उसने screen के अंदर से कहा—
“मेरा नाम अर्जुन है।”
मैं पीछे हट गया।
Screen पर लिखा आया—
UPLOAD COMPLETE: 1%
मैंने plug निकाला। Wi-Fi router तोड़ा। Laptop बंद किया। लेकिन screen फिर भी जलती रही।
UPLOAD COMPLETE: 18%
मैंने laptop जमीन पर पटक दिया।
UPLOAD COMPLETE: 43%
मैंने kitchen से हथौड़ा उठाया और screen तोड़ दी।
अंधेरा छा गया।
मैंने राहत की सांस ली।
फिर कमरे के कोने से आवाज आई—
“तू technology तोड़ सकता है, अर्जुन… लेकिन आवाज नहीं।”
मैंने धीरे-धीरे मुड़कर देखा।
कोने में बाबा खड़े थे।
या शायद उनका शरीर।
उनकी आंखें पूरी काली थीं। उनके गले से कई आवाजें एक साथ निकल रही थीं।
“मैंने पहरा दिया,” वह बोला, “लेकिन तूने मुझे बाहर ला दिया।”
मैंने कांपते हुए कहा,
“मैंने तो सब delete कर दिया था।”
वह मुस्कुराया।
“जिस रात तूने मां की recording चलाई थी… तूने असली आवाज और मेरी आवाज को एक साथ खोल दिया। मैं रास्ता नहीं ढूंढ रहा था, अर्जुन। तूने रास्ता दिया।”
मेरे पैरों के नीचे जमीन हिलने लगी।
मैंने पूछा,
“अब तू क्या चाहता है?”
उसने कहा,
“जवाब।”
“किस बात का?”
वह मेरे बिल्कुल पास आ गया। उसके चेहरे से राख गिर रही थी। उसकी आवाज अब मेरी मां, मेरी अपनी आवाज, बाबा और रवि सबकी थी।
“जब कोई तेरा नाम पुकारे… तू कौन है?”
मैंने जवाब नहीं दिया।
वह मुस्कुराया।
“सीख गया?”
मैं चुप रहा।
वह और पास आया।
“लेकिन दुनिया नहीं सीखी।”
तभी मेरे phone की टूटी screen चमकी। उसमें मेरी पुरानी YouTube channel page खुली थी।
एक new video upload हो चुकी थी।
Title था—
तांत्रिक की चेतावनी जिसे मैंने नजरअंदाज कर दिया
Views तेजी से बढ़ रहे थे।
100…
1,000…
50,000…
2 lakh…
Comments आने लगे—
“भाई, 12:13 पर किसी ने मेरा नाम लिया।”
“मुझे मेरी dead grandmother की आवाज सुनाई दी।”
“Is this real or fake?”
“I watched it alone at night. Now someone is knocking.”
“Don’t reply guys.”
मैंने screen की तरफ देखा। Video thumbnail में मैं था। मेरे पीछे काला मंदिर। और दरवाजे पर बाबा।
लेकिन बाबा के पीछे एक और चेहरा था।
नैना का।
मुझे याद आया—मंदिर से लौटते समय नैना चुप थी। बहुत चुप। उसने कहा था कि वह ठीक है। पर क्या वह सच में ठीक थी?
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
टक।
मैंने सांस रोक ली।
टक।
फिर बाहर से नैना की आवाज आई—
“अर्जुन, दरवाजा खोलो। मैंने video रोक दी है।”
मैं दरवाजे के पास गया।
“नैना?” मेरे होंठों तक आया।
लेकिन मैंने खुद को रोक लिया।
बाहर से वह बोली—
“Please, जल्दी करो। मैं हूं। सच में मैं।”
मैंने peephole से देखा।
बाहर नैना खड़ी थी।
उसके हाथ में तांबे का दर्पण था।
उसने धीरे से कहा,
“अर्जुन, मेरी आंखों में देखो। मैं जवाब नहीं मांग रही। मैं तुम्हें warning देने आई हूं।”
मैंने दरवाजा नहीं खोला।
उसने दर्पण दरवाजे की तरफ उठाया।
दर्पण में मेरी reflection दिखी।
लेकिन मेरे पीछे, कमरे के अंदर, बाबा नहीं खड़ा था।
कोई और खड़ा था।
मेरी मां।
मैंने पीछे मुड़ना चाहा, लेकिन नैना ने बाहर से चिल्लाकर कहा—
“मत मुड़ना!”
मेरी मां की आवाज मेरे कान के पास आई—
“बेटा…”
मेरी आंखों से आंसू निकल आए।
“एक बार देख तो ले…”
नैना दरवाजे पर रो रही थी।
“अर्जुन, यह last test है। अगर तूने पीछे देखा या जवाब दिया, तो तू उसका हो जाएगा।”
मैंने आंखें बंद कर लीं।
मां की आवाज बोली—
“तू मुझे हमेशा छोड़ देता है।”
मैं टूट गया।
मैंने धीरे से कहा—
“मां…”
दरवाजे के बाहर नैना चीखी।
कमरे में सब शांत हो गया।
मैंने आंखें खोलीं।
सुबह थी।
मैं अपने bed पर था।
Laptop सही था। Phone सही था। कोई video upload नहीं थी। Channel बंद था।
मैंने राहत की सांस ली।
“सपना था,” मैंने खुद से कहा।
तभी bathroom mirror पर भाप से कुछ लिखा दिखाई दिया—
“जवाब दे दिया।”
मेरे पीछे से मेरी ही आवाज आई—
“अब मेरी बारी है।”
मैंने mirror में देखा।
मेरी reflection मुस्कुरा रही थी।
लेकिन मैं नहीं मुस्कुरा रहा था।
और तभी मुझे अपना नाम याद नहीं रहा।
18. Ending Note
आज यह कहानी आप पढ़ रहे हैं। शायद आपको लगे कि यह सिर्फ एक horror story है। शायद आपको लगे कि यह viral content के लिए लिखा गया fiction है।
शायद आप हंसें।
शायद आप comments में लिखें—
“Nice story bro.”
“Ending predictable थी।”
“Part 2 चाहिए।”
लेकिन आज रात अगर कोई आपकी आवाज में आपका नाम पुकारे…
या आपकी मां की आवाज में…
या किसी ऐसे की आवाज में, जिसे आप खो चुके हैं…
तो please, जवाब मत देना।
क्योंकि कुछ आवाजें सुनने के लिए नहीं होतीं।
कुछ आवाजें आपको सुनने आती हैं।
और अगर आपने जवाब दे दिया—
तो अगली कहानी शायद आपके नाम से शुरू होगी।