WRITER – Raghav Sharma
अध्याय 1: आधी रात की आवाज़
पंजाब के border के पास बसे छोटे से गाँव कालीनगर में रातें हमेशा अजीब हुआ करती थीं। दिन में यह गाँव बिल्कुल normal दिखाई देता था—सरसों के खेत, पुराने brick houses, टूटी हुई गलियाँ और शाम होते ही घरों से उठती लकड़ी के धुएँ की गंध। लेकिन जैसे ही रात के बारह बजते, पूरा गाँव किसी unseen darkness में डूब जाता।

लोग कहते थे कि इस गाँव पर वर्षों पहले एक cursed shadow मंडराने लगी थी। कोई खुलकर उस बारे में बात नहीं करता था। बच्चे अगर ज़्यादा सवाल पूछते, तो बुजुर्ग सिर्फ इतना कहते—
“रात को अगर कौवा बोले… तो खिड़की मत खोलना।”
गाँव के बाहर एक पुराना कुआँ था। उसके आसपास बबूल के पेड़ खड़े थे, जिनकी टेढ़ी शाखाएँ किसी मरे हुए इंसान की उंगलियों जैसी लगती थीं। उस कुएँ के पास रात में हमेशा कौवों का झुंड मंडराता रहता। लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि वे कौवे सिर्फ अंधेरी रातों में बोलते थे।
उस रात भी आसमान में बादल छाए हुए थे। बिजली बार-बार चमक रही थी। हवा में मिट्टी और बारिश की smell घुली हुई थी।
गाँव के बीच बने पुराने मकान में निखिल अपने परिवार के साथ रहता था। उम्र करीब 27 साल। शहर से वापस गाँव आया था क्योंकि उसके पिता अचानक बीमार पड़ गए थे। वह practical आदमी था। Ghost stories, black magic, horror legends जैसी बातों पर उसे हँसी आती थी।
उसकी माँ ने रात का खाना परोसते हुए धीरे से कहा,
“आज जल्दी सो जाना… बाहर मत निकलना।”
“क्यों?” निखिल ने पूछा।
माँ की आँखें डर से भरी हुई थीं।
“आज अमावस्या है।”
निखिल मुस्कुरा दिया।
“माँ… ये 2026 है। अब भी तुम लोग इन बातों से डरते हो?”
माँ ने जवाब नहीं दिया। बस उसकी थाली के पास तुलसी की छोटी माला रख दी।
रात गहराती गई। बारिश शुरू हो चुकी थी। बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया।
करीब 12:17 AM पर…
“काँव…”
एक भारी आवाज़ पूरे घर में गूँज उठी।
निखिल की आँख खुल गई।
फिर दूसरी आवाज़ आई।
“काँव… काँव…”
यह सामान्य कौवे की आवाज़ नहीं थी। उसमें अजीब कंपन था। जैसे कोई इंसान गले से आवाज़ निकाल रहा हो।
उसने खिड़की की ओर देखा। बाहर pitch black darkness थी।
तभी उसकी माँ का दरवाज़ा खुला।
“खिड़की मत खोलना!”
उनकी आवाज़ काँप रही थी।
लेकिन तभी… खिड़की के बाहर किसी ने धीरे से दस्तक दी।
टक… टक… टक…
निखिल चौंक गया।
“इतनी रात को कौन होगा?”
माँ लगभग चीख पड़ीं,
“मत जाना!”
लेकिन curiosity उस पर हावी हो चुकी थी।
वह धीरे-धीरे खिड़की के पास गया। बाहर देखने की कोशिश की। कुछ दिखाई नहीं दिया।
फिर अचानक बिजली चमकी।
और उसी पल उसने देखा—
खिड़की के ठीक बाहर एक विशाल काला कौवा बैठा था। उसकी आँखें लाल थीं। और उसकी चोंच में किसी इंसान की उंगली फँसी हुई थी।
निखिल का शरीर सुन्न पड़ गया।
कौवा उसे घूर रहा था। बिल्कुल इंसानों की तरह।
फिर उसने अपनी गर्दन घुमाई… और अजीब आवाज़ निकाली—
“का… क… तंत्र…”
अगले ही पल पूरा कमरा बर्फ जैसा ठंडा हो गया।
अध्याय 2: शापित निशान
सुबह होते ही गाँव में खबर फैल गई कि पास वाले घर का बूढ़ा आदमी रात में मर गया। उसकी लाश घर के पीछे मिली थी। आँखें बाहर निकली हुई थीं और छाती पर तीन गहरे पंजों के निशान बने थे।
गाँव वाले डरे हुए थे। लेकिन किसी ने पुलिस को call नहीं किया।
निखिल को यह सब absurd लग रहा था।
“किसी जंगली जानवर ने हमला किया होगा।”
लेकिन उसके दोस्त रघु ने धीमी आवाज़ में कहा,
“ये जानवर नहीं था।”
“तो?”
रघु उसे गाँव के बाहर पुराने कुएँ तक ले गया। वहाँ कीचड़ में अजीब symbols बने हुए थे। काले धागे, टूटी हुई हड्डियाँ और राख फैली हुई थी।
“ये Kak Tantra है।”
निखिल हँस पड़ा।
“Seriously?”
रघु ने उसकी तरफ देखा।
“तीन महीने पहले यहाँ एक आदमी आया था। उसने कहा था कि वो occult rituals जानता है। रात में वह कौवों को बुलाता था। फिर अचानक गायब हो गया। उसके बाद गाँव में मौतें शुरू हो गईं।”
निखिल कुछ बोल पाता, उससे पहले ऊपर बैठे सैकड़ों कौवे एक साथ चिल्लाने लगे।
“काँव! काँव! काँव!”
आवाज़ इतनी तेज थी कि कान सुन्न पड़ जाएँ।
फिर अचानक सारे कौवे एकदम शांत हो गए।
पेड़ की सबसे ऊपरी शाखा पर एक बड़ा कौवा बैठा था। बाकी सारे कौवे उसकी तरफ देख रहे थे… जैसे वह उनका राजा हो।
निखिल को लगा उसकी आँखें सीधे उसे देख रही हैं।
तभी उसे अपने पैरों के पास कुछ दिखाई दिया।
मिट्टी में बना एक निशान।
तीन पंजों वाला काला symbol।
उसी पल उसके सिर में भयानक दर्द उठा। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा।
और उसे कुछ दिखाई देने लगा—
एक आदमी।
काले कपड़े पहने हुए।
चारों तरफ जलती हुई candles।
और उसके आसपास हजारों कौवे।
वह आदमी अपने हाथ काट रहा था। उसका खून जमीन पर गिर रहा था।
फिर उसने आसमान की ओर देखकर चीखा—
“काक देव… जागो!”
निखिल अचानक जमीन पर गिर पड़ा।
जब उसकी आँख खुली, तो शाम हो चुकी थी।
रघु डरा हुआ उसके पास बैठा था।
“तेरे माथे पर निशान बन गया है…”
निखिल ने काँपते हाथों से माथा छुआ।
वहाँ तीन पंजों जैसा जलता हुआ निशान था।
अध्याय 3: कौवों का पीछा
उस रात निखिल सो नहीं पाया। जैसे ही आँख बंद करता, उसे वही ritual दिखाई देता। हजारों कौवे। खून। मंत्र। चीखें।
करीब 2 बजे उसके कमरे की छत पर किसी के चलने की आवाज़ आई।
ठक… ठक… ठक…
फिर खरोंचने की आवाज़।
कrrrrr…
उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।
वह धीरे से उठा और दरवाज़ा खोला। बाहर पूरा घर अंधेरे में डूबा हुआ था।
अचानक kitchen की तरफ से किसी के फुसफुसाने की आवाज़ आई।
“निखिल…”
वह डरते हुए आगे बढ़ा।
Kitchen में पहुँचते ही उसका खून जम गया।
छत पर दर्जनों कौवे उल्टे लटके हुए थे। उनकी आँखें चमक रही थीं।
और बीच में उसकी माँ खड़ी थीं… बिल्कुल स्थिर।
“माँ?”
उन्होंने धीरे-धीरे सिर उठाया।
उनकी आँखें पूरी काली हो चुकी थीं।
“काक तंत्र जाग चुका है…”
अचानक सारे कौवे एक साथ नीचे गिरे और उसकी तरफ उड़ने लगे।
निखिल चीखता हुआ पीछे भागा।
लेकिन तभी उसकी माँ जमीन पर गिर पड़ीं। जैसे उन्हें होश आया हो।
“भाग जा…” उन्होंने काँपती आवाज़ में कहा।
“वो तुझे लेने आए हैं…”
बाहर अचानक तूफान शुरू हो गया।
घर की सारी खिड़कियाँ अपने आप खुलने लगीं।
धड़ाम!
हवा के साथ हजारों कौवों की आवाज़ पूरे घर में भर गई।
निखिल ने बाहर देखा—
पूरा आसमान कौवों से ढका हुआ था।
अध्याय 4: Forbidden Ritual
अगले दिन रघु उसे गाँव के सबसे बूढ़े आदमी दत्ताराम के पास ले गया। लोग कहते थे कि वह ancient tantra rituals के बारे में सब जानता है।
दत्ताराम का घर जंगल के किनारे था। अंदर अजीब smell थी—धूप, राख और किसी सड़े हुए चीज़ की।
बूढ़े ने निखिल का माथा देखा और पीछे हट गया।
“बहुत देर हो चुकी है…”
“ये सब क्या है?” निखिल चिल्लाया।
दत्ताराम ने कांपती आवाज़ में कहा,
“काक तंत्र… मौत को बुलाने वाला forbidden ritual है। इसे करने वाला इंसान कौवों की आत्माओं को control करता है। लेकिन बदले में उसे अपनी आत्मा देनी पड़ती है।”
“ये ritual शुरू किसने किया?”
बूढ़े ने जवाब देने से पहले दरवाज़ा बंद कर दिया।
“सालों पहले इस गाँव में plague फैला था। लोग मर रहे थे। तब एक तांत्रिक आया। उसने कहा कि वो गाँव को बचा सकता है। लेकिन उसने काक देव को जगा दिया।”
“काक देव?”
“एक ऐसी शक्ति… जो इंसानों के डर से पैदा होती है।”
बाहर अचानक कौवों की आवाज़ गूँजने लगी।
दत्ताराम घबरा गया।
“उन्होंने तुझे चुन लिया है।”
“क्यों?”
“क्योंकि तूने उन्हें देख लिया।”
निखिल का गला सूख गया।
“अब क्या होगा?”
बूढ़े ने धीरे से कहा,
“अमावस्या खत्म होने से पहले अगर ritual पूरा हो गया… तो पूरा गाँव खत्म हो जाएगा।”
अध्याय 5: Black Temple
रात होते ही निखिल और रघु जंगल की तरफ निकले। दत्ताराम ने बताया था कि जंगल के अंदर एक abandoned temple है जहाँ Kak Tantra किया जाता था।
जंगल असामान्य रूप से शांत था। ना झींगुरों की आवाज़… ना हवा की सरसराहट।
बस ऊपर पेड़ों पर बैठे कौवों की चमकती आँखें।
चलते-चलते वे एक पुराने मंदिर तक पहुँचे। उसकी दीवारों पर काले निशान बने थे। अंदर से धीमी chanting की आवाज़ आ रही थी।
“काकाय नमः…”
“काकाय नमः…”
निखिल ने अंदर झाँका।
मंदिर के बीचोंबीच एक आदमी बैठा था। उसका चेहरा राख से ढका हुआ था। आसपास इंसानों की खोपड़ियाँ रखी थीं।
और छत पर हजारों कौवे बैठे थे।
अचानक वह आदमी रुक गया।
धीरे-धीरे उसने सिर उठाया।
उसकी आँखें नहीं थीं। सिर्फ काले गड्ढे।
“तुम आ गए…”
निखिल पीछे हट गया।
“तुम कौन हो?”
आदमी हँस पड़ा।
“मैं वही हूँ जिसने काक देव को जगाया।”
फिर उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।
उसकी हथेली में इंसानी आँख रखी हुई थी।
“अब अगली बारी तुम्हारी है…”
तभी मंदिर के सारे कौवे एक साथ उड़ने लगे।
उनके पंखों की आवाज़ किसी तूफान जैसी थी।
रघु चिल्लाया,
“भाग!”
लेकिन मंदिर का दरवाज़ा अपने आप बंद हो चुका था।
अध्याय 6: Dead Voices
मंदिर के अंदर अचानक temperature गिरने लगा। निखिल की सांस से धुआँ निकलने लगा। दीवारों पर बने काले symbols चमकने लगे।
वह अंधा आदमी जमीन पर राख फैलाते हुए मंत्र पढ़ रहा था।
“काक देव भूखे हैं…”
“उन्हें आत्माएँ चाहिए…”
अचानक मंदिर की दीवारों से आवाज़ें आने लगीं।
रोने की।
चीखने की।
मदद माँगने की।
निखिल ने दीवार पर हाथ रखा… और तुरंत पीछे हट गया।
दीवार के अंदर इंसानी चेहरे फँसे हुए थे। दर्जनों चेहरे। उनकी आँखें खुली थीं और वे चिल्ला रहे थे।
“हमें बाहर निकालो!”
रघु डर से काँपने लगा।
“ये सब कौन हैं?”
अंधा आदमी हँसा।
“जो भी काक देव को देखता है… उसकी आत्मा यहीं कैद हो जाती है।”
तभी मंदिर के बीच रखा काला घड़ा हिलने लगा। उसके अंदर से कौवों की आवाज़ आ रही थी।
काँव… काँव… काँव…
घड़ा अचानक फट गया।
और उसके अंदर से काले धुएँ जैसी चीज़ बाहर निकली।
वह धुआँ धीरे-धीरे इंसानी आकार लेने लगा।
लंबा शरीर।
कौवे जैसा चेहरा।
लाल चमकती आँखें।
पूरा मंदिर उसकी presence से काँप उठा।
“काक देव…”
अंधा आदमी उसके सामने झुक गया।
निखिल का शरीर डर से जाम हो गया।
वह चीज़ सीधे उसकी तरफ देखने लगी।
फिर उसने इंसानी आवाज़ में कहा—
“तुम्हारा डर… बहुत स्वादिष्ट है…”
अध्याय 7: Blood Moon
मंदिर की छत टूटने लगी। बाहर आसमान लाल हो चुका था। Blood Moon निकल आया था।
काक देव धीरे-धीरे निखिल की तरफ बढ़ने लगा।
हर कदम के साथ जमीन पर काले निशान बन रहे थे।
रघु ने पास पड़ी मशाल उठाकर उस पर फेंकी। लेकिन आग उसके शरीर के आर-पार निकल गई।
वह कोई इंसान नहीं था।
वह shadow थी।
अंधेरा था।
और डर था।
तभी निखिल को दत्ताराम की बात याद आई—
“काक तंत्र को खत्म करने के लिए उसका मूल मंत्र तोड़ना पड़ेगा।”
उसने मंदिर के बीच बने symbol को देखा। वही तीन पंजों वाला निशान।
अचानक उसके दिमाग में आवाज़ गूँजी।
“खून…”
“रक्त से ही द्वार खुला था…”
निखिल समझ गया।
उसने पास पड़ा लोहे का टुकड़ा उठाया और अपनी हथेली काट दी।
खून जमीन पर गिरा।
जैसे ही खून symbol पर पड़ा… पूरा मंदिर हिलने लगा।
काक देव ने भयानक चीख मारी।
हजारों कौवे दीवारों से टकराने लगे।
अंधा आदमी चिल्लाया,
“नहीं!”
लेकिन देर हो चुकी थी।
निशान जलने लगा।
फिर अचानक…
पूरा मंदिर आग में घिर गया।
अध्याय 8: The Last Crow
निखिल और रघु किसी तरह मंदिर से बाहर भागे। पीछे पूरा जंगल जल रहा था। कौवों की चीखें आसमान में गूँज रही थीं।
कुछ देर बाद अचानक सब शांत हो गया।
ना हवा।
ना आवाज़।
ना कौवे।
सिर्फ राख।
निखिल ने राहत की सांस ली।
“खत्म हो गया…”
लेकिन तभी रघु की नजर उसके पीछे गई।
उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
“निखिल…”
निखिल धीरे-धीरे पलटा।
उसके पीछे एक अकेला कौवा बैठा था।
बिल्कुल शांत।
उसकी लाल आँखें अंधेरे में चमक रही थीं।
फिर उसने धीरे से अपनी चोंच खोली।
“काक तंत्र… कभी खत्म नहीं होता…”
और अगले ही पल वह उड़ गया।
अध्याय 9: लौटता हुआ अंधेरा
तीन हफ्ते बीत गए। गाँव धीरे-धीरे normal होने लगा। लोग फिर खेतों में काम करने लगे। रातों में डर कम होने लगा। लेकिन निखिल के अंदर कुछ बदल चुका था।
उसे रात में नींद नहीं आती थी। जैसे ही आँख बंद करता… उसे कौवों के पंखों की आवाज़ सुनाई देती। कभी-कभी उसे लगता कोई उसकी छत पर बैठा है।
एक रात वह अचानक जाग गया।
कमरे में अजीब smell थी। सड़े हुए मांस जैसी।
उसने देखा कि उसकी दीवार पर काले पंख चिपके हुए थे।
और ठीक सामने आईने पर खून से लिखा था—
“हम वापस आएँगे।”
उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।
तभी पीछे से आवाज़ आई।
“काँव…”
निखिल पलटा।
कमरे के कोने में वही लाल आँखों वाला कौवा बैठा था।
लेकिन इस बार वह अकेला नहीं था।
धीरे-धीरे अंधेरे से और कौवे निकलने लगे।
दर्जनों।
सैकड़ों।
पूरा कमरा उनके पंखों से भर गया।
निखिल भागने के लिए दरवाज़े की तरफ दौड़ा, लेकिन दरवाज़ा अपने आप बंद हो चुका था।
फिर उन कौवों के बीच से एक shadow बाहर आई।
वही लंबा काला शरीर।
वही लाल आँखें।
काक देव वापस आ चुका था।
“तुमने सिर्फ द्वार बंद किया था…”
“मुझे नहीं।”
अध्याय 10: Cursed Village
अगली सुबह गाँव में फिर मौत हुई। इस बार एक बच्चा गायब हो गया था। उसकी माँ पागलों की तरह रो रही थी।
लोगों ने कहा कि रात में उन्होंने हजारों कौवे देखे थे।
गाँव में panic फैल गया।
हर घर के बाहर नींबू-मिर्च लटकने लगे। लोग मंदिरों में पूजा करने लगे। लेकिन डर बढ़ता जा रहा था।
रात होते ही गाँव में अजीब चीज़ें होने लगीं।
किसी के घर की छत पर पंजों के निशान मिलते।
किसी के दरवाज़े पर मरे हुए कौवे लटकते।
और हर रात 12:17 AM पर…
पूरा गाँव एक साथ कौवों की आवाज़ से गूँज उठता।
निखिल समझ चुका था कि यह सब उसी की वजह से हो रहा है।
काक देव उससे जुड़ चुका था।
दत्ताराम ने उसे फिर बुलाया।
बूढ़ा पहले से ज्यादा कमजोर लग रहा था।
“तू अब उनका माध्यम बन चुका है।”
“मतलब?”
“जब तक तू जिंदा है… काक देव इस दुनिया से जुड़ा रहेगा।”
निखिल की सांस रुक गई।
“तो मुझे क्या करना होगा?”
दत्ताराम ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“या तो तू खुद को खत्म कर दे… या पूरा गाँव खत्म होगा।”
अध्याय 11: Dark Truth
निखिल इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा था। लेकिन अगले कुछ दिनों में हालात और भयानक हो गए।
गाँव के लोग एक-एक करके गायब होने लगे। सिर्फ खून के निशान बचते।
रात में आसमान पूरी तरह काला दिखाई देता क्योंकि हजारों कौवे गाँव के ऊपर मंडराते रहते।
एक शाम निखिल अपने घर के पुराने स्टोर room में गया। वहाँ उसे एक लकड़ी का संदूक मिला। उसके अंदर पुराने papers और एक diary रखी थी।
Diary उसके दादा की थी।
उसने काँपते हाथों से पन्ने पलटे।
और जो उसने पढ़ा… उससे उसकी दुनिया बदल गई।
“हमने काक देव को जगाया।”
“गाँव को बचाने के लिए बलि दी गई।”
“लेकिन शक्ति नियंत्रण से बाहर हो गई।”
निखिल की आँखें फैल गईं।
उसके दादा ही उस पुराने ritual का हिस्सा थे।
आगे लिखा था—
“हर पीढ़ी में एक व्यक्ति चुना जाएगा। वही द्वार बनेगा।”
निखिल समझ गया।
वह शुरुआत से ही चुना गया था।
तभी diary के आखिरी पन्ने पर खून से बना वही पंजों वाला निशान चमकने लगा।
और कमरे में आवाज़ गूँजी—
“तुम्हारा समय आ गया…”
अध्याय 12: Final Ritual
अमावस्या की आखिरी रात आ चुकी थी। आसमान पूरी तरह लाल था। बिजली लगातार चमक रही थी।
गाँव लगभग खाली हो चुका था। जो लोग बचे थे, वे घरों में बंद थे।
निखिल अकेला पुराने कुएँ की तरफ बढ़ रहा था। उसके हाथ में दत्ताराम द्वारा दिया गया ताबीज था।
कुएँ के पास पहुँचते ही उसने देखा—
सैकड़ों कौवे गोल घेरा बनाकर बैठे थे। बीच में काक देव खड़ा था।
उसकी लाल आँखें जल रही थीं।
“तुम आ गए…”
निखिल ने डर दबाते हुए कहा,
“आज ये सब खत्म होगा।”
काक देव हँस पड़ा।
उसकी हँसी इंसानों की चीखों जैसी थी।
“डर कभी खत्म नहीं होता।”
तभी जमीन से काले हाथ निकलने लगे। मृत आत्माएँ कुएँ से बाहर आने लगीं। पूरा वातावरण चीखों से भर गया।
निखिल ने ताबीज जमीन पर फेंका और दत्ताराम द्वारा बताया मंत्र पढ़ना शुरू किया।
हवा अचानक तेज हो गई। कौवे पागलों की तरह उड़ने लगे।
काक देव क्रोधित होकर उसकी तरफ बढ़ा।
लेकिन निखिल ने बिना रुके अपनी हथेली काटी और खून कुएँ में डाल दिया।
अचानक कुएँ के अंदर से भयानक रोशनी निकली।
हजारों आत्माएँ चीखने लगीं।
काक देव ने पहली बार डर महसूस किया।
“नहीं!”
लेकिन देर हो चुकी थी।
कुआँ फट गया।
काली ऊर्जा आसमान में उठी। सारे कौवे आग की तरह जलने लगे।
और फिर…
एक भयानक धमाका हुआ।
अध्याय 13: Silence
सुबह जब गाँव वालों ने बाहर निकलकर देखा… तो सब कुछ शांत था।
आसमान साफ था।
कौवे गायब थे।
पुराना कुआँ भी टूट चुका था।
लेकिन निखिल कहीं नहीं मिला।
कुछ लोगों ने कहा कि उसने खुद को बलि दे दी।
कुछ ने कहा कि काक देव उसे अपने साथ ले गया।
लेकिन सच कोई नहीं जानता था।
गाँव धीरे-धीरे फिर normal होने लगा।
साल गुजर गए।
लोग उस horror को भूलने लगे।
फिर एक रात…
एक नए परिवार ने निखिल वाला घर खरीदा।
उनका छोटा बेटा रात में अचानक जाग गया।
उसे खिड़की के बाहर कुछ दिखाई दिया।
एक बड़ा काला कौवा।
लाल आँखों वाला।
बच्चे ने डरते हुए खिड़की खोली।
और कौवे ने धीरे से कहा—
“काक तंत्र… फिर शुरू होगा…”
अध्याय 14: Never Ending Horror
उस रात के बाद गाँव में फिर अजीब घटनाएँ शुरू हो गईं। लोगों ने रात में छतों पर पंजों की आवाज़ सुननी शुरू कर दी। खेतों में मरे हुए जानवर मिलने लगे।
और हर बार किसी मौत से पहले…
एक कौवा घर की खिड़की पर आकर बैठ जाता।
धीरे-धीरे यह कहानी आसपास के शहरों तक फैल गई। लोग इसे urban legend कहने लगे। सोशल media पर videos आने लगीं। कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने लाल आँखों वाले कौवे देखे हैं।
लेकिन सबसे डरावनी बात अभी बाकी थी।
एक रात शहर में रहने वाला एक paranormal investigator उस गाँव में पहुँचा। उसने live recording शुरू की।
Camera चालू था।
वह पुराने कुएँ के खंडहर के पास खड़ा था।
अचानक recording में पीछे एक shadow दिखाई दी।
फिर हजारों कौवों की आवाज़ आने लगी।
और camera बंद होने से पहले आखिरी frame में सिर्फ एक चीज़ दिखाई दी—
दो लाल चमकती आँखें।
उस investigator का आज तक कुछ पता नहीं चला।
लेकिन उसकी आखिरी uploaded clip अब भी internet पर मौजूद है।
अगर कोई उसे रात 12:17 AM पर देखे…
तो उसके घर की खिड़की पर अगले तीन दिनों में एक कौवा जरूर आकर बैठता है।
और अगर वह कौवा तीन बार बोले…
तो समझ जाओ…
काक तंत्र ने तुम्हें चुन लिया है।
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