WRITER – Shaurya Anand
बरसात की वह रात किसी पुराने श्राप की तरह धरती पर उतरी थी। आसमान में काले बादल ऐसे घूम रहे थे जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने उन्हें बांध रखा हो। बिजली की चमक हर कुछ मिनट बाद वीरान सड़क को रोशन कर देती और फिर चारों तरफ ऐसा अंधेरा छा जाता मानो दुनिया निगल ली गई हो।

रात के लगभग बारह बजे थे।
शहर के किनारे स्थित पुराने कब्रिस्तान के बाहर एक जंग लगी Van आकर रुकी। Van के इंजन से धुआँ निकल रहा था। दरवाज़ा खुला और तीन आदमी बाहर उतरे। उनके चेहरों पर बारिश की बूंदें चमक रही थीं।
पहला आदमी लंबा और दुबला था। उसका नाम समीर था। दूसरा आदमी भारी शरीर वाला था, जिसे लोग बस “मोटा रघु” कहते थे। तीसरा आदमी चुप रहने वाला इंसान था, जिसका नाम दानिश था।
तीनों की आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।
Van के पीछे का दरवाज़ा खुला।
अंदर एक पुराना लकड़ी का ताबूत रखा था।
ताबूत पर काले रंग से अंग्रेज़ी में कुछ लिखा था—
“DO NOT OPEN AFTER MIDNIGHT”
समीर ने काँपती आवाज़ में कहा,
“मुझे अभी भी लगता है कि हमें यह काम नहीं करना चाहिए।”
रघु ने सिगरेट सुलगाई।
“पाँच लाख रुपये ऐसे ही नहीं मिलते।”
Haunted Coffin Horror दानिश अब तक चुप था। उसने कब्रिस्तान की ओर देखा।
“जल्दी खत्म करो… मुझे यहाँ अजीब feeling आ रही है।”
तेज़ हवा चली।
कब्रिस्तान का लोहे का गेट अपने आप चर्रररर की आवाज़ के साथ खुल गया।
तीनों कुछ सेकंड तक जमे रहे।
फिर समीर ने खुद को संभाला।
“चलो।”
वे ताबूत को उठाकर अंदर ले गए।
कब्रिस्तान कई सालों से बंद पड़ा था। जगह-जगह टूटी कब्रें थीं। पेड़ों की शाखाएँ ऐसे हिल रही थीं जैसे कोई उन पर बैठा हो।
अचानक…
ठक…
ताबूत के अंदर से हल्की आवाज़ आई।
तीनों रुक गए।
रघु ने हँसने की कोशिश की।
“लकड़ी होगी।”
फिर दोबारा आवाज़ आई।
ठक… ठक…
इस बार आवाज़ साफ थी।
दानिश की सांस अटक गई।
“अंदर… कुछ है।”
समीर ने तुरंत कहा,
“हमें कहा गया था कि सवाल मत पूछो। बस इसे दफना दो।”
वे कब्रिस्तान के बीचोंबीच पहुँचे, जहाँ पहले से एक गहरा गड्ढा खोदा हुआ था।
बारिश और तेज हो गई।
बिजली चमकी।
और उसी पल…
ताबूत के अंदर से किसी ने ज़ोर से खरोंचना शुरू कर दिया।
खरररररर…
लकड़ी पर नाखून रगड़ने की आवाज़ सुनकर तीनों के चेहरों का रंग उड़ गया।
“ये मज़ाक नहीं है…” दानिश पीछे हट गया।
अचानक अंदर से किसी औरत की धीमी आवाज़ आई—
“मुझे बाहर निकालो…”
तीनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
समीर चीखा,
“भागो यहाँ से!”
लेकिन तभी रघु ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“पागल मत बन! पैसे चाहिए या नहीं?”
“अंदर कोई जिंदा है!”
रघु की आँखों में लालच चमक उठा।
“अगर जिंदा है तो और अच्छा… जिसने हमें भेजा है वो खुद संभाल लेगा।”
दानिश डर से काँप रहा था।
“मुझे ये काम छोड़ना है…”
फिर अचानक…
ताबूत के अंदर से ज़ोरदार धमाका हुआ।
धड़ाम!
लकड़ी हिल गई।
समीर पीछे गिर पड़ा।
ताबूत के अंदर मौजूद चीज़ अब ज़ोर-ज़ोर से ताबूत पीट रही थी।
धड़ाम!
धड़ाम!
धड़ाम!
और फिर…
आवाज़ आई—
“दरवाज़ा खोलो…”
आवाज़ इंसानी थी…
लेकिन उसमें कुछ ऐसा था जो इंसान नहीं था।
जैसे कई लोग एक साथ बोल रहे हों।
रघु ने डर छिपाते हुए कहा,
“खोलकर देखते हैं।”
समीर चीखा,
“दिमाग खराब हो गया है क्या?”
लेकिन रघु ने ताबूत के ऊपर लगे जंग लगे ताले को पकड़ लिया।
दानिश पीछे हट गया।
“मत खोलो…”
हवा अचानक ठंडी हो गई।
बारिश रुक गई।
पूरा कब्रिस्तान एकदम शांत हो गया।
इतनी शांति कि तीनों की सांसों की आवाज़ तक सुनाई दे रही थी।
रघु ने ताला तोड़ा।
चक…
ताबूत का ढक्कन थोड़ा खुला।
और उसी पल…
एक सड़ी हुई बदबू हवा में फैल गई।
ऐसी बदबू मानो कई साल पुरानी लाश सड़ रही हो।
समीर उल्टी करने लगा।
रघु ने हिम्मत करके ढक्कन पूरा उठाया।
अंदर अंधेरा था।
कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
दानिश ने मोबाइल की Flashlight जलाई।
रोशनी ताबूत के अंदर पड़ी।
और अगले ही सेकंड…
तीनों की चीख निकल गई।
अंदर एक औरत थी।
उसका शरीर सफेद कपड़ों में लिपटा था। बाल पूरे चेहरे पर फैले थे। उसकी आँखें खुली हुई थीं… लेकिन उनमें पुतलियाँ नहीं थीं।
सिर्फ सफेदी।
उसके होंठ धीरे-धीरे हिल रहे थे।
“तुम देर से आए…”
समीर पीछे हटते हुए बोला,
“या अल्लाह…”
और तभी…
औरत ने मुस्कुराया।
उसकी मुस्कान इंसानी नहीं थी।
उसका जबड़ा धीरे-धीरे इतना खुला कि मानो टूट जाएगा।
फिर वह अचानक सीधी बैठ गई।
दानिश डर के मारे जमीन पर गिर पड़ा।
रघु ने काँपते हुए पूछा,
“तू… कौन है?”
औरत ने गर्दन टेढ़ी की।
चटाक…
उसकी गर्दन असामान्य तरीके से घूम गई।
“मैं अभी भी भूखी हूँ…”
इतना कहते ही उसकी लंबी काली जीभ बाहर निकली।
समीर भागने लगा।
लेकिन तभी…
कब्रिस्तान की सारी कब्रों से आवाज़ आने लगी।
ठक…
ठक…
ठक…
जैसे हर ताबूत के अंदर कोई जाग गया हो।
दानिश रोने लगा।
“हमें यहाँ नहीं आना चाहिए था…”
अचानक जमीन हिलने लगी।
टूटी कब्रों के नीचे से हाथ बाहर आने लगे।
सड़े हुए हाथ…
मिट्टी से भरे हाथ…
लाशों के हाथ।
समीर भागते-भागते रुक गया।
उसके सामने एक बूढ़ी औरत खड़ी थी।
उसकी आँखें नहीं थीं।
वह फुसफुसाई,
“उसे क्यों जगाया…”
समीर चीख पड़ा।
उधर रघु ने जेब से पिस्तौल निकाली।
“पास मत आना!”
लेकिन ताबूत वाली औरत धीरे-धीरे उसके सामने आ गई।
उसके पैर जमीन को छू नहीं रहे थे।
वह हवा में तैर रही थी।
रघु ने गोली चला दी।
धाँय!
गोली उसके सिर के आर-पार निकल गई।
लेकिन वह हँसने लगी।
धीमी…
डरावनी हँसी।
फिर उसने अपना हाथ रघु के चेहरे पर रखा।
अगले ही पल…
रघु की चीख आसमान में गूँज उठी।
उसका चेहरा गलने लगा।
त्वचा पिघलकर नीचे गिर रही थी।
कुछ ही सेकंड में उसका पूरा शरीर काला पड़ गया।
और वह जमीन पर मर गया।
दानिश सदमे में जड़ हो गया।
समीर भागते हुए कब्रिस्तान के गेट तक पहुँचा।
लेकिन गेट बंद हो चुका था।
उसने पूरी ताकत से धक्का मारा।
कुछ नहीं हुआ।
पीछे से वही आवाज़ आई—
“भागकर कहाँ जाओगे…”
समीर ने पलटकर देखा।
वह औरत अब बिल्कुल उसके पीछे खड़ी थी।
इतनी करीब कि उसकी सड़ी हुई सांस महसूस हो रही थी।
समीर काँपने लगा।
“तुझे क्या चाहिए…”
औरत ने धीरे से कहा,
“तुम तीनों ने सौदा पूरा किया है… अब कीमत दोगे…”
अचानक समीर को याद आया।
तीन दिन पहले एक अजनबी आदमी उनके Garage में आया था।
उसने कहा था—
“बस ताबूत को कब्रिस्तान तक पहुँचा दो। बाकी सवाल मत पूछना।”
उस आदमी की आँखें पूरी काली थीं।
तब उन्होंने पैसे देखकर सवाल नहीं किए।
लेकिन अब…
समीर समझ चुका था कि वे किसी इंसानी काम में शामिल नहीं थे।
दानिश अचानक चिल्लाया,
“वो देखो!”
कब्रिस्तान के बीचोंबीच मिट्टी फट रही थी।
धीरे-धीरे एक पुरानी कब्र खुल रही थी।
उसके अंदर से एक लंबा काला ताबूत बाहर आने लगा।
उस ताबूत पर वही निशान बना था जो पहले वाले पर था।
और फिर…
उसका ढक्कन अपने आप खुल गया।
अंदर अंधेरा था।
लेकिन उस अंधेरे में दो लाल आँखें चमक रही थीं।
पूरा कब्रिस्तान काँप उठा।
पेड़ों पर बैठे कौवे एक साथ उड़ गए।
और उसी पल…
ताबूत वाली औरत घुटनों के बल बैठ गई।
जैसे किसी मालिक के सामने झुक रही हो।
दानिश डर के मारे बेहोश हो गया।
समीर की टाँगें जवाब दे चुकी थीं।
काले ताबूत के अंदर से भारी आवाज़ आई—
“सौ साल बाद… आखिर दरवाज़ा खुल गया…”
हवा में चीखें गूंजने लगीं।
जैसे हजारों लोग एक साथ रो रहे हों।
समीर ने देखा…
कब्रिस्तान की सारी लाशें अब बाहर आ चुकी थीं।
वे धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रही थीं।
कुछ के चेहरे नहीं थे।
कुछ आधे जले हुए थे।
कुछ बच्चों की लाशें थीं।
और सबकी आँखें सफेद थीं।
समीर रोने लगा।
“मुझे जाने दो…”
काले ताबूत के अंदर मौजूद चीज़ हँसी।
“अब कोई नहीं जाएगा…”
अचानक सारी लाशें समीर पर टूट पड़ीं।
उसकी चीख रात में गूंजती रही।
फिर सब शांत हो गया।
सिर्फ बारिश की आवाज़ बची।
अगली सुबह…
पुलिस को कब्रिस्तान के बाहर वही पुरानी Van मिली।
लेकिन अंदर कोई नहीं था।
सिर्फ एक चीज़ मिली—
लकड़ी का पुराना ताबूत।
बंद।
उस पर वही अंग्रेज़ी में लिखा था—
“DO NOT OPEN AFTER MIDNIGHT”
एक पुलिस अफसर ने ताबूत को छूने की कोशिश की।
तभी…
अंदर से आवाज़ आई—
ठक…
फिर…
एक और आवाज़—
“मुझे बाहर निकालो…”
और कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
क्योंकि उस रात के बाद शहर में लोग गायब होने लगे।
हर गायब इंसान की आखिरी location उसी कब्रिस्तान के आसपास मिलती।
लोग कहते थे कि आधी रात को वहाँ से किसी औरत के रोने की आवाज़ आती है।
कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्होंने काले कपड़ों में एक औरत को सड़क किनारे खड़े देखा।
वह Lift मांगती थी।
जो भी उसे गाड़ी में बैठाता…
वह कभी वापस नहीं आता।
धीरे-धीरे शहर में यह बात फैल गई कि कब्रिस्तान के नीचे कोई पुरानी evil power कैद थी।
और किसी ने उसे आज़ाद कर दिया।
लेकिन असली डर अभी बाकी था।
क्योंकि एक रात…
शहर के एक Hospital में अचानक बिजली चली गई।
Emergency Backup भी बंद हो गया।
पूरा Hospital अंधेरे में डूब गया।
नर्सें घबरा गईं।
मरीज चीखने लगे।
तभी Morgue Room से आवाज़ आने लगी।
ठक…
ठक…
ठक…
गार्ड डरते हुए अंदर गया।
कमरे में दर्जनों Dead Bodies रखी थीं।
और बीच में रखा था—
वही पुराना ताबूत।
गार्ड काँप गया।
“ये यहाँ कैसे आया…”
फिर अंदर से आवाज़ आई—
“दरवाज़ा खोलो…”
गार्ड पीछे हट गया।
लेकिन उसके पैर किसी चीज़ से टकराए।
उसने नीचे देखा।
फर्श पर कीचड़ भरे पैरों के निशान थे।
जैसे कोई अभी-अभी ताबूत से बाहर निकला हो।
गार्ड ने धीरे-धीरे सिर उठाया।
और अगले ही पल…
उसकी चीख पूरे Hospital में गूँज उठी।
क्योंकि कमरे के कोने में वही औरत खड़ी थी।
उसकी सफेद आँखें अंधेरे में चमक रही थीं।
उसने मुस्कुराकर कहा—
“अब मेरी बारी खत्म…
अब तुम्हारी शुरू…”
उस रात Hospital में बारह लोग गायब हो गए।
सिर्फ खून मिला।
और दीवार पर उंगलियों से लिखा था—
“I AM FREE”
उसके बाद शहर में Curfew लग गया।
लोग रात में घरों से निकलना बंद कर चुके थे।
Social Media पर अफवाहें फैलने लगीं।
कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने अपने घरों के बाहर रात में ताबूत देखा।
कुछ लोगों ने Video Upload किए…
लेकिन हर Video कुछ मिनट बाद अपने आप Delete हो जाता।
एक Blogger ने इस रहस्य की सच्चाई जानने की कोशिश की।
उसका नाम कबीर था।
वह Paranormal Cases पर काम करता था।
उसे लगा कि यह सब Viral Marketing या Fake Horror Story होगी।
लेकिन जब उसने पहली बार कब्रिस्तान में कदम रखा…
उसे समझ आ गया कि यहाँ कुछ बहुत गलत है।
उसने Camera On किया।
चारों तरफ सन्नाटा था।
फिर अचानक उसके Camera में एक Shadow दिखाई दी।
कबीर ने पीछे मुड़कर देखा।
कोई नहीं था।
लेकिन Camera में वह Shadow अब भी खड़ी थी।
धीरे-धीरे वह Shadow इंसानी आकार लेने लगी।
सफेद आँखें…
लंबे बाल…
फटा हुआ चेहरा…
कबीर की सांस रुक गई।
वह भागने लगा।
लेकिन तभी उसके मोबाइल पर Unknown Number से Call आया।
उसने काँपते हाथों से फोन उठाया।
दूसरी तरफ से वही आवाज़ आई—
“तुम मुझे Record नहीं कर सकते…”
अचानक फोन से खून टपकने लगा।
कबीर चीखा और फोन फेंक दिया।
तभी उसके पीछे से किसी ने फुसफुसाया—
“मुड़कर मत देखना…”
लेकिन इंसानी फितरत…
डर में हमेशा वही करती है जो नहीं करना चाहिए।
कबीर मुड़ा।
और उसी पल उसकी चीख अंधेरे में गुम हो गई।
अगले दिन उसका Camera टूटी हालत में मिला।
Video File आखिरी सेकंड तक Record हुई थी।
उस Video में कबीर रोते हुए भाग रहा था।
फिर Camera जमीन पर गिरता है।
और कुछ सेकंड बाद…
एक चेहरा स्क्रीन के बिल्कुल पास आता है।
सफेद आँखें…
खूनी मुस्कान…
और फिर Video अचानक बंद हो जाता है।
उसके बाद से शहर को Ghost City कहा जाने लगा।
रात होते ही सड़कें खाली हो जातीं।
लोग अपने दरवाज़ों पर Holy Symbol लगाने लगे।
लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
क्योंकि वह चीज़ अब किसी एक जगह तक सीमित नहीं थी।
वह हर जगह पहुँच सकती थी।
एक रात…
शहर के Radio Station पर Live Broadcast चल रहा था।
RJ लोगों से सामान्य बातें कर रहा था।
तभी अचानक आवाज़ टूटने लगी।
फिर Radio पर सिर्फ खरोंचने की आवाज़ आने लगी।
खररररर…
सभी Listener घबरा गए।
फिर अचानक एक औरत की आवाज़ आई—
“क्या तुम मुझे सुन सकते हो…”
RJ डर गया।
“कौन बोल रहा है?”
कुछ सेकंड चुप्पी रही।
फिर वही आवाज़ हँसी।
और बोली—
“मैं अब हर घर में हूँ…”
उसी पल पूरे शहर की बिजली चली गई।
और लोगों ने अपने घरों के बाहर एक साथ वही आवाज़ सुनी—
ठक…
ठक…
ठक…
जैसे किसी ताबूत के अंदर से कोई बाहर आने की कोशिश कर रहा हो।
उस रात के बाद हजारों लोग शहर छोड़कर भाग गए।
लेकिन जो लोग गए…
उनमें से कई रास्ते में गायब हो गए।
कुछ Cars सुनसान सड़कों पर मिलीं।
अंदर कोई नहीं था।
सिर्फ पीछे की सीट पर मिट्टी और लंबे काले बाल पड़े थे।
सरकार ने पूरे इलाके को Seal कर दिया।
लेकिन सच कभी छिप नहीं पाया।
आज भी इंटरनेट के Dark Forums पर लोग उस ताबूत की चर्चा करते हैं।
कुछ कहते हैं कि वह शापित Coffin अब भी घूम रहा है।
कुछ कहते हैं कि आधी रात को अगर कोई अकेले सुनसान सड़क पर जाए…
तो उसे सड़क किनारे एक औरत दिखेगी।
वह धीरे से पूछेगी—
“क्या तुम मुझे घर छोड़ दोगे…”
अगर तुमने हाँ कहा…
तो अगली सुबह तुम्हारी गाड़ी खाली मिलेगी।
और पीछे की सीट पर लिखा होगा—
“DO NOT OPEN AFTER MIDNIGHT”
अगर कभी आधी रात को तुम्हारे दरवाज़े पर कोई दस्तक दे…
और बाहर कोई ताबूत रखा हो…
तो भूलकर भी उसे मत खोलना।
क्योंकि हो सकता है…
अंदर से वही आवाज़ आए—
“मुझे बाहर निकालो…”
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