Ye Sachchi Horror Story Aapko Dara Degi | Bhoot Ki Kahani

WRITER – Shaurya Anand

रात के ठीक 1:13 बजे मोबाइल की स्क्रीन अपने आप जल उठी।

कमरे में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था। बाहर लगातार बारिश हो रही थी और खिड़की के शीशों पर गिरती बूंदों की आवाज़ किसी अजीब Warning जैसी लग रही थी।

स्क्रीन पर एक Unknown Number चमक रहा था।

लेकिन डराने वाली बात नंबर नहीं थी…

डराने वाली बात थी उस मैसेज में लिखा हुआ सिर्फ एक वाक्य—

“मत जाना उस पुराने मकान के अंदर… वो अभी भी जाग रही है।”

संदेश पढ़ते ही शरीर में ठंडक दौड़ गई।

Bhoot Ki Kahani

राघव ने तुरंत फोन बंद कर दिया।

वह पिछले तीन दिनों से शहर से दूर पहाड़ियों के बीच बने एक पुराने Mansion में ठहरा हुआ था। जगह बेहद सस्ती थी और उसे कुछ दिनों के लिए अकेलापन चाहिए था। शहर के शोर, काम के दबाव और लगातार बढ़ती बेचैनी से दूर वह किसी शांत जगह की तलाश में था।

Bhoot Ki Kahani लेकिन अब उसे लगने लगा था कि उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है।

उस Mansion के बारे में आसपास के लोग ज्यादा बात नहीं करते थे। जब भी कोई उसका नाम लेता, अचानक चुप हो जाता।

होटल के बूढ़े मालिक ने सिर्फ इतना कहा था—

“अगर रात में ऊपर वाली मंज़िल से किसी औरत के चलने की आवाज़ आए… तो दरवाज़ा मत खोलना।”

उस समय राघव हँस पड़ा था।

उसे लगा था कि बूढ़ा आदमी Tourist को डराने के लिए कहानी बना रहा है।

लेकिन अब…

अब उसे समझ आने लगा था कि लोग उस जगह से इतना डरते क्यों हैं।

उस रात बिजली बार-बार जा रही थी।

कमरे की दीवारों पर नमी जमी हुई थी। पुरानी लकड़ी की अलमारी अपने आप चरमराने लगती थी। कभी-कभी ऐसा लगता जैसे कोई उसके कमरे के बाहर धीरे-धीरे चल रहा हो।

टप…

टप…

टप…

जैसे किसी के गीले पैर लकड़ी के फर्श पर पड़ रहे हों।

राघव ने खुद को समझाया कि यह सिर्फ उसका भ्रम है।

लेकिन तभी ऊपर वाली मंज़िल से कुर्सी घसीटने जैसी आवाज़ आई।

घर में उसके अलावा कोई नहीं था।

उसने धीरे से दरवाज़ा खोला।

लंबा अंधेरा गलियारा उसके सामने फैला हुआ था। दीवारों पर लगी पुरानी तस्वीरें टेढ़ी लटक रही थीं। कई तस्वीरों में चेहरों पर खरोंचें थीं, जैसे किसी ने जानबूझकर उन्हें मिटाने की कोशिश की हो।

अचानक गलियारे के आखिरी छोर पर उसे एक औरत दिखाई दी।

सफेद कपड़े…

लंबे काले बाल…

और गर्दन अस्वाभाविक तरीके से एक तरफ झुकी हुई।

राघव का गला सूख गया।

वह कुछ सेकंड तक वहीं खड़ी रही।

फिर धीरे-धीरे पीछे मुड़ी…

और अंधेरे में गायब हो गई।

राघव तुरंत कमरे में वापस भागा और दरवाज़ा बंद कर लिया।

उसकी सांसें तेज़ हो चुकी थीं।

“यह सपना है…”

वह बार-बार खुद से यही कह रहा था।

लेकिन तभी उसके फोन में फिर Message आया।

“उसने तुम्हें देख लिया है।”

अब डर असली हो चुका था।

उसने तुरंत होटल मालिक को कॉल लगाया, लेकिन नेटवर्क नहीं था।

कमरे का तापमान अचानक बहुत ठंडा हो गया।

उसकी सांसों से धुआँ निकलने लगा।

और तभी…

Bhoot Ki Kahani

कमरे के कोने में रखी कुर्सी धीरे-धीरे अपने आप हिलने लगी।

चीईईईई…

लकड़ी की डरावनी आवाज़ पूरे कमरे में गूंज उठी।

राघव जड़ हो गया।

कुर्सी के पीछे अंधेरा गहरा होने लगा।

और उस अंधेरे में दो सफेद आंखें दिखाई दीं।

वह चीज़ इंसान नहीं थी।

उसका चेहरा आधा जला हुआ था। त्वचा जगह-जगह से फटी हुई थी। होंठों की जगह सिर्फ काला मांस दिखाई दे रहा था।

लेकिन सबसे डरावनी बात…

वह मुस्कुरा रही थी।

धीरे-धीरे।

अस्वाभाविक तरीके से।

राघव चीख पड़ा।

उसने टेबल पर रखा लैम्प उठाकर उस दिशा में फेंका।

लैम्प टूट गया।

कमरा अंधेरे में डूब गया।

और तभी…

उसे अपने कान के बिल्कुल पास किसी औरत की फुसफुसाहट सुनाई दी—

“तुम देर से आए हो…”

राघव पागलों की तरह दरवाज़ा खोलकर भागा।

गलियारे में अंधेरा फैला हुआ था।

नीचे जाने वाली सीढ़ियों की तरफ दौड़ते समय उसे महसूस हुआ कि कोई उसके पीछे तेजी से चल रहा है।

टप…

टप…

टप…

लेकिन उन कदमों की आवाज़ इंसानी नहीं थी।

वे बहुत तेज़ थीं।

बहुत भारी।

जैसे कोई चीज़ दीवारों पर रेंगते हुए उसका पीछा कर रही हो।

उसने पीछे मुड़कर देखा।

और उसकी चीख निकल गई।

वह औरत अब छत पर उल्टी चिपकी हुई थी।

उसकी गर्दन पूरी तरह घूम चुकी थी।

काले बाल नीचे लटक रहे थे।

और उसकी आंखें…

सीधे राघव को घूर रही थीं।

वह पागलों की तरह सीढ़ियों से नीचे भागा।

लेकिन नीचे पहुंचते ही उसका दिल बैठ गया।

मुख्य दरवाज़ा गायब था।

जहाँ दरवाज़ा होना चाहिए था, वहाँ सिर्फ पुरानी दीवार थी।

“यह कैसे संभव है…?”

उसकी आवाज़ कांप रही थी।

तभी पीछे से धीमी हँसी सुनाई दी।

वह धीरे-धीरे पलटा।

सीढ़ियों पर वही औरत खड़ी थी।

इस बार उसका चेहरा साफ दिखाई दे रहा था।

आंखों की जगह गहरे काले गड्ढे थे।

और उसके होंठ फटे हुए थे।

वह धीरे-धीरे नीचे उतरने लगी।

हर कदम के साथ लकड़ी की सीढ़ियाँ चरमराने लगीं।

राघव पीछे हटता गया।

लेकिन अचानक उसका पैर किसी चीज़ से टकराया।

नीचे देखा—

फर्श पर पुरानी तस्वीरें बिखरी हुई थीं।

एक तस्वीर में वही Mansion दिखाई दे रहा था।

दूसरी तस्वीर में कुछ लोग थे।

और तीसरी तस्वीर देखकर उसका खून जम गया।

उस तस्वीर में वह खुद खड़ा था।

उसी घर के सामने।

लेकिन तस्वीर बहुत पुरानी थी।

कम से कम 40-50 साल पुरानी।

“यह… यह असंभव है…”

उसके हाथ कांपने लगे।

तभी पीछे से ठंडी सांस उसकी गर्दन से टकराई।

वह औरत अब उसके बिल्कुल पीछे खड़ी थी।

धीरे-धीरे उसने अपना हाथ राघव के कंधे पर रखा।

हाथ बर्फ से भी ज्यादा ठंडा था।

और फिर उसने फुसफुसाया—

“अब तुम यहीं रहोगे…”

अचानक पूरा घर जोर से हिलने लगा।

दीवारों से खून जैसी लाल नमी बहने लगी।

ऊपर लगे झूमर अपने आप हिलने लगे।

हर तरफ चीखें गूंजने लगीं।

ऐसा लग रहा था जैसे उस Mansion के अंदर सैकड़ों लोग दर्द में चिल्ला रहे हों।

राघव ने पूरी ताकत से उस औरत को धक्का दिया और भागने लगा।

उसे सामने एक छोटा दरवाज़ा दिखाई दिया।

वह तुरंत अंदर घुस गया।

कमरा बेहद पुराना था।

दीवारों पर अजीब Symbols बने हुए थे।

बीच में एक लकड़ी की कुर्सी रखी थी।

और कुर्सी पर बैठी थी…

एक छोटी लड़की।

उसकी आंखें बंद थीं।

हाथों में पुरानी गुड़िया थी।

कमरे में सड़ांध की भयानक बदबू फैली हुई थी।

अचानक लड़की ने आंखें खोल दीं।

पूरी सफेद आंखें।

बिना पुतलियों के।

“वो तुम्हें जाने नहीं देगी…”

उसने धीमी आवाज़ में कहा।

राघव डर से कांप उठा।

“कौन…?”

लड़की मुस्कुराई।

और धीरे-धीरे अपनी उंगली पीछे की तरफ उठाई।

राघव पलटा—

और उसका दिल रुकते-रुकते बचा।

वही औरत दरवाज़े पर खड़ी थी।

लेकिन अब उसका शरीर इंसानी नहीं लग रहा था।

उसके हाथ अस्वाभाविक रूप से लंबे हो चुके थे।

उंगलियां नुकीले पंजों जैसी दिख रही थीं।

मुंह पूरी तरह खुल चुका था।

इतना ज्यादा कि जबड़ा लगभग टूट गया था।

और अंदर…

सिर्फ अंधेरा था।

कोई जीभ नहीं।

कोई दांत नहीं।

बस अंतहीन काला अंधेरा।

अचानक वह चीज़ चीखते हुए राघव की तरफ झपटी।

राघव ने पास पड़ी कुर्सी उठाकर मारी और कमरे से बाहर भागा।

अब पूरा Mansion बदल चुका था।

गलियारे लंबे हो गए थे।

दीवारों पर खून के हाथों के निशान थे।

हर तरफ फुसफुसाहटें गूंज रही थीं।

“मत भागो…”

“तुम अब हमारे हो…”

“वो तुम्हें ढूंढ लेगी…”

राघव रोने लगा।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह कहाँ जाए।

तभी उसे नीचे तहखाने की तरफ जाने वाला रास्ता दिखाई दिया।

वह तेजी से नीचे उतर गया।

तहखाने में घुप अंधेरा था।

लेकिन वहाँ उसे एक पुरानी डायरी मिली।

कांपते हाथों से उसने उसे खोला।

पहले पन्ने पर लिखा था—

“अगर कोई यह पढ़ रहा है… तो समझ लो तुम बच नहीं सकते।”

डायरी में लिखा था कि कई साल पहले इस Mansion में रहने वाली एक औरत की मौत आग में हुई थी।

लेकिन उसकी मौत सामान्य नहीं थी।

लोग कहते थे कि वह किसी Dark Ritual में शामिल थी।

आग लगने के बाद उसका शरीर कभी नहीं मिला।

उस रात के बाद से जो भी उस घर में ठहरता…

वह गायब हो जाता।

और सबसे डरावनी बात—

हर गायब होने वाले इंसान की तस्वीर कुछ दिनों बाद घर की दीवार पर दिखाई देती।

राघव के हाथ से डायरी गिर गई।

उसे अचानक याद आया…

वह पुरानी तस्वीर।

उसमें वह खुद था।

मतलब…

घर उसे पहले से जानता था।

अचानक तहखाने में किसी के घिसटते हुए आने की आवाज़ गूंजने लगी।

घ्रररर…

घ्रररर…

राघव ने टॉर्च जलाई।

और सामने जो दिखाई दिया…

उसे देखकर उसकी चीख निकल गई।

फर्श पर कई इंसानी शरीर पड़े थे।

सड़े हुए।

आधे जले हुए।

और उन सबकी आंखें खुली हुई थीं।

जैसे वे अभी भी जिंदा हों।

अचानक उनमें से एक शव ने धीरे-धीरे अपना सिर घुमाया।

“भागो…”

उसने टूटी हुई आवाज़ में कहा।

तभी पीछे से वही औरत दिखाई दी।

इस बार उसके पूरे शरीर से धुआँ निकल रहा था।

उसकी त्वचा जल रही थी।

लेकिन वह फिर भी मुस्कुरा रही थी।

राघव पूरी ताकत से भागा।

तहखाने के आखिर में उसे लोहे का एक पुराना दरवाज़ा दिखाई दिया।

उसने जोर लगाकर दरवाज़ा खोला।

और बाहर निकलते ही जमीन पर गिर पड़ा।

सुबह हो चुकी थी।

बारिश रुक चुकी थी।

Mansion उसके पीछे खामोश खड़ा था।

लेकिन…

अब वह पूरी तरह जला हुआ दिखाई दे रहा था।

जैसे वहाँ सालों से कोई रहता ही न हो।

राघव कांपते हुए सड़क की तरफ भागा।

कुछ दूर उसे एक बूढ़ा आदमी मिला।

उसने हांफते हुए पूरी कहानी बता दी।

बूढ़ा आदमी कुछ देर चुप रहा।

फिर धीरे से बोला—

“लेकिन वो Mansion तो 30 साल पहले आग में जलकर खत्म हो चुका था…”

राघव के पैरों तले जमीन खिसक गई।

“न… नहीं… मैं अभी वहीं से आया हूँ…”

बूढ़े आदमी की आंखों में डर उतर आया।

उसने कांपते हुए पूछा—

“क्या तुमने… उसे देख लिया?”

राघव कुछ बोल नहीं पाया।

बूढ़ा आदमी धीरे-धीरे पीछे हटने लगा।

“अगर उसने तुम्हें देख लिया है… तो वो तुम्हें कभी नहीं छोड़ेगी…”

उस रात के बाद राघव शहर लौट आया।

लेकिन चीज़ें सामान्य नहीं थीं।

हर रात ठीक 1:13 बजे उसके फोन में Unknown Number से Message आता—

“मैं आ रही हूँ…”

कमरे की लाइट अपने आप बंद हो जाती।

दीवारों पर गीले हाथों के निशान दिखाई देते।

और कभी-कभी…

आईने में उसके पीछे वही औरत खड़ी दिखाई देती।

धीरे-धीरे राघव की हालत खराब होने लगी।

उसने लोगों से मिलना बंद कर दिया।

घर से निकलना बंद कर दिया।

क्योंकि उसे हर जगह वही आवाज़ सुनाई देती—

टप…

टप…

टप…

एक रात उसने फैसला किया कि अब वह यह सब खत्म कर देगा।

उसने सारे दरवाज़े बंद कर दिए।

कमरे की लाइट जला दी।

और खुद को समझाने लगा कि यह सिर्फ उसका भ्रम है।

लेकिन तभी…

टीवी अपने आप चालू हो गया।

स्क्रीन पर सिर्फ काला अंधेरा था।

फिर धीरे-धीरे उसमें एक चेहरा दिखाई देने लगा।

जला हुआ चेहरा।

सफेद आंखें।

फटी मुस्कान।

वही औरत।

टीवी से धीमी आवाज़ आई—

“मैं पहुँच गई हूँ…”

अचानक कमरे की सारी लाइट बंद हो गई।

पूरा घर अंधेरे में डूब गया।

राघव कांपने लगा।

और तभी…

उसके पीछे किसी ने बहुत धीरे से फुसफुसाया—

“अब तुम कहीं नहीं जा सकते…”

उस रात पड़ोसियों ने उसके घर से भयानक चीखें सुनीं।

लेकिन जब सुबह पुलिस अंदर गई…

घर पूरी तरह खाली था।

सिर्फ दीवार पर एक नई तस्वीर टंगी हुई थी।

उस तस्वीर में राघव खड़ा था।

उसके पीछे वही जली हुई औरत मुस्कुरा रही थी।

और तस्वीर के नीचे खून से लिखा था—

“NEXT…”

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