WRITER – AMIT VERMA
पूजा गहरी नींद में थी… तभी रात के ठीक 2:17 पर उसकी आँखें डर से खुल गईं।
कमरे में AC बंद था… फिर भी उसकी गर्दन पर बर्फ जैसी ठंडी हवा चल रही थी।
और सामने ड्रेसिंग टेबल के शीशे में… कोई उसे देख रहा था।
पूजा का गला सूख गया।

कमरे की सारी लाइटें बंद थीं। सिर्फ बाहर सड़क पर लगी पीली स्ट्रीट लाइट की रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी। उसी हल्की रोशनी में उसने फिर शीशे की तरफ देखा।
Nazar utarna वहाँ कोई खड़ा नहीं था।
उसने गहरी सांस ली।
“शायद सपना था…”
लेकिन तभी…
टक… टक… टक…
ड्रेसिंग टेबल के शीशे पर अंदर से किसी ने उंगलियाँ मारीं।
पूजा का पूरा शरीर जम गया।
उसने तुरंत चादर सिर तक खींच ली। दिल इतनी तेज धड़क रहा था कि उसे लग रहा था पड़ोस वाले भी सुन लेंगे। कुछ सेकंड तक आवाज़ बंद रही। फिर धीरे-धीरे कमरे में किसी के चलने की आवाज़ आने लगी।
नंगे पैरों की।
चरर… चरर…
जैसे कोई फर्श पर धीरे-धीेरे घूम रहा हो।
पूजा ने काँपते हुए मोबाइल उठाया। स्क्रीन पर टाइम था — 2:19 AM।
उसने तुरंत अपनी माँ को कॉल लगाया।
“मम्मी…”
उधर से नींद भरी आवाज़ आई, “क्या हुआ बेटा?”
पूजा रोने लगी।
“मम्मी… वो मुझे देख रही है…”
“कौन?”
पूजा बोल नहीं पा रही थी।
उसकी नजर अब भी चादर के नीचे से ड्रेसिंग टेबल की तरफ थी।
और इस बार…
Nazar utarna
शीशे में उसे साफ दिखाई दिया।
एक औरत।
सफेद चेहरा।
सूखी आँखें।
बाल आधे चेहरे पर चिपके हुए।
और होंठ ऐसे जैसे किसी ने सिल दिए हों।
Nazar utarna पूजा चीख पड़ी।
फोन हाथ से गिर गया।
अगली सुबह जब पूजा की माँ, संगीता, उसके फ्लैट पहुँची… तो पूजा दरवाज़े के पास जमीन पर बैठी मिली। आँखें सूजी हुई थीं। रातभर सोई नहीं थी।
“क्या हुआ था?” संगीता ने घबराकर पूछा।
पूजा ने पानी पीते हुए काँपती आवाज़ में कहा,
“मम्मी… वो फिर आ गई…”
“कौन?”
“पता नहीं… लेकिन वो मुझे देखती रहती है…”
संगीता ने पूरा घर देखा। सब सामान्य था। कोई निशान नहीं। कोई टूटी चीज नहीं।
“तू बहुत काम कर रही है पूजा। दिमाग पर असर पड़ रहा है।”
पूजा ने धीरे से सिर हिलाया।
“नहीं मम्मी… ये सपना नहीं है।”
उसने ड्रेसिंग टेबल की तरफ इशारा किया।
“वो वहीं खड़ी थी…”
संगीता कुछ पल चुप रही। फिर उसने धीरे से पूछा,
“तूने किसी को कुछ दिखाया था क्या?”
“क्या मतलब?”
“फोटो… सोशल मीडिया… नया घर… कुछ?”
पूजा अचानक चुप हो गई।
दो हफ्ते पहले ही उसने अपना नया फ्लैट लिया था। मुंबई के पुराने इलाके परेल में। बिल्डिंग बहुत पुरानी थी, लेकिन अंदर से फ्लैट सुंदर था। उसने गृहप्रवेश की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर डाली थीं।

हजारों लाइक्स आए थे।
लोगों ने लिखा था —
“नजर ना लगे।”
“इतना सुंदर घर!”
“ड्रीम लाइफ।”
संगीता ने गहरी सांस ली।
“आज शाम को मैं किसी को बुलाती हूँ।”
“किसको?”
“नजर उतारने वाली को।”
पूजा हल्का हँसी।
“मम्मी… प्लीज़। ये 2026 है।”
लेकिन संगीता के चेहरे पर कोई मुस्कान नहीं थी।
“कुछ चीजें साल बदलने से खत्म नहीं होतीं।”
शाम 7 बजे दरवाज़े की घंटी बजी।
बाहर एक बूढ़ी औरत खड़ी थी। झुकी हुई कमर। हाथ में लाल कपड़ा और छोटी सी थैली।
उसकी आँखें अजीब थीं। बहुत शांत… लेकिन डरावनी।
“यही लड़की है?” उसने पूजा को देखते ही पूछा।
संगीता ने हाँ में सिर हिलाया।
बूढ़ी औरत ने बिना कुछ कहे घर के अंदर कदम रखा। जैसे उसे पहले से सब पता हो।
उसने कमरे में जाते ही ड्रेसिंग टेबल को देखा।
और उसी पल उसका चेहरा बदल गया।
“इसे ढक दो।”
पूजा ने पूछा, “क्यों?”
“अभी ढक दो।”
उसकी आवाज़ अचानक बहुत भारी हो गई थी।
संगीता ने तुरंत सफेद चादर से शीशा ढक दिया।
बूढ़ी औरत ने पूजा को सोफे पर बैठाया। फिर थैली से कुछ निकाला — लाल मिर्च, नमक, सरसों और एक काला धागा।
कमरे में अचानक अजीब सी गंध फैलने लगी।
जली हुई चीज़ जैसी।
बूढ़ी औरत पूजा के चारों तरफ चीजें घुमाने लगी और धीरे-धीरे कुछ बुदबुदाने लगी।
पहले आवाज़ बहुत धीमी थी।
फिर तेज होने लगी।
पूजा को अचानक घबराहट होने लगी। साँस भारी हो गई।
और तभी…
ढकने वाली चादर अपने आप नीचे गिर गई।
सभी की नजर ड्रेसिंग टेबल पर गई।
शीशे में सिर्फ पूजा नहीं दिख रही थी।
उसके पीछे…
कोई खड़ा था।
लंबा।
बहुत दुबला।
और उसका चेहरा पूरा काला।
संगीता चीख पड़ी।
लेकिन बूढ़ी औरत बिल्कुल शांत रही।
उसने धीरे से कहा,
“मैंने कहा था… देर हो चुकी है।”
पूजा रोने लगी।
“ये क्या है?!”
बूढ़ी औरत ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“किसी की नजर नहीं लगी…”
“तो?”
“किसी ने तुम्हें देखा है।”
कमरे में अचानक तापमान गिर गया।
खिड़की अपने आप खुल गई।
ठंडी हवा अंदर आने लगी।
और उसी हवा में पूजा को किसी औरत की धीमी आवाज़ सुनाई दी—
“मुझे वापस चाहिए…”
उस रात बूढ़ी औरत ने पूजा को अकेला सोने से मना किया। तीनों एक ही कमरे में बैठे रहे।
रात के करीब 1 बजे बिल्डिंग की सारी बिजली चली गई।
पूरा फ्लोर अंधेरे में डूब गया।
सिर्फ बाहर कॉरिडोर में इमरजेंसी लाइट जल रही थी।
लाल रंग की।
उस लाल रोशनी में पूरा घर अजीब लग रहा था।
फिर…
ऊपर वाले फ्लैट से कुर्सी घसीटने की आवाज़ आने लगी।
घर्ररर…
घर्ररर…
पूजा ने डरकर पूछा, “ऊपर कोई रहता है?”
संगीता ने कहा, “नहीं।”
बूढ़ी औरत धीरे से खड़ी हुई।
उसने पहली बार डर दिखाया।
“ये यहाँ आ चुका है।”
“क्या?”
उसने जवाब नहीं दिया।
बस दरवाज़े की तरफ देखने लगी।
और फिर…
धड़ाम!
मुख्य दरवाज़ा जोर से हिला।
जैसे बाहर कोई पूरी ताकत से मार रहा हो।
धड़ाम!
धड़ाम!
पूजा चीखने लगी।
संगीता ने उसे पकड़ लिया।
“कौन है?!” संगीता चिल्लाई।
बाहर से कोई जवाब नहीं आया।
बस…
धीरे-धीरे खरोंचने की आवाज़ आने लगी।
कर्क… कर्क…
जैसे नाखून लकड़ी पर रगड़े जा रहे हों।
पूजा की आँखों से आँसू बह रहे थे।
“मम्मी…”
बूढ़ी औरत ने फुसफुसाकर कहा,
“दरवाज़ा मत खोलना। चाहे जो आवाज़ आए।”
अचानक बाहर से एक छोटी लड़की की रोने की आवाज़ आने लगी।
“मम्मी… दरवाज़ा खोलो…”
पूजा का दिल रुक गया।
आवाज़ बिल्कुल उसकी छोटी बहन जैसी थी… जो सालों पहले मर चुकी थी।
संगीता का चेहरा सफेद पड़ गया।
उसने काँपते हुए दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ाया।
“नहीं!” बूढ़ी औरत चिल्लाई।
लेकिन देर हो चुकी थी।
संगीता ने जैसे ही हैंडल छुआ…
पूरा घर हिल गया।
सारी खिड़कियाँ एक साथ बंद हुईं।
और ड्रेसिंग टेबल का शीशा जोर से टूट गया।
टन्न्न्न्न!!!
काँच के टुकड़े पूरे कमरे में फैल गए।
पूजा जमीन पर गिर गई।
और उसी पल…
उसने पहली बार उसे साफ देखा।
वही औरत।
लेकिन अब उसका चेहरा साफ था।
आँखें जली हुई थीं।
गर्दन टेढ़ी।
और होंठ खुले हुए।
जैसे बहुत दिनों से चीख रही हो।
वो सीधे पूजा को देख रही थी।
फिर मुस्कुराई।
और गायब हो गई।
अगली सुबह बूढ़ी औरत ने फ्लैट छोड़ने को कहा।
“ये जगह ठीक नहीं है।”
पूजा ने पूछा, “यहाँ पहले क्या हुआ था?”
बूढ़ी औरत ने जवाब देने से मना कर दिया।
लेकिन पूजा अब जानना चाहती थी।
उसने बिल्डिंग के पुराने वॉचमैन से बात की।
पहले वो टालता रहा। फिर आखिरकार बोला,
“तीन साल पहले यहाँ एक औरत रहती थी।”
“अकेली?”
“हाँ… लेकिन लोग कहते थे वो कुछ करती थी।”
“क्या?”
वॉचमैन ने धीरे से कहा,
“नजर उतारती थी।”
पूजा के हाथ ठंडे पड़ गए।
“फिर?”
“एक रात उसने खुद को इसी कमरे में बंद कर लिया। अगले दिन मिली…”
“कैसे?”
वॉचमैन चुप हो गया।
“कैसे मिली?”
“शीशे के सामने बैठी थी… और उसकी दोनों आँखें बाहर निकली हुई थीं।”
पूजा का गला सूख गया।
“पुलिस ने क्या कहा?”
“हार्ट अटैक।”
“और लोग?”
वॉचमैन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“लोगों ने कहा… वो कुछ गलत अपने साथ ले आई थी।”
उस रात पूजा ने फ्लैट छोड़ने का फैसला कर लिया।
सामान पैक होने लगा।
लेकिन जैसे-जैसे रात करीब आ रही थी… उसे बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
बार-बार ऐसा लग रहा था जैसे कोई पीछे खड़ा हो।
वो बार-बार मुड़कर देखती।
कोई नहीं।
रात 11 बजे उसने आखिरी बैग बंद किया।
तभी उसके फोन पर नोटिफिकेशन आया।
Instagram.
किसी ने उसकी फोटो पर कमेंट किया था।
“अब तुम बहुत सुंदर लग रही हो।”
अकाउंट बिना फोटो का था।
यूज़रनेम — @nazar_wali
पूजा का दिल बैठ गया।
उसने तुरंत प्रोफाइल खोली।
कोई पोस्ट नहीं।
लेकिन bio में सिर्फ एक लाइन लिखी थी—
“मैं तुम्हें देख रही हूँ।”
उसी पल पूरे घर की लाइट चली गई।
फोन की स्क्रीन अपने आप बंद हो गई।
और अंधेरे में…
ड्रेसिंग टेबल के टूटे हुए शीशे में दो आँखें चमकीं।
पूजा पीछे हट गई।
फिर धीरे-धीरे किसी के चलने की आवाज़ आने लगी।
चरर…
चरर…
चरर…
जैसे कोई उसके बहुत करीब आ रहा हो।
पूजा रोते हुए दरवाज़े की तरफ भागी।
लेकिन दरवाज़ा नहीं खुला।
उसने पूरी ताकत लगाई।
“खोलो! खोलो!”
तभी उसके कान के बिल्कुल पास किसी ने फुसफुसाया—
“तुमने मुझे बुलाया था…”
पूजा जम गई।
“मैंने… नहीं…”
“हर वो इंसान जो चाहता है लोग उसे देखें… वो मुझे बुलाता है।”
पूजा की साँस रुकने लगी।
धीरे-धीरे उसके पीछे ठंडी उंगलियाँ उसकी गर्दन को छूने लगीं।
“तुम्हें सबकी नजर चाहिए थी ना…”
कमरे में अचानक हजारों लोगों की फुसफुसाहट गूंजने लगी।
“सुंदर…”
“वाह…”
“कितनी परफेक्ट…”
“नजर ना लगे…”
पूजा कान बंद करके चीखने लगी।
लेकिन आवाजें और तेज हो गईं।
और तभी…
उसने समझा।
ये कोई आत्मा नहीं थी।
ये… नजर थी।
सालों से लोगों की जलन, लालच, बुरी नजर… सब कुछ।
जो उस औरत ने अपने अंदर खींचा था।
और अब…
वो पूजा में आ चुका था।
क्योंकि उसने खुद को दुनिया के सामने खोल दिया था।
हर तस्वीर।
हर दिखावा।
हर चाहत।
सबने मिलकर उसे बुलाया था।
पूजा जमीन पर गिर गई।
उसकी आँखें जलने लगीं।
ऐसा लग रहा था जैसे अंदर कोई घुस रहा हो।
वो चीख रही थी।
लेकिन बाहर किसी को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था।
और फिर अचानक…
सब शांत हो गया।
दो दिन बाद पुलिस ने फ्लैट का दरवाज़ा तोड़ा।
अंदर सब सामान पैक था।
लेकिन पूजा नहीं थी।
सिर्फ ड्रेसिंग टेबल के टूटे हुए शीशे पर उंगलियों से लिखा था—
“अब मैं भी उसे देख सकती हूँ।”
केस बंद हो गया।
कोई सबूत नहीं मिला।
लेकिन उसके बाद से उस फ्लैट में जो भी रहने आया…
वो ज्यादा दिन नहीं टिक पाया।
कुछ लोग कहते हैं रात में वहाँ किसी औरत के रोने की आवाज़ आती है।
कुछ कहते हैं शीशे में पीछे कोई खड़ा दिखता है।
लेकिन सबसे अजीब बात…
आज भी Instagram पर @nazar_wali अकाउंट एक्टिव है।
हर कुछ दिनों में वहाँ नई स्टोरी लगती है।
किसी नए घर की।
किसी नई लड़की की।
किसी नई मुस्कान की।
और नीचे सिर्फ एक लाइन लिखी होती है—
“मुझे तुम बहुत सुंदर लगे…”
अगर कभी रात में अचानक आपको लगे कि कोई आपको देख रहा है…
तो तुरंत पीछे मत मुड़ना।
क्योंकि हो सकता है…
वो इंसान नहीं हो।
और अगर कभी किसी शीशे में अपने पीछे किसी को खड़ा देखो…
तो उसकी आँखों में मत देखना।
क्योंकि कुछ नजरें…
सिर्फ देखती नहीं।
अपने साथ ले जाती हैं।
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