BY GOVIND BHISE
College Trip Horror Story की यह डरावनी कहानी दिल्ली के कुछ कॉलेज स्टूडेंट्स की है, जो हिमाचल की पहाड़ियों में घूमने गए थे। लेकिन उनकी यह adventure trip एक ऐसी horror night में बदल गई, जिसे वे कभी भूल नहीं पाए।
कॉलेज ट्रिप का नाम सुनते ही पूरे क्लास में उत्साह फैल गया था।

करीब तीस छात्र थे और साथ में तीन टीचर्स। पूरे सेमेस्टर के बाद पहली बार ऐसा मौका मिला था जब किताबों, assignments और exams से दूर कुछ दिन बिताने का मौका मिलने वाला था। किसी को पहाड़ देखने का उत्साह था, किसी को दोस्तों के साथ रातभर मस्ती करने का। बस में बैठते समय किसी के चेहरे पर डर नहीं था। हर कोई सिर्फ़ इस ट्रिप को यादगार बनाने के बारे में सोच रहा था। College Trip Horror Story in Hindi
लेकिन हममें से किसी को यह नहीं पता था कि जब ट्रिप खत्म होगी, तब हम तीस नहीं रहेंगे।
या शायद… रहेंगे तो तीस ही, लेकिन उनमें से एक इंसान नहीं होगा।
यात्रा की शुरुआत बिल्कुल सामान्य थी। सुबह-सुबह कॉलेज कैंपस से बस निकली। तेज़ म्यूज़िक, सीटों पर चलती मस्ती, लगातार खींची जा रही selfies और पीछे की सीटों पर बैठे लड़कों की ऊँची आवाज़ें। माहौल इतना जीवंत था कि किसी को रास्ते का पता ही नहीं चला।
शाम तक हम पहाड़ों के बीच बने एक पुराने guest house तक पहुँच गए।
वह जगह देखने में खूबसूरत थी। चारों तरफ़ देवदार के पेड़, दूर-दूर तक फैली धुंध और शहर के शोर से बिल्कुल अलग एक अजीब-सी शांति। पहली नज़र में वह किसी travel brochure की तस्वीर जैसी लगती थी।
लेकिन वहाँ पहुँचते ही कुछ बातें अजीब लगने लगीं।
सबसे पहले हमने notice किया कि आसपास कोई गाँव नहीं था।
कई किलोमीटर तक सिर्फ़ जंगल ही जंगल था।
फिर guest house के caretaker का व्यवहार भी थोड़ा अलग लगा। वह उम्रदराज़ आदमी था जो कम बोलता था और ज़्यादातर समय नीचे ज़मीन की तरफ़ देखता रहता था।
जब हम सामान उतार रहे थे, उसने अचानक पूछा,
“आप लोग कुल कितने हैं?”
हमारे एक दोस्त ने हँसते हुए जवाब दिया,
“तीस student और तीन teacher.”
वह कुछ सेकंड तक चुप रहा।
फिर बोला,
“रात में दोबारा गिन लेना।”
हम सब हँस पड़े।
उस समय यह सिर्फ़ एक अजीब मज़ाक लगा था।
लेकिन रात होने के बाद वही बात हमारे दिमाग़ में बार-बार घूमने वाली थी।
डिनर के बाद सभी अपने-अपने कमरों में चले गए। कुछ लोग कार्ड खेल रहे थे, कुछ balcony में बैठकर बातें कर रहे थे और कुछ अपने phones पर लगे हुए थे।
करीब ग्यारह बजे पहली अजीब घटना हुई।
एक लड़की अचानक घबराई हुई नीचे आई।
उसने कहा कि उसके कमरे की खिड़की के बाहर कोई खड़ा था।
सबने सोचा कोई दोस्त मज़ाक कर रहा होगा।
लेकिन जब सब बाहर देखने गए, वहाँ कोई नहीं था।
समस्या यह थी कि जिस खिड़की की बात वह कर रही थी, वह जमीन से लगभग तीस फीट ऊपर थी।
वहाँ बाहर खड़ा होना किसी इंसान के लिए संभव ही नहीं था।
इसके बाद भी किसी ने बात को गंभीरता से नहीं लिया।
लेकिन आधी रात के बाद माहौल बदलने लगा।
कॉरिडोर में कई लोगों ने किसी के चलने की आवाज़ सुनी।
धीरे-धीरे।
एकदम नापे हुए कदमों की तरह।
समस्या यह थी कि जब भी कोई दरवाज़ा खोलकर बाहर देखता, कॉरिडोर खाली मिलता।
करीब एक बजे कुछ छात्रों ने तय किया कि वे पूरे guest house की exploration करेंगे।
कुल सात लोग थे।
हाथ में mobile flashlights लेकर वे नीचे वाले हिस्से की तरफ़ गए जहाँ आमतौर पर कोई नहीं जाता था।
वहीं उन्हें एक पुराना बंद कमरा मिला।
दरवाज़ा जंग लगा हुआ था और उस पर बाहर से मोटी chain लगी हुई थी।
दरवाज़े के ऊपर धूल जमी हुई थी, लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे हाल ही में किसी ने उस धूल पर हाथ फेरा हो।
उनमें से एक लड़के ने मज़ाक में कहा,
“खोलकर देखते हैं अंदर ghost है क्या।”
बाकी लोग हँस पड़े।
लेकिन तभी पीछे से caretaker की आवाज़ आई।
“उसे मत खोलना।”
वह अचानक अंधेरे से निकलकर उनके पीछे खड़ा था।
किसी ने उसके आने की आवाज़ तक नहीं सुनी थी।
उसकी आँखों में पहली बार डर दिखाई दे रहा था।
उसने कहा,
“जिस कमरे को बंद रखा गया है, उसे बंद ही रहने दो।”
यह कहकर वह चला गया।
अब curiosity और बढ़ चुकी थी।
अगले दिन सुबह सब सामान्य दिखाई दिया।
सूरज की रोशनी में पिछली रात की बातें थोड़ी बेवकूफी भरी लग रही थीं।
लेकिन दोपहर में attendance लेते समय पहली बार कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको असहज कर दिया।
गिनती इकतीस आई।
टीचर ने दोबारा गिना।
फिर इकतीस।
तीसरी बार भी इकतीस।
सबने सोचा शायद किसी का नाम दो बार बोल दिया गया होगा।
लेकिन जब list दोबारा check की गई, तब भी संख्या एक ज़्यादा थी।
अजीब बात यह थी कि कोई extra व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा था।
हर चेहरा जाना-पहचाना था।
फिर भी count गलत आ रहा था।
उस शाम से लोगों ने एक और चीज़ notice करनी शुरू की।
हर group photo में कोई अतिरिक्त चेहरा दिखाई देता था।
College Trip Horror Story in Hindi
पहले लगा editing error होगा।
लेकिन अलग-अलग phones से ली गई तस्वीरों में भी वही चेहरा मौजूद था।
एक युवा लड़का।
लगभग हमारी उम्र का।
फीके कपड़े।
अजीब-सी मुस्कान।
और सबसे डरावनी बात…
किसी को याद नहीं था कि वह हमारे साथ कब खड़ा हुआ था।
जब तस्वीरें zoom करके देखी गईं तो कई लोगों की हालत खराब हो गई।
क्योंकि वह लड़का हर फोटो में अलग जगह खड़ा था।
कभी पीछे।
कभी किनारे।
कभी बिल्कुल बीच में।
जैसे वह हर समय हमारे साथ था।
लेकिन किसी ने उसे चलते हुए नहीं देखा था।
रात तक पूरा माहौल बदल चुका था।
अब कोई अकेले कमरे में नहीं जाना चाहता था।
लोग groups में रहने लगे।
लेकिन डर तब और बढ़ गया जब एक छात्र अचानक गायब हो गया।
वह आखिरी बार guest house के पीछे वाले जंगल की तरफ जाता हुआ देखा गया था।
पूरी रात उसे खोजा गया।
टीचर्स, caretaker और बाकी सभी छात्र जंगल में निकल पड़े।
करीब तीन घंटे बाद वह मिल गया।
लेकिन उसकी हालत अजीब थी।
वह एक पेड़ के नीचे बैठा था।
आँखें खुली हुई थीं।
चेहरा पूरी तरह सफेद।
और वह सिर्फ़ एक ही बात बार-बार दोहरा रहा था।
“वह कह रहा है कि वह भी हमारे साथ वापस जाएगा।”
इसके बाद जो हुआ, उसने हम सबकी जिंदगी बदल दी।
अगली सुबह caretaker ने आखिरकार उस जगह की कहानी बताई।
कई साल पहले इसी guest house में एक कॉलेज ट्रिप आई थी।
लगभग उतने ही छात्र जितने हम थे।
उनमें से एक लड़का जंगल में खो गया था।
तीन दिन बाद उसकी लाश मिली थी।
लेकिन उसके दोस्तों का दावा था कि वह मौत के बाद भी उनके साथ दिखाई देता रहा।
Group photos में।
कॉरिडोर में।
खिड़कियों के बाहर।
और हर बार students की गिनती एक ज़्यादा आती थी।
Caretaker ने धीमी आवाज़ में कहा,
“वह कभी अकेला नहीं रहता। हर नई college trip के साथ लौट आता है।”
उस रात किसी ने नींद नहीं ली।
सुबह होने का इंतज़ार किया गया।
जैसे ही बस वापस कॉलेज के लिए निकली, सबको लगा कि अब सब खत्म हो गया।
लेकिन असली डर तब शुरू हुआ।
रास्ते में एक student ने मज़ाक में फिर से headcount किया।
बस में सन्नाटा छा गया।
क्योंकि संख्या फिर इकतीस थी।
तीस student।
तीन teacher।
और फिर भी…
एक चेहरा ज़्यादा।
बस के पीछे की आखिरी सीट पर कोई बैठा था।
वही लड़का।
वही फीकी मुस्कान।
और इस बार…
वह सीधे हमारी तरफ देख रहा था।
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