BY SCARY CROCODILE TEAM
इस कहानी की शुरुआत एक ऐसी पुरानी हवेली से होती है जिसके बारे में आसपास के लोग रात होते ही बात करना बंद कर देते थे। दिन में भी वहाँ अजीब सा सन्नाटा रहता था, लेकिन असली डर आधी रात के बाद शुरू होता था।
लोग कहते थे कि उस हवेली के अंदर कुछ ऐसा है जो इंसानों को वापस नहीं जाने देता।

पहले मुझे ये सब बस गाँव वालों की बनाई हुई डरावनी बातें लगती थीं। लेकिन जिस रात मैं उस हवेली के अंदर गया… उसके बाद मैं खुद समझ नहीं पाया कि जो देखा वो सच था या कोई बुरा सपना। Real Ghost Story
रात के करीब 11:40 बजे होंगे। सड़क पूरी खाली थी। दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था। सिर्फ ठंडी हवा चल रही थी और पुराने पेड़ों की टहनियाँ हिलने की आवाज़ आ रही थी।
मेरे हाथ में camera था और मैं हवेली के बाहर खड़ा उसे record कर रहा था।
सामने वो पुराना काला दरवाज़ा आधा खुला हुआ था। पता नहीं क्यों… उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कोई अंदर खड़ा मेरा इंतज़ार कर रहा हो।
मैंने खुद को normal दिखाने की कोशिश की, लेकिन सच बोलूँ तो उस जगह के सामने खड़े होते ही अजीब बेचैनी शुरू हो चुकी थी।
मैं धीरे-धीरे अंदर गया।
बस जैसे ही अंदर कदम रखा…
धड़ाम!
पीछे का दरवाज़ा इतनी जोर से बंद हुआ कि मेरा दिल literally उछल गया।
कुछ सेकंड तक मैं वहीं खड़ा रहा। पूरा हॉल अंधेरे में डूबा हुआ था। सिर्फ flashlight की हल्की रोशनी दीवारों पर पड़ रही थी।
हर तरफ धूल जमी हुई थी। दीवारों पर लंबे खरोंच के निशान बने थे। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बाहर निकलने की कोशिश की हो।
तभी ऊपर से किसी के चलने की आवाज़ आई। टक… टक… टक…
मैंने ऊपर देखा।
फिर अचानक एक आवाज़ सुनाई दी—
“ऊपर आ जाओ…”
मेरे पूरे शरीर में ठंड सी दौड़ गई।
वो आवाज़ बहुत जानी-पहचानी लगी। इतनी familiar कि एक पल के लिए मैं freeze हो गया।
मैंने डरते हुए पूछा—
“कौन है?”
लेकिन जवाब नहीं आया।
बस ऊपर वाली लकड़ी की floor फिर से चरमराई।
मेरी flashlight बार-बार blink कर रही थी। हाथ भी काँप रहे थे, लेकिन फिर भी मैं सीढ़ियों की तरफ बढ़ गया।
हर कदम पर ऐसा लग रहा था जैसे सीढ़ियाँ टूट जाएँगी।
ऊपर पहुँचते ही एक कमरा दिखा जिसका दरवाज़ा आधा खुला था। बाहर लाल रंग से लिखा हुआ था—
“DO NOT OPEN”
अब normally कोई भी इंसान वहाँ रुक जाता…
लेकिन उस वक्त शायद curiosity डर से बड़ी थी।
मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला।
अंदर सिर्फ एक पुराना आईना रखा था।
बस वही।
बाकी पूरा कमरा खाली।
हवा इतनी ठंडी थी कि साँस लेते वक्त भी अजीब लग रहा था।
मैं धीरे-धीरे आईने के पास गया।
पहले सब normal लगा।
फिर अचानक मुझे महसूस हुआ कि आईने में मेरे पीछे कोई खड़ा है।
एक औरत।
सफेद साड़ी।
लंबे बाल।
और पूरी काली आँखें।
मैं तुरंत पीछे पलटा…
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
उस वक्त पहली बार सच में डर लगा।
वो वाला डर जिसमें इंसान समझ नहीं पाता कि भागे या वहीं खड़ा रहे।
मैंने दोबारा आईने की तरफ देखा…
और इस बार वो औरत पहले से ज्यादा करीब थी।
धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी।
मेरे हाथ से camera लगभग गिर गया।
तभी अचानक कमरे का तापमान और नीचे चला गया। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा कमरा बर्फ बन गया हो।
Camera अपने आप बंद हो गया।
Real Ghost Story
मैं बार-बार उसे on करने की कोशिश करता रहा लेकिन कुछ नहीं हुआ।
फिर आईने पर धीरे-धीरे धुंध जमने लगी।
और उस धुंध पर words बनने लगे—
“तू यहाँ क्यों आया?”
अब मेरे पैरों ने जवाब देना शुरू कर दिया था।
मैं पीछे हट ही रहा था कि कमरे के कोने से बच्चे के रोने की आवाज़ आई।
बहुत धीमी।
बहुत डरावनी।
“मुझे बाहर निकालो…”
मैंने flashlight उस तरफ घुमाई।
पुराने बिस्तर के नीचे से एक छोटी हथेली बाहर दिखाई दी।
“Please… बचा लो…”
उस पल दिमाग ने कहा भाग जा।
लेकिन मैं फिर भी नीचे झुका।
और जैसे ही बिस्तर के नीचे देखा…
वहाँ कोई बच्चा नहीं था।
सिर्फ अंधेरा।
और उस अंधेरे में दो लाल आँखें।
फिर अचानक एक भारी आवाज़ आई—
“अब तू भी यहीं रहेगा…”
बस उसके बाद मैं भागा।
इतनी तेज़ शायद जिंदगी में कभी नहीं भागा था।
सीढ़ियों से नीचे उतरा और सीधे मुख्य दरवाज़े की तरफ दौड़ा।
लेकिन नीचे पहुँचकर मेरे कदम रुक गए।
दरवाज़ा गायब था।
वहाँ सिर्फ दीवार थी।
मैं literally समझ नहीं पा रहा था ये कैसे possible है।
तभी फोन vibrate हुआ।
Unknown Number.
Message में सिर्फ इतना लिखा था—
“पीछे मत देखना।”
मेरी साँस रुक गई।
मैं बिल्कुल स्थिर खड़ा रहा।
लेकिन कुछ सेकंड बाद डर curiosity में बदल गया।
और मैंने पीछे देख लिया।
दीवार पर एक फोटो लगी थी।
उस फोटो में मैं था।
लेकिन मरा हुआ।
आँखें खुली हुई थीं… चेहरा सफेद पड़ा हुआ था।
और नीचे लिखा था—
“Death Time: 12:00 AM”
मैंने काँपते हुए घड़ी देखी।
11:59 PM
उसी वक्त पूरी हवेली में घंटियों की आवाज़ गूंजने लगी। टन…टन…टन…
हर आवाज़ के साथ ऐसा लग रहा था जैसे दीवारें हिल रही हों।
ऊपर के सारे कमरे अपने आप खुलने लगे।
धीरे-धीरे।
और हर कमरे से कोई बाहर झाँक रहा था।
किसी का चेहरा जला हुआ था।
किसी की आँखें नहीं थीं।
किसी के हाथ नहीं थे।
और फिर सबने एक साथ कहा—
“नया मेहमान आ गया…”
उस वक्त मुझे सिर्फ बाहर निकलना था।
अचानक सामने मुख्य दरवाज़ा फिर दिखाई दिया।
और बाहर कोई खड़ा था।
“जल्दी बाहर आ!” उसने चिल्लाकर कहा।
मैं पूरी ताकत से उसकी तरफ भागा।
लेकिन जैसे ही दरवाज़े के पास पहुँचा…
वो मुस्कुराने लगा।
उसकी आँखें सफेद हो गईं।
चेहरा बदलने लगा।
और फिर उसकी आवाज़ पूरी अलग हो गई—
“मैं वो नहीं हूँ जिसे तू समझ रहा है…”
धड़ाम!
दरवाज़ा फिर बंद हो गया।
उसके बाद मुझे सिर्फ अपनी चीखें याद हैं।
बाकी सब धुंधला है।
अगली सुबह लोगों को हवेली के बाहर सिर्फ camera मिला।
उसमें आखिरी recording अभी भी थी।
शुरुआत में मैं normal दिख रहा था।
फिर धीरे-धीरे डरने लगा।
फिर रोने लगा।
आखिरी clip में camera जमीन पर पड़ा था और दूर अंधेरे में मैं घुटनों के बल बैठा दिखाई दे रहा था।
मैं किसी से बार-बार कह रहा था—
“Please… मुझे जाने दो…”
फिर एक औरत की आवाज़ आई—
“हर इंसान जो ये कहानी पढ़ता है… वो भी एक दरवाज़ा खोल देता है…”
Camera धीरे-धीरे मेरे चेहरे के पास गया।
लेकिन वो चेहरा मेरा नहीं था।
उस पर वही औरत मुस्कुरा रही थी।
फिर screen पूरी काली हो गई।
और आखिरी आवाज़ सुनाई दी—
“If You Read This Story At Night… Don’t Look Behind You.”
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