Midnight Horror Story -Telegram Par Aaya Ek Darawna Message

रात 2 बजे का Telegram Message

Midnight Horror Story

Midnight Horror Story रात के ठीक 2 बजे आरव की नींद मोबाइल की हल्की-सी vibration से टूटी। कमरे में अंधेरा था, खिड़की के बाहर हवा तेज़ चल रही थी और दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक पूरे कमरे में गूंज रही थी।

आरव ने आधी नींद में मोबाइल उठाया।

स्क्रीन पर notification था—

Telegram: New Message from Unknown User

उसने आंखें मलीं। नाम लिखा था—“Main Wapas Aa Gayi”

आरव का दिल एक पल के लिए रुक-सा गया।

उसने chat खोली।

Message था—

“सो मत… मैं तुम्हारे कमरे में हूँ।”

आरव झटके से उठ बैठा। उसने कमरे में चारों तरफ देखा। सब कुछ वैसा ही था—टेबल, कुर्सी, अलमारी, और कोने में पड़ा उसका बैग।

लेकिन हवा में एक अजीब-सी ठंडक थी।

उसने खुद को समझाया, “कोई prank कर रहा है।”

तभी दूसरा message आया—

“Prank नहीं है, आरव।”

अब उसके हाथ कांपने लगे।

क्योंकि उसने अपना नाम कहीं mention नहीं किया था।

Unknown Number की सच्चाई

आरव ने profile picture खोलकर देखी। DP पूरी काली थी। Bio में सिर्फ एक line लिखी थी—

“जिसे तुमने भुला दिया, वो तुम्हें नहीं भूली।”

आरव के दिमाग में अचानक एक चेहरा चमका—मीरा।

मीरा उसकी college friend थी। दो साल पहले उसकी मौत हो गई थी। लोग कहते थे उसने suicide किया, लेकिन आरव जानता था कि उस रात कुछ ऐसा हुआ था, जिसे उसने सबसे छुपाया था।

उसने Telegram पर reply किया—

“कौन हो तुम?”

तुरंत जवाब आया—

“तुम्हें सच याद दिलाने वाली।”

आरव का गला सूख गया।

उसने chat delete करने की कोशिश की, लेकिन delete option काम नहीं कर रहा था। मोबाइल hang हो गया। फिर अपने आप एक audio message play हुआ।

पहले सिर्फ सन्नाटा था।

फिर एक लड़की की धीमी आवाज़ आई—

“आरव… दरवाजा मत खोलना।”

आवाज मीरा जैसी थी।

बिल्कुल वैसी।

दरवाजे के बाहर कौन था?

आरव ने घबराकर कमरे का दरवाजा देखा।

बाहर से हल्की-हल्की खटखटाहट होने लगी।

टक… टक… टक…

आरव की सांसें तेज़ हो गईं। घर में वह अकेला था। माता-पिता गांव गए हुए थे।

Telegram पर फिर message आया—

“मैं बाहर नहीं हूँ।”

आरव ने डरते हुए लिखा—

“तो फिर कहां हो?”

Reply आया—

“पीछे।”

आरव का शरीर जम गया।

वह धीरे-धीरे मुड़ा।

पीछे कोई नहीं था।

लेकिन उसकी study table पर रखी notebook खुली हुई थी। उस पर लाल pen से लिखा था—

“उस रात तुमने मुझे अकेला छोड़ा था।”

आरव चिल्ला पड़ा। वह notebook तो बंद थी। लाल pen भी उसके पास नहीं था।

उसी समय कमरे की light flicker होने लगी।

एक second के लिए light बंद हुई।

जब light वापस आई, तो mirror पर भाप जैसी नमी जम चुकी थी, और उस पर उंगली से लिखा था—

“Confess.”

मीरा की आखिरी रात

आरव को सब याद आने लगा।

दो साल पहले college party के बाद मीरा ने उसे call किया था। वह रो रही थी। उसने कहा था—

“आरव, मुझे डर लग रहा है। कोई मेरा पीछा कर रहा है। Please मुझे लेने आ जाओ।”

आरव उस वक्त दोस्तों के साथ था। उसने झुंझलाकर कहा था—

“Drama मत करो मीरा, घर चली जाओ।”

उसके बाद मीरा की आखिरी location old bridge के पास मिली थी।

अगली सुबह उसकी body नदी के किनारे मिली।

Police ने case बंद कर दिया।

लेकिन मौत से एक दिन पहले मीरा ने आरव को एक Telegram message भेजा था—

“अगर मैं मर गई, तो तुम्हें सच बताना होगा।”

आरव ने वह message delete कर दिया था।

वह डर गया था।

क्योंकि वह जानता था कि मीरा का पीछा कौन कर रहा था—उसका ही दोस्त, कबीर।

कबीर ने मीरा को बहुत परेशान किया था, और आरव ने चुप रहना चुना।

Midnight Horror की शुरुआत

मोबाइल फिर vibrate हुआ।

“अब भी चुप रहोगे?”

आरव रोते हुए बोला, “मीरा, मुझे माफ कर दो। मैं डर गया था।”

Telegram पर typing दिखने लगी।

फिर message आया—

“माफी मुझे नहीं, सच को चाहिए।”

अचानक कमरे में रखी अलमारी अपने आप खुल गई। अंदर से वही नीली scarf नीचे गिरी, जो मीरा हमेशा पहनती थी।

आरव चीख पड़ा।

“ये यहां कैसे आई?”

तभी speaker अपने आप on हुआ। एक call आ रही थी—Telegram voice call.

Caller: Meera

आरव ने कांपते हाथों से call उठाई।

दूसरी तरफ से बहुत धीमी आवाज़ आई—

“आरव… कबीर अभी भी जिंदा है… और वह फिर किसी लड़की के पीछे है।”

आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई।

“कौन?” उसने पूछा।

आवाज आई—

“रिया।”

रिया आरव की छोटी बहन थी।

सच का डर

आरव ने तुरंत रिया को call किया। Phone switched off था।

उसने कबीर का Instagram खोला। उसकी story में एक photo थी—रिया के college के बाहर की।

Caption था—

“New friend.”

आरव के अंदर का डर गुस्से में बदल गया।

Telegram पर message आया—

“इस बार देर मत करना।”

आरव ने jacket पहनी और बाहर निकलने लगा। लेकिन जैसे ही उसने दरवाजा खोला, सामने hallway में कोई खड़ी थी।

सफेद dress, भीगे बाल, और झुका हुआ चेहरा।

आरव की सांस रुक गई।

“मीरा?”

वह आकृति धीरे-धीरे ऊपर देखने लगी। उसका चेहरा पीला था, आंखें खाली थीं, लेकिन उनमें दर्द था।

उसने हाथ उठाकर दीवार की तरफ इशारा किया।

दीवार पर खून जैसे अक्षरों में लिखा था—

“Old Bridge.”

आरव समझ गया।

वह भागता हुआ घर से निकला।

Old Bridge का राज

रात के 2:40 बज रहे थे। सड़कें खाली थीं। हवा में ठंड थी। आरव bike लेकर old bridge पहुंचा।

वहां दूर एक car खड़ी थी।

Car के पास कबीर खड़ा था, और रिया बेहोश हालत में पीछे की seat पर थी।

आरव चिल्लाया—

“कबीर!”

कबीर पलटा और हंसने लगा।

“तू फिर आ गया? उस रात भी आ सकता था।”

आरव का खून खौल उठा।

“मीरा को तूने मारा था।”

कबीर मुस्कुराया।

“मारना नहीं पड़ा। डर के मारे खुद भागी और bridge से गिर गई। लेकिन हां, वजह मैं था… और तू भी।”

आरव ने mobile का recorder on कर रखा था।

कबीर ने सब बोल दिया था।

अचानक हवा बहुत तेज़ चलने लगी। bridge के नीचे से पानी की आवाज़ आने लगी। Street light blink करने लगी।

कबीर ने पीछे मुड़कर देखा।

Bridge के किनारे मीरा खड़ी थी।

इस बार वह पहले से ज्यादा भयानक दिख रही थी।

उसके पैरों के नीचे पानी टपक रहा था।

कबीर का चेहरा सफेद पड़ गया।

“नहीं… तू मर चुकी है।”

मीरा की आवाज़ आई—

“और तू सच से भाग रहा है।”

Telegram का आखिरी Message

कबीर डरकर पीछे हटने लगा। उसका पैर फिसला और वह bridge की railing से टकराया।

आरव ने मौका देखकर रिया को car से बाहर निकाला। वह अभी भी बेहोश थी, लेकिन जिंदा थी।

कबीर चिल्ला रहा था—

“बचाओ मुझे!”

आरव ने police को recording भेज दी और location share कर दी।

तभी उसका phone vibrate हुआ।

Telegram पर मीरा का message आया—

“इस बार तुमने देर नहीं की।”

आरव ने कांपते हुए लिखा—

“मीरा, क्या अब तुम चली जाओगी?”

लंबे समय तक typing दिखती रही।

फिर reply आया—

“सच जहां दबता है, वहां मैं लौट आती हूं।”

इतना लिखते ही chat अपने आप गायब हो गई।

Profile भी delete हो गई।

Bridge पर खड़ी मीरा की आकृति धीरे-धीरे धुंध में बदल गई।

Police आई। कबीर गिरफ्तार हुआ। रिया को hospital ले जाया गया।

आरव ने court में गवाही दी। मीरा की मौत का case फिर खुला। पहली बार सच सामने आया।

लेकिन कहानी खत्म नहीं हुई

कुछ महीने बाद सब सामान्य होने लगा।

आरव ने Telegram delete कर दिया। वह अब रात को mobile silent रखकर सोता था।

लेकिन एक रात, फिर ठीक 2 बजे, उसका phone vibrate हुआ।

आरव की नींद खुली।

उसने डरते हुए mobile उठाया।

Telegram फिर install था।

Screen पर notification था—

New Message from Unknown User

नाम लिखा था—

“Tumne Ek Sach Bataya… Ab Dusra Suno.”

आरव का दिल फिर जोर से धड़कने लगा।

उसने message खोला।

लिखा था—

“मीरा अकेली नहीं मरी थी।”

और उसी पल कमरे की light बंद हो गई।

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