Chhutti Ka Din | Ek Khaufnaak Horror Story

अप्रैल का आखिरी हफ्ता था। नोएडा में गर्मी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था और गर्म हवा इतनी तेज चलती थी कि कुछ मिनट बाहर खड़े रहना भी मुश्किल हो जाता था।

Chhutti Ka Din

इसी दौरान 27 साल का रोहित अपनी पत्नी नेहा और 19 साल के छोटे भाई अमन के साथ एक नए किराए के मकान में रहने आया था।

रोहित की शादी को सिर्फ डेढ़ साल हुआ था। उसके माता-पिता गांव में रहते थे और अमन कॉलेज की पढ़ाई के लिए कुछ महीनों से रोहित के साथ ही रह रहा था।

तीनों पहले एक छोटे से फ्लैट में रहते थे, लेकिन किराया लगातार बढ़ने के कारण रोहित काफी समय से कोई सस्ता घर तलाश रहा था।

आखिरकार उसे शहर से थोड़ा बाहर एक दो मंजिला मकान का ऊपरी हिस्सा बेहद कम किराए में मिल गया। Chhutti Ka Din

मकान काफी बड़ा था।

दो बेडरूम, एक हॉल, किचन और सामने बड़ी बालकनी।

सबसे अच्छी बात यह थी कि इतने बड़े घर का किराया उनके पुराने छोटे फ्लैट से भी कम था।

रोहित ने मकान मालिक से इसका कारण पूछा तो उसने बताया,

“इलाका थोड़ा अंदर है इसलिए किराया कम है। बाकी घर में कोई दिक्कत नहीं है।”

रोहित को इससे बेहतर सौदा नहीं मिल सकता था।

तीनों वहां रहने आ गए।

शुरुआत के चार-पांच दिन बिल्कुल सामान्य बीते।

फिर एक रात अमन ने एक अजीब चीज नोटिस की।

उसका कमरा सीढ़ियों के बिल्कुल पास था।

रात के लगभग ढाई बजे उसकी नींद खुली तो उसे लगा जैसे नीचे से कोई धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ रहा है।

ठक…

कुछ सेकंड बाद—

ठक…

फिर—

ठक…

अमन ने सोचा शायद रोहित नीचे गया होगा।

उसने दरवाजा खोला।

बाहर पूरा हॉल अंधेरे में था।

सीढ़ियों के पास लगी छोटी लाइट जल रही थी।

लेकिन वहां कोई नहीं था।

अमन ने नीचे झांककर देखा।

ग्राउंड फ्लोर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था।

वह वापस कमरे में जाने ही वाला था कि अचानक उसकी नजर सीढ़ियों पर पड़ी।

सबसे नीचे वाली सीढ़ी पर कोई बैठा हुआ था।

अमन वहीं रुक गया।

उसे साफ दिखाई नहीं दे रहा था।

बस किसी आदमी जैसी काली आकृति नजर आ रही थी।

“कौन है?”

अमन ने आवाज लगाई।

कोई जवाब नहीं आया।

उसने मोबाइल की फ्लैशलाइट ऑन की।

लेकिन रोशनी नीचे पहुंचते ही वहां कुछ नहीं था।

अमन को लगा शायद नींद की वजह से भ्रम हुआ होगा।

वह वापस कमरे में चला गया।

अगली सुबह उसने किसी को कुछ नहीं बताया।

लेकिन उसके बाद लगभग हर रात वही आवाज आने लगी।

ठक… ठक… ठक…

जैसे कोई बहुत धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ रहा हो।

और सबसे अजीब बात यह थी कि आवाज हमेशा रात के लगभग ढाई से तीन बजे के बीच आती थी।

कुछ दिनों बाद रविवार की दोपहर रोहित और नेहा खरीदारी करने बाजार चले गए।

Chhutti Ka Din

अमन घर पर अकेला था। गर्मी बहुत ज्यादा थी। वह अपने कमरे में पंखा चलाकर मोबाइल देख रहा था।

करीब तीन बजे अचानक बिजली चली गई।

पंखा बंद हो गया।

कमरा कुछ ही मिनट में गर्म होने लगा।

अमन बाहर हॉल में आया और बालकनी का दरवाजा खोल दिया।

लेकिन बाहर से आने वाली हवा भी गर्म थी।

वह वापस मुड़ने वाला था कि तभी—

ठक…

सीढ़ियों से आवाज आई।

अमन रुक गया।

दिन के तीन बजे थे।

उसने सीढ़ियों की तरफ देखा।

कोई नहीं था।

फिर आवाज आई।

ठक… ठक…

इस बार नीचे से नहीं।

ऊपर से।

अमन ने सिर उठाया।

ऊपर छत थी।

वह धीरे-धीरे छत की सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।

जैसे ही उसने पहला कदम रखा, अचानक हवा बदल गई।

कुछ सेकंड पहले तक घर गर्म था।

लेकिन अब सीढ़ियों से बर्फ जैसी ठंडी हवा नीचे आ रही थी।

अमन के हाथों पर रोंगटे खड़े हो गए।

छत का दरवाजा आधा खुला था।

उसे याद था कि सुबह रोहित ने खुद उसमें ताला लगाया था।

अमन ऊपर पहुंचा।

छत खाली थी।

एक तरफ पानी की टंकी और दूसरी तरफ छोटा-सा पुराना कमरा बना हुआ था।

उस कमरे को अमन ने पहले भी देखा था।

दरवाजे पर जंग लगा ताला लगा रहता था।

मकान मालिक ने बताया था कि उसमें पुराना कबाड़ रखा है।

लेकिन आज—

उसका ताला जमीन पर पड़ा था।

दरवाजा थोड़ा खुला था।

अंदर बिल्कुल अंधेरा।

अमन कुछ देर दूर खड़ा रहा।

फिर उसने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाई।

“कोई है?”

कोई जवाब नहीं।

वह धीरे-धीरे दरवाजे के पास पहुंचा।

कमरे के अंदर से बेहद गंदी बदबू आ रही थी।

जैसे कई दिनों से कोई गीली चीज बंद पड़ी हो।

उसने दरवाजा थोड़ा और खोला।

अंदर कुछ पुराने लकड़ी के तख्ते, टूटी कुर्सियां और फटे गद्दे पड़े थे।

लेकिन कमरे की पीछे वाली दीवार पर कुछ ऐसा था जिसे देखकर अमन की नजर वहीं रुक गई।

दीवार पर छोटे-छोटे हाथों के निशान बने हुए थे।

दर्जनों निशान।

कुछ नीचे।

कुछ ऊपर।

मानो किसी ने गंदे हाथ बार-बार दीवार पर लगाए हों।

अमन पास गया।

एक निशान बाकी निशानों से अलग था।

वह बिल्कुल नया लग रहा था।

उस पर नमी थी।

अमन ने उंगली लगाई।

काला गाढ़ा पदार्थ उसकी उंगली पर आ गया।

तभी उसके पीछे से किसी बच्चे के हंसने की आवाज आई।

अमन तुरंत पलटा।

कोई नहीं।

वह तेजी से कमरे से बाहर निकला।

तभी दरवाजा अपने आप उसके पीछे जोर से बंद हो गया।

धड़ाम!

अमन डरकर सीढ़ियों की तरफ भागा।

लेकिन दो कदम चलने के बाद उसे महसूस हुआ कि छत पर कोई उसके पीछे दौड़ रहा है।

छोटे-छोटे पैरों की तेज आवाज।

टप-टप-टप-टप…

अमन ने पीछे नहीं देखा।

वह नीचे आया और सीधा अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया।

उसकी सांस बहुत तेज चल रही थी।

तभी कमरे की बिजली वापस आ गई।

पंखा घूमने लगा।

अमन ने राहत की सांस ली।

लेकिन तभी उसकी नजर सामने लगे आईने पर गई।

आईने में अमन अकेला नहीं था।

उसके ठीक पीछे लगभग दस-ग्यारह साल का एक लड़का खड़ा था।

अमन डर के मारे पलटा।

पीछे कोई नहीं।

उसने दोबारा आईने में देखा।

लड़का गायब था।

शाम को रोहित और नेहा वापस आए।

अमन ने पूरी घटना उन्हें बता दी।

रोहित ने उसकी बात पर ज्यादा विश्वास नहीं किया।

“गर्मी में दिमाग खराब हो गया होगा तेरा।”

लेकिन नेहा गंभीर थी।

उसने अमन से पूछा,

“वो बच्चा कैसा दिख रहा था?”

अमन ने कहा,

“चेहरा साफ नहीं देखा… लेकिन उसके कपड़े बहुत पुराने थे।”

नेहा कुछ देर चुप रही।

फिर बोली,

“कल रात मैंने भी किसी बच्चे को देखा था।”

रोहित ने उसकी तरफ देखा।

नेहा ने बताया कि रात में पानी पीने के लिए उठते समय उसने हॉल में किसी छोटे लड़के को खड़ा देखा था।

उसे लगा पड़ोस का कोई बच्चा गलती से घर में आ गया है।

लेकिन जैसे ही उसने लाइट ऑन की, वहां कोई नहीं था।

अब रोहित भी थोड़ा परेशान हुआ।

उस रात तीनों ने तय किया कि सभी दरवाजे बंद रखेंगे।

करीब 2:40 बजे तक सब सामान्य रहा।

फिर अचानक बिजली चली गई।

पूरा घर अंधेरे में डूब गया।

कुछ सेकंड बाद सीढ़ियों से वही आवाज आने लगी।

ठक…

ठक…

ठक…

इस बार तीनों जाग रहे थे।

रोहित हॉल में आया।

अमन और नेहा भी उसके पीछे थे।

आवाज नीचे से ऊपर आ रही थी।

हर आवाज के साथ ऐसा लग रहा था जैसे कोई एक सीढ़ी ऊपर चढ़ रहा हो।

लेकिन दिखाई कोई नहीं दे रहा था।

फिर अचानक आवाज बंद हो गई।

सामने का मुख्य दरवाजा अपने आप खुल गया।

बाहर कोई नहीं था।

तभी नेहा चीखी।

अमन उनके साथ नहीं था।

कुछ सेकंड पहले तक वह रोहित के पीछे खड़ा था।

“अमन!”

रोहित जोर से चिल्लाया।

ऊपर छत से किसी चीज के गिरने की आवाज आई।

दोनों भागकर ऊपर पहुंचे।

छत के पुराने कमरे का दरवाजा खुला था।

अंदर अमन जमीन पर बैठा था।

उसकी पीठ उनकी तरफ थी।

“अमन?”

रोहित धीरे-धीरे उसके पास गया।

अमन कोई जवाब नहीं दे रहा था।

रोहित ने उसके कंधे पर हाथ रखा।

अमन ने धीरे से गर्दन घुमाई।

उसकी आंखें पूरी तरह खुली थीं।

लेकिन वह रोहित को नहीं देख रहा था।

उसकी नजर रोहित के पीछे किसी चीज पर टिकी थी।

फिर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

और वह बहुत धीमी आवाज में बोला,

“वो मुझे नीचे बुला रहा है।”

“कौन?”

रोहित ने पूछा।

अमन ने उंगली फर्श की तरफ कर दी।

“नीचे वाला।”

अचानक अमन जोर-जोर से हंसने लगा।

उसकी हंसी किसी बच्चे जैसी थी।

रोहित और नेहा उसे किसी तरह नीचे लेकर आए।

कुछ मिनट बाद अमन सामान्य हो गया।

उसे याद ही नहीं था कि वह छत पर कैसे पहुंचा।

अगले दिन रोहित ने मकान मालिक को फोन किया।

पहले उसने सारी बातें बेकार बताईं।

लेकिन रोहित ने घर छोड़ने और पुलिस बुलाने की बात कही तो वह शाम को मिलने आया।

मकान मालिक घर में घुसते ही छत पर जाने से बच रहा था।

रोहित ने साफ पूछा,

“उस कमरे में क्या हुआ था?”

वह आदमी चुप रहा।

कुछ देर बाद उसने बताया कि करीब पंद्रह साल पहले इस मकान में दूसरी फैमिली रहती थी।

पति-पत्नी और उनका ग्यारह साल का बेटा सोनू

लड़का बहुत शरारती था।

एक दिन खेलते-खेलते उसने घर के पुराने स्टोररूम में खुद को बंद कर लिया।

दरवाजे का लॉक खराब था।

उस दिन परिवार के बाकी लोग किसी शादी में गए हुए थे।

जब रात को वापस लौटे तो उन्हें सोनू नहीं मिला।

पूरे इलाके में उसे तलाश किया गया।

अगली सुबह स्टोररूम खोला गया।

लड़का अंदर बेहोश पड़ा था।

भीषण गर्मी और बंद कमरे में दम घुटने के कारण उसकी मौत हो चुकी थी।

रोहित ने पूछा,

“तो ये बात पहले क्यों नहीं बताई?”

मकान मालिक बोला,

“क्योंकि उसके बाद भी परिवार कई साल यहां रहा। ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी।”

अमन अचानक बोला,

“झूठ बोल रहा है।”

सबकी नजर उसकी तरफ गई।

अमन मकान मालिक को घूर रहा था।

“वो कमरे में नहीं मरा था।”

रोहित ने पूछा,

“तुझे कैसे पता?”

अमन ने कोई जवाब नहीं दिया।

उस रात अमन की हालत और बिगड़ गई।

वह नींद में उठकर घर में घूमने लगा।

कभी सीढ़ियों पर बैठ जाता।

कभी छत के बंद दरवाजे के सामने खड़ा रहता।

एक रात नेहा की आंख खुली तो अमन उसके बेड के बिल्कुल पास खड़ा था।

उसके हाथ में मिट्टी लगी थी।

नेहा डरकर उठी।

“अमन?”

वह मुस्कुराया।

“मम्मी आ गई?”

नेहा के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

“मैं नेहा हूं।”

अमन की मुस्कान गायब हो गई।

उसने गुस्से से कहा,

“तुम मेरी मम्मी नहीं हो।”

और अचानक कमरे से बाहर भाग गया।

अगली सुबह रोहित ने एक स्थानीय पुजारी को बुलाया।

घर में घुसते ही पुजारी सीढ़ियों के पास रुक गए।

उन्होंने ऊपर देखा और पूछा,

“छत पर क्या है?”

रोहित ने पूरी बात बता दी।

पुजारी ने कहा कि शाम होने से पहले उस कमरे को पूरी तरह खाली करना होगा।

चार लोगों ने सामान बाहर निकालना शुरू किया।

पुराने गद्दे हटाए गए।

लकड़ी हटाई गई।

फिर उन्हें फर्श के एक कोने में लोहे की छोटी अंगूठी दिखाई दी।

खींचने पर फर्श का एक हिस्सा ऊपर उठा।

नीचे एक बेहद संकरा तहखाना था।

मकान मालिक का चेहरा देखते ही रोहित समझ गया कि वह इसके बारे में जानता था।

पुलिस को बुलाया गया।

नीचे से एक पुराना स्कूल बैग, कुछ कपड़े और इंसानी हड्डियों के छोटे अवशेष मिले।

जांच शुरू हुई।

और तब असली कहानी सामने आई।

सोनू की मौत स्टोररूम में बंद होने से नहीं हुई थी।

उस दिन उसके पिता ने गुस्से में उसे छत के नीचे बने उस छोटे तहखाने में बंद किया था।

वह अक्सर सजा देने के लिए उसे वहां बंद कर देता था।

लेकिन उस दिन परिवार शादी में चला गया।

भीषण गर्मी में कई घंटों तक बंद रहने के कारण सोनू की हालत खराब हो गई।

जब परिवार वापस आया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

बदनामी और गिरफ्तारी के डर से उसके पिता ने शव छिपा दिया और पुलिस में उसके लापता होने की झूठी रिपोर्ट लिखवाई।

कुछ समय बाद परिवार मकान छोड़कर चला गया।

लेकिन अमन की हालत अभी भी सामान्य नहीं थी।

उसी रात अचानक उसका शरीर तेज बुखार से तपने लगा।

वह बार-बार एक ही बात कह रहा था—

“बहुत गर्मी है… दरवाजा खोलो…”

रोहित और नेहा उसे पकड़कर बैठे रहे।

अचानक कमरे का तापमान बढ़ने लगा।

दीवारें गर्म होने लगीं।

अमन जोर-जोर से दरवाजा पीटने लगा।

“पापा खोलो!”

“मैं दोबारा नहीं करूंगा!”

“पापा!”

उसकी आवाज अब अमन की नहीं थी।

एक छोटे बच्चे की थी।

पुजारी ने मंत्र पढ़ना शुरू किया।

अमन अचानक शांत हो गया।

उसने धीरे से सिर उठाया।

फिर सामने खाली जगह को देखकर मुस्कुराया।

“मम्मी?”

रोहित ने पीछे देखा।

वहां कोई नहीं था।

लेकिन उसी समय कमरे में बहुत हल्की-सी ठंडी हवा चली।

अमन की आंखों से आंसू निकल आए।

उसने खाली हवा में हाथ बढ़ाया।

फिर उसकी आंखें बंद हो गईं और वह बेहोश हो गया।

करीब दस मिनट बाद उसे होश आया।

उसका बुखार उतर चुका था।

उसे पिछले कई दिनों की ज्यादातर बातें याद नहीं थीं।

रोहित ने उसी सप्ताह घर खाली कर दिया।

पुलिस जांच के बाद मकान को कुछ समय के लिए सील कर दिया गया।

कई महीनों तक वह खाली पड़ा रहा।

लेकिन इस घटना के लगभग एक साल बाद उस इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति ने रात के समय उस मकान का वीडियो बनाया।

वीडियो में मकान पूरी तरह अंधेरा दिखाई दे रहा था।

ऊपर छत का स्टोररूम भी बंद था।

रिकॉर्डिंग सामान्य थी।

लेकिन वीडियो के आखिर में कैमरा जब छत की तरफ गया तो बंद कमरे की छोटी खिड़की के पीछे किसी बच्चे का चेहरा दिखाई दिया।

सिर्फ दो सेकंड के लिए।

फिर गायब।

वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि रिकॉर्डिंग के समय उसने वहां किसी को नहीं देखा था।

आज भी उस मकान के आसपास रहने वाले कुछ लोग कहते हैं कि मई और जून की सबसे गर्म रातों में करीब तीन बजे उसकी छत से किसी बच्चे के दरवाजा पीटने की आवाज आती है।

ठक… ठक… ठक…

और अगर कोई बहुत ध्यान से सुने तो उसके बाद एक बच्चे की रोती हुई आवाज सुनाई देती है—

“पापा… अब तो दरवाजा खोल दो…”

National Disaster Management Authority (NDMA) — Heatwave और अन्य आपदाओं से जुड़ी आधिकारिक जानकारी।

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1 thought on “Chhutti Ka Din | Ek Khaufnaak Horror Story”

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