मुंबई–नासिक हाईवे पर रात में सफर करने वाले लोग एक जगह का नाम आज भी धीरे आवाज़ में लेते हैं — “किलोमीटर 47।”
दिन में वहां कुछ खास नहीं दिखता। सड़क के किनारे सूखे पेड़, एक बंद पड़ा ढाबा, टूटी railing और थोड़ा आगे पुराना bus stop। लेकिन रात के बाद… वहां का माहौल बदल जाता था। कई truck drivers कहते थे कि आधी रात के बाद वहां एक सफेद bus दिखाई देती है। पुरानी। बिना आवाज़ के चलती हुई। और सबसे अजीब बात… उसके अंदर बैठे लोग कभी खिड़की से बाहर नहीं देखते।
कुछ लोग उसे मजाक समझते थे।
कुछ लोग उस रास्ते से जाना ही छोड़ चुके थे।
लेकिन जो लोग उस bus में चढ़े थे… उनके बारे में दोबारा कभी कुछ सुनाई नहीं दिया।

रोहन को ऐसी बातों पर भरोसा नहीं था।
Ghost Bus On Highway वह Virar में रहता था और एक courier company में night delivery का काम करता था। उसकी जिंदगी simple थी — दिन में सोना, रात में parcels लेकर अलग-अलग शहरों में घूमना। पैसे ज्यादा नहीं मिलते थे, लेकिन घर की जिम्मेदारियां थीं। पिता की तबीयत खराब रहती थी और छोटी बहन की college fees भी उसी को भरनी पड़ती थी।
उस रात उसे नासिक के पास एक warehouse में urgent package deliver करना था। काम खत्म होते-होते रात के करीब डेढ़ बज गए।
जब वह वापस मुंबई लौटने लगा तो highway पर उसकी bike अचानक बंद हो गई।
पहले उसे लगा fuel खत्म हो गया होगा। लेकिन meter half tank दिखा रहा था। उसने दो-तीन बार self start दबाया।
कुछ नहीं हुआ।
Highway लगभग खाली था। दूर कहीं trucks की हल्की lights दिखाई दे रही थीं। ठंडी हवा चल रही थी और सड़क के किनारे लगे पेड़ अंधेरे में अजीब लग रहे थे।
रोहन ने phone निकाला।
Battery — 5%.
“बस यही बाकी था…” उसने बड़बड़ाया।
उसने cab apps खोलीं लेकिन कोई ride accept नहीं हुई। Network भी बार-बार गायब हो रहा था। मजबूरी में उसने bike सड़क किनारे लगाई और पैदल आगे बढ़ने लगा।
करीब दो मिनट बाद उसे एक पुराना bus stop दिखाई दिया।
टूटी हुई bench। ऊपर आधा टूटा tin roof। पीछे faded advertisement।
वहीं एक बूढ़ा आदमी बैठा था। सिर पर गमछा। हाथ में steel का पुराना डिब्बा।
रोहन उसके पास जाकर बैठ गया।
“बाबा, मुंबई जाने के लिए कुछ मिलेगा क्या?”
बूढ़ा आदमी धीरे-धीरे उसकी तरफ मुड़ा। उसकी आंखें अजीब तरह से शांत थीं।
“इतनी रात में?”
“हाँ… कोई बस या truck मिल जाए तो…”
कुछ सेकंड तक वो आदमी चुप रहा।
फिर बहुत धीरे बोला—
“अगर सफेद bus आए… तो उसमें मत बैठना।”
रोहन हल्का हंसा।
“क्यों? टिकट ज्यादा लेती है क्या?”
लेकिन बूढ़ा आदमी नहीं हंसा।
उसने बस सड़क की तरफ देखा।
“कुछ रास्ते वापस नहीं छोड़ते।”
रोहन को लगा शायद कोई local horror story होगी। Highway वाले लोग अक्सर ऐसी बातें करते रहते हैं। उसने ध्यान नहीं दिया।
करीब दस मिनट तक वहां सिर्फ हवा की आवाज़ आती रही।
फिर अचानक दूर से headlights दिखाई दीं।
एक bus धीरे-धीरे उनकी तरफ आ रही थी।
सफेद रंग।
पुरानी body।
ऊपर faded letters में लिखा था — “Shivshakti Travels.”
Bus stop के सामने आकर bus रुक गई।
अजीब बात ये थी कि engine की आवाज़ लगभग सुनाई ही नहीं दे रही थी।
दरवाजा अपने आप खुला।
रोहन ने पीछे मुड़कर बूढ़े आदमी को देखा—
Ghost Bus On Highway
लेकिन bench खाली थी।
वह अचानक गायब था।
रोहन का दिल हल्का सा धड़का।
“अभी तो यहीं था…”
उसने इधर-उधर देखा लेकिन आसपास कोई नहीं था। Highway पूरी तरह सुनसान पड़ा था।
तभी bus के अंदर खड़े conductor ने उसकी तरफ देखा।
पुरानी grey uniform।
चेहरा जरूरत से ज्यादा सफेद।
आंखें बिल्कुल expressionless।
“मुंबई?” रोहन ने पूछा।
Conductor ने बिना कुछ बोले सिर हिलाया।
रोहन कुछ सेकंड हिचकिचाया… लेकिन उसके पास दूसरा option भी नहीं था।
वह bus में चढ़ गया।
अंदर आते ही उसे अजीब ठंड महसूस हुई।
जैसे किसी freezer में आ गया हो।
ऊपर लगे fan बंद थे। AC भी नहीं चल रहा था। फिर भी पूरी bus बर्फ जैसी ठंडी थी।
Dim yellow lights जल रही थीं। लगभग सभी seats भरी हुई थीं लेकिन पूरा माहौल असामान्य रूप से शांत था।
ना कोई बात कर रहा था।
ना phone चला रहा था।
ना कोई हिल रहा था।
बस सभी लोग सीधे सामने देख रहे थे।
रोहन धीरे-धीरे पीछे जाकर बैठ गया। उसने casually passengers को देखना शुरू किया।
एक आदमी की गर्दन थोड़ा टेढ़ी थी।
एक औरत ने पुरानी green sari पहन रखी थी।
एक बुजुर्ग आदमी की आंखें पूरी तरह बंद थीं लेकिन वह सीधा बैठा था।
रोहन ने phone निकाला।
No Network.
उसने खिड़की के बाहर देखा। Highway तेजी से पीछे छूट रहा था।
Bus धीरे-धीरे speed पकड़ रही थी।
तभी उसके बगल वाली सीट से धीमी आवाज़ आई—
“आप भी अभी चढ़े हो?”
रोहन थोड़ा चौंका।
उसने देखा कि उसके पास एक लड़की बैठी थी। करीब पच्चीस साल की। चेहरा डरा हुआ। हाथ हल्के कांप रहे थे।
“हाँ,” रोहन बोला। “तुम?”
“मैं highway पर फंसी थी… कोई गाड़ी नहीं रुकी। सिर्फ ये bus रुकी।”
उसकी आवाज़ में अजीब घबराहट थी।
“तुम्हें भी अजीब लग रहा है?” उसने धीरे पूछा।
रोहन कुछ बोल पाता उससे पहले bus की lights एक सेकंड के लिए blink हुईं।
और उसी पल…
उसने सामने बैठे passengers के चेहरे साफ देखे।
एक आदमी का आधा चेहरा जला हुआ था।
एक औरत की skin जैसे पिघल चुकी थी।
एक बुजुर्ग की आंखें पूरी तरह काली थीं।
Lights वापस normal हो गईं।
रोहन का गला सूख गया।
उसने दोबारा देखा—
अब सभी लोग बिल्कुल normal बैठे थे।
उसने लड़की की तरफ देखा।
वह कांप रही थी।
“तुमने देखा?” रोहन ने फुसफुसाकर पूछा।
लड़की ने धीरे-धीरे सिर हिलाया।
Bus अचानक तेज हो गई।
इतनी तेज कि बाहर के पेड़ blur होने लगे।
रोहन ने driver को देखने की कोशिश की लेकिन सामने का हिस्सा unusually dark था। जैसे वहां तक light पहुंच ही नहीं रही।
तभी पीछे से धीमी आवाज़ आई—
“पहली बार चढ़े हो?”
रोहन मुड़ा।
पीछे वाली सीट पर वही आदमी बैठा था जिसकी गर्दन टेढ़ी थी।
अब उसकी आंखें पूरी तरह खुली हुई थीं।
“क्या मतलब?” रोहन ने पूछा।
वो आदमी कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
फिर धीरे बोला—
“अगर उतर सकते हो… तो उतर जाओ।”
रोहन का दिल तेजी से धड़कने लगा।
“ये कैसी बात कर रहे हो?”
उस आदमी ने खिड़की की तरफ देखा।
“क्योंकि हम नहीं उतर पाए थे।”
Bus अचानक जोर से झटकी।
ऊपर लगी एक पुरानी photo नीचे गिर गई। रोहन ने उठाकर देखी।
उसमें यही bus थी।
पूरी जली हुई।
नीचे newspaper clipping लगी थी—
“Shivshakti Travels Bus Accident — 31 Dead”
Date — 1998.
रोहन के हाथ ठंडे पड़ गए।
उसने फिर passengers की तरफ देखा।
अब उसे कई चीजें अजीब लगने लगीं।
उनके कपड़े पुराने थे।
कुछ लोगों के शरीर पर जलने के निशान थे।
एक आदमी के हाथ की skin आधी गायब थी।
एक सीट पर आधा जला हुआ school bag रखा था।
लेकिन वहां कोई बच्चा नहीं बैठा था।
तभी bus के अंदर अचानक burnt smell फैल गई।
जैसे कुछ जल रहा हो।
Passengers धीरे-धीरे अपनी seats से उठने लगे।
उनकी हरकतें इंसानों जैसी नहीं थीं।
कोई घिसट रहा था।
कोई बिना पलक झपकाए देख रहा था।
एक औरत का सिर अजीब angle पर झुक गया।
लड़की रोने लगी।
“Bus रोको… please bus रोको…”
लेकिन conductor धीरे-धीरे aisle में उनकी तरफ आने लगा।
उसके कदमों की आवाज़ नहीं आ रही थी।
बस उसकी uniform हल्की हिल रही थी।
रोहन तुरंत खड़ा हो गया।
“मुझे उतरना है!”
कोई जवाब नहीं।
Bus अब किसी tunnel जैसी जगह में घुस चुकी थी।
लेकिन रोहन को याद था—
उस highway पर कोई tunnel नहीं थी।
खिड़कियों के बाहर सिर्फ pitch black darkness थी।
तभी अचानक पूरी bus में धीमी फुसफुसाहट गूंजने लगी।
जैसे कई लोग एक साथ कुछ बोल रहे हों।
धीमी।
टूटी हुई।
दर्द भरी।
रोहन panic में emergency exit की तरफ भागा।
Door locked था।
उसने पूरी ताकत से धक्का मारा।
कुछ नहीं हुआ।
पीछे passengers उसकी तरफ बढ़ रहे थे।
अब उनके चेहरे पूरी तरह दिखाई दे रहे थे।
जले हुए।
टूटे हुए।
कुछ की skin पिघली हुई।
एक आदमी की आंख का हिस्सा गायब था।
तभी पीछे बैठे वही आदमी जोर से चिल्लाया—
“Glass तोड़ो!”
रोहन ने emergency hammer उठाया और पूरी ताकत से खिड़की पर मारा।
पहला वार।
Crack.
दूसरा वार।
Glass टूट गया।
तेज ठंडी हवा अंदर आई।
बाहर कहीं दूर highway की lights दिखाई दे रही थीं।
Passengers तेजी से उनकी तरफ बढ़ रहे थे।
उनके मुंह खुले हुए थे… लेकिन आवाज़ नहीं निकल रही थी।
रोहन ने लड़की का हाथ पकड़ा।
“Jump!”
“Bus बहुत तेज है!”
“अभी नहीं कूदे तो कभी नहीं उतर पाएंगे!”
अगले ही सेकंड दोनों ने छलांग लगा दी।
सड़क पर गिरते ही सब कुछ घूमने लगा।
पत्थर।
अंधेरा।
ठंडी हवा।
फिर silence।
जब रोहन की आंख खुली तो सुबह हो चुकी थी।
उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था। हाथों पर खरोंचें थीं। वह highway किनारे पड़ा था।
पास में वही लड़की बैठी थी।
दोनों कुछ सेकंड तक चुप रहे।
फिर रोहन ने सड़क की तरफ देखा।
दूर… fog के बीच वही सफेद bus धीरे-धीरे गायब हो रही थी।
बिना आवाज़ के।
जैसे वो कभी थी ही नहीं।
दो दिन बाद रोहन मुंबई वापस पहुंच गया।
उसने internet पर उस accident के बारे में search किया।
1998।
मुंबई–नासिक highway।
रात 2:17 AM।
Shivshakti Travels bus में अचानक आग लग गई थी।
31 लोग जिंदा जल गए थे।
लेकिन एक बात पढ़कर उसके हाथ कांप गए।
News article में लिखा था—
“Accident से पहले कई यात्रियों ने शिकायत की थी कि driver रास्ता बदलकर गलत दिशा में जा रहा था…”
उस रात रोहन सो नहीं पाया।
हर बार आंख बंद करते ही उसे वही bus दिखाई देती।
वही जले हुए चेहरे।
वही conductor।
और सबसे ज्यादा…
rear mirror में दिखता driver।
जिसका आधा चेहरा पूरी तरह जला हुआ था।
करीब एक महीने बाद रात के ठीक 2:17 पर उसका phone बजा।
Unknown Number.
उसने call उठाया।
कुछ सेकंड तक सिर्फ static noise सुनाई दी।
फिर एक धीमी आवाज़ आई—
“अगला stop आने वाला है…”
Call कट गया।
रोहन का पूरा शरीर ठंडा पड़ गया।
वह धीरे-धीरे खिड़की तक गया।
नीचे सड़क पर एक सफेद bus धीरे-धीरे उसकी building के सामने से गुजर रही थी।
उसकी खिड़कियों में बैठे लोग बिल्कुल स्थिर थे।
और आखिरी सीट पर…
कोई लगातार उसकी तरफ देख रहा था।
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