BY TEAM SCARY CROCODILE
नदी के उस पार कोई गांव नहीं था… फिर भी हर रात वहां एक लालटेन जलती दिखाई देती थी। लोग कहते थे कि जो भी उस रोशनी के पीछे गया, वह सुबह तक बदल चुका था। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के पास बसे छोटे से “रामघाट” में रात के बाद नदी की तरफ देखना भी लोग अशुभ मानते थे। दिन में घाट सामान्य लगता — चाय की दुकान, मंदिर की घंटियां, गीली मिट्टी की खुशबू और किनारे खेलते बच्चे। लेकिन रात होते ही वही जगह डरावनी हो जाती थी। पानी काला दिखने लगता, हवा बर्फ जैसी ठंडी हो जाती और दूर कहीं से चप्पू के पानी काटने की आवाज सुनाई देती — छप… छप… छप… जबकि नदी पर कोई नाव दिखाई नहीं देती थी। गांव में एक पुरानी कहानी मशहूर थी। एक बूढ़ा boatman, गणेश मल्लाह, जो बरसों पहले नदी में डूबकर मर चुका था… लेकिन उसकी नाव आज भी रात में चलती थी।

अभय ने बचपन में ये बातें सुनी थीं, लेकिन कभी यकीन नहीं किया। कई साल बाद जब वह Lucknow से अपने गांव लौटा, तब उसे पहली बार डर महसूस हुआ। रात लगभग साढ़े बारह बजे की थी। Haunted Boatman Story बारिश लगातार हो रही थी और बस उसे मेन रोड पर उतारकर जा चुकी थी। गांव पहुंचने का सबसे छोटा रास्ता नदी पार करके जाता था। अभय जल्दी में था क्योंकि उसकी मां ने फोन पर सिर्फ इतना कहा था — “तेरे पापा की हालत ठीक नहीं है… जल्दी आ जा।” कीचड़ भरे रास्ते से गुजरते हुए वह घाट तक पहुंचा। वहां पूरा सन्नाटा था। सिर्फ एक पुरानी लकड़ी की नाव किनारे बंधी थी और उसके आगे लालटेन जल रही थी। तभी पीछे से भारी आवाज आई — “इतनी रात में घाट पर क्यों आए हो बाबू?” अभय पलटा। एक बूढ़ा आदमी भीगी धोती और काले कुर्ते में खड़ा था। उसकी आंखें अजीब शांत थीं। “मुझे परसापुर जाना है,” अभय ने कहा। बूढ़ा कुछ सेकंड उसे देखता रहा, फिर बोला — “छोड़ दूंगा… लेकिन रास्ते में पीछे मत देखना।”
नाव धीरे-धीरे नदी के बीच पहुंचने लगी। शुरुआत में सब सामान्य था। बारिश की बूंदें पानी पर गिर रही थीं, हवा गीली थी और चप्पू की आवाज अंधेरे में गूंज रही थी। लेकिन कुछ देर बाद अभय को महसूस हुआ कि नाव में कोई तीसरा भी मौजूद है। उसने गर्दन घुमाने की कोशिश की, तभी boatman की आवाज आई — “पीछे मत देखना।” अभय रुक गया। उसके हाथ ठंडे पड़ने लगे। फिर अचानक पीछे से खांसी की आवाज आई… किसी बूढ़ी औरत जैसी। अभय ने डरते हुए पूछा, “काका… कोई और भी है क्या?” बूढ़े ने बिना उसकी तरफ देखे जवाब दिया — “नदी में हमेशा कोई न कोई साथ चलता है।” उसी पल अभय के फोन की screen अपने आप जल उठी। Battery सिर्फ 1% थी। फिर अचानक उसके फोन में उसकी मां की आवाज सुनाई दी — “अभय… जल्दी आ जा…” जबकि ऐसी कोई recording उसके फोन में थी ही नहीं। उसके हाथ कांपने लगे।
नदी के बीच पहुंचते ही धुंध फैलने लगी। इतनी घनी कि लालटेन की रोशनी भी नाव से बाहर नहीं जा रही थी। तभी पीछे से एक आदमी की भारी आवाज आई — “अभय…” वह बिल्कुल उसके पिता जैसी थी। अभय की आंखों में पानी भर आया। वह खुद को रोक नहीं पाया और धीरे-धीरे पीछे मुड़ा। धुंध में एक आदमी बैठा था। सफेद कुरता, भीगे बाल… बिल्कुल उसके पिता जैसा। लेकिन अगले ही पल उस आकृति ने सिर उठाया और अभय की चीख निकल गई। चेहरे पर आंखें, नाक, मुंह कुछ भी नहीं था। सिर्फ चिकनी भीगी त्वचा। नाव जोर से हिल गई। पानी अंदर आने लगा। बूढ़े boatman ने चप्पू जोर से पानी पर मारा और चीखा — “कहा था पीछे मत देखना!” उसी समय नाव के नीचे से कई हाथों जैसी हरकत महसूस होने लगी। लकड़ी पर नाखून रगड़ने की आवाज आने लगी — खर्र… खर्र… खर्र…
कुछ देर बाद धुंध के बीच एक दूसरा घाट दिखाई दिया। वहां सफेद कपड़ों में कई लोग खड़े थे। सब चुप। सब स्थिर। उनके बीच एक छोटा लड़का लाल पतंग पकड़े खड़ा था। अभय का शरीर सुन्न पड़ गया। वह लड़का उसका cousin रोहित था… जो पंद्रह साल पहले इसी नदी में डूब गया था। उस दिन अभय ने ही उसे गहरे पानी तक जाने की चुनौती दी थी। जब रोहित डूबने लगा, अभय डरकर भाग गया था और घर जाकर झूठ बोला था कि रोहित अकेला नदी में गया था। वह सच उसने कभी किसी को नहीं बताया। धुंध में खड़े लड़के ने धीरे से पूछा — “तुमने मुझे छोड़ा क्यों?” अभय टूट गया। वह नाव में घुटनों के बल बैठ गया और रोते हुए बोला — “मैं डर गया था… मैंने झूठ बोला था… मुझे माफ कर दे…” जैसे ही उसने सच बोला, घाट पर खड़ी सारी आकृतियां धीरे-धीरे धुंध में गायब होने लगीं। लाल पतंग हवा में उठी और अंधेरे में खो गई।
Haunted Boatman Story
अब नदी अचानक शांत हो गई थी। हवा रुक चुकी थी। अभय कांपती आवाज में बोला — “काका… आप कौन हैं?” बूढ़े ने कुछ देर चुप रहने के बाद कहा — “जिस दिन रोहित डूबा था… उसी दिन एक आदमी उसे बचाने नदी में कूदा था।” अभय की सांस रुक गई। “वो आदमी मैं था,” boatman बोला। “लोगों ने मेरी लाश तीन दिन बाद नीचे वाले घाट पर देखी थी।” अभय के हाथ सुन्न पड़ गए। सामने बैठा आदमी इंसान नहीं था। फिर भी उसके चेहरे पर डर नहीं, सिर्फ थकान थी। “फिर आप मुझे क्यों पार ले जा रहे हैं?” अभय ने पूछा। बूढ़ा हल्का सा मुस्कुराया — “क्योंकि कुछ लोग नदी पार करने नहीं… सच बोलने आते हैं।”
कुछ मिनट बाद नाव किनारे लग गई। सामने उसका गांव था। अभय जल्दी से नीचे उतरा और पीछे मुड़कर पैसे देने लगा… लेकिन नाव गायब थी। न बूढ़ा, न लालटेन, न चप्पू। सिर्फ काला पानी। डर से उसका गला सूख गया। वह भागता हुआ घर पहुंचा। आंगन में लोग बैठे थे। अंदर अगरबत्ती की गंध थी। उसके पिता सफेद चादर में ढके हुए पड़े थे। मां रोते हुए बोली — “मरने से पहले बस तेरा नाम लिया था…” अभय वहीं बैठकर फूट-फूटकर रो पड़ा। उसी रात उसने पूरे परिवार के सामने रोहित वाली सच्चाई बता दी। घर में सन्नाटा छा गया, लेकिन पहली बार उसके सीने का बोझ हल्का हुआ।
अगले दिन शाम को अभय अकेला घाट पर गया। चाय वाले रामू से उसने पूछा — “गणेश मल्लाह सच में मर चुके हैं?” रामू ने नदी की तरफ देखते हुए कहा — “पंद्रह साल पहले। लेकिन रात में कभी-कभी उनकी नाव अब भी दिखती है।” अभय काफी देर तक नदी को देखता रहा। फिर उसने घाट की आखिरी सीढ़ी पर एक लाल पतंग रख दी और वापस चला गया। लेकिन कहानी वहीं खत्म नहीं हुई। एक साल बाद, उसी monsoon की रात, एक दूसरा मुसाफिर रामघाट पहुंचा। घाट खाली था। सिर्फ एक नाव और उसके आगे जलती लालटेन। उसने आवाज लगाई — “कोई है?” धुंध से एक आदमी बाहर आया। उसके कंधे पर पुराना गमछा था। हाथ में चप्पू। और उसकी आंखें अजीब शांत थीं। वह अभय था। उसने मुसाफिर को देखते हुए धीरे से कहा — “छोड़ दूंगा… लेकिन रास्ते में पीछे मत देखना।”
रामघाट पर उस रात हवा सामान्य नहीं थी। नदी के ऊपर धुंध बहुत नीचे तक झुकी हुई थी, जैसे पानी खुद सांस ले रहा हो। नया मुसाफिर, जिसका नाम निखिल था, भीगते हुए घाट की सीढ़ियों तक पहुंचा। उसके जूते कीचड़ में धंस रहे थे और हाथ में पकड़ा mobile बार-बार network search कर रहा था। उसने कई बार पीछे मुड़कर सड़क की तरफ देखा, लेकिन वहां सिर्फ अंधेरा था। फिर उसकी नजर नाव के पास खड़े आदमी पर गई। कंधे पर पुराना गमछा, हाथ में चप्पू और आंखों में अजीब ठंडापन। “मुझे उस पार जाना है,” निखिल ने जल्दी से कहा। सामने खड़े आदमी ने कुछ सेकंड उसे देखा, फिर बिल्कुल धीमी आवाज में बोला — “बैठ जाओ… लेकिन रास्ते में पीछे मत देखना।” निखिल हल्का सा हंसा। “ये dialogue यहां सब बोलते हैं क्या?” आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया। बस नाव को धीरे से धक्का दिया और वह काले पानी में उतर गई।
निखिल को शुरुआत में सब अजीब जरूर लगा, लेकिन डर नहीं लगा। वह Delhi में crime journalism करता था और कई haunted stories expose कर चुका था। उसे लगता था गांवों में लोग अंधविश्वास को सच मान लेते हैं। नाव आगे बढ़ी तो उसने casually पूछा, “तुम्हारा नाम?” आदमी ने चप्पू चलाते हुए जवाब दिया — “अभय।” निखिल अचानक चुप हो गया। उसे याद आया कि कुछ महीने पहले उसने internet पर एक article पढ़ा था — The Ghost Boatman of Ramghat. उस article में एक आदमी का जिक्र था जिसने अपने cousin की मौत का सच कबूल करने के बाद नदी किनारे खुदकुशी कर ली थी। नाम था… अभय। निखिल ने तुरंत phone निकाला और article search करने लगा, लेकिन screen अपने आप black हो गई। Battery 73% थी, फिर भी phone बंद हो चुका था। उसी समय नदी के दूसरी तरफ कहीं से घंटी बजने की आवाज आई। एक… दो… तीन… फिर अचानक बंद।
अब हवा बहुत ठंडी हो चुकी थी। निखिल ने jacket कसकर पकड़ी। तभी उसे महसूस हुआ कि नाव का वजन बढ़ गया है। जैसे कोई और भी उसमें बैठ गया हो। पानी में हल्की-हल्की थपकी जैसी आवाज आने लगी। उसने नीचे देखा। नाव के फर्श पर गीले पैरों के निशान थे… छोटे-छोटे… जैसे किसी बच्चे के। निखिल का गला सूख गया। “ये… ये क्या है?” उसने धीमे से पूछा। अभय ने बिना उसकी तरफ देखे कहा — “जो लोग नदी से जाते हैं… कुछ कभी उतरते नहीं।” उसी पल पीछे से किसी लड़की की धीमी हंसी सुनाई दी। इतनी पास… जैसे कोई उसके कान के बिल्कुल पीछे बैठा हो। निखिल के हाथ कांपने लगे। “कौन है वहां?” उसने डरते हुए पूछा। जवाब में सिर्फ पानी की आवाज आई — छप… छप… छप…
धुंध अब नाव के चारों तरफ घूमने लगी थी। लालटेन की लौ बार-बार कांप रही थी। तभी निखिल को धुंध में एक चेहरा दिखाई दिया। एक लड़की। भीगे बाल। सफेद सलवार। उसका आधा चेहरा पानी में डूबा हुआ था। निखिल का दिल रुक सा गया। वह लड़की सना थी — उसकी girlfriend… जो तीन साल पहले mysterious तरीके से गायब हो गई थी। Police को उसकी body कभी नहीं मिली थी। निखिल हमेशा कहता रहा कि वह उसे छोड़कर चली गई, लेकिन सच कुछ और था। उस रात दोनों नदी किनारे लड़ रहे थे। गुस्से में निखिल ने उसका हाथ झटका था… और सना पीछे फिसलकर पानी में गिर गई थी। वह तैर सकती थी… लेकिन निखिल डर गया। उसने मदद बुलाने के बजाय वहां से भागना चुना। अगले दिन उसने झूठ बोला कि सना अचानक गायब हो गई। अब वही लड़की धुंध में खड़ी उसे देख रही थी। उसके होंठ धीरे-धीरे खुले — “तुमने मुझे बचाया क्यों नहीं…?”
निखिल चीख पड़ा। “नहीं… नहीं… मैंने जानबूझकर नहीं किया…” उसका शरीर कांप रहा था। उसने आंखें बंद कर लीं, लेकिन आवाजें बंद नहीं हुईं। अब नाव के नीचे से कई हाथ लकड़ी पर मार रहे थे। धड़… धड़… धड़… जैसे कोई अंदर घुसना चाहता हो। अभय पहली बार जोर से बोला — “सच बोलो!” निखिल रोने लगा। “मैं डर गया था… अगर सच बोलता तो police मुझे जेल भेज देती…” अचानक नाव रुक गई। चारों तरफ का पानी पूरी तरह शांत हो गया। धुंध के बीच सना का चेहरा धीरे-धीरे बदलने लगा। उसकी आंखों से पानी बह रहा था… लेकिन इस बार वह डरावनी नहीं लग रही थी। सिर्फ टूटी हुई। उसने धीरे से कहा — “तुम्हें हर रात मेरी याद आती थी ना?” निखिल जमीन पर बैठ गया और सिर पकड़कर रोने लगा। “हर रात…”
कुछ सेकंड बाद सब शांत हो गया। धुंध पीछे हटने लगी। लेकिन अब अभय चुप था। बहुत देर तक चप्पू चलाने के बाद उसने पहली बार कहा — “नदी लोगों को मारती नहीं… बस उनसे उनका सच छीन लेती है।” निखिल ने कांपते हुए पूछा — “तुम यहां क्यों हो?” अभय ने नदी की तरफ देखा। “क्योंकि मैं एक बार इस नाव से उतर चुका हूं… लेकिन नदी ने मुझे वापस बुला लिया।” निखिल कुछ समझ नहीं पाया। तभी दूर किनारा दिखाई देने लगा। गांव की हल्की रोशनी, पीपल का पेड़ और घाट की टूटी सीढ़ियां। नाव धीरे से किनारे लगी। निखिल जल्दी से नीचे उतरा। उसके पैर कांप रहे थे। उसने पीछे मुड़कर कहा — “तुम… इंसान हो या…” लेकिन उसके शब्द वहीं रुक गए। नाव खाली थी। अभय गायब था। सिर्फ लालटेन पानी पर तैर रही थी।
अगली सुबह रामघाट में खबर फैली कि नदी किनारे एक आदमी बेहोश मिला है। वही निखिल। जब गांव वालों ने उसे उठाया, उसके बाल आधे सफेद हो चुके थे। वह बार-बार सिर्फ एक ही बात बोल रहा था — “पीछे मत देखना…” Police ने उसे mentally disturbed समझा। कुछ दिन बाद वह Delhi लौट गया, लेकिन उसकी हालत कभी ठीक नहीं हुई। उसने journalism छोड़ दिया, apartment से बाहर निकलना बंद कर दिया और हर रात कमरे की light जलाकर सोने लगा। उसके पड़ोसी कहते थे कि कई बार रात के तीन बजे उसके कमरे से पानी टपकने की आवाज आती थी… जबकि अंदर सब सूखा होता था।
और रामघाट? वहां आज भी रात के बाद कोई नाव नहीं चलती। फिर भी कई लोग दावा करते हैं कि monsoon की कुछ रातों में नदी के बीच एक लालटेन तैरती दिखाई देती है। कभी-कभी धुंध के बीच दो परछाइयां भी दिखती हैं — एक बूढ़ा boatman… और उसके पीछे चप्पू पकड़े एक जवान आदमी। लेकिन सबसे डरावनी बात ये है कि अगर कोई उस नाव को बहुत देर तक देखता रहे… तो उसे अपने पीछे किसी गीले इंसान की सांस महसूस होने लगती है।
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