Uski Kundli Mein Mangal Nahi Kuch Aur Tha | Kundli Ka Rahasya

BY SCARY CROCODILE TEAM

पहली बार बात तब बिगड़ी जब तीसरा रिश्ता भी बिना वजह टूट गया।

रिया की मां अब लोगों से नजरें छिपाने लगी थीं। मोहल्ले में हर दूसरे दिन कोई न कोई पूछ ही देता —
“अरे, अभी तक शादी नहीं हुई इसकी?”

और हर बार वही मजबूर मुस्कान।

“बस… बात चल रही है।”

Kundli Ka Rahasya

लेकिन सच ये था कि पिछले छह महीनों में जो भी लड़का रिया को देखने आया, कुछ अजीब हुआ। कोई अगले दिन मना कर देता। किसी के घर अचानक accident हो जाता। एक लड़के की मां तो रिया की photo देखते ही बेहोश हो गई थी।

शुरुआत में सबने इसे coincidence समझा।

रिया ने भी।

वो इंदौर में एक private company में काम करती थी। Simple लड़की। ज्यादा makeup नहीं, ज्यादा दोस्त नहीं। Office, घर, weekend पर Netflix — बस इतनी सी life थी उसकी।

Kundli Ka Rahasya लेकिन फिर चीजें धीरे-धीरे बदलने लगीं।

और सबसे पहले बदलाव उसकी नींद में आया।

उसे हर रात लगभग एक ही time पर आंख खुलने लगी।
3:19 AM.

ना एक मिनट ऊपर। ना नीचे।

पहले उसने ignore किया। लेकिन चौथी रात उसे लगा कि कमरे में कोई और भी है।

रिया का कमरा छोटा था। एक तरफ study table, सामने अलमारी और खिड़की के पास bed। उस रात बाहर हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ phone charging light जल रही थी।

उसने करवट बदली।

और उसे साफ लगा… कोई उसके bed के पास खड़ा है।

रिया का गला सूख गया।

उसने धीरे-धीरे आंखें खोलीं।

अंधेरे में कोई shape दिखाई दे रही थी। लंबा सा आदमी। बिल्कुल स्थिर।

उसने तुरंत bed lamp on किया।

कमरा खाली था।

रिया काफी देर तक बैठी रही। Heartbeat इतनी तेज थी कि उसे खुद सुनाई दे रही थी। फिर खुद को समझाकर दोबारा सो गई।

सुबह उसने ये बात किसी को नहीं बताई।

क्योंकि उसे खुद ही childish लग रहा था।

लेकिन उसी दिन office में एक अजीब चीज हुई।

Lunch break के दौरान उसकी दोस्त नेहा अचानक बोली —
“रिया… तू रात को सोती नहीं क्या?”

“क्यों?”

“तेरे आंखों के नीचे देख। और honestly… तू आज weird लग रही है।”

रिया हंस दी।
“Thanks.”

लेकिन नेहा मजाक नहीं कर रही थी।

वो लगातार रिया को ऐसे देख रही थी जैसे कुछ समझने की कोशिश कर रही हो।

फिर धीरे से बोली —
“कल मैंने तुझे parking में देखा था।”

रिया ने सिर उठाया।
“कब?”

“रात को। करीब 9 बजे।”

“Impossible. मैं तो 7 बजे निकल गई थी।”

नेहा कुछ सेकंड चुप रही।

“शायद कोई और होगी।”

लेकिन उसके चेहरे पर confusion साफ दिख रहा था।

उस शाम जब रिया basement parking में अपनी scooty निकाल रही थी, उसे अचानक पीछे किसी के चलने की आवाज सुनाई दी।

टक…

टक…

टक…

Concrete parking में आवाज बहुत साफ गूंज रही थी।

रिया ने पीछे देखा।

कोई नहीं।

ऊपर एक tube light बार-बार blink कर रही थी। दूर security guard phone पर बात कर रहा था। बाकी पूरा parking लगभग खाली था।

रिया ने scooty start की ही थी कि उसके phone पर notification आया।

Unknown Number.

उसने casually message खोला।

उसके हाथ ठंडे पड़ गए।

Message में सिर्फ एक photo थी।

उसकी scooty की।

अभी की photo।

और photo में रिया के पीछे कोई खड़ा था।

एक आदमी।

धुंधला चेहरा।

लंबा काला shirt।

रिया तुरंत पीछे पलटी।

Parking खाली था।

उसका सांस लेना भारी हो गया।

उसने तुरंत उस number पर call लगाया।

Phone switched off.

उस रात वो पहली बार सच में डर गई।

घर पहुंचकर उसने photo दोबारा खोली।

अब image blurred थी।

जैसे किसी ने edit करके खराब कर दी हो।

लेकिन पीछे खड़ा वो आदमी अब भी दिख रहा था।

थोड़ा और साफ।

और वो सीधे camera की तरफ देख रहा था।


रिया ने अगले दिन वो बात अपनी मां को बताई।

उनकी मां ने बिना देर किए कहा —
“तू इस weekend घर आ जा।”

सोनगढ़ का उनका पुश्तैनी घर काफी पुराना था। दो मंजिला। सामने छोटा मंदिर, पीछे नीम का पेड़ और ऊपर एक बंद कमरा।

रिया बचपन से उस कमरे से डरती थी।

कोई उसे वहां जाने नहीं देता था।

लेकिन वजह कभी किसी ने नहीं बताई।

जब वो घर पहुंची तो बारिश शुरू हो चुकी थी। पुरानी दीवारों से सीलन की smell आ रही थी। आंगन में पानी जमा था।

उसकी मां ने उसे देखते ही माथा छुआ।
“तुझे बुखार है क्या?”

“नहीं।”

लेकिन सच ये था कि पिछले कुछ दिनों से रिया खुद को अजीब महसूस कर रही थी।

थकान।

चिड़चिड़ापन।

और सबसे ज्यादा… वो feeling कि कोई उसे लगातार देख रहा है।

रात को खाना खाते वक्त उसके पिता अचानक बोले —
“कल पंडित दामोदर आएंगे।”

रिया चिढ़ गई।
“Please papa, ये kundli वाला drama मत शुरू करो।”

लेकिन उनके पिता serious थे।

“तीन रिश्ते ऐसे नहीं टूटते।”

रिया कुछ बोलती उससे पहले ऊपर कहीं से भारी चीज घिसटने की आवाज आई।

घssss…

टेबल पर बैठे तीनों लोग चुप हो गए।

फिर आवाज दोबारा आई।

इस बार थोड़ा लंबा।

रिया ने ऊपर देखा।

“कोई है क्या वहां?”

उसकी मां ने तुरंत नजरें झुका लीं।

“बिल्ली होगी।”

लेकिन उनके हाथ कांप रहे थे।

उस रात रिया देर तक जागती रही।

बारिश लगातार चल रही थी। पुराने घर में हवा की आवाज अलग तरह से गूंजती थी। कभी खिड़की हिलती, कभी लकड़ी चटकती।

करीब 3 बजे उसे फिर वही महसूस हुआ।

कोई उसके कमरे के बाहर खड़ा है।

रिया धीरे से उठी।

दरवाजे के नीचे से corridor की हल्की yellow light अंदर आ रही थी।

और उसी रोशनी में उसे किसी के पैरों की shadow दिखाई दी।

बिल्कुल स्थिर।

रिया का शरीर जम गया।

फिर…

टक।

दरवाजे पर एक हल्की knock हुई।

टक।

दूसरी।

उसने हिम्मत करके पूछा —
“मम्मी?”

कोई जवाब नहीं।

कुछ सेकंड बाद handle धीरे-धीरे नीचे दबा।

खट्…

रिया पीछे हट गई।

लेकिन दरवाजा lock था।

करीब आधा मिनट बाद सब शांत हो गया।

सुबह उसने दरवाजा खोला।

बाहर कोई नहीं था।

लेकिन floor पर गीले पैरों के निशान बने हुए थे।

ऐसे… जैसे कोई बारिश में भीगकर अंदर आया हो।

और वो निशान सीधे सीढ़ियों की तरफ जा रहे थे।

ऊपर बंद कमरे तक।


अगले दिन पंडित दामोदर आए।

करीब सत्तर साल के बूढ़े आदमी। बहुत पतले। आंखों पर मोटा चश्मा। उन्होंने आते ही घर के अंदर अजीब नजरों से देखना शुरू कर दिया।

जैसे कुछ ढूंढ रहे हों।

रिया को ये सब uncomfortable लग रहा था।

लेकिन जब दामोदर ने उसकी जन्मतिथि सुनते ही अचानक पूछा —
“जन्म रात को हुआ था?”

तो कमरे में अजीब चुप्पी फैल गई।

उसकी मां ने धीरे से कहा —
“जी… बारह बजे के बाद।”

“बारिश हो रही थी?”

“हां…”

दामोदर अब kundli पर झुक गए।

करीब दो मिनट तक वो कुछ नहीं बोले।

फिर अचानक उनका हाथ रुक गया।

उन्होंने चश्मा उतारा।

और पहली बार सीधे रिया की तरफ देखा।

उस नजर में sympathy नहीं थी।

डर था।

“इस लड़की की kundli में मंगल नहीं है,” उन्होंने बहुत धीमे कहा, “कुछ और है।”

रिया irritate हो गई।
“मतलब?”

लेकिन दामोदर ने जवाब नहीं दिया।

उन्होंने सिर्फ एक सवाल पूछा —

“ऊपर वाला कमरा कितने साल से बंद है?”

रिया के पिता का चेहरा उतर गया।

“करीब… पच्चीस साल।”

“और उस कमरे में जिसने जान दी थी… उसका नाम क्या था?”

रिया ने shock में अपने पिता की तरफ देखा।

कमरे में कोई आवाज नहीं थी।

सिर्फ बाहर बारिश।

फिर उसके पिता ने बहुत धीरे कहा —

“नैना।”

रिया पहली बार ये नाम सुन रही थी।

उसकी बुआ।

जिसके बारे में घर में कभी बात नहीं होती थी।


उस रात उसके पिता ने पूरी कहानी बताई।

नैना उनकी बड़ी बहन थी। पढ़ने में तेज। Astrology और पुराने rituals में बहुत interest था। वो घंटों कमरे में बंद रहकर किताबें पढ़ती रहती।

फिर अचानक वो बदलने लगी।

रात में जागना।

खुद से बातें करना।

Mirror ढंककर रखना।

और सबसे अजीब… वो बार-बार कहती थी कि कोई आदमी उसे बुलाता है।

पहले परिवार ने मजाक समझा।

लेकिन एक रात पड़ोसियों ने उसे छत पर किसी से बात करते देखा।

जबकि वहां कोई नहीं था।

धीरे-धीरे उसकी हालत खराब होती गई।

और फिर एक रात…

वो ऊपर वाले कमरे में dead मिली।

Officially suicide.

लेकिन उसके पिता ने जो बात सबसे आखिर में बताई… उसने रिया के हाथ ठंडे कर दिए।

“मरने से पहले वो बार-बार एक ही बात बोल रही थी,” उन्होंने कहा।

“क्या?”

उनके पिता कुछ सेकंड चुप रहे।

फिर बोले —

“वो कहती थी… ‘वो वापस आएगा।’”

रिया उस रात सो नहीं पाई।

करीब 2 बजे उसे प्यास लगी। वो kitchen में पानी लेने गई।

पूरा घर अंधेरे में डूबा था।

जैसे ही वो वापस मुड़ी… उसे ऊपर corridor में कोई खड़ा दिखाई दिया।

लंबा आदमी।

सफेद दीवार के पास।

रिया freeze हो गई।

उसने सोचा शायद papa होंगे।

लेकिन अगले ही second वो shape धीरे-धीरे पीछे हटने लगी।

और अंधेरे में गायब हो गई।

रिया भागकर अपने कमरे में बंद हो गई।

सुबह उसने खुद को समझाया कि उसने गलत देखा होगा।

लेकिन उसी दोपहर उसकी मां ऊपर सफाई करने गईं।

और चीखते हुए नीचे भागीं।

“रिया!”

सब ऊपर दौड़े।

बंद कमरे की धूल भरी floor पर किसी ने उंगली से लिखा था —

“मैं अभी गया नहीं।”

किसी के पैरों के निशान नहीं थे।

खिड़की अंदर से बंद थी।

और कमरे में धूल इतनी थी कि अगर कोई अंदर आता तो marks जरूर बनते।

लेकिन वहां सिर्फ वो sentence लिखा था।

और कुछ नहीं।


उस शाम पहली बार रिया ने महसूस किया कि शायद problem उसकी kundli नहीं थी।

कुछ और था।

कुछ जो इस घर में बहुत पहले से मौजूद था।

और शायद…

अब उसे पहचान चुका था।

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