जादूगर जिसने मेरी मौत की तारीख बता दी | Jadugar Ki Kahani

BY SCARY CROCODILE TEAM

मैंने अपने जीवन में बहुत तरह के लोगों के बारे में सुना था। तांत्रिक, ओझा, साधु, बाबा, ज्योतिषी और ऐसे लोग जो दावा करते थे कि वे इंसानों की किस्मत बदल सकते हैं। लेकिन “जादूगर” शब्द सुनते ही मेरे दिमाग में हमेशा मंच पर करतब दिखाने वाले कलाकारों की तस्वीर आती थी।

ऐसे लोग जो टोपी से कबूतर निकालते हैं, हवा में सिक्का गायब कर देते हैं और लोगों का मनोरंजन करते हैं।

कम से कम मैं यही सोचता था। Jadugar Ki Kahani

फिर एक दिन मुझे उस जादूगर के बारे में पता चला जिसके बारे में आज भी हमारे इलाके के लोग खुलकर बात नहीं करते।

और सच कहूँ…

Jadugar Ki Kahani

जो कुछ मैंने अपनी आँखों से देखा, उसके बाद मुझे समझ नहीं आया कि वह इंसान था या कुछ और।

यह घटना लगभग सात साल पुरानी है।

उस समय मैं एक स्थानीय समाचार पत्र के लिए काम करता था।

मेरा काम था छोटे कस्बों और गाँवों में जाकर अजीब घटनाओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करना।

ज्यादातर मामलों में लोगों की कहानियों के पीछे कोई न कोई सामान्य कारण निकल आता था।

कभी अफवाह।

कभी गलतफहमी।

कभी किसी का बनाया हुआ डर।

इसलिए मैं ऐसी बातों को बहुत गंभीरता से नहीं लेता था।

एक दिन ऑफिस में बैठे हुए मुझे एक फोन आया।

फोन करने वाला मेरा पुराना परिचित था।

वह एक छोटे गाँव में स्कूल शिक्षक था।

उसकी आवाज़ असामान्य रूप से धीमी लग रही थी।

“तुम्हें यहाँ आना चाहिए।”

मैंने हँसते हुए पूछा, “क्यों? फिर कोई भूत दिखाई दे गया क्या?”

लेकिन दूसरी तरफ कुछ क्षणों तक चुप्पी रही।

फिर उसने कहा,

“इस बार मामला अलग है।”

“क्या हुआ है?”

“गाँव में एक जादूगर आया है।”

मैं मुस्कुराया।

“और?”

“लोग कह रहे हैं कि वह भविष्य देख सकता है।”

“ये तो हर दूसरा बाबा कहता है।”

“नहीं।”

उसकी आवाज़ अचानक काँप गई।

“यह आदमी लोगों की मौत बता रहा है… और जो तारीख वह बता रहा है, उसी दिन लोग मर रहे हैं।”

फोन कटने के बाद भी उसके आखिरी शब्द मेरे दिमाग में घूमते रहे।

सच कहूँ तो मुझे कहानी में दिलचस्पी आ गई थी।

अगले दिन मैं गाँव के लिए निकल पड़ा।

गाँव का नाम था भानपुर।

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शहर से लगभग तीन घंटे दूर।

सड़क धीरे-धीरे संकरी होती गई।

पक्के रास्ते खत्म हुए और मिट्टी के रास्ते शुरू हो गए।

चारों तरफ खेत फैले हुए थे।

दूर-दूर तक सरसों के पीले फूल दिखाई दे रहे थे।

लेकिन जैसे-जैसे मैं गाँव के करीब पहुँच रहा था, एक अजीब बात महसूस हो रही थी।

सड़क पर लोग बहुत कम दिखाई दे रहे थे।

जो लोग दिखते भी थे, उनके चेहरे पर तनाव साफ दिखाई देता था।

ऐसा लग रहा था जैसे पूरा गाँव किसी अनदेखे डर के नीचे जी रहा हो।

दोपहर तक मैं वहाँ पहुँच गया।

मेरा दोस्त स्कूल के बाहर मेरा इंतजार कर रहा था।

मुझे देखते ही उसने राहत की साँस ली।

“तुम आ गए।”

“अब बताओ मामला क्या है?”

उसने आसपास देखा।

फिर मुझे थोड़ा दूर ले गया।

“वह आदमी तीन महीने पहले आया था।”

“कौन?”

“जादूगर।”

“नाम?”

“कोई नहीं जानता।”

“कहाँ से आया?”

“कोई नहीं जानता।”

मैं हँस पड़ा।

“कमाल है।”

लेकिन मेरा दोस्त नहीं हँसा।

उसका चेहरा पूरी तरह गंभीर था।

“पहले लोग उसे मजाक समझते थे।”

“फिर?”

“फिर उसने पहली भविष्यवाणी की।”

मैंने उत्सुकता से उसकी तरफ देखा।

वह धीरे-धीरे बोलने लगा।

“गाँव के एक किसान से उसने कहा था कि सात दिन बाद शाम छह बजे उसकी मौत हो जाएगी।”

“और?”

“सातवें दिन शाम छह बजे उस किसान को खेत में साँप ने काट लिया।”

मैंने कंधे उचकाए।

“संयोग हो सकता है।”

“सभी ने यही सोचा था।”

“फिर?”

“फिर उसने दूसरी भविष्यवाणी की।”

उसकी आवाज़ और धीमी हो गई।

“और फिर तीसरी… चौथी… पाँचवीं।”

“सब सच हुईं?”

“एक भी गलत नहीं निकली।”

मेरे शरीर में हल्की सिहरन दौड़ गई।

लेकिन फिर भी मैं खुद को समझा रहा था कि इसके पीछे कोई तार्किक कारण जरूर होगा।

शाम होने लगी थी।

आसमान नारंगी रंग में बदल रहा था।

पेड़ों की लंबी परछाइयाँ जमीन पर फैल रही थीं।

तभी मैंने गाँव के बीचोंबीच एक बड़ी भीड़ देखी।

लगभग पूरा गाँव वहाँ मौजूद था।

मैं और मेरा दोस्त भी आगे बढ़ गए।

भीड़ के बीच एक पुराना बरगद का पेड़ खड़ा था।

उसके नीचे एक आदमी बैठा था।

उसे देखते ही मेरे कदम रुक गए।

वह किसी साधारण जादूगर जैसा बिल्कुल नहीं दिखता था।

उसने काले रंग का लंबा चोगा पहन रखा था।

सफेद बाल कंधों तक लटक रहे थे।

उसकी दाढ़ी बिखरी हुई थी।

लेकिन सबसे अजीब उसकी आँखें थीं।

गहरी काली।

इतनी काली कि उनमें कोई चमक दिखाई ही नहीं देती थी।

ऐसा लग रहा था जैसे दो अँधेरे गड्ढे हों।

वह बिल्कुल स्थिर बैठा था।

न साँसों की आवाज़।

न शरीर की हरकत।

कुछ नहीं।

भीड़ में खड़े लोग उससे डरते हुए दिखाई दे रहे थे।

तभी एक महिला आगे आई।

वह रो रही थी।

“मेरे बेटे का क्या होगा?”

जादूगर ने उसकी तरफ देखा।

बस देखा।

कुछ सेकंड तक।

फिर बोला,

“वह जिंदा रहेगा।”

महिला की आँखों में आँसू आ गए।

वह तुरंत उसके पैर छूने लगी।

मुझे यह सब ढोंग लग रहा था।

लेकिन तभी जादूगर की नजर मुझ पर पड़ी।

और उसी क्षण…

मेरे शरीर में एक अजीब ठंडक दौड़ गई।

ऐसा लगा जैसे किसी ने बर्फ का टुकड़ा मेरी रीढ़ पर रख दिया हो।

उसकी आँखें सीधे मेरी आँखों में देख रही थीं।

कुछ सेकंड तक हम दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर अचानक उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आई।

और उसने कहा,

“शहर वाला।”

भीड़ की सारी निगाहें मेरी तरफ घूम गईं।

मैं थोड़ा असहज हो गया।

जादूगर धीरे-धीरे खड़ा हुआ।

उसकी ऊँचाई उम्मीद से कहीं ज्यादा थी।

कम से कम छह फीट से ऊपर।

वह मेरी तरफ बढ़ने लगा।

भीड़ अपने आप उसके लिए रास्ता छोड़ती चली गई।

हर कदम के साथ उसकी चोगे की किनारी मिट्टी पर घिसट रही थी।

मैं खुद को शांत रखने की कोशिश कर रहा था।

वह मेरे सामने आकर रुक गया।

इतना करीब कि मैं उसकी साँस महसूस कर सकता था।

उसकी साँसों में किसी जली हुई चीज़ की गंध थी।

फिर उसने फुसफुसाते हुए कहा,

“तुम यहाँ सच खोजने आए हो।”

मैं चौंक गया।

मैंने अपने दोस्त को यह बात रास्ते में भी नहीं बताई थी।

“हाँ।”

मैंने जवाब दिया।

उसकी मुस्कान और गहरी हो गई।

“सच हमेशा अच्छा नहीं होता।”

“और झूठ?”

“झूठ इंसान को जीने देता है।”

कुछ क्षण तक खामोशी रही।

फिर उसने मेरा दाहिना हाथ पकड़ लिया।

उसकी उँगलियाँ बर्फ जैसी ठंडी थीं।

अगले ही पल…

मेरे दिमाग में जैसे किसी ने बिजली दौड़ा दी।

एक दृश्य अचानक मेरी आँखों के सामने चमका।

अंधेरा।

घना जंगल।

पेड़ों के बीच लटकती लाल लालटेनें।

और जमीन पर पड़ा एक इंसानी शरीर।

फिर सब गायब।

मैं हाँफते हुए पीछे हट गया।

भीड़ चौंककर मुझे देखने लगी।

लेकिन जादूगर शांत खड़ा था।

उसके चेहरे पर वही मुस्कान थी।

“तुमने देखा?”

मैं कुछ बोल नहीं पाया।

“यह सिर्फ शुरुआत है।”

फिर वह पीछे मुड़ा और बरगद के पेड़ की तरफ लौट गया।

उस रात मुझे बिल्कुल नींद नहीं आई।

क्योंकि पहली बार मेरे मन में यह सवाल पैदा हुआ था…

अगर वह सिर्फ एक धोखेबाज था…

उस रात मैं स्कूल के पुराने गेस्ट रूम में ठहरा हुआ था।

कमरा साधारण था।

चूने से पुती दीवारें।

लकड़ी का पुराना पलंग।

छत पर घूमता हुआ धीमा पंखा।

खिड़की के बाहर अंधेरा।

लेकिन उस रात समस्या कमरे की नहीं थी।

समस्या मेरे दिमाग की थी।

बार-बार वही दृश्य मेरी आँखों के सामने आ रहा था।

घना जंगल।

लाल लालटेनें।

और जमीन पर पड़ा हुआ कोई इंसान।

जब भी आँखें बंद करता, वही तस्वीर दिखाई देती।

करीब आधी रात को मैंने हार मान ली।

नींद आने वाली नहीं थी।

मैं उठकर खिड़की के पास गया।

गाँव लगभग पूरी तरह शांत था।

दूर कहीं कुत्ते के भौंकने की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

हवा में मिट्टी और सूखी घास की गंध घुली हुई थी।

तभी मेरी नजर सड़क पर पड़ी।

कोई आदमी धीरे-धीरे चल रहा था।

पहले मुझे लगा कोई ग्रामीण होगा।

लेकिन अगले ही पल मैंने उसे पहचान लिया।

वह जादूगर था।

उसका काला चोगा चांदनी में साफ दिखाई दे रहा था।

वह गाँव से बाहर की तरफ जा रहा था।

मेरे भीतर अचानक उत्सुकता जाग उठी।

दिन में वह लोगों के बीच रहता था।

लेकिन रात में कहाँ जाता था?

मैंने बिना किसी को जगाए दरवाजा खोला और बाहर निकल आया।

हवा सामान्य से कहीं ज्यादा ठंडी लग रही थी।

मैं सावधानी से उसके पीछे चलने लगा।

वह तेज नहीं चल रहा था।

लेकिन उसकी चाल अजीब थी।

ऐसा लग रहा था जैसे उसे रास्ता देखने की जरूरत ही नहीं।

जैसे उसे हर मोड़ पहले से याद हो।

गाँव पीछे छूट गया।

खेत खत्म होने लगे।

और सामने जंगल शुरू हो गया।

भानपुर के लोग जिस जंगल का नाम लेने से भी बचते थे।

दिन में मैंने उसके बारे में सुना था।

लोग कहते थे कि वहाँ शाम के बाद कोई नहीं जाता।

कारण कोई साफ नहीं बताता था।

बस इतना कहते थे—

“वहाँ कुछ ठीक नहीं है।”

मैं आमतौर पर ऐसी बातों पर विश्वास नहीं करता था।

लेकिन उस रात जंगल के पास पहुँचते ही मुझे समझ आने लगा कि लोग ऐसा क्यों कहते हैं।

पेड़ असामान्य रूप से घने थे।

उनकी शाखाएँ एक-दूसरे में उलझी हुई थीं।

ऊपर आसमान मुश्किल से दिखाई दे रहा था।

चाँद की रोशनी जमीन तक पहुँच ही नहीं पा रही थी।

चारों तरफ ऐसा अंधेरा था जैसे किसी ने काले कपड़े से दुनिया ढक दी हो।

जादूगर बिना रुके भीतर चला गया।

मैंने गहरी साँस ली और उसके पीछे बढ़ गया।

कुछ देर तक सिर्फ पत्तों की सरसराहट सुनाई देती रही।

फिर अचानक…

मुझे हल्की रोशनी दिखाई दी।

लाल रंग की।

ठीक वैसी ही जैसी मैंने उस दृश्य में देखी थी।

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा।

मैं सावधानी से आगे बढ़ा।

कुछ कदम बाद पेड़ों के बीच एक खुली जगह दिखाई दी।

और उसे देखकर मेरे पैर वहीं रुक गए।

खुली जमीन के बीच गोलाकार जगह बनाई गई थी।

उसके चारों तरफ दर्जनों लाल लालटेनें लटक रही थीं।

हवा चलने पर उनकी रोशनी कांप रही थी।

जमीन पर अजीब निशान बने हुए थे।

किसी तरह के प्रतीक।

ऐसे चिन्ह जिन्हें मैंने पहले कभी नहीं देखा था।

और सबसे डरावनी बात…

वहाँ सिर्फ जादूगर नहीं था।

करीब दस लोग और मौजूद थे।

सभी काले कपड़ों में।

सभी के चेहरे ढके हुए।

वे चुपचाप खड़े थे।

जैसे किसी चीज का इंतजार कर रहे हों।

मैं एक मोटे पेड़ के पीछे छिप गया।

दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि मुझे डर था कहीं कोई सुन न ले।

तभी जादूगर गोल घेरे के बीच पहुँचा।

उसने दोनों हाथ ऊपर उठाए।

और धीमी आवाज़ में कुछ बोलना शुरू किया।

भाषा मेरी समझ से बाहर थी।

शब्द इंसानी लगते ही नहीं थे।

वे अजीब थे।

टूटे हुए।

खुरदरे।

ऐसे जैसे कई आवाजें एक साथ बोल रही हों।

जैसे-जैसे वह मंत्र बोल रहा था, हवा बदलने लगी।

पहले हल्की ठंड थी।

अब अचानक तापमान और गिर गया।

मेरी साँस से धुंध निकलने लगी।

जून का महीना था।

फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे सर्दियों की रात हो।

मेरे हाथ काँपने लगे।

फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरी सारी तर्कशक्ति हिला दी।

लालटेनें एक साथ तेज चमकने लगीं।

एक-एक करके नहीं।

सभी एक साथ।

जैसे किसी ने अदृश्य स्विच दबा दिया हो।

फिर जमीन पर बने प्रतीकों से हल्की लाल चमक निकलने लगी।

मैं अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पा रहा था।

“यह कैसे संभव है?”

मैंने खुद से कहा।

लेकिन जवाब नहीं मिला।

अचानक काले कपड़ों वाले लोगों में से एक व्यक्ति आगे आया।

वह बाकी लोगों से अलग लग रहा था।

क्योंकि उसके हाथ बँधे हुए थे।

वह डरा हुआ था।

बहुत ज्यादा डरा हुआ।

वह बार-बार पीछे हटने की कोशिश कर रहा था।

लेकिन दो लोग उसे पकड़कर आगे ला रहे थे।

मेरा गला सूख गया।

यह कोई खेल नहीं था।

कुछ बहुत गलत होने वाला था।

जादूगर उसके सामने खड़ा हो गया।

कुछ क्षण तक उसे देखता रहा।

फिर बोला—

“तुमने नियम तोड़ा।”

वह आदमी रोने लगा।

“मुझसे गलती हो गई।”

“गलती नहीं। विश्वासघात।”

“मुझे माफ कर दो।”

जादूगर की आँखों में कोई भावना नहीं थी।

न गुस्सा।

न दया।

कुछ भी नहीं।

सिर्फ खालीपन।

फिर उसने अपना हाथ उस आदमी के सिर पर रख दिया।

और उसी क्षण…

वह आदमी चीख उठा।

इतनी भयानक चीख मैंने पहले कभी नहीं सुनी थी।

ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आत्मा को खींचा जा रहा हो।

वह जमीन पर गिर पड़ा।

तड़पने लगा।

उसका शरीर बुरी तरह काँप रहा था।

बाकी लोग बिल्कुल शांत खड़े रहे।

जैसे यह उनके लिए सामान्य बात हो।

कुछ सेकंड बाद सब शांत हो गया।

वह आदमी हिलना बंद कर चुका था।

पूरी तरह।

मेरा खून जम गया।

मैं समझ नहीं पा रहा था कि अभी क्या हुआ।

लेकिन एक बात साफ थी।

वह मर चुका था।

और तभी…

जादूगर ने अचानक सिर घुमाया।

सीधे मेरी तरफ।

मेरी साँस रुक गई।

उसने मुझे देख लिया था।

इसमें कोई शक नहीं था।

हमारे बीच लगभग पचास कदम का फासला था।

फिर भी मुझे लगा जैसे उसकी आँखें मेरे चेहरे के आर-पार देख रही हों।

मैं भागना चाहता था।

लेकिन पैर जैसे जमीन में धँस गए थे।

कुछ सेकंड तक वह मुझे देखता रहा।

फिर उसके होंठों पर वही मुस्कान आई।

धीमी।

डरावनी।

और उसने धीरे से कहा—

“बाहर आ जाओ।”

मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई।

उसने मुझे देख लिया था।

पेड़ के पीछे छिपे होने के बावजूद।

मैं वहीं जड़ बनकर खड़ा रहा।

“बाहर आ जाओ।”

इस बार उसकी आवाज़ थोड़ी तेज थी।

बाकी लोग भी मेरी तरफ देखने लगे।

अब छिपने का कोई मतलब नहीं था।

मैं धीरे-धीरे बाहर निकल आया।

मेरे कदम काँप रहे थे।

दिल पसलियों से टकरा रहा था।

जादूगर मुझे देखता रहा।

फिर बोला—

“तुम्हें नहीं आना चाहिए था।”

“यह सब क्या है?”

मेरे मुँह से मुश्किल से शब्द निकले।

वह मुस्कुराया।

“सच।”

“अभी जो हुआ वह क्या था?”

“सजा।”

“तुमने उसे मार दिया।”

कुछ क्षण तक खामोशी रही।

फिर उसने कहा—

“नहीं।”

“तो?”

“मैंने सिर्फ उसका समय आगे बढ़ा दिया।”

उसकी बात सुनकर मेरी रीढ़ में ठंड उतर गई।

फिर वह धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ने लगा।

एक कदम।

फिर दूसरा।

और उसी क्षण मुझे एहसास हुआ…

उसकी परछाईं जमीन पर नहीं पड़ रही थी।

चारों तरफ लाल रोशनी थी।

बाकी सभी लोगों की परछाइयाँ दिखाई दे रही थीं।

लेकिन उसकी नहीं।

मेरी साँस अटक गई।

मैंने फिर देखा।

हाँ।

वास्तव में उसकी कोई परछाईं नहीं थी।

और उसी पल पहली बार मेरे मन में यह विचार आया—

शायद यह आदमी इंसान नहीं है।

जादूगर मेरे सामने आकर रुक गया।

उसकी आँखें अब पहले से ज्यादा काली दिखाई दे रही थीं।

जैसे उनके भीतर कोई गहराई ही न हो।

फिर उसने फुसफुसाकर कहा—

“तुम्हें वह दृश्य याद है?”

जंगल।

लाल लालटेनें।

और जमीन पर पड़ा हुआ शरीर।

मेरे चेहरे का रंग उड़ गया।

वह मुस्कुराया।

“तुमने अभी उसका एक हिस्सा देखा है।”

“बाकी कब देखूँगा?”

उसकी मुस्कान और चौड़ी हो गई।

“बहुत जल्द।”

“क्यों?”

इस बार उसने सीधे मेरी आँखों में देखा।

और जो जवाब दिया, उसे सुनकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।

“क्योंकि उस दृश्य में जो शव पड़ा था…”

वह कुछ क्षण रुका।

फिर बोला—

“वह तुम्हारा था।”

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