Mandir Ki Kinnar Insaan Nahi Thi | Kinnar Ki Sacchi Kahani

WRITER – Manoj Kulkarni

मैंने अपनी जिंदगी में कई लाशें देखी थीं…

लेकिन उस रात मंदिर की सीढ़ियों पर बैठी किन्नर इंसान नहीं थी।

क्योंकि जब उसने मुस्कुराकर अपना सिर उठाया…

तो उसके चेहरे पर आंखें थीं ही नहीं।

मध्य प्रदेश के देवगढ़ जिले से लगभग बीस किलोमीटर दूर एक छोटा-सा गांव था — बिशनखेड़ा। गांव इतना छोटा था कि वहां आज भी रात आठ बजे के बाद सड़कें खाली हो जाती थीं। पुराने लोग कहते थे कि गांव के बाहर पहाड़ी पर बना “कालभैरव मंदिर” रात के बाद जाग जाता है।

Kinnar Ki Sacchi Kahani

लेकिन शहर वाले इन बातों पर हंसते थे।

मैं भी हंसा था।

Kinnar Ki Sacchi Kahani मेरा नाम निखिल था। मैं भोपाल में एक local news portal के लिए crime और paranormal incidents कवर करता था। ज्यादातर केस fake निकलते थे। कोई झाड़-फूंक वाला बाबा, कोई property dispute, या social media के views के लिए बनाई गई कहानी।

लेकिन बिशनखेड़ा वाला मामला अलग था।

पहली बार मैंने उस मंदिर का नाम तब सुना जब हमारे office में एक video आया।

Video सिर्फ 19 सेकंड का था।

रात का अंधेरा… तेज बारिश… मंदिर की टूटी सीढ़ियां… और सबसे ऊपर सफेद साड़ी पहने एक किन्नर बैठी थी।

वो कैमरे की तरफ देख रही थी।

लेकिन उसकी आंखें…

आंखें बिल्कुल सफेद थीं।

Video के आखिर में record करने वाला लड़का अचानक चीखा —

“भाई… ये नीचे कैसे आ गई…?”

फिर screen हिली।

और video बंद।

उस लड़के की लाश दो दिन बाद जंगल में मिली थी।

उसकी जीभ कटी हुई थी।


“तू seriously वहां जाने वाला है?” मेरे दोस्त और cameraman समीर ने cigarette सुलगाते हुए पूछा।

“Content मिलेगा,” मैंने laptop बंद करते हुए कहा, “और अगर कुछ real हुआ तो views explode करेंगे।”

समीर ने हल्की हंसी छोड़ी।

“हर बार यही बोलता है… फिर निकलता कुछ नहीं।”

काश वो सही होता।


हम शाम करीब छह बजे बिशनखेड़ा पहुंचे।

गांव में घुसते ही एक अजीब-सी चुप्पी महसूस हुई। बारिश रुक चुकी थी लेकिन मिट्टी से गीली बदबू उठ रही थी। रास्ते में एक भी बच्चा नहीं दिखा। बस दूर कहीं लाउडspeaker पर धीमी आरती बज रही थी।

हमने गांव के एक छोटे ढाबे पर गाड़ी रोकी।

ढाबे का मालिक बूढ़ा आदमी था। उसकी आंखों के नीचे काले गड्ढे थे।

“कालभैरव मंदिर का रास्ता?” मैंने पूछा।

उसके हाथ रुक गए।

“रात में?”

“हाँ।”

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वो कुछ सेकंड हमें घूरता रहा।

फिर धीरे से बोला —

“ऊपर अगर सीढ़ियों पर कोई किन्नर बैठे दिखे… तो उससे बात मत करना।”

समीर हंस पड़ा।

“क्यों? वरना क्या होगा?”

बूढ़े ने उसकी तरफ देखा तक नहीं।

“वो इंसान नहीं है।”

ढाबे के अंदर अचानक सन्नाटा फैल गया।

पीछे खाना खा रहे दो आदमी उठे और बिना कुछ बोले बाहर चले गए।

मैंने माहौल हल्का करने के लिए मुस्कुराया।

“कोई local prank होगा।”

बूढ़ा झुककर मेरे करीब आया।

उसके मुंह से बीड़ी और सड़े तेल की बदबू आ रही थी।

“तीन साल पहले मंदिर के पीछे वाली खाई में एक किन्नर की लाश मिली थी। किसी ने उसके साथ बहुत बुरा किया था। पुलिस ने case दबा दिया।”

“नाम?”

“चंदा।”

उसने कांपते हुए कहा।

“मरने के बाद भी वो मंदिर नहीं छोड़ी।”


रात 9 बजे हम मंदिर की तरफ निकले।

जैसे-जैसे गाड़ी पहाड़ी रास्ते पर चढ़ रही थी, network गायब होने लगा।

हवा अजीब आवाज कर रही थी।

कानों में ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत धीरे-धीरे रो रहा हो।

समीर camera check कर रहा था।

“Battery full थी… अब 41% कैसे?”

मैंने मजाक उड़ाया।

“Ghost ने download कर लिया होगा।”

लेकिन सच कहूं…

मुझे भी बेचैनी होने लगी थी।


मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब सौ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं।

सीढ़ियां टूटी हुई थीं। जगह-जगह काई जमी थी। ऊपर मंदिर का काला दरवाजा अंधेरे में किसी खुले मुंह जैसा दिख रहा था।

और वहीं…

सीढ़ियों के बीचों-बीच…

कोई बैठा था।

सफेद साड़ी।

लंबे काले बाल।

नाक में बड़ी-सी नथ।

किन्नर।

समीर रुक गया।

“भाई…”

उसकी आवाज सूख चुकी थी।

मैंने camera zoom किया।

वो सिर झुकाकर बैठी थी।

बारिश की बूंदें उसके बालों से टपक रही थीं।

फिर उसने धीरे-धीरे सिर उठाया।

मेरी रीढ़ जम गई।

उसकी आंखें पूरी सफेद थीं।

एकदम सफेद।

जैसे आंखों में पुतलियां ही नहीं थीं।

लेकिन सबसे डरावनी बात कुछ और थी।

वो मुस्कुरा रही थी।


“चल… वापस चलते हैं,” समीर फुसफुसाया।

मैंने खुद को संभाला।

“Excuse me… हम news से हैं।”

किन्नर धीरे से हंसी।

आवाज ऐसी थी जैसे कोई गले में पानी भरकर बोल रहा हो।

“तुम लोग देर से आए…”

हवा अचानक ठंडी हो गई।

मैंने पूछा, “तुम यहां अकेली क्या कर रही हो?”

उसने उंगली मंदिर की तरफ उठाई।

“वो बुलाता है।”

“कौन?”

उसने जवाब नहीं दिया।

बस हमें देखती रही।

फिर बोली —

“आज फिर किसी को नीचे फेंकेगा।”

समीर का हाथ कांप गया।

“चल भाई!”

मैंने भी तय कर लिया था कि काफी footage मिल चुकी है।

लेकिन तभी…

मंदिर के अंदर घंटी बजी।

अपने आप।

टन्न्न्न्न्न…

पूरी पहाड़ी में आवाज गूंज गई।

किन्नर मुस्कुराई।

“देखा? जाग गया।”


हम नीचे उतरने लगे।

लेकिन तभी समीर अचानक रुक गया।

“मेरा camera?”

Camera गायब था।

“अभी तो हाथ में था!”

हमने चारों तरफ देखा।

फिर ऊपर से आवाज आई।

“ये ढूंढ रहे हो?”

हमने सिर उठाया।

वो किन्नर अब सबसे ऊपर वाली सीढ़ी पर खड़ी थी।

हाथ में camera।

लेकिन…

अभी दो सेकंड पहले वो हमारे पीछे थी।

समीर का चेहरा सफेद पड़ गया।

“ये… इतनी जल्दी ऊपर कैसे गई?”

मेरा गला सूख चुका था।

किन्नर धीरे-धीरे सीढ़ियां उतरने लगी।

लेकिन उसके पैर…

उल्टे थे।

मैं जड़ हो गया।

हर कदम पर उसकी चूड़ियों की आवाज अंधेरे में गूंज रही थी।

छन… छन… छन…

फिर उसने camera मेरी तरफ बढ़ाया।

“अंदर मत जाना।”

मैंने हिम्मत करके पूछा —

“क्यों?”

उसकी मुस्कान गायब हो गई।

“क्योंकि वो भूखा है।”


तभी मंदिर के अंदर से किसी आदमी की चीख सुनाई दी।

इतनी दर्दनाक चीख…

कि मेरे पैरों से ताकत निकल गई।

समीर चिल्लाया —

“कोई अंदर है!”

हम दोनों instinctively मंदिर की तरफ भागे।

किन्नर पीछे से चीखी —

“मत जाओ!”

लेकिन हम अंदर घुस चुके थे।


मंदिर अंदर से बहुत बड़ा था।

दीवारों पर काला धुआं जमा था। ऐसा लग रहा था जैसे सालों से वहां आग जलती रही हो।

बीच में विशाल कालभैरव की मूर्ति थी।

लेकिन मूर्ति की आंखों पर लाल ताजा सिंदूर लगा था।

जैसे अभी किसी ने लगाया हो।

फर्श पर गीले पैरों के निशान थे।

किसी आदमी के।

और वो निशान पीछे वाले कमरे की तरफ जा रहे थे।

समीर camera ऑन करके आगे बढ़ा।

“Hello? कोई है?”

अचानक पीछे से मंदिर का दरवाजा धड़ाम से बंद हो गया।

पूरा मंदिर अंधेरे में डूब गया।

फिर…

किसी के घसीटने की आवाज आने लगी।

घरररर…

घरररर…

जैसे कोई भारी चीज जमीन पर घसीट रहा हो।

समीर की सांसें तेज हो गईं।

मैंने mobile flashlight ऑन की।

और रोशनी जैसे ही पीछे वाले कमरे में गई…

मेरे हाथ से phone गिर गया।

दीवार पर इंसानी नाखूनों के निशान थे।

खून से लिखी एक लाइन भी थी —

“उसे नीचे मत देखने देना।”


“ये मजाक नहीं है…” समीर बुदबुदाया।

तभी ऊपर छत से कुछ टपका।

मेरे गाल पर।

मैंने हाथ लगाया।

खून।

हमने ऊपर देखा।

और मेरी चीख निकल गई।

छत से एक आदमी उल्टा लटका हुआ था।

उसकी आंखें निकली हुई थीं।

जीभ आधी कटी थी।

वही लड़का…

जिसका video viral हुआ था।

लेकिन उसकी लाश तो जंगल में मिली थी।

समीर hysterical होकर पीछे हटने लगा।

तभी उस लाश की गर्दन धीरे-धीरे घूमी।

कड़क…

कड़क…

और उसने सीधे हमें देखा।

“भागो…” उसने फुसफुसाया।

अगले ही सेकंड उसका शरीर ऊपर अंधेरे में खिंच गया।

जैसे कोई उसे घसीटकर ले गया हो।


हम पागलों की तरह बाहर भागे।

लेकिन बाहर पहुंचकर मेरे पैर जम गए।

सीढ़ियों पर कोई नहीं था।

किन्नर गायब थी।

बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।

और तभी…

समीर ने कांपती आवाज में कहा —

“भाई… पीछे देख।”

मैंने पीछे मुड़कर देखा।

मंदिर की छत पर कोई खड़ा था।

बहुत लंबा।

इंसान से कहीं ज्यादा लंबा।

उसका शरीर अंधेरे में था।

बस आंखें दिख रही थीं।

लाल।

जलती हुई लाल।

फिर उसने धीरे-धीरे हाथ उठाया।

और नीचे हमारी तरफ इशारा किया।

अचानक मेरे कानों में आवाज गूंजी —

“नीचे मत देख…”

लेकिन इंसानी दिमाग वही करता है जिससे मना किया जाए।

मैंने नीचे देखा।

सीढ़ियों पर…

दर्जनों लोग बैठे थे।

सफेद कपड़ों में।

सबकी आंखें सफेद।

सब मुस्कुरा रहे थे।

और उनमें सबसे आगे…

वो किन्नर बैठी थी।


मैं और समीर चीखते हुए नीचे भागे।

लेकिन सीढ़ियां खत्म ही नहीं हो रही थीं।

हम भागते रहे…

भागते रहे…

लेकिन मंदिर वहीं ऊपर दिख रहा था।

जैसे हम एक ही जगह फंसे हों।

समीर रोने लगा।

“हम मर जाएंगे…”

तभी पीछे से चूड़ियों की आवाज आई।

छन…

छन…

छन…

किन्नर धीरे-धीरे हमारी तरफ आ रही थी।

लेकिन इस बार उसका चेहरा बदल चुका था।

त्वचा सड़ी हुई।

आंखों से काला पानी बह रहा था।

“तुम लोगों ने उसे जगा दिया…”

उसने कहा।

मैं चिल्लाया —

“कौन है वो?!”

उसने कांपती उंगली मंदिर की तरफ उठाई।

“जिसने मुझे मारा था…”

अचानक मेरे दिमाग में सब connect हुआ।

“तुम… चंदा हो?”

उसकी आंखों में आंसू आ गए।

पहली बार वो इंसान लगी।

“उन्होंने मुझे मंदिर में बुलाया था… कहा था पूजा होगी… फिर…”

उसकी आवाज टूट गई।

“उन्होंने मुझे जिंदा नीचे फेंक दिया।”

बारिश और तेज हो गई।

“लेकिन वो अभी भी यहीं है।”

“कौन?”

चंदा ने ऊपर देखा।

“पंडित।”


मेरा दिल रुक गया।

“लेकिन गांव वाले तो कहते हैं पंडित दस साल पहले मर गया।”

चंदा हंसी।

धीमी… टूटी हुई हंसी।

“वो कभी इंसान था ही नहीं।”

तभी मंदिर के ऊपर से भारी कदमों की आवाज आई।

धम…

धम…

धम…

पूरी सीढ़ियां कांपने लगीं।

समीर चीखा —

“भाग!”

हम नीचे दौड़े।

इस बार सच में सीढ़ियां खत्म हुईं।

हम किसी तरह गाड़ी तक पहुंचे।

समीर ने ignition घुमाया।

गाड़ी start नहीं हुई।

पीछे से कदमों की आवाज करीब आ रही थी।

धम…

धम…

धम…

मैंने rear-view mirror में देखा।

और मेरी चीख निकल गई।

वो चीज सड़क पर खड़ी थी।

सात फीट लंबी।

काले कपड़े।

मुंह पूरा फटा हुआ।

और उसके कंधे पर…

चंदा की कटी हुई लाश लटकी थी।

लेकिन चंदा तो अभी हमारे सामने थी।

फिर…

मेरे बगल में बैठा समीर अचानक धीरे से बोला —

“भाई…”

मैंने उसकी तरफ देखा।

उसकी आंखें पूरी सफेद हो चुकी थीं।

“नीचे मत देख…”


अगले दिन मेरी आंख hospital में खुली।

पुलिस वाले पास खड़े थे।

उन्होंने बताया हमारी गाड़ी पहाड़ी से नीचे गिरी मिली।

समीर की मौत हो चुकी थी।

“और दूसरा?” मैंने पूछा।

“कौन दूसरा?”

“किन्नर…”

पुलिस वाला चुप हो गया।

फिर उसने धीरे से कहा —

“उस पहाड़ी पर पिछले तीस साल में कोई किन्नर नहीं मरा।”

मेरी सांस रुक गई।

“लेकिन… चंदा…”

उसने मेरी तरफ अजीब नजरों से देखा।

“चंदा नाम का पंडित था।”

मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई।

“क्या?”

“लोग कहते हैं वो तंत्र-मंत्र करता था। फिर एक रात गांव वालों ने उसे मंदिर में जिंदा जला दिया।”

कमरे की हवा अचानक ठंडी हो गई।

“क्योंकि वो बच्चों को मारता था।”

मेरे हाथ कांपने लगे।

“लेकिन video… सफेद साड़ी वाली…”

पुलिस वाला चुप रहा।

फिर उसने अपना phone निकाला।

एक पुरानी फोटो खोली।

और मेरी रूह जम गई।

Photo में मंदिर की सीढ़ियों पर वही किन्नर बैठी थी।

लेकिन नीचे लिखा था —

“पंडित चंदानाथ — 1987”

मैं hysterically सिर हिलाने लगा।

“नहीं… नहीं… वो औरत थी…”

तभी hospital के बाहर चूड़ियों की आवाज आई।

छन…

छन…

छन…

मैं जम गया।

धीरे-धीरे दरवाजे के बाहर एक परछाई दिखाई दी।

सफेद साड़ी।

फिर वही आवाज फुसफुसाई —

“तुमने नीचे देख लिया…”

उस रात hospital के CCTV में मैं खुद अपने कमरे से बाहर जाता दिखा।

धीरे-धीरे।

जैसे नींद में चल रहा हूं।

फिर camera के सामने रुककर मैंने ऊपर देखा।

मेरी आंखें पूरी सफेद थीं।

और उसके बाद…

मैं कभी नहीं मिला।

लेकिन आज भी बिशनखेड़ा के उस मंदिर में रात 11:47 बजे अगर कोई जाता है…

तो सीढ़ियों पर सफेद साड़ी पहने एक किन्नर बैठी मिलती है।

वो पहले मुस्कुराती है।

फिर सिर्फ एक बात कहती है —

“नीचे मत देख…”

और जिसने भी उसकी बात नहीं मानी…

वो कभी वापस नहीं आया।

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