जिस शादी को रोकने कोई जिंदा इंसान नहीं आया था | Monsoon Wedding Horror Story

शादी वाले घरों में एक अजीब किस्म की ऊर्जा होती है।

कुछ लोग उसे खुशी कहते हैं, कुछ उत्साह।

लेकिन इवेंट मैनेजर नील मल्होत्रा उसे अलग नाम देता था।

“अराजकता।”

Monsoon Wedding Horror Story

पिछले आठ सालों में उसने सैकड़ों शादियाँ संभाली थीं। पाँच सितारा होटल, बीच रिसॉर्ट, डेस्टिनेशन वेडिंग, इंडस्ट्रियल थीम, रॉयल थीम—सब कुछ।

उसने दूल्हों को मंडप से भागते देखा था। Monsoon Wedding Horror Story

दुल्हनों को मेकअप रूम में बेहोश होते देखा था।

परिवारों को करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद प्लेटों के रंग पर लड़ते देखा था।

इसलिए जब जुलाई के आखिरी सप्ताह में उसे मुंबई के पास एक विशाल कन्वेंशन होटल में होने वाली तीन दिन की मॉनसून वेडिंग का कॉन्ट्रैक्ट मिला, तो उसे लगा यह भी वैसी ही एक शादी होगी।

बस थोड़ी बड़ी।

थोड़ी महंगी।

और थोड़ी ज्यादा पागल।

लेकिन पहली ही रात उसे समझ आ गया कि इस शादी में कुछ ऐसा था जिसे कोई भी वेडिंग प्लानर अपने अनुभवों में शामिल नहीं करता।

शादी का आयोजन एक बड़े बिजनेस परिवार ने किया था।

दूल्हा था आरव सूरी।

दुल्हन थी अनन्या मेहता।

दोनों परिवार मीडिया से दूर रहना चाहते थे इसलिए होटल का पूरा पश्चिमी विंग बुक कर लिया गया था।

करीब दो सौ मेहमान।

तीन दिन का कार्यक्रम।

संगीत, हल्दी, मेहंदी, शादी और रिसेप्शन।

सब कुछ बेहद व्यवस्थित लग रहा था।

नील सुबह से भागदौड़ कर रहा था।

रात करीब साढ़े ग्यारह बजे जब अधिकतर मेहमान अपने कमरों में लौट चुके थे, वह होटल की चौथी मंजिल पर बने कंट्रोल रूम में बैठा अगले दिन की तैयारी चेक कर रहा था।

तभी इंटरकॉम बजा।

रिसेप्शन से कॉल थी।

“सर, एक छोटी समस्या है।”

“क्या हुआ?”

“कमरा 427 के गेस्ट कह रहे हैं कि उनके कमरे में कोई बार-बार आता है।”

नील ने थककर आँखें बंद कर लीं।

“शराब पी रखी होगी।”

“नहीं सर। वे काफी परेशान लग रहे हैं।”

नील नीचे गया।

कमरा 427 में दूल्हे की बुआ और उनके पति रुके थे।

दरवाजा खुलते ही महिला बोलीं, “आप ही इवेंट वाले हैं?”

“जी।”

“यहाँ कोई हमारे कमरे में घुस रहा है।”

नील ने कमरे का निरीक्षण किया।

सब सामान्य था।

“कुछ चोरी हुआ?”

“नहीं।”

“तो फिर?”

महिला ने धीमे स्वर में कहा, “हर बार जब हम बाहर जाते हैं और वापस आते हैं, कमरे में एक अतिरिक्त शादी का कार्ड रखा मिलता है।”

नील ने सोचा शायद किसी बच्चे की शरारत होगी।

टेबल पर वास्तव में एक निमंत्रण कार्ड रखा था।

वही कार्ड जो शादी के लिए छपवाए गए थे।

लेकिन उस पर कुछ अजीब था।

सुनहरे अक्षरों में लिखा था—

आरव सूरी एवं अनन्या मेहता

जबकि बाकी कार्डों पर लिखा था—

अनन्या मेहता एवं आरव सूरी

Monsoon Wedding Horror Story

छोटी सी बात थी।

लेकिन कार्ड बिल्कुल नया छपा हुआ लग रहा था।

“शायद प्रिंटिंग की गलती होगी,” नील ने कहा।

“हर बार अलग कार्ड आता है?” महिला ने पूछा।

“हाँ।”

नील कार्ड अपने साथ ले गया।

अगले दिन वह बात लगभग भूल चुका था।

सुबह मेहंदी का कार्यक्रम शुरू हुआ।

हॉल रंगों, संगीत और लोगों से भरा था।

तभी दुल्हन की छोटी बहन रिया घबराई हुई उसके पास आई।

“नील, तुम्हें कुछ दिखाना है।”

वह उसे मेकअप रूम में ले गई।

वहाँ एक फोटो फ्रेम रखा था।

उसमें अनन्या और आरव की सगाई की तस्वीर लगी थी।

रिया ने कहा, “यह फोटो कल रात तक अलग थी।”

“कैसे?”

“इसमें पीछे खड़ी औरत नहीं थी।”

नील ने गौर से देखा।

फोटो में दोनों मुस्कुरा रहे थे।

उनके पीछे भीड़ थी।

और भीड़ के बीच एक महिला खड़ी थी।

सफेद साड़ी।

भीगे हुए बाल।

चेहरा धुंधला।

इतना धुंधला कि कैमरा उसे ठीक से पकड़ नहीं पाया था।

“शायद पहले ध्यान नहीं दिया होगा।”

“मैंने यह फोटो खुद एडिट की थी,” रिया बोली। “यह वहाँ नहीं थी।”

नील ने कोई जवाब नहीं दिया।

क्योंकि वह जानता था कि डिजिटल फोटो अपने आप नहीं बदलती।

लेकिन वह यह भी जानता था कि शादी के दौरान लोग नींद कम लेते हैं और कल्पनाएँ ज्यादा करने लगते हैं।

उसने बात टाल दी।

मगर उसी शाम पहली बार उसे बेचैनी महसूस हुई।

संगीत कार्यक्रम चल रहा था।

करीब दो सौ लोग मौजूद थे।

डीजे जोर-जोर से संगीत बजा रहा था।

अचानक मुख्य स्क्रीन पर स्लाइडशो शुरू हो गया।

परिवार की पुरानी तस्वीरें दिखाई जा रही थीं।

बचपन।

स्कूल।

कॉलेज।

सगाई।

सब सामान्य था।

फिर अचानक एक तस्वीर स्क्रीन पर आई।

हॉल शांत हो गया।

तस्वीर में शादी का मंडप दिखाई दे रहा था।

लेकिन वह तस्वीर इस शादी की नहीं हो सकती थी।

क्योंकि मंडप अभी बना ही नहीं था।

और तस्वीर के नीचे तारीख लिखी थी—

14 अगस्त 2004

हॉल में फुसफुसाहट शुरू हो गई।

आरव के पिता का चेहरा सफेद पड़ गया।

उन्होंने तुरंत स्क्रीन बंद करवायी।

कुछ सेकंड बाद कार्यक्रम फिर सामान्य हो गया।

लेकिन नील ने उनकी आँखों में जो देखा, वह सामान्य नहीं था।

वह डर था।

खालिस डर।

रात दो बजे तक कार्यक्रम खत्म हुआ।

जब अधिकतर लोग जा चुके थे, नील होटल के पार्किंग क्षेत्र से गुजर रहा था।

तभी उसने देखा कि आरव के पिता अकेले खड़े किसी पुराने फोटो को देख रहे हैं।

वे इतने तनाव में थे कि उन्हें नील के आने का एहसास तक नहीं हुआ।

नील ने अनजाने में फोटो की झलक देख ली।

उस तस्वीर में शादी का वही मंडप था।

और मंडप के बीच खड़ी वही सफेद साड़ी वाली महिला।

इस बार उसका चेहरा साफ दिखाई दे रहा था।

वह मुस्कुरा नहीं रही थी।

वह सीधे कैमरे की तरफ देख रही थी।

और तस्वीर के नीचे एक नाम लिखा था—

“सिया सूरी”

नील ने पूछा, “सर, सब ठीक है?”

वृद्ध व्यक्ति जैसे चौंक गए।

उन्होंने फोटो तुरंत जेब में रख लिया।

“हाँ।”

“वह तस्वीर कौन थी?”

कुछ क्षण तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

फिर बोले—

“एक ऐसी शादी… जो कभी पूरी नहीं हुई।”

और बिना कुछ समझाए वहाँ से चले गए।

उस रात पहली बार नील को नींद नहीं आई।

क्योंकि अब मामला अजीब घटनाओं से आगे बढ़ चुका था।

किसी ने पुराने निमंत्रण छापे थे।

किसी ने डिजिटल तस्वीरें बदली थीं।

किसी ने दो दशक पुरानी तारीख वाला फोटो संगीत समारोह में चला दिया था।

और सबसे बड़ी बात—

परिवार का कोई सदस्य सच छिपा रहा था।

लेकिन असली डर अगले दिन शुरू हुआ।

क्योंकि शादी की सुबह होटल के हर कमरे के बाहर एक अतिरिक्त नेमप्लेट लगी मिली।

और उन सभी पर सिर्फ एक ही नाम लिखा था—

“सिया”

सुबह होटल का माहौल बदला हुआ था।

रंग-बिरंगी सजावट वही थी, फूल वही थे, स्टाफ वही था, मेहमान वही थे, लेकिन सबके चेहरों पर एक ऐसी सावधानी आ गई थी जैसे हर कोई किसी अदृश्य गलती से बचने की कोशिश कर रहा हो।

नील ने सबसे पहले नेमप्लेट हटवायीं।

हाउसकीपिंग स्टाफ ने साफ कहा कि उन्होंने रात में ऐसा कुछ नहीं लगाया था। सिक्योरिटी ने भी मना कर दिया। होटल मैनेजर ने फुटेज निकालने का वादा किया, लेकिन दस मिनट बाद जब नील कंट्रोल रूम पहुँचा तो स्क्रीन पर एक और समस्या खड़ी थी।

रात 3:17 से 3:29 तक पूरे पश्चिमी विंग का CCTV ब्लैंक था।

काला नहीं।

ब्लैंक।

जैसे कैमरे चल रहे हों, लेकिन जगह मौजूद ही न हो।

“सर, पावर कट नहीं था,” सिक्योरिटी सुपरवाइजर बोला। “बाकी होटल की फुटेज ठीक है। सिर्फ शादी वाला विंग गायब है।”

नील ने पूछा, “गायब मतलब?”

सुपरवाइजर ने रिकॉर्डिंग पीछे की।

3:16 तक कॉरिडोर दिख रहा था।

3:17 पर फ्रेम सफेद हो गया।

फिर 3:29 पर कॉरिडोर वापस आ गया।

और तभी नील ने देखा—

हर दरवाजे पर नेमप्लेट लग चुकी थी।

किसी आदमी को आते-जाते नहीं देखा गया।

किसी हाथ को नहीं।

किसी परछाईं को भी नहीं।

दोपहर की हल्दी शुरू होने वाली थी। नील ने खुद को समझाया कि अभी सच जानने से ज्यादा जरूरी शादी को टूटने से बचाना है। लेकिन जैसे ही वह हॉल में पहुँचा, अनन्या ने उसे इशारे से पास बुलाया।

उसके हाथों में हल्दी लगी थी, चेहरे पर मुस्कान थी, पर आँखें डरी हुई थीं।

“नील, क्या मेरी शादी पहले भी हो चुकी है?”

नील कुछ सेकंड उसे देखता रहा।

“क्या मतलब?”

अनन्या ने धीरे से कहा, “आज सुबह मेरे कमरे में एक ज्वेलरी बॉक्स मिला। उसमें मंगलसूत्र था। साथ में एक कागज था—‘दूसरी बार वही गलती मत करना।’”

नील के पास कोई तैयार जवाब नहीं था।

तभी पीछे से आरव आया।

“किसने दिया यह?”

अनन्या ने बॉक्स उसे दिखाया।

आरव ने मंगलसूत्र देखते ही हाथ पीछे खींच लिया।

उसका चेहरा वही हो गया जो रात को उसके पिता का था।

नील ने पकड़ लिया—आरव इस चीज को पहचानता था।

“आरव,” नील बोला, “अगर आप कुछ जानते हैं तो अभी बताइए।”

आरव ने आसपास देखा। फिर बहुत धीमे स्वर में कहा, “यह मेरी माँ का था।”

अनन्या सन्न रह गई।

“तुमने कहा था तुम्हारी माँ की death कार एक्सीडेंट में हुई थी।”

आरव चुप रहा।

“वह मर चुकी हैं न?” अनन्या की आवाज काँप गई।

आरव ने जवाब नहीं दिया।

उसने सिर्फ नील से कहा, “पापा से बात करनी पड़ेगी।”

लेकिन आरव के पिता गायब थे।

कमरा खाली।

फोन बंद।

ड्राइवर को पता नहीं।

रिसेप्शन को पता नहीं।

करीब चालीस मिनट बाद वे होटल के पुराने सर्विस कॉरिडोर में मिले, जहाँ शादी के किसी मेहमान को जाना ही नहीं चाहिए था।

वे एक बंद दरवाजे के सामने खड़े थे।

दरवाजे पर जंग लगा बोर्ड था—

ARCHIVE STORAGE

नील, आरव और अनन्या तीनों वहाँ पहुँचे।

आरव के पिता ने उन्हें देखकर कहा, “मैं नहीं चाहता था कि यह दिन ऐसे खत्म हो।”

आरव गुस्से में बोला, “माँ के बारे में आपने झूठ क्यों बोला?”

वृद्ध व्यक्ति ने पहली बार बेटे की आँखों में सीधे देखा।

“क्योंकि सच से तुम कभी शादी नहीं कर पाते।”

दरवाजा खोला गया।

अंदर होटल के पुराने रिकॉर्ड, एल्बम, रजिस्टर और फोटोग्राफी टेप रखे थे। धूल बहुत थी, पर एक कोना साफ था, जैसे कोई हाल में वहाँ आया हो।

एक फाइल मेज पर खुली पड़ी थी।

उस पर लिखा था—

SURI-MEHTA WEDDING, 2004

अनन्या ने फाइल उठाई।

पहले पन्ने पर वही नाम थे—

सिया मेहता एवं विक्रम सूरी

नील ने धीमे से पढ़ा, “मेहता?”

अनन्या ने आरव की तरफ देखा।

“सिया… मेरी कौन थी?”

आरव के पिता ने कुर्सी पकड़ ली।

“तुम्हारी मौसी।”

कमरे में कुछ पल कोई आवाज नहीं हुई।

फिर उन्होंने पूरी बात बतानी शुरू की।

बीस साल पहले इसी होटल में सिया मेहता की शादी विक्रम सूरी से होने वाली थी। विक्रम, यानी आरव के पिता का छोटा भाई। शादी बहुत बड़ी थी। वही परिवार, वही बिजनेस रिश्ते, वही दिखावा। लेकिन शादी की रात सिया मंडप तक नहीं पहुँची। परिवार ने कहा कि वह भाग गई। मीडिया से बचने के लिए मामला दबा दिया गया। कुछ दिन बाद खबर फैलाई गई कि सिया विदेश चली गई।

“और सच?” नील ने पूछा।

वृद्ध व्यक्ति ने आँखें नीचे कर लीं।

“सच यह था कि सिया को आखिरी बार इसी सर्विस कॉरिडोर में देखा गया था। उसके बाद वह कभी नहीं मिली।”

अनन्या की आवाज टूट गई।

“मेरे परिवार ने भी झूठ बोला?”

“दोनों परिवारों ने।”

आरव बोला, “लेकिन माँ का मंगलसूत्र?”

पिता ने कहा, “तुम्हारी माँ… सिया नहीं थी।”

यह सुनकर आरव पीछे हट गया।

“क्या?”

“तुम्हारी माँ का नाम नेहा था। शादी के बाद उसने सिया का मंगलसूत्र रखा था। उसे शक था कि सिया भागी नहीं थी। वह सवाल पूछती रही। फिर एक रात वह भी…” उनका गला भर आया, “कार एक्सीडेंट नहीं हुआ था। उसने होटल के पुराने रिकॉर्ड निकालने शुरू किए थे। उसके बाद उसे चुप करा दिया गया।”

“किसने?” आरव ने पूछा।

वृद्ध व्यक्ति ने जवाब नहीं दिया।

क्योंकि उसी क्षण archive room की पुरानी ट्यूबलाइट दो बार झपकी।

और मेज पर पड़ी फाइल के अंदर से एक फोटो नीचे फिसल गया।

फोटो में 2004 की शादी का मंडप था।

सिया दुल्हन बनी बैठी थी।

उसके पीछे पाँच लोग खड़े थे।

आरव के पिता।

अनन्या के पिता।

होटल का पुराना मालिक।

एक पंडित।

और एक आदमी जिसे नील ने तुरंत पहचान लिया—

वर्तमान होटल मैनेजर।

वह तब जवान था।

लेकिन वही था।

नील ने फोटो जेब में रख लिया।

अब यह भूत की कहानी नहीं लग रही थी।

यह छिपे हुए अपराध की कहानी लग रही थी।

पर डर वहीं से असली शुरू हुआ।

क्योंकि उस शाम शादी रोक दी गई।

औपचारिक कारण बताया गया—दुल्हन की तबीयत।

लेकिन होटल के अंदर तनाव फैल चुका था। दोनों परिवारों ने मेहमानों को कमरों में रहने को कहा। नील को पेमेंट का आधा हिस्सा देकर कहा गया कि वह स्टाफ लेकर निकल जाए।

लेकिन नील नहीं गया।

क्योंकि वह जानता था कि अगर वह अभी चला गया, तो सुबह तक इस पूरे मामले को फिर से दबा दिया जाएगा।

रात करीब ग्यारह बजे वह कंट्रोल रूम में बैठा फुटेज देख रहा था।

तभी उसने स्क्रीन पर अनन्या को देखा।

वह अकेली सर्विस कॉरिडोर की तरफ जा रही थी।

नील ने तुरंत फोन किया।

उसने फोन नहीं उठाया।

वह दौड़ा।

कॉरिडोर में पहुँचते ही उसे हल्दी, इत्र और गीले कपड़े जैसी मिली-जुली गंध आई। सामने archive room का दरवाजा खुला था।

अंदर अनन्या खड़ी थी।

उसके हाथ में एक पुराना ऑडियो टेप था।

“यह मुझे मेरे कमरे में मिला,” उसने कहा।

टेप पर लिखा था—

SIA — FINAL RECORDING

नील ने होटल के पुराने रिकॉर्डर में टेप डाला।

पहले सिर्फ खरखराहट आई।

फिर एक महिला की आवाज सुनाई दी।

शांत।

बहुत शांत।

“अगर यह रिकॉर्डिंग किसी को मिले, तो समझ लेना मैंने भागने की कोशिश नहीं की थी। मुझे शादी नहीं करनी थी, लेकिन मैं डर कर नहीं भागी। मैंने एक सौदा सुन लिया था। सूरी और मेहता परिवार इस शादी को बिजनेस merger बनाने वाले थे। मेरे नाम पर जो shares थे, वे शादी के बाद transfer होने थे। मैंने मना किया। उन्होंने कहा कि मेरी जगह कोई और sign कर देगा। मैंने कहा मैं police जाऊँगी…”

आवाज कुछ सेकंड रुक गई।

फिर फुसफुसाहट आई।

“वे दरवाजे के बाहर हैं।”

टेप में कदमों की आवाज आई।

किसी पुरुष की आवाज—

“सिया, दरवाजा खोलो। बात करते हैं।”

फिर रिकॉर्डिंग बंद हो गई।

अनन्या रो नहीं रही थी।

उसका चेहरा पत्थर जैसा हो गया था।

“मेरी मौसी को मारा गया था,” उसने कहा।

नील ने धीमे से कहा, “और किसी ने चाहा कि यह सच तुम्हारी शादी से पहले सामने आए।”

तभी पीछे से आवाज आई।

“किसी ने नहीं।”

दोनों मुड़े।

दरवाजे पर होटल मैनेजर खड़ा था।

उसके पीछे दो सिक्योरिटी गार्ड थे।

उसके चेहरे पर डर नहीं था। थकान थी।

“बीस साल लग गए,” उसने कहा। “लेकिन आखिर कोई सुनने को तैयार हुआ।”

नील ने पूछा, “तुमने यह सब किया?”

मैनेजर ने सिर हिलाया।

“नेमप्लेट, फोटो, कार्ड, स्क्रीन—सब मैंने नहीं किया। कुछ मैंने किया। कुछ सिया ने अपने समय में पहले से छिपा रखा था। वह बहुत समझदार थी। उसने सबूत अलग-अलग जगहों पर रखे थे। समस्या यह थी कि कोई उन्हें ढूँढना नहीं चाहता था।”

“और CCTV?” नील ने पूछा।

मैनेजर चुप रहा।

“वह भी तुमने किया?”

“नहीं।”

कमरा फिर शांत हो गया।

उसी समय कॉरिडोर से धीमी आवाज आई।

जैसे बहुत सारे गीले पाँव मार्बल पर चल रहे हों।

सिक्योरिटी गार्ड ने टॉर्च घुमाई।

कॉरिडोर खाली था।

लेकिन फर्श पर पानी के निशान बनते जा रहे थे।

एक-एक कदम।

सीधे archive room की तरफ।

होटल मैनेजर की साँस अटक गई।

वह धीरे से बोला, “आज पहली बार… वह अंदर आ रही है।”

नील ने पीछे हटना चाहा, पर अनन्या आगे बढ़ी।

“सिया मौसी?”

जवाब नहीं आया।

बस कमरे की मेज पर रखी फाइल अपने आप खुल गई।

आखिरी पन्ने पर एक नाम लिखा था।

विक्रम सूरी।

आरव का चाचा।

जो आधिकारिक रिकॉर्ड में विदेश में रहता था।

लेकिन उसी क्षण होटल के बाहर पुलिस सायरन सुनाई दिए।

नील ने चौंककर अनन्या को देखा।

“तुमने पुलिस बुलायी?”

अनन्या ने सिर हिलाया।

“नहीं।”

फिर आरव अंदर आया।

उसके हाथ में फोन था।

“मैंने बुलायी। और विक्रम सूरी भी यहीं है।”

सब लोग चुप हो गए।

आरव ने बताया कि उसके पिता ने आखिरकार टूटकर सच बोल दिया था। विक्रम सूरी कभी विदेश नहीं गया था। वह नाम बदलकर परिवार के दूसरे बिजनेस में काम कर रहा था। शादी में वह मेहमान बनकर आया था। यही देखने कि पुरानी बात कहीं खुल न जाए।

पुलिस ने उसे होटल के basement lounge से पकड़ा।

लेकिन जब उसे archive room में लाया गया, तो वह अचानक हँसने लगा।

“तुम सब पागल हो। बीस साल पुरानी बात साबित कैसे करोगे? लाश कहाँ है?”

यह सवाल कमरे में हथौड़े की तरह गिरा।

सच था।

सिया गायब थी।

बिना शरीर, बिना अंतिम प्रमाण, मामला कमजोर था।

विक्रम ने अनन्या की तरफ देखकर कहा, “तुम्हारी मौसी भाग गई थी। तुम्हारे परिवार ने भी यही माना था।”

तभी फर्श पर पानी के निशान फिर शुरू हुए।

इस बार वे विक्रम के पैरों तक आकर रुके।

विक्रम की हँसी बंद हो गई।

नील को लगा कमरे का तापमान अचानक गिरा नहीं, बल्कि भारी हो गया है, जैसे हवा किसी अदृश्य वजन से भर गई हो।

मेज पर रखा पुराना होटल नक्शा अपने आप खिसक गया।

उस पर एक जगह लाल दाग बना था।

LAUNDRY CHUTE — SEALED 2005

होटल मैनेजर काँप गया।

“यह हिस्सा renovation में बंद कर दिया गया था।”

पुलिस ने तुरंत नीचे जाकर दीवार तुड़वायी।

करीब पैंतालीस मिनट लगे।

कोई चीख नहीं थी।

कोई नाटकीय दृश्य नहीं।

बस मशीन की आवाज।

टूटती ईंटें।

और फिर अचानक सब शांत।

दीवार के पीछे एक छोटा बंद हिस्सा था।

उसमें एक पुराना लोहे का ट्रंक मिला।

ट्रंक पर मेहता परिवार का initials था।

जब उसे खोला गया, तो अंदर हड्डियाँ नहीं थीं।

अंदर दुल्हन का लाल जोड़ा था।

सड़ी हुई हालत में।

कुछ गहने।

और एक छोटा प्लास्टिक pouch।

उसमें बालों का गुच्छा, टूटी चूड़ियाँ और खून के पुराने धब्बों वाला कपड़ा था।

फॉरेंसिक के लिए इतना काफी था।

विक्रम वहीं बैठ गया।

उसने कोई स्वीकारोक्ति नहीं दी।

लेकिन उसके चेहरे ने दे दी।

शादी उसी रात खत्म हो गई।

मेहमानों को सुबह भेज दिया गया।

आरव और अनन्या की शादी नहीं हुई।

पर कहानी वहाँ खत्म नहीं हुई।

तीन महीने बाद रिपोर्ट आई।

कपड़े पर मिला DNA सिया मेहता से मैच हुआ, क्योंकि अनन्या की माँ ने family sample दिया था।

विक्रम गिरफ्तार हुआ।

दोनों परिवारों के बुजुर्गों से पूछताछ हुई।

होटल मैनेजर ने गवाही दी।

आरव के पिता ने भी।

लेकिन सबसे अजीब बात यह थी कि जाँच में पता चला—सिया की अंतिम रिकॉर्डिंग किसी टेप में नहीं थी।

टेप खाली था।

रिकॉर्डर में कोई आवाज सेव ही नहीं हुई थी।

नील ने जब यह सुना तो कई मिनट तक चुप रहा।

उसे लगा शायद उस रात सबने सामूहिक तनाव में कुछ सुना होगा।

लेकिन फिर अनन्या ने उसे एक लिफाफा भेजा।

अंदर वही शादी का कार्ड था।

सिया मेहता एवं विक्रम सूरी

पीछे हाथ से लिखा था—

“इस बार शादी नहीं, सच पूरा हुआ।”

नील ने कार्ड बहुत देर तक देखा।

फिर उसने उसे किसी मंदिर, नदी या आग में नहीं फेंका।

उसने उसे एक पारदर्शी फोल्डर में रखा।

अपने ऑफिस की सबसे ऊपरी दराज में।

क्योंकि कुछ चीजें डराने के लिए नहीं आतीं।

कुछ चीजें याद दिलाने आती हैं कि इंसान जब सच को दीवार में बंद कर देता है, तो डर भूत से नहीं, उसी दीवार से पैदा होता है।

कुछ महीनों बाद नील ने शादी के इवेंट लेना कम कर दिए।

वह अब भी इवेंट मैनेजर था, लेकिन हर बड़े फंक्शन से पहले वह होटल का पुराना रिकॉर्ड जरूर माँगता।

लोग हँसते थे।

उसे अजीब समझते थे।

मगर नील को फर्क नहीं पड़ता था।

क्योंकि वह जान चुका था कि हर सजावट सिर्फ खूबसूरती नहीं छिपाती।

कभी-कभी फूलों के पीछे गवाही छिपी होती है।

लाइट्स के पीछे अपराध।

और शादी के कार्ड पर छपे नामों के बीच किसी ऐसे इंसान की आवाज—

जिसे सबने मिटा दिया था, लेकिन जिसने खुद को मिटने नहीं दिया।

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