Old House Totka Horror Story, हिंदी डरावनी कहानी

बरसात का मौसम खत्म हुए मुश्किल से दो हफ्ते हुए थे। गांव की कच्ची गलियों में अभी भी जगह-जगह नमी बची हुई थी। पुराने मकानों की दीवारों से सीलन की गंध आती रहती थी और शाम ढलते ही पूरा इलाका असामान्य रूप से शांत हो जाता था। गांव के बीचोंबीच एक पुराना दो मंजिला घर था, जिसके मालिक रघुवीर सिंह पिछले कई वर्षों से शहर में रहते थे। घर बंद पड़ा रहता था, केवल महीने में एक-दो बार उनका भतीजा अर्जुन आकर सफाई कर जाता था। Old House Totka Horror Story

उस दिन भी अर्जुन सुबह-सुबह चाबी लेकर वहां पहुंचा। दरवाजा खोलते ही अंदर से ठंडी हवा का झोंका निकला। उसने सोचा कि कई दिनों से बंद रहने के कारण ऐसा हुआ होगा। उसने झाड़ू उठाई और सफाई शुरू कर दी।

Old House Totka Horror Story

करीब एक घंटे बाद जब वह आंगन में पहुंचा तो उसकी नजर तुलसी के चौरे के पास पड़ी एक अजीब चीज पर गई।

एक मिट्टी का छोटा घड़ा रखा था।

घड़े के ऊपर लाल कपड़ा बंधा था। उसके चारों ओर हल्दी, सिंदूर और काले तिल बिखरे हुए थे। पास में सात नींबू पड़े थे जिनमें लोहे की कीलें गड़ी हुई थीं। एक पुरानी रस्सी में बंधे काले धागे हवा के बिना भी धीरे-धीरे हिल रहे थे।

अर्जुन कुछ देर उसे देखता रहा।

वह जानता था कि गांवों में लोग ऐसी चीजों को टोटका कहते हैं।

उसने आसपास देखा। कोई नहीं था।

उसने सोचा शायद किसी ने डराने के लिए रख दिया होगा।

उसने लकड़ी उठाई और घड़े को हटाने ही वाला था कि पीछे से आवाज आई।

“हाथ मत लगाना।”

वह तुरंत पलटा।

दरवाजे पर गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति रामदीन खड़े थे।

उनकी आंखें उसी घड़े पर टिकी थीं।

उन्होंने धीरे से कहा, “जिसने भी रखा है… वह चाहता यही होगा कि कोई इसे छुए।”

अर्जुन हंस पड़ा।

“काका, आज के समय में कौन इन बातों पर विश्वास करता है?”

रामदीन ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस इतना बोले, “विश्वास मत कर… लेकिन इसे मत छू।”

इतना कहकर वह चले गए।

अर्जुन ने सिर हिलाया और लकड़ी से घड़े को उठाकर बाहर खेत में फेंक दिया।

लाल कपड़ा खुल गया।

अंदर से केवल सूखी मिट्टी निकली।

वह मुस्कुराया।

“इतना डर इसी बात का था?”

उसने पूरा घर साफ किया और शाम होते-होते वापस अपने घर चला गया।

रात करीब ग्यारह बजे उसकी नींद खुली।

उसे लगा जैसे कोई उसके आंगन में धीरे-धीरे चल रहा हो।

टक…

टक…

टक…

जैसे कोई नंगे पैर भीगी जमीन पर चल रहा हो।

उसने खिड़की से बाहर देखा।

कोई नहीं था।

सिर्फ हवा चल रही थी।

वह वापस लेट गया।

लेकिन आवाज बंद नहीं हुई।

ऐसा लगा जैसे कदम धीरे-धीरे उसके कमरे की ओर बढ़ रहे हों।

वह फिर उठा।

इस बार दरवाजा खोला।

पूरा आंगन खाली था।

सुबह उसने यह बात अपनी मां को बताई।

मां ने पूछा, “कल उस पुराने घर में कुछ छुआ था क्या?”

अर्जुन ने हंसते हुए सारी बात बता दी।

मां का चेहरा उतर गया।

उन्होंने तुरंत कहा, “आज वहां मत जाना।”

लेकिन अर्जुन को काम पूरा करना था।

वह फिर उसी घर पहुंच गया।

घर वैसा ही था।

सब सामान्य।

Old House Totka Horror Story

लेकिन आंगन में पहुंचते ही उसके कदम रुक गए।

जहां से उसने घड़ा हटाया था…

वहीं जमीन पर गोल निशान बना हुआ था।

जैसे कोई भारी चीज पूरी रात वहीं रखी रही हो।

उसने चारों ओर देखा।

घड़ा वहां नहीं था।

उसने खुद ही तो उसे खेत में फेंका था।

वह बाहर गया।

घंटे भर खोजता रहा।

कुछ नहीं मिला।

उसने सोचा कोई उठा ले गया होगा।

दोपहर तक काम खत्म हुआ।

जब वह जाने लगा तो उसकी नजर दरवाजे के पास गई।

वहीं…

ठीक दहलीज के किनारे…

वही मिट्टी का घड़ा रखा था।

लाल कपड़ा फिर से कसकर बंधा हुआ।

नींबू फिर से व्यवस्थित रखे हुए।

जैसे किसी ने अभी-अभी सजाया हो।

इस बार अर्जुन का चेहरा गंभीर हो गया।

उसने आसपास के खेतों में देखा।

कोई नहीं।

गांव की गली भी खाली।

उसने घड़े को हाथ नहीं लगाया।

बस घर बंद किया और वापस लौट आया।

रात फिर वही कदमों की आवाज शुरू हुई।

लेकिन इस बार आवाज उसके आंगन तक नहीं रुकी।

धीरे-धीरे…

सीढ़ियां चढ़ने लगी।

टक…

टक…

टक…

हर कदम साफ सुनाई दे रहा था।

उसका कमरा पहली मंजिल पर था।

आवाज दरवाजे तक आई।

फिर अचानक बंद हो गई।

पूरा घर शांत।

कुछ सेकंड बाद…

दरवाजे के नीचे से किसी की परछाईं गुजरी।

जैसे कोई बाहर खड़ा हो।

अर्जुन ने हिम्मत करके दरवाजा खोला।

गलियारा खाली था।

लेकिन फर्श पर गीली मिट्टी के छोटे-छोटे पैरों के निशान बने हुए थे।

वे निशान सीढ़ियों की तरफ नहीं…

बल्कि उसकी खिड़की की तरफ जा रहे थे।

खिड़की बंद थी।

अंदर से कुंडी लगी हुई।

उसकी रीढ़ में ठंड उतर गई।

अगली सुबह वह सीधे रामदीन के पास पहुंचा।

उन्होंने पूरी बात सुनी।

फिर बोले, “जिसने टोटका रखा था, उसका मकसद नुकसान करना नहीं था।”

अर्जुन ने पूछा, “फिर?”

रामदीन बोले, “डर।”

“सिर्फ डर?”

“हां। कुछ लोग मानते हैं कि अगर किसी घर के लोग डर जाएं तो वह घर अपने आप खाली हो जाता है।”

“लेकिन यह कर कौन रहा है?”

रामदीन ने सिर हिलाया।

“पता नहीं।”

उन्होंने सलाह दी कि कुछ दिनों तक उस घर को बंद रहने दो।

लेकिन अर्जुन जिद्दी था।

उसे सच जानना था।

उस रात वह टॉर्च और कैमरा लेकर पुराने घर में ही रुक गया।

उसने कैमरा आंगन की तरफ लगा दिया।

घड़ी ने बारह बजाए।

कुछ नहीं हुआ।

एक बजे…

दो बजे…

सन्नाटा।

करीब ढाई बजे अचानक आंगन में रखी सूखी पत्तियां बिना हवा के हिलने लगीं।

कैमरे की लाल बत्ती जल रही थी।

अर्जुन खिड़की से बाहर देख रहा था।

उसे कोई दिखाई नहीं दिया।

लेकिन जमीन पर मिट्टी ऐसे दब रही थी जैसे कोई अदृश्य व्यक्ति धीरे-धीरे चल रहा हो।

एक-एक कदम।

मिट्टी अपने आप नीचे बैठती जा रही थी।

वह सांस रोककर देखता रहा।

अचानक…

आंगन के बीचोंबीच…

वही घड़ा दिखाई देने लगा।

ऐसा लगा जैसे धुंध के भीतर से धीरे-धीरे आकार ले रहा हो।

कुछ ही सेकंड में वह पूरी तरह सामने था।

लाल कपड़ा हिल भी नहीं रहा था।

अर्जुन की हिम्मत जवाब देने लगी।

फिर भी वह बाहर निकल आया।

उसने टॉर्च की रोशनी सीधे घड़े पर डाली।

उसी समय उसके पीछे किसी के धीरे से हंसने की आवाज आई।

वह तुरंत पलटा।

कोई नहीं।

फिर सामने देखा।

घड़ा गायब।

पूरा आंगन खाली।

उसके हाथ कांपने लगे।

सुबह होते ही उसने कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी।

वीडियो में वह अकेला खड़ा था।

लेकिन एक अजीब बात थी।

हर बार जब वह किसी दूसरी दिशा में देखता…

कैमरे में उसके पीछे कुछ सेकंड के लिए वही घड़ा दिखाई देता।

जैसे वह हमेशा उसकी पीठ के पीछे मौजूद हो।

लेकिन जैसे ही अर्जुन मुड़ता…

रिकॉर्डिंग में भी घड़ा गायब हो जाता।

उसने वीडियो कई बार देखा।

हर बार वही।

रामदीन ने वीडियो देखा तो गहरी सांस ली।

उन्होंने कहा, “जिसने यह टोटका किया… वह चाहता है कि देखने वाला खुद अपने डर से हार जाए।”

“तो इसका अंत कैसे होगा?”

रामदीन बोले, “डरना बंद कर दे।”

अर्जुन ने फैसला किया कि अब वह उस घड़े की तरफ ध्यान ही नहीं देगा।

अगले कुछ दिनों तक उसने उसी घर में काम किया।

न घड़े की तरफ देखा।

न आवाजों पर ध्यान दिया।

धीरे-धीरे कदमों की आवाज कम होने लगी।

गीली मिट्टी के निशान भी बंद हो गए।

एक सप्ताह बाद सब सामान्य हो गया।

अर्जुन ने राहत की सांस ली।

उसे लगा कि सब खत्म हो चुका है।

करीब एक महीने बाद रघुवीर सिंह शहर से गांव लौटे।

उन्होंने घर का ताला खोला।

आंगन में पहुंचे।

अचानक रुक गए।

तुलसी के चौरे के पास एक मिट्टी का छोटा घड़ा रखा था।

ऊपर लाल कपड़ा।

चारों ओर हल्दी।

सात नींबू।

उन्होंने जोर से आवाज लगाई, “अर्जुन… ये किसने रखा?”

अर्जुन दौड़ता हुआ आया।

उसने उसी जगह देखा।

वहां कुछ भी नहीं था।

रघुवीर बार-बार उसी घड़े की तरफ इशारा करते रहे।

लेकिन अर्जुन को केवल खाली जमीन दिखाई दे रही थी।

कुछ पल बाद रघुवीर का चेहरा सफेद पड़ गया।

उन्होंने कांपती आवाज में कहा,

“अभी… अभी कोई इसे उठाकर अंदर वाले कमरे में ले गया…”

अर्जुन ने अंदर देखा।

कमरा खाली था।

सिर्फ दरवाजा अपने आप धीरे-धीरे बंद हो गया।

उस दिन के बाद गांव में किसी ने उस घर के आंगन में रखे उस टोटके को नहीं देखा।

लेकिन अजीब बात यह थी कि जो भी पहली बार उस घर में अकेले जाता…

वह लौटकर सिर्फ एक ही बात कहता—

“तुलसी के पास रखा वह लाल कपड़े वाला घड़ा… आखिर वहां रखता कौन है?”

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