रेलवे स्टेशन की वो भटकती आत्मा | Railway Station Horror Story in Hindi

1. आख़िरी ट्रेन

Railway Station Horror Story in Hindi रात के ठीक 12:17 बजे, “कालीघाट रोड” रेलवे स्टेशन पर आख़िरी ट्रेन आकर रुकी।

बारिश इतनी तेज़ थी कि प्लेटफॉर्म की पीली lights भी धुंधली लग रही थीं। स्टेशन छोटा था, पुराना था, और अजीब तरह से सुनसान था। वहाँ सिर्फ एक आदमी उतरा—आरव।

Railway Station Horror Story in Hindi

आरव एक travel vlogger था। उसका channel paranormal places और haunted locations के लिए famous था। उसे किसी ने comment में लिखा था—

“अगर सच में डर देखना है, तो कालीघाट रोड स्टेशन की आख़िरी ट्रेन से उतरना… और प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर रात 1:13 तक रुकना।”

आरव हँस पड़ा था।

“भूत-वूत कुछ नहीं होता,” उसने camera on करते हुए कहा, “बस डर इंसान के दिमाग में होता है।”

लेकिन उसे नहीं पता था कि उस रात उसका camera सिर्फ content नहीं, उसकी आख़िरी सच्चाई record करने वाला था।


2. प्लेटफॉर्म नंबर 3

स्टेशन पर कोई कुली नहीं था। कोई guard नहीं। टिकट खिड़की बंद थी। सिर्फ एक बूढ़ा चायवाला था, जो धुएँ से भरे छोटे से stall में बैठा था।

आरव उसके पास गया।

“चाय मिलेगी?”

बूढ़े ने सिर उठाया। उसकी आँखें अजीब थीं—थकी हुई, मगर डरी हुई।

“तुम आख़िरी ट्रेन से उतरे हो?” उसने पूछा।

“हाँ। क्यों?”

बूढ़े ने धीमे से कहा, “यहाँ आख़िरी ट्रेन से उतरने वाले लोग सुबह तक रुकते नहीं।”

आरव मुस्कुराया। “क्यों? Ghost story?”

चायवाले ने जवाब नहीं दिया। बस प्लेटफॉर्म नंबर 3 की तरफ देखा।

“उधर मत जाना।”

“क्यों?”

“वो इंतज़ार करती है।”

“कौन?”

बूढ़े ने कप रखते हुए कहा—

“रेलवे स्टेशन की वो भटकती आत्मा।”

आरव ने camera उसकी तरफ घुमा दिया। “Uncle, ये line बहुत cinematic है। थोड़ा detail में बताइए।”

बूढ़े का चेहरा सख़्त हो गया।

“कुछ stories content नहीं होतीं बेटा… warning होती हैं।”


3. पुराना हादसा

आरव फिर भी प्लेटफॉर्म नंबर 3 की तरफ चला गया।

उसके कदमों की आवाज़ खाली स्टेशन में गूंज रही थी। दीवारों पर पुरानी posters चिपकी थीं। एक जगह लिखा था—

“सावधान! चलती ट्रेन में चढ़ना मना है।”

नीचे किसी ने लाल रंग से लिखा था—

“वो अब भी चढ़ना चाहती है।”

आरव रुका।

“Interesting,” उसने camera में कहा, “यहाँ लोगों ने पूरा horror setup बना रखा है।”

तभी speaker से खरखराहट हुई।

“यात्रीगण कृपया ध्यान दें…”

आरव ने ऊपर देखा।

Announcement system तो बंद पड़ा था।

फिर भी आवाज़ आई—

“गाड़ी संख्या… 1313… प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर… कुछ ही देर में आएगी…”

आरव का गला सूख गया।

उसने mobile निकाला। Network नहीं था।

फिर उसे पटरियों के उस पार एक लड़की दिखाई दी।

सफेद सलवार-कमीज़। भीगे बाल। हाथ में लाल suitcase।

वो आरव को देख रही थी।


4. लाल Suitcase वाली लड़की

“Hello!” आरव ने आवाज़ लगाई।

लड़की ने जवाब नहीं दिया।

आरव ने camera zoom किया, लेकिन screen पर सिर्फ static दिखा।

“ये क्या…” वह बुदबुदाया।

तभी लड़की ने हाथ उठाया और धीरे से इशारा किया—जैसे उसे पास बुला रही हो।

आरव के पैर खुद-ब-खुद आगे बढ़ने लगे।

प्लेटफॉर्म के किनारे पहुँचते ही पीछे से चायवाले की आवाज़ आई—

“रुक जा!”

आरव चौंका। वह पटरियों से बस एक कदम दूर था।

चायवाला हाँफते हुए बोला, “उसकी तरफ मत देखना।”

“वो कौन है?” आरव ने पूछा।

बूढ़े ने काँपती आवाज़ में कहा, “तेरह साल पहले… इसी प्लेटफॉर्म पर… एक लड़की की मौत हुई थी। नाम था मीरा। शादी के लिए घर से भागी थी। आख़िरी ट्रेन पकड़नी थी। लेकिन ट्रेन आई नहीं… मौत आ गई।”

“मतलब accident?”

बूढ़े ने सिर हिलाया। “नहीं। किसी ने उसे धक्का दिया था।”

आरव ने धीरे से पूछा, “किसने?”

बूढ़े ने उसकी आँखों में देखा।

“यही तो कोई नहीं जान पाया।”


5. Missing Footage

आरव ने अपने camera की recording check की। अभी तक सब ठीक था, लेकिन जैसे ही लड़की दिखाई दी थी, video black हो गया था।

सिर्फ audio बची थी।

और audio में आरव की आवाज़ के अलावा एक और आवाज़ थी।

एक लड़की फुसफुसा रही थी—

“तुम लौट आए…”

आरव के हाथ ठंडे पड़ गए।

“मैं? मैं पहली बार आया हूँ।”

Audio फिर चला—

“झूठ मत बोलो… तुमने ही धक्का दिया था…”

आरव ने camera बंद कर दिया।

बारिश अचानक रुक गई।

पूरा स्टेशन एकदम खामोश हो गया।

फिर दूर से ट्रेन की सीटी सुनाई दी।

लेकिन tracks खाली थे।


6. Waiting Room का दरवाज़ा

चायवाले ने कहा, “सुबह होने तक waiting room में रहो। बाहर मत निकलना।”

“और आप?”

“मैं यहाँ से 1 बजे के बाद कभी बाहर नहीं रहता।”

“क्यों?”

बूढ़ा धीरे से बोला, “क्योंकि 1:13 पर वो अपना कातिल ढूँढती है।”

आरव waiting room में गया। अंदर धूल, टूटी बेंच और पुराना पंखा था। दीवार पर एक faded newspaper cutting लगी थी—

“युवती की रहस्यमयी मौत, प्रेमी फरार”

आरव ने cutting पढ़ी।

लड़की का नाम मीरा था।

उसके साथ भागने वाला लड़का—अर्जुन।

आरव ठिठक गया।

क्योंकि newspaper में अर्जुन की धुंधली तस्वीर थी।

और वो तस्वीर… आरव जैसी दिखती थी।

बहुत ज़्यादा।


7. आईने में दूसरा चेहरा

Waiting room के कोने में एक पुराना mirror था।

आरव ने खुद को देखा।

पहले उसका ही चेहरा दिखा।

फिर reflection बदलने लगा।

उसकी आँखों के नीचे काले घेरे उभरे। बाल पीछे की तरफ सेट हो गए। चेहरे पर हल्की दाढ़ी आ गई।

वह चेहरा उसका नहीं था।

वो अर्जुन था।

आरव पीछे हट गया।

तभी mirror पर धुंध जमने लगी और उस पर किसी ने उंगली से लिखा—

“क्यों छोड़ा मुझे?”

आरव चिल्ला पड़ा।

दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया।

Speaker फिर से बजा—

“गाड़ी संख्या 1313… मृत्यु एक्सप्रेस… प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर आ रही है…”


8. असली कहानी

आरव ने door पीटना शुरू किया।

“खोलो! कोई है?”

बाहर से चायवाले की आवाज़ आई, “मत खोलना! चाहे कोई भी बुलाए!”

अचानक बाहर लड़की की रोने की आवाज़ आई।

“आरव…”

आरव जम गया।

“तुम मेरा नाम कैसे जानती हो?”

“क्योंकि तुमने मुझे बुलाया था…”

“मैंने नहीं!”

“तुम हर जन्म में यही कहते हो…”

कमरे की lights flicker करने लगीं।

दीवार पर लगी newspaper cutting जलने लगी, और उसके पीछे एक और कागज़ दिखाई दिया।

वो police report थी।

उसमें लिखा था—

मीरा की मौत accident नहीं थी। धक्का उसके प्रेमी अर्जुन ने नहीं दिया।

आरव ने जल्दी-जल्दी आगे पढ़ा।

संदिग्ध: स्टेशन मास्टर हरिनारायण। केस बंद। सबूत गायब।

हरिनारायण?

आरव का दिल धड़कना भूल गया।

क्योंकि चायवाले ने अपना नाम नहीं बताया था।


9. चायवाला कौन था?

आरव ने दरवाज़े की दरार से बाहर देखा।

चायवाला प्लेटफॉर्म पर खड़ा था।

लेकिन अब वो बूढ़ा नहीं लग रहा था।

उसकी पीठ सीधी थी। चेहरे पर डर नहीं, गुस्सा था। उसके हाथ में वही लाल suitcase था।

वह धीरे से बोल रहा था—

“तेरह साल… तेरह साल से तू मुझे चैन से जीने नहीं देती।”

पटरियों के उस पार मीरा खड़ी थी।

उसकी आँखों से पानी नहीं, खून बह रहा था।

“तुमने कहा था ट्रेन नहीं आएगी,” मीरा की आवाज़ गूंजी, “तुमने कहा था अर्जुन ने मुझे धोखा दिया। तुमने कहा था वापस चलो…”

चायवाला हँसा।

“तूने मना किया। तूने मुझे थप्पड़ मारा। फिर मैंने धक्का दे दिया। बस इतना ही।”

आरव की साँस अटक गई।

कातिल सामने था।

लेकिन फिर मीरा ने धीरे से सिर घुमाया।

वह सीधे waiting room की तरफ देख रही थी।

“आरव… सच record करो।”


10. Viral Footage

आरव ने camera on किया।

इस बार सब साफ़ record हो रहा था।

चायवाला—यानी हरिनारायण—अपने अपराध को दोहरा रहा था।

“मैं station master था। सब मेरे हाथ में था। मैंने CCTV delete किया। रिपोर्ट बदली। अर्जुन को दोषी बनाया। वो बेचारा भागता रहा… फिर उसने खुदकुशी कर ली।”

आरव काँप गया।

“अर्जुन मर गया?”

मीरा ने फुसफुसाया—

“हाँ… लेकिन उसका वादा नहीं मरा।”

आरव के कानों में आवाज़ गूंजी।

“मैं लौटूँगा, मीरा…”

अचानक आरव को flashes दिखने लगे।

एक लड़का, भागती हुई लड़की, लाल suitcase, बारिश, आख़िरी ट्रेन, झगड़ा, धक्का, चीख…

और फिर अंधेरा।

आरव घुटनों पर गिर गया।

वह समझ गया।

वह सिर्फ व्लॉगर नहीं था।

वह अर्जुन का पुनर्जन्म था।


11. ट्रेन जो कभी नहीं आई

घड़ी में 1:13 बजे।

पटरियाँ काँपने लगीं।

दूर से एक काली ट्रेन आती दिखी।

उस पर कोई number नहीं था। खिड़कियों के पीछे धुंधले चेहरे थे—जैसे वो लोग जो कभी मंज़िल तक नहीं पहुँचे।

हरिनारायण पीछे हटने लगा।

“नहीं… नहीं… मैं नहीं जाऊँगा!”

मीरा प्लेटफॉर्म पर आ गई।

उसके पैर ज़मीन को छू नहीं रहे थे।

“तेरह साल से मैं उसी ट्रेन का इंतज़ार कर रही थी,” उसने कहा, “लेकिन आज मेरी ticket नहीं कटेगी… आज तेरी कटेगी।”

हरिनारायण भागा।

लेकिन स्टेशन के सभी दरवाज़े बंद हो गए।

आरव ने camera पकड़े-पकड़े सब record किया।

काली ट्रेन platform 3 पर रुकी।

दरवाज़ा खुला।

अंदर से कई हाथ निकले।

ठंडे, सड़े हुए, सफेद हाथ।

उन्होंने हरिनारायण को पकड़ लिया।

वह चीखा—

“मुझे बचाओ!”

मीरा ने सिर्फ एक बात कही—

“जिसे तुमने पटरियों पर छोड़ा था… वो भी यही चिल्लाई थी।”

और हरिनारायण को ट्रेन के अंदर खींच लिया गया।

दरवाज़ा बंद हुआ।

ट्रेन अंधेरे में गायब हो गई।


12. सुबह की सच्चाई

सुबह 5:40 पर जब पहली passenger train आई, तो आरव प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर बेहोश पड़ा मिला।

उसका camera उसके हाथ में था।

Police आई। Media आई।

Video viral हो गया।

हर तरफ headline थी—

“Haunted Railway Station पर 13 साल पुराने Murder Case का खुलासा”

लेकिन एक सवाल सबको परेशान कर रहा था।

Video में हरिनारायण साफ़ दिख रहा था।

Police record के अनुसार हरिनारायण की मौत तो पाँच साल पहले heart attack से हो चुकी थी।

तो फिर रात 1:13 पर camera में confess करने वाला आदमी कौन था?


13. आख़िरी Clip

आरव hospital में जागा।

उसने अपना phone खोला। लाखों views। हजारों comments।

लेकिन एक private video उसकी gallery में खुद-ब-खुद save था।

Title था—

“Last Journey.mp4”

उसने play किया।

Video में प्लेटफॉर्म नंबर 3 दिख रहा था।

मीरा खड़ी थी।

इस बार वो डरावनी नहीं लग रही थी। शांत थी।

उसके पीछे अर्जुन खड़ा था।

मगर अर्जुन का चेहरा आरव जैसा था।

मीरा मुस्कुराई।

“तुमने वादा निभाया।”

आरव की आँखों से आँसू बह निकले।

तभी video के background में announcement हुआ—

“यात्रीगण कृपया ध्यान दें… प्रेम और विश्वास की गाड़ी… अब अपनी मंज़िल पर पहुँच चुकी है।”

Video खत्म हो गया।

लेकिन screen पर एक message उभरा—

“अब मेरी जगह कोई और भटकेगा…”

आरव का दिल रुक सा गया।

नीचे एक नई तस्वीर उभरी।

एक लड़की।

सफेद dress।

हाथ में नीला bag।

Location—

Platform Number 2.

और time—

Tonight, 12:17 AM.

आरव ने phone गिरा दिया।

क्योंकि उस लड़की को वह पहचानता था।

वो उसकी girlfriend नंदिनी थी।

जो उसी शाम उससे मिलने कालीघाट रोड स्टेशन आने वाली थी।


Ending Twist

आरव भागकर station पहुँचा।

रात हो चुकी थी।

Platform 2 पर नंदिनी खड़ी थी।

“आरव!” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “तुमने बुलाया था ना?”

आरव चौंका।

“मैंने? नहीं!”

नंदिनी ने phone दिखाया।

Message था—

“आख़िरी ट्रेन से आओ। Platform 2 पर wait करना. — Aarav”

आरव के पीछे से ठंडी हवा चली।

Speaker crackle हुआ।

“गाड़ी संख्या 1313… फिर से आ रही है…”

आरव ने मुड़कर देखा।

प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर मीरा नहीं थी।

वहाँ अब हरिनारायण खड़ा था।

वह मुस्कुरा रहा था।

उसने धीरे से कहा—

“एक आत्मा मुक्त हुई… तो दूसरी बंध गई।”

और तभी पटरियों के उस पार अंधेरे से किसी ने आरव का नाम पुकारा—

“अर्जुन…”

आरव समझ गया।

कहानी खत्म नहीं हुई थी।

कालीघाट रोड स्टेशन पर आत्माएँ मरती नहीं थीं।

बस अपना प्लेटफॉर्म बदलती थीं।

1. फिर वही सीटी

रात के 12:16 बजे।

कालीघाट रोड रेलवे स्टेशन पर हवा अचानक बर्फ जैसी ठंडी हो गई।

आरव platform number 2 पर खड़ा था। उसके सामने नंदिनी थी… और पीछे अंधेरे में हरिनारायण की मुस्कुराती हुई परछाई।

Speaker फिर crackle हुआ—

“यात्रीगण कृपया ध्यान दें… गाड़ी संख्या 1313… कुछ ही क्षणों में प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर आएगी…”

नंदिनी ने घबराकर पूछा, “ये क्या हो रहा है आरव?”

आरव के हाथ काँप रहे थे।

“नंदिनी… अभी इसी वक्त यहाँ से चलो।”

“लेकिन तुमने ही तो बुलाया था!”

“मैंने नहीं बुलाया!”

नंदिनी ने phone उसकी तरफ बढ़ाया।

Message बिल्कुल उसी के number से आया था।

लेकिन नीचे time देखकर आरव की साँस रुक गई।

Message रात 1:13 AM पर भेजा गया था।

उसी समय… जब वो hospital में था।


2. अंधेरे में खड़ा आदमी

Platform के आख़िरी छोर पर एक आदमी खड़ा था।

काला coat। सिर झुका हुआ। हाथ में पुरानी pocket watch।

नंदिनी ने धीमे से पूछा—

“वो कौन है?”

आरव ने ध्यान से देखा।

उस आदमी का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।

लेकिन उसके पैरों के पास पानी नहीं पड़ रहा था।

जैसे बारिश उसे छू ही नहीं रही हो।

तभी उसने धीरे-धीरे सिर उठाया।

उसकी आँखें पूरी काली थीं।

और होंठों पर टेढ़ी मुस्कान।

“अर्जुन…” उसकी भारी आवाज़ गूंजी।

आरव पीछे हट गया।

“मैं आरव हूँ!”

आदमी हँसा।

“नाम बदलने से पाप नहीं बदलते।”


3. Dead Passenger

अचानक station की सारी lights बुझ गईं।

पूरा प्लेटफॉर्म अंधेरे में डूब गया।

फिर tracks के नीचे से लाल रोशनी चमकने लगी।

जैसे पटरियों के नीचे आग जल रही हो।

और फिर…

धीरे-धीरे ट्रेन की आवाज़ आने लगी।

छुक… छुक… छुक…

लेकिन tracks खाली थे।

नंदिनी डरकर आरव का हाथ पकड़ चुकी थी।

तभी उनके पीछे से किसी बच्चे की आवाज़ आई—

“भैया… मेरी mummy दिखी क्या?”

दोनों मुड़े।

करीब आठ साल का एक लड़का खड़ा था।

उसके कपड़े पुराने थे। चेहरे पर मिट्टी लगी थी। हाथ में टूटा हुआ teddy bear।

आरव झुका।

“तुम यहाँ अकेले क्या कर रहे हो?”

बच्चा मुस्कुराया।

“मैं अकेला नहीं हूँ…”

उसने धीरे से प्लेटफॉर्म की तरफ इशारा किया।

आरव ने देखा…

पूरा प्लेटफॉर्म लोगों से भरा था।

लेकिन एक सेकंड पहले वहाँ कोई नहीं था।

अब दर्जनों लोग खड़े थे।

सभी चुप।

सभी भीगे हुए।

और सबकी आँखें… सिर्फ आरव पर थीं।


4. Ghost Train के यात्री

एक औरत जिसके गले पर गहरा कट था।

एक बूढ़ा आदमी जिसके हाथ नहीं थे।

एक college girl जिसके पैर उल्टी दिशा में मुड़े थे।

एक आदमी जिसका आधा चेहरा जला हुआ था।

नंदिनी चीख पड़ी।

“ये… ये लोग कौन हैं?”

Pocket watch वाला आदमी आगे बढ़ा।

“ये वो यात्री हैं… जो कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुँचे।”

उसने watch खोली।

अंदर 1:13 लिखा था।

“और अब… नई journey शुरू होगी।”


5. मीरा की वापसी

तभी अचानक तेज़ हवा चली।

प्लेटफॉर्म के सारे ghost passengers पीछे हट गए।

सामने से मीरा चली आ रही थी।

लेकिन इस बार वो पहले जैसी नहीं थी।

उसकी आँखों में डर था।

जैसे वो किसी चीज़ से खुद भी डरी हुई हो।

“आरव…” उसने कहा, “उसे मत सुनो।”

Pocket watch वाला आदमी मुस्कुराया।

“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था मीरा।”

मीरा चीखी—

“तूने मुझे धोखा दिया था!”

आरव चौंका।

“क्या मतलब?”

मीरा ने काँपती आवाज़ में कहा—

“हरिनारायण सिर्फ मोहरा था… असली शैतान ये है।”

“कौन है ये?”

मीरा की आँखों में आँसू आ गए।

“ये… इस स्टेशन का Time Keeper है।”


6. Time Keeper

पूरा स्टेशन अचानक हिलने लगा।

दीवारों पर लगी घड़ियाँ उल्टी दिशा में घूमने लगीं।

Time Keeper धीरे-धीरे आगे आया।

“हर स्टेशन पर एक दरवाज़ा होता है,” उसने कहा, “जहाँ अधूरी मौतें जमा होती हैं। कालीघाट रोड… उन दरवाज़ों में सबसे पुराना है।”

उसने आरव को देखा।

“और तू… अर्जुन… हर जन्म में लौट आता है।”

आरव चीखा—

“मैं अर्जुन नहीं हूँ!”

Time Keeper मुस्कुराया।

“फिर ये देख।”

उसने pocket watch आरव के माथे से लगा दी।

और अचानक…


7. पिछला जन्म

आरव के सामने सब बदल गया।

वो अब स्टेशन पर नहीं था।

साल 2013।

बारिश हो रही थी।

मीरा रो रही थी।

“अर्जुन जल्दी करो! ट्रेन आने वाली है!”

और सामने…

युवा हरिनारायण खड़ा था।

लेकिन उसके पीछे shadow में वही Time Keeper था।

वो हरिनारायण के कान में कुछ फुसफुसा रहा था।

“उसे मार दो…”

हरिनारायण की आँखें काली हो गईं।

उसने मीरा को धक्का दिया।

चीख।

खून।

और फिर…

अर्जुन पटरियों पर कूद गया।

उसने मीरा को बचाने की कोशिश की।

लेकिन ट्रेन दोनों के ऊपर से गुजर गई।

आरव की चीख निकल गई।

“नहीं…!”

Vision टूट गया।

वो वापस प्लेटफॉर्म पर था।

साँसें तेज़।

आँखों में आँसू।

क्योंकि अब उसे सब याद आ चुका था।

अर्जुन सिर्फ मीरा का प्रेमी नहीं था।

वो उसी रात मर गया था।

और अब…

उसकी आत्मा आरव के शरीर में थी।


8. नंदिनी का सच

नंदिनी धीरे-धीरे पीछे हट रही थी।

उसकी आँखें डर से भरी थीं।

“तो… तुम इंसान नहीं हो?”

आरव उसकी तरफ बढ़ा।

“नंदिनी listen to me—”

तभी Time Keeper हँसा।

“उसे सच बता।”

आरव रुक गया।

“कौन सा सच?”

Time Keeper की मुस्कान और चौड़ी हो गई।

“कि नंदिनी यहाँ पहली बार नहीं आई।”

नंदिनी अचानक freeze हो गई।

उसकी आँखें blank हो गईं।

और फिर…

वो धीरे-धीरे मुस्कुराने लगी।

वैसी मुस्कान… जैसी इंसानों की नहीं होती।

“Welcome back, अर्जुन…”

आरव के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

“नंदिनी…?”

उसकी आवाज़ बदल चुकी थी।

“इस बार मैं तुझे अकेला नहीं छोड़ूँगी।”


9. Possessed Soul

नंदिनी का शरीर हवा में उठने लगा।

उसके बाल अपने-आप उड़ रहे थे।

उसकी आँखें पूरी सफेद हो गईं।

मीरा डर गई।

“नहीं… उसने इसे चुन लिया।”

आरव चीखा—

“किसने?!”

मीरा काँपती आवाज़ में बोली—

“जो भी इस स्टेशन पर सबसे ज़्यादा डरता है… Time Keeper उसी के शरीर में घुस जाता है।”

नंदिनी अचानक ज़ोर से हँसी।

“अब ये शरीर मेरा है।”

उसकी गर्दन धीरे-धीरे 180 degree घूम गई।

“और अगली train में… तुम दोनों जाओगे।”


10. मौत की टिकट

Tracks के नीचे से हाथ निकलने लगे।

सैकड़ों हाथ।

सड़े हुए।

खून से लथपथ।

उन्होंने आरव के पैरों को पकड़ लिया।

Speaker फटने जैसी आवाज़ में गूंजा—

“Final Boarding शुरू हो चुकी है…”

Ghost passengers एक साथ बोलने लगे—

“Ticket दिखाओ…”

“Ticket दिखाओ…”

“Ticket दिखाओ…”

Time Keeper ने pocket watch बंद की।

“जिसकी मौत अधूरी होती है… उसकी ticket हमेशा खुली रहती है।”

उसने आरव की तरफ हाथ बढ़ाया।

“चलो अर्जुन… इस बार हमेशा के लिए।”


11. मीरा का बलिदान

अचानक मीरा आरव के सामने आ गई।

“नहीं!”

Time Keeper गुर्राया।

“हट जा!”

मीरा रो पड़ी।

“तेरह साल पहले मैं उसे बचा नहीं पाई… लेकिन इस बार बचाऊँगी।”

उसने आरव का चेहरा पकड़ा।

“तुम्हें याद है ना… तुमने क्या कहा था?”

आरव की आँखों में flash आया।

बारिश वाली रात।

मीरा मुस्कुरा रही थी।

और अर्जुन कह रहा था—

“अगर मौत भी आई… तो साथ लड़ेंगे।”

मीरा मुस्कुराई।

“तो लड़ो।”

उसने आरव को जोर से पीछे धक्का दिया।

और खुद Time Keeper को पकड़ लिया।

पूरे स्टेशन में भयानक चीख गूंजी।

Ghost train अचानक काँपने लगी।

दरवाज़े खुल गए।

अंदर सिर्फ अंधेरा था।

मीरा चीखी—

“अभी भागो!”


12. Last Run

आरव ने नंदिनी का हाथ पकड़ा और दौड़ पड़ा।

पूरा स्टेशन टूटने लगा।

दीवारों से खून बह रहा था।

Ghost passengers चीख रहे थे।

Clock 1:13 पर अटक चुकी थी।

पीछे से Time Keeper की डरावनी आवाज़ गूंजी—

“कोई इस स्टेशन से बचकर नहीं जाता!”

आरव भागता रहा।

Exit gate बस कुछ कदम दूर था।

तभी नंदिनी रुक गई।

“आरव…”

उसकी आवाज़ normal थी।

“मुझे छोड़ दो।”

“क्या?!”

“वो अभी भी मेरे अंदर है…”

उसकी आँखों से काला खून बहने लगा।

“अगर तुम रुके… तो वो तुम्हें भी ले जाएगा।”

आरव रो पड़ा।

“मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊँगा!”

नंदिनी मुस्कुराई।

“तो फिर… अगली कहानी में मिलेंगे।”

और उसने खुद को पीछे गिरा दिया।

सीधे tracks पर।


13. Cliffhanger Ending

आरव चीखा—

“नंदिनीiiii!”

उसी पल ghost train तेज़ी से उसके ऊपर से गुज़री।

पूरा स्टेशन सफेद रोशनी में डूब गया।

और फिर…

सब शांत हो गया।

सुबह जब लोग स्टेशन पहुँचे, तो वहाँ कुछ भी नहीं था।

ना ghost train।

ना passengers।

ना Time Keeper।

सिर्फ platform number 2 पर पड़ा था—

नंदिनी का नीला bag।

और उसके अंदर…

एक पुरानी pocket watch।

जो अब भी चल रही थी।

Time—

1:13 AM.

और watch के पीछे खून से लिखा था—

“Part 3 Begins Soon…”

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