Voodoo Doll Horror Story in Hindi

वूडू – श्रापित गुड़िया की पूरी कहानी

रात के ठीक दो बजकर तेरह मिनट हुए थे।

दिल्ली के दक्षिणी इलाके में बने पुराने दो-मंजिला मकान की सारी बत्तियां बंद थीं। बाहर हल्की बारिश हो रही थी। गली में लगे पीले लैम्पपोस्ट की रोशनी बूंदों के बीच कांपती हुई जमीन पर पड़ रही थी।

मकान की ऊपरी मंजिल के एक कमरे में पैंतीस वर्षीय समर गहरी नींद में सो रहा था।

Voodoo Doll Horror Story in Hindi

अचानक उसकी आंखें खुल गईं।

उसे लगा जैसे किसी ने कमरे के भीतर बहुत धीमी आवाज में उसका नाम लिया हो।

“समर…”

उसने आंखें खोले बिना कुछ क्षण तक आवाज सुनने की कोशिश की। Voodoo Doll Horror Story in Hindi

कमरे में पंखे की धीमी घरघराहट के अलावा कुछ नहीं था।

उसने करवट बदली और दोबारा सोने की कोशिश की।

तभी फिर वही आवाज आई।

“समर…”

इस बार आवाज पहले से अधिक स्पष्ट थी।

वह किसी स्त्री की आवाज थी, लेकिन उसमें इंसानी गर्माहट नहीं थी। ऐसा लग रहा था मानो कोई बहुत गहरे कुएं के भीतर से उसे बुला रहा हो।

समर झटके से उठकर बैठ गया।

उसने कमरे में नजर दौड़ाई।

खिड़की बंद थी। दरवाजा भी अंदर से बंद था। मेज पर रखा नाइट लैम्प बुझा हुआ था।

लेकिन कमरे के एक कोने से लगातार हल्की-सी खुरचने की आवाज आ रही थी।

खर्र…

खर्र…

खर्र…

समर ने मोबाइल की टॉर्च जलाई।

रोशनी कमरे के कोने में पड़ी।

वहां एक छोटी-सी लकड़ी की गुड़िया बैठी थी।

उसका चेहरा काले कपड़े से ढका हुआ था। शरीर पर लाल धागे लिपटे थे और छाती के बीचों-बीच एक लंबी काली सुई धंसी हुई थी।

समर कुछ क्षण तक उसे देखता रह गया।

उसके चेहरे का रंग उतर गया।

वह बिस्तर से नीचे उतरा और धीरे-धीरे गुड़िया की ओर बढ़ने लगा।

“यह यहां कैसे आई?”

उसने दो दिन पहले ही उस गुड़िया को ताले लगे लकड़ी के बक्से में बंद करके नीचे बने स्टोर रूम में रखा था।

समर गुड़िया के सामने घुटनों के बल बैठा।

उसने हाथ आगे बढ़ाया ही था कि गुड़िया की गर्दन अपने आप धीरे-धीरे ऊपर उठने लगी।

समर का हाथ हवा में ही रुक गया।

काले कपड़े के पीछे जहां उसका चेहरा होना चाहिए था, वहां से किसी के सांस लेने जैसी आवाज आने लगी।

ह्ह्ह…

ह्ह्ह…

ह्ह्ह…

अगले ही पल गुड़िया की छाती में धंसी सुई अपने आप और भीतर चली गई।

उसी क्षण समर की छाती में भयानक दर्द उठा।

“आह!”

वह पीछे गिर पड़ा।

उसने अपनी शर्ट उठाकर देखा।

छाती के ठीक बीच में एक छोटा-सा गोल निशान बन चुका था। वहां से खून की एक पतली बूंद निकल रही थी।

समर ने घबराकर दोबारा कोने में देखा।

गुड़िया वहां नहीं थी।

कमरा बिल्कुल खाली था।

तीन सप्ताह पहले तक समर का जीवन पूरी तरह सामान्य था।

वह दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में शोधकर्ता था। उसका मुख्य विषय प्राचीन जनजातीय परंपराएं और रहस्यमय अनुष्ठान थे।

कुछ महीने पहले उसे कैरेबियाई द्वीपों की लोक परंपराओं पर आयोजित एक शोध अभियान में शामिल होने का अवसर मिला था।

यात्रा के अंतिम दिनों में वह समुद्र से दूर बसे एक छोटे और सुनसान गांव में गया था।

गांव के किनारे एक जली हुई पुरानी हवेली थी। स्थानीय लोग सूर्यास्त के बाद उसके पास नहीं जाते थे।

कहा जाता था कि वहां कई दशक पहले एक बाहरी व्यापारी रहता था। उसने गांव के लोगों की पवित्र वस्तुएं चुराकर उन्हें विदेशों में बेचने की कोशिश की थी।

एक रात व्यापारी और उसके सभी नौकर अचानक गायब हो गए।

हवेली के भीतर केवल काले धागों से बंधी कुछ गुड़ियां मिली थीं।

समर ऐसी कहानियों को लोककथा मानता था।

वह जली हुई हवेली के भीतर चला गया।

हवेली की दीवारें काली पड़ चुकी थीं। छत का अधिकांश हिस्सा गिर चुका था। जमीन पर राख, टूटा फर्नीचर और मिट्टी के बर्तन बिखरे हुए थे।

एक कमरे में उसे लकड़ी का पुराना संदूक मिला।

संदूक पर तांबे की एक पट्टी जड़ी थी, जिस पर किसी अनजान भाषा में कुछ लिखा था।

उसके साथ मौजूद स्थानीय गाइड, मार्कस, संदूक देखते ही पीछे हट गया था।

“इसे मत खोलिए।”

समर हंस पड़ा था।

“क्यों? इसके अंदर क्या है?”

Voodoo Doll Horror Story in Hindi

मार्कस का चेहरा गंभीर हो गया।

“कुछ वस्तुएं मिलती नहीं हैं। वे खुद अपना नया मालिक चुनती हैं।”

समर ने उसकी बात अनसुनी कर दी।

उसने लोहे की छड़ से संदूक का जंग लगा ताला तोड़ दिया।

अंदर लाल कपड़े में लिपटी वही लकड़ी की गुड़िया रखी थी।

गुड़िया के सिर पर काले बालों जैसा रेशा लगा था। उसके शरीर पर लाल और काले धागे लिपटे थे। उसके साथ चमड़े के कवर वाली एक छोटी डायरी भी थी।

समर ने गुड़िया उठाई।

उसी समय हवेली के किसी अंधेरे हिस्से से जोरदार आवाज आई।

धड़ाम!

जैसे कोई भारी वस्तु जमीन पर गिरी हो।

मार्कस घबराकर बाहर भाग गया।

समर डायरी और गुड़िया अपने बैग में डालकर उसके पीछे चला आया।

गांव लौटने के बाद मार्कस ने उसे चेतावनी दी थी।

“उसे वापस रख दीजिए।”

“यह एक ऐतिहासिक वस्तु है।”

“वह वस्तु नहीं है।”

“तुम्हें कैसे पता?”

मार्कस ने समर के बैग की ओर देखा।

“क्योंकि मेरी दादी ने बचपन में मुझे उसके बारे में बताया था। उस गुड़िया के भीतर किसी मृत इंसान की आत्मा नहीं है। उसके भीतर उससे भी पुरानी चीज है।”

समर मुस्कराया।

“हर गांव में ऐसी कहानियां होती हैं।”

मार्कस ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“कहानी और चेतावनी में अंतर होता है।”

समर गुड़िया अपने साथ भारत ले आया।

दिल्ली पहुंचने के बाद उसने उसे अपने अध्ययन कक्ष में शीशे की अलमारी में रख दिया।

पहले दो दिनों तक कुछ नहीं हुआ।

तीसरी रात घर की बिजली अचानक चली गई।

समर मोमबत्ती लेने नीचे गया। जब वह लौटा तो शीशे की अलमारी खुली हुई थी।

गुड़िया कमरे के बीच रखी कुर्सी पर बैठी थी।

समर को लगा शायद अलमारी ठीक से बंद नहीं हुई होगी और गुड़िया गिरकर कुर्सी पर आ गई होगी।

हालांकि वह खुद भी जानता था कि ऐसा होना लगभग असंभव था।

उसने गुड़िया उठाई और वापस अलमारी में रख दी।

अगली सुबह उसके बाएं हाथ पर तीन पतली खरोंचें थीं।

उसके बाद से घटनाएं लगातार बढ़ने लगीं।

रसोई में रखे बर्तन अपने आप गिर जाते।

रात में सीढ़ियों पर किसी के चलने की आवाज आती।

बाथरूम के शीशे पर उंगली से अजीब निशान बनाए जाते।

कभी-कभी उसे घर के बंद कमरों से किसी स्त्री के धीमे-धीमे रोने की आवाज सुनाई देती।

एक रात समर ने अपने अध्ययन कक्ष में कैमरा लगा दिया।

अगली सुबह उसने रिकॉर्डिंग देखी।

रात दो बजे तक सब सामान्य था।

दो बजकर तेरह मिनट पर कमरे की अलमारी अपने आप खुल गई।

गुड़िया धीरे-धीरे बाहर गिरी।

फिर वह जमीन पर सीधी खड़ी हो गई।

रिकॉर्डिंग में गुड़िया छोटे-छोटे कदम उठाती हुई कैमरे के पास आई।

उसका चेहरा काले कपड़े से ढका था, फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे वह सीधे कैमरे की ओर देख रही हो।

कुछ सेकंड बाद स्क्रीन पर धुंध छा गई।

इसके बाद वीडियो बंद हो गया।

समर ने उसी दिन गुड़िया को लकड़ी के बक्से में बंद करके स्टोर रूम में रख दिया था।

लेकिन अब वह दोबारा उसके शयनकक्ष में पहुंच चुकी थी।

उस रात छाती पर निशान बनने के बाद समर ने पहली बार उस पुरानी डायरी को ध्यान से पढ़ने का फैसला किया।

डायरी में अधिकांश बातें फ्रेंच और किसी स्थानीय बोली के मिश्रण में लिखी थीं।

समर पूरी भाषा नहीं समझता था। उसने अनुवाद करने वाले सॉफ्टवेयर और पुराने शब्दकोशों की मदद ली।

पहले कुछ पन्ने एक व्यापारी की निजी टिप्पणियां थीं।

व्यापारी का नाम एडवर्ड ग्रेगरी था।

वह अफ्रीका और कैरेबियाई क्षेत्रों से दुर्लभ धार्मिक वस्तुएं खरीदकर यूरोप में अमीर संग्राहकों को बेचता था।

डायरी के अनुसार, उसे एक दूरस्थ गांव में लकड़ी की विशेष गुड़िया के बारे में पता चला था।

ग्रेगरी ने लिखा था—

“गांव वाले इसे नामा कहते हैं। वे मानते हैं कि इसके माध्यम से एक व्यक्ति दूसरे के शरीर और विचारों को नियंत्रित कर सकता है। यह गुड़िया किसी व्यक्ति के बाल, खून या कपड़े से जुड़ जाए, तो दोनों एक हो जाते हैं।”

अगले पन्ने पर लिखा था—

“मैंने आज गुड़िया प्राप्त कर ली है। इसे पाने के लिए मुझे मंदिर के रक्षक को रास्ते से हटाना पड़ा। बूढ़े आदमी ने मरते समय मुझसे कहा कि मैंने गुड़िया नहीं चुराई। गुड़िया ने मुझे चुना है।”

इसके बाद के पन्नों की लिखावट बिखरी हुई थी।

“मेरे नौकर कहते हैं कि मैं नींद में घर से बाहर चला जाता हूं।”

“आज मेरे हाथ में सुई मिली। मुझे याद नहीं कि मैंने उसे कब पकड़ा।”

“रात को कोई मेरे कान में बोलता है।”

“मैंने गुड़िया को आग में फेंका, लेकिन मेरे अपने हाथ जलने लगे।”

“मैंने उसे समुद्र में फेंका। अगली सुबह वह मेरे तकिए के पास थी।”

अंतिम पढ़ने योग्य पन्ने पर बड़े अक्षरों में लिखा था—

“गुड़िया श्रापित नहीं है। गुड़िया सिर्फ दरवाजा है।”

समर ने पन्ना पलटा।

अगले कई पन्ने खाली थे।

सबसे आखिरी पन्ने पर सूखे खून जैसी स्याही से एक वाक्य लिखा था—

“जिस दिन वह तुम्हारी आवाज में बोलेगी, समझ लेना कि तुम्हारे भीतर उसके लिए जगह बन चुकी है।”

समर ने डायरी बंद कर दी।

उसी समय उसके पीछे से आवाज आई।

“यह सब झूठ है।”

समर का शरीर सुन्न पड़ गया।

आवाज बिल्कुल उसकी अपनी थी।

वह धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।

कमरे में कोई नहीं था।

उसने मेज पर रखे शीशे में देखा।

शीशे में उसका प्रतिबिंब कुर्सी पर बैठा था।

लेकिन वास्तविक समर खड़ा था।

शीशे के भीतर बैठा उसका प्रतिबिंब धीरे-धीरे मुस्कराया।

“तुमने मुझे यहां बुलाया है।”

समर ने डरकर शीशे पर कपड़ा डाल दिया।

उसी क्षण पूरे घर की बत्तियां बुझ गईं।

नीचे स्टोर रूम से लकड़ी के बक्से के खुलने की आवाज आई।

ठक!

फिर सीढ़ियों पर छोटे कदम सुनाई दिए।

टक…

टक…

टक…

कदम धीरे-धीरे ऊपर आ रहे थे।

समर ने कमरे का दरवाजा बंद किया और अलमारी खिसकाकर उसके सामने लगा दी।

कदम दरवाजे के बाहर आकर रुक गए।

कुछ क्षण तक पूरी खामोशी रही।

फिर दरवाजे के नीचे की पतली दरार से लाल धागा अंदर आने लगा।

धागा फर्श पर सांप की तरह सरकता हुआ समर के पैरों की ओर बढ़ा।

समर पीछे हटता गया।

अचानक धागा उसके टखने से लिपट गया।

उसका पैर जोर से खिंचा और वह जमीन पर गिर पड़ा।

“छोड़ो मुझे!”

वह धागा पकड़कर खोलने लगा।

धागा उसकी त्वचा के भीतर धंसने लगा था।

समर ने मेज पर रखी कैंची उठाई और धागा काट दिया।

जैसे ही धागा कटा, दरवाजे के बाहर से एक दर्दनाक चीख सुनाई दी।

लेकिन वह चीख किसी स्त्री या पुरुष की नहीं थी।

वह दर्जनों आवाजों का मिश्रण थी।

अगली सुबह समर सीधे अपने मित्र डॉ. नीलांश के पास पहुंचा।

नीलांश मनोचिकित्सक था। दोनों कॉलेज के समय से एक-दूसरे को जानते थे।

समर ने उसे पूरी घटना बताई।

नीलांश ने ध्यान से उसकी बात सुनी।

“तुम पिछले कुछ हफ्तों से ठीक से सोए नहीं हो।”

“तुम्हें लगता है मैं पागल हो रहा हूं?”

“मैं ऐसा नहीं कह रहा। लंबे समय तक नींद पूरी न होने से भ्रम हो सकते हैं।”

समर ने अपनी छाती का निशान दिखाया।

“यह भ्रम नहीं है।”

नीलांश कुछ क्षण तक निशान देखता रहा।

“हो सकता है नींद में तुमने खुद को चोट पहुंचाई हो।”

समर उठकर खड़ा हो गया।

“तुम मेरी बात पर विश्वास नहीं करोगे।”

“मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूं।”

“तो आज रात मेरे घर चलो।”

नीलांश पहले तैयार नहीं हुआ, लेकिन समर की हालत देखकर मान गया।

रात करीब साढ़े ग्यारह बजे दोनों घर पहुंचे।

गुड़िया फिर से अध्ययन कक्ष की मेज पर रखी थी।

नीलांश ने उसे ध्यान से देखा।

“यही है?”

“हां।”

नीलांश ने दस्ताने पहने और गुड़िया उठाई।

“साधारण लकड़ी है। संभव है इसे किसी लोक अनुष्ठान में इस्तेमाल किया गया हो।”

जैसे ही उसने गुड़िया पलटी, उसके पीछे कपड़े में कुछ सिलाई दिखाई दी।

नीलांश ने कैंची से धागा काटा।

अंदर से बालों का एक छोटा गुच्छा निकला।

समर ने बाल देखते ही कहा, “ये मेरे नहीं हैं।”

नीलांश ने कुछ बाल निकालकर सफेद कागज पर रखे।

उसके भीतर एक मुड़ा हुआ कागज भी था।

कागज पर समर का पूरा नाम लिखा था।

नीचे उसके दिल्ली वाले घर का पता भी था।

दोनों चुप हो गए।

“यह किसने लिखा?” नीलांश ने पूछा।

“मुझे नहीं पता।”

“क्या किसी और ने गुड़िया को छुआ था?”

“यात्रा के दौरान मार्कस ने बैग जरूर पकड़ा था, लेकिन उसने गुड़िया को नहीं छुआ।”

नीलांश ने कागज सूंघा।

“स्याही नई लग रही है।”

उसी समय गुड़िया का दायां हाथ अचानक ऊपर उठ गया।

उसकी छोटी उंगली नीलांश की ओर थी।

नीलांश पीछे हट गया।

“यह कैसे…”

गुड़िया की उंगली धीरे-धीरे मुड़ी।

अगले ही पल नीलांश की दाहिनी तर्जनी पीछे की ओर मुड़ गई।

हड्डी टूटने की तेज आवाज कमरे में गूंजी।

नीलांश दर्द से चीख पड़ा।

समर ने गुड़िया छीनकर जमीन पर फेंक दी।

गुड़िया गिरते ही नीलांश का सिर मेज से टकराया और वह बेहोश हो गया।

समर ने एम्बुलेंस बुलाई।

अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि नीलांश की उंगली की हड्डी असामान्य तरीके से टूट गई थी। सिर पर भी गहरी चोट थी।

नीलांश को होश आया तो उसने समर से केवल एक बात कही—

“उसे मेरे पास मत आने देना।”

उस घटना के बाद समर का संदेह पूरी तरह खत्म हो चुका था।

गुड़िया वास्तव में किसी अनजान शक्ति से जुड़ी थी।

वह उसे वापस उसी स्थान पर पहुंचाना चाहता था, लेकिन इतनी जल्दी विदेश जाना संभव नहीं था।

उसने मार्कस को फोन किया।

पहली दो बार फोन नहीं उठा।

तीसरी बार किसी ने कॉल स्वीकार की।

दूसरी तरफ कुछ क्षण तक केवल सांस लेने की आवाज आती रही।

“मार्कस?”

कोई उत्तर नहीं मिला।

“मार्कस, मुझे तुम्हारी मदद चाहिए।”

दूसरी ओर से धीमी आवाज आई—

“तुमने उसे खोल दिया।”

“तुम्हें उस गुड़िया के बारे में सब पता था।”

“मैंने तुम्हें रोका था।”

“उसे वापस कैसे भेजूं?”

मार्कस कुछ क्षण चुप रहा।

“अब वापस भेजने से कुछ नहीं होगा।”

“क्यों?”

“क्योंकि वह तुमसे जुड़ चुकी है।”

“यह मेरा नाम और पता कैसे जानती है?”

मार्कस ने कहा, “वह तुम्हारी यादों में देख सकती है।”

समर की रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।

“उससे छुटकारा पाने का कोई तरीका होगा।”

“डायरी के अंतिम पन्ने देखो।”

“वे खाली हैं।”

“उन्हें गर्मी के पास रखो। लेकिन सावधान रहना। जो लिखा है, उसे पूरा पढ़ने से पहले कोई कदम मत उठाना।”

कॉल कट गया।

समर ने डायरी निकाली और खाली पन्नों को मोमबत्ती की हल्की गर्मी के ऊपर रखा।

धीरे-धीरे पन्नों पर भूरे अक्षर उभरने लगे।

छिपी हुई स्याही से एक अनुष्ठान का विवरण लिखा था।

गुड़िया और चुने गए व्यक्ति का संबंध तोड़ने के लिए तीन वस्तुएं आवश्यक थीं—

उस व्यक्ति का खून।

उस गुड़िया को बांधने वाला मूल लाल धागा।

और उस व्यक्ति से जुड़ी सबसे प्रिय वस्तु।

तीनों को एक साथ जलाकर उसकी राख गुड़िया के भीतर भरनी थी।

लेकिन नीचे एक चेतावनी भी थी—

“अनुष्ठान शुरू होने के बाद गुड़िया तुम्हें रोकने के लिए तुम्हारी सबसे कमजोर स्मृति का रूप लेगी। उस रूप से बात मत करना। उसे छूना मत। उसकी बात पर विश्वास मत करना।”

समर ने अनुष्ठान की तैयारी शुरू कर दी।

उसकी सबसे प्रिय वस्तु उसकी दिवंगत मां की चांदी की पुरानी अंगूठी थी।

मां की मृत्यु पांच वर्ष पहले हुई थी। वह अंगूठी हमेशा उसके पास रहती थी।

रात बारह बजे उसने घर के मुख्य कमरे में लोहे की परात रखी।

उसमें लाल धागा और अंगूठी रखी।

फिर उंगली काटकर खून की कुछ बूंदें टपकाईं।

गुड़िया सामने कुर्सी पर रखी थी।

समर ने माचिस जलाई।

जैसे ही उसने आग परात में डाली, घर के सारे दरवाजे एक साथ बंद हो गए।

खिड़कियां जोर-जोर से हिलने लगीं।

कमरे का तापमान अचानक गिर गया।

समर की सांस से सफेद भाप निकलने लगी।

परात में जलती आग नीली हो गई।

तभी ऊपर वाले कमरे से किसी स्त्री के पैरों की आवाज आई।

समर का हाथ कांपने लगा।

सीढ़ियों पर सफेद साड़ी पहने एक महिला दिखाई दी।

उसका चेहरा अंधेरे में छिपा था।

वह धीरे-धीरे नीचे उतर रही थी।

“समर…”

समर ने आंखें बंद कर लीं।

वह आवाज उसकी मां की थी।

“बेटा, मेरी तरफ देख।”

समर की आंखों में आंसू भर आए।

“तुम मेरी अंगूठी क्यों जला रहे हो?”

समर ने स्वयं को याद दिलाया कि यह उसकी मां नहीं थी।

महिला सीढ़ियों से नीचे आ गई।

“मैं तुमसे मिलने आई हूं।”

समर ने सामने देखना बंद रखा।

महिला उसके बिल्कुल पास आकर खड़ी हो गई।

उसकी ठंडी उंगलियां समर के गाल से छू गईं।

डायरी में लिखा था—उसे छूना मत।

समर ने अपनी मुट्ठियां कस लीं।

“क्या तुम्हें मेरी याद नहीं आती?” महिला ने पूछा।

समर रोने लगा।

“तुम्हारी वजह से मैं यहां फंसी हुई हूं।”

समर ने आंखें खोल दीं।

उसके सामने वास्तव में उसकी मां जैसी दिखने वाली महिला खड़ी थी।

वही चेहरा। वही आंखें। वही हल्की मुस्कान।

“मां…”

महिला ने बाहें खोल दीं।

“मेरे पास आओ।”

समर एक कदम आगे बढ़ा।

उसी समय परात में रखी अंगूठी टूटने की आवाज आई।

समर की नजर महिला के पैरों पर पड़ी।

उसके पैर उल्टी दिशा में मुड़े हुए थे।

समर पीछे हट गया।

महिला की मुस्कान गायब हो गई।

उसका चेहरा धीरे-धीरे काला पड़ने लगा। त्वचा फट गई। आंखों की जगह गहरे गड्ढे बन गए।

“तुमने मुझे पहचान लिया।”

उसकी आवाज अब कई आवाजों में बदल चुकी थी।

समर ने परात में बची राख उठाई और गुड़िया के भीतर भरने लगा।

गुड़िया जोर-जोर से कांपने लगी।

काली सुई उसकी छाती से बाहर निकलकर हवा में उठ गई।

अचानक सुई समर की ओर तेजी से आई।

उसने सिर नीचे किया।

सुई उसके पीछे दीवार में धंस गई।

समर ने बची हुई राख गुड़िया के भीतर डाल दी और उसका कपड़ा सिल दिया।

गुड़िया से भयानक चीख निकली।

घर की सभी खिड़कियों के शीशे टूट गए।

सफेद साड़ी वाली आकृति धुएं में बदलकर गुड़िया के भीतर खिंचने लगी।

कुछ ही सेकंड में कमरा शांत हो गया।

गुड़िया जमीन पर निर्जीव पड़ी थी।

उसके शरीर पर लिपटे सारे लाल धागे काले होकर टूट चुके थे।

समर वहीं बैठ गया।

अगले दो दिनों तक घर में कोई घटना नहीं हुई।

सीढ़ियों पर कदमों की आवाज बंद हो गई।

शीशों पर निशान बनने बंद हो गए।

समर ने गुड़िया को एक लोहे के डिब्बे में रखा और उसे शहर से दूर नदी किनारे ले गया।

उसने गुड़िया पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी।

इस बार उसके शरीर में कोई दर्द नहीं हुआ।

गुड़िया धीरे-धीरे जलकर राख हो गई।

समर ने राहत की सांस ली।

उसे लगा सब समाप्त हो चुका है।

एक सप्ताह बाद नीलांश अस्पताल से घर लौट आया।

समर उससे मिलने गया।

नीलांश कमजोर लग रहा था, लेकिन खतरे से बाहर था।

“वह चीज नष्ट हो गई?” उसने पूछा।

“हां।”

“तुम्हें पूरा विश्वास है?”

“मैंने उसे अपनी आंखों के सामने जलते देखा।”

नीलांश ने कुछ क्षण उसकी ओर देखा।

“उसके भीतर मिले बालों की रिपोर्ट आ गई है।”

समर चौंका।

“किसके बाल थे?”

नीलांश ने मेज से एक फाइल उठाई।

“वे इंसानी बाल नहीं थे।”

“तो?”

“लैब किसी निश्चित परिणाम पर नहीं पहुंची। उनकी संरचना इंसान और किसी जानवर, दोनों से अलग थी।”

समर के चेहरे पर चिंता उभर आई।

नीलांश ने आगे कहा, “और उस कागज पर जो तुम्हारा नाम और पता लिखा था…”

“उसका क्या?”

“लिखावट तुम्हारी थी।”

“यह संभव नहीं है।”

“मैंने तुम्हारे पुराने दस्तावेजों से मिलान करवाया। वह तुम्हारी ही लिखावट थी।”

समर फाइल के पन्ने देखने लगा।

दोनों लिखावट बिल्कुल एक जैसी थीं।

“मैंने वह कागज कभी नहीं लिखा।”

नीलांश ने धीमी आवाज में पूछा, “क्या तुम्हें उन रातों की सारी बातें याद हैं?”

समर उत्तर नहीं दे पाया।

वापस घर लौटते समय उसे मार्कस का फोन आया।

“क्या तुमने अनुष्ठान पूरा किया?” मार्कस ने पूछा।

“हां। गुड़िया जल चुकी है।”

दूसरी तरफ कुछ क्षण खामोशी रही।

“तुमने डायरी के सभी छिपे पन्ने पढ़े थे?”

“हां।”

“अंतिम पन्ना भी?”

समर का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“अंतिम पन्ने पर सिर्फ चेतावनी थी।”

“डायरी में एक और पन्ना है। चमड़े के पिछले कवर के भीतर।”

समर ने गाड़ी सड़क किनारे रोकी।

“उसमें क्या लिखा है?”

मार्कस की आवाज कांप रही थी।

“अनुष्ठान उस शक्ति को नष्ट नहीं करता।”

समर के हाथ से फोन लगभग छूट गया।

“तो फिर क्या करता है?”

“वह शक्ति गुड़िया से निकलकर सबसे प्रिय वस्तु से जुड़ जाती है।”

“लेकिन मैंने अंगूठी जला दी।”

“सबसे प्रिय वस्तु वह नहीं होती जिसे इंसान सबसे अधिक संभालकर रखता है।”

मार्कस ने धीमी आवाज में कहा—

“सबसे प्रिय वस्तु उसका अपना शरीर होता है।”

समर ने फोन काट दिया और तेजी से घर पहुंचा।

उसने डायरी का पिछला कवर चाकू से काटा।

अंदर एक पतला पन्ना छिपा था।

उस पर लिखा था—

“दरवाजे को जलाया जा सकता है, लेकिन अतिथि को नहीं। अनुष्ठान पूरा करने वाला मनुष्य स्वयं नया पात्र बन जाता है।”

समर के हाथ कांपने लगे।

नीचे एक और पंक्ति थी—

“नए पात्र की पहचान उसकी छाती पर बने काले निशान से होगी।”

समर ने तुरंत शर्ट उठाई।

उसकी छाती पर जहां पहले सुई का छोटा निशान था, वहां अब काले धागों जैसा बड़ा गोल चिह्न बन चुका था।

उसने घबराकर बाथरूम के शीशे में देखा।

उसका प्रतिबिंब सामान्य था।

समर ने राहत की सांस ली।

फिर शीशे के भीतर खड़े उसके प्रतिबिंब ने धीरे-धीरे सिर उठाया।

वास्तविक समर स्थिर खड़ा था।

लेकिन प्रतिबिंब मुस्करा रहा था।

“अब गुड़िया की जरूरत नहीं है।”

समर पीछे हट गया।

उसी समय उसके दोनों हाथ अपने आप ऊपर उठने लगे।

उसने हाथ नीचे करने की कोशिश की, लेकिन उसका शरीर उसके नियंत्रण में नहीं था।

उसके पैर मुड़े और वह घुटनों के बल बैठ गया।

शीशे के भीतर का प्रतिबिंब बाहर निकलने की कोशिश करने लगा।

कांच की सतह पानी की तरह लहराने लगी।

एक काला हाथ शीशे से बाहर आया।

समर चीखना चाहता था, लेकिन उसके मुंह से कोई आवाज नहीं निकली।

काला हाथ उसके चेहरे पर रखा गया।

अगले ही क्षण पूरे घर में अंधेरा छा गया।

अगली सुबह पड़ोसियों ने समर के घर का मुख्य दरवाजा खुला देखा।

पुलिस को अंदर किसी संघर्ष के निशान नहीं मिले।

समर घर में मौजूद नहीं था।

उसका मोबाइल, गाड़ी और बाकी सामान वहीं था।

अध्ययन कक्ष में केवल उसकी डायरी खुली हुई मिली।

आखिरी पन्ने पर ताजा स्याही से लिखा था—

“मुझे नया घर मिल गया है।”

समर के गायब होने के तीन महीने बाद उसके विश्वविद्यालय में एक पार्सल आया।

पार्सल पर भेजने वाले का कोई नाम नहीं था।

वह पार्सल समर के विभाग में काम करने वाली शोधकर्ता रिया के नाम था।

रिया ने डिब्बा खोला।

अंदर एक छोटी लकड़ी की गुड़िया रखी थी।

गुड़िया के चेहरे पर इस बार काला कपड़ा नहीं था।

उसका चेहरा लकड़ी पर बहुत बारीकी से उकेरा गया था।

वह चेहरा समर का था।

गुड़िया की छाती में एक काली सुई धंसी हुई थी।

उसके नीचे एक छोटा-सा कागज रखा था।

उस पर लिखा था—

“रिया, मुझे यहां से बाहर निकालो।”

रिया ने कांपते हाथों से गुड़िया उठाई।

उसी क्षण गुड़िया की लकड़ी वाली आंखों से आंसू की एक बूंद निकलकर उसके हाथ पर गिरी।

रिया घबराकर पीछे हट गई।

फिर गुड़िया ने धीरे-धीरे अपना मुंह खोला।

अंदर से समर की आवाज आई—

“इस बार दरवाजा तुम हो।”

कमरे की बत्ती बुझ गई।

और बाहर गलियारे में लगी घड़ी की सुइयां रुक गईं।

समय था—

रात के दो बजकर तेरह मिनट।

Smithsonian Magazine – Explore the Timeless World of Vodou

National Library Kolkata Haunted Story in Hindi

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